#sumit_

82 posts
  • bal_ram_pandey 115w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @riya_expression#anitya
    @rangkarmi_anuj
    #osr#jhala#naajnaaj
    @naushadtm
    @odysseus#sumit_
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    @word_of_the_heart
    @lafze_aatish
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe...

    रचना शायद कुछ गंभीर लगे....

    मन कुछ व्यथित सा है
    भटका हुआ पथिक सा है ����

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    सुबह है अब कैद में,
    कैद में है शाम ,
    कैद में है मेरा घर ,
    खोया चैन - आराम ।।

    फुटपाथ पर रहे सो ,
    भारत के भविष्य ,
    नेताजी गिना रहे ,
    अपने वादे अपने काम ।।

    बोतल में लहु बिके,
    ख़ुदा हुए हकीम ,
    जीवन सस्ता हो गया,
    बढे दवा के दाम ।।

    दाढ़ी टोपी तिलक से ,
    हुई हमारी पहचान ,
    मंदिर मस्जिद सूने पड़े ,
    मचा हुआ कोहराम ।।

    विकट हो गया देश में ,
    राजनीति का खेल ,
    हंस बौराये फिर रहे ,
    और गिद्ध नोच रहे चाम ।।

    मस्जिद में अल्लाह बसे,
    मंदिर में भगवान ,
    जो हर कण में बसे ,
    उसका कौन सा धाम ।।

    धड़कन भूली धड़कना ,
    सांसे हुई उदास ,
    सपनों पर पहरे लगे हैं ,
    नींद हुई हराम ।।
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 115w

    अंधेरों से परे नूर तक
    आओ चलें कुछ दूर तक

    मैं उसूलों से बंधा परिंदा
    न जाता रास्ता मेरा हूर तक

    तुम्हें पिज़्ज़ा बर्गर की चाहत
    रोटी नहीं पहुंची मज़दूर तक

    राहे सबकी हैं जुदा - जुदा
    दौड़ तितलियों की फूल तक

    सपने गीले हैं , हुए चांदनी में
    पहुंचाए कोई इसे धूप तक

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 116w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @riya_expression#anitya
    @rangkarmi_anuj
    #osr#jhala#naajnaaj
    @naushadtm
    @odysseus#sumit_
    #anjali_chopra#agentrkd007
    @Vishal__
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe

    बहुत दिनों बाद प्रस्तुत है एक 'आशावादी'
    कविता.........����

    #umeed00
    @fairygurl. Ji
    @Psrathore...ji

    (One of the repost I found relevant to the theme....umeed)

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    जीवन के कंटक पथ पर
    चल चला चल चल राही चल.......

    बन मत निर्बल ,
    कर मन निर्मल ,
    कठिनाइयों को रौंदते,
    सतपथ पर दौड़ते ।।
    चल चला चल चल राही चल.........

    आत्मशक्ति जगा के ,
    संशय तिमिर हिय से भगा के ,
    कितने भी हो राह में शूल ,
    हे बटोही ध्येय न भूल ।।
    चल चला चल चल राही चल........

    मन निराश न कर अधीर ,
    उठ चल बन आशा के तीर ,
    तुम जगत के हो प्रकाश ,
    क्यों बैठे हो उदास ।।
    चल चला चल चल राही चल......

    जात -पात के बंधन तोड़,
    देश ,धर्म ,दुनिया को जोड़,
    अजान ,शबद और प्रार्थना,
    है एक प्रभु की ही आराधना ।।
    चल चला चल चल राही चल.........

    कर्म में करता जा विश्वास,
    कर्तव्य पथ से रखना आस,
    खोल भाग्य के बंद द्वार ,
    अरुणोदय करे तेरा इंतजार ।।
    चल चला चल चल राही चल..........

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 117w

    खिला हुआ फूल भी, अब खार सा लगे
    इंसान आज ,बिजली की तार सा लगे

    चाहता हूं लौट आऊं, तेरे गांव पर
    मुझ में भी एक शहर, बीमार सा लगे

    अहले नज़र मुझे ,तुझसा ना मिला कोई
    भीड़ आशिकों की ,इश्क बाज़ार सा लगे

    सुब्ह से सुखा रहे, कुछ ख्वाब धूप में
    चांद तन्हा है , मन में गुबार सा लगे

    वक्त ए आईना में , देखा जब चेहरा
    दरमियां मेरे- तेरे , एक दीवार सा लगे

    खिला हुआ फूल भी खार सा लगे
    इंसान आज बिजली की तार सा लगे

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 118w

    जुगनूओं की तरह जगमगाना क्या
    न मिले मंज़िल तो जख्म खाना क्या

    कागज के फूलों से उम्मीद ख़ुशबू की
    झूठी तसल्ली में ज़िंदगी बिताना क्या

    मयस्सर नहीं उनसे मुख्तसर मुलाक़ात
    उनसे मिलना क्या हाथ मिलाना क्या

    दोस्तों से हुई मुझे मेरी ख़बर अक्सर
    मुझ सा होगा कहीं कोई दीवाना क्या

    बू ए ख़ुशबू कौन रोक सकता है कभी
    ज़ाहिर हो जाएगा प्यार छुपाना क्या

    बावफा की उम्मीद बेवफ़ा को ग़ज़ब है !
    दरख़्त के साए को पानी पिलाना क्या

    जर ज़मीन महल कजा ले जाएगी साथ
    अब यहां रहना आशियां बनाना क्या

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 118w

    इश्क़ में ना गर इतने सदमे होते
    आज हम भी अपने घर में होते

    खुला आसमां है हमसफ़र हमारा
    हम वरना आंधियों के डर में होते

    न तैर सके हम दरिया ए दिल में
    वरना तेरी आंखों के समंदर में होते

    गर जीत जाते वक़्त की अदालत में
    हम भी दुनिया की हर ख़बर में होते

    न बेचा इमान दौलत के लिए हमने
    हम वरना फूलों के बिस्तर में होते

    हमने ना बनाया सियासत को पेशा
    वरना लहू के भी दाग खंजर में होते

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 119w

    बग़ैर तेरे ज़िंदगी , ज़िंदगी है क्या
    मोहब्ब्त में इतनी दीवानगी है क्या

    खयालों को कैसे बांधे ज़ंजीरों में
    जिस्म की इतनी , बेबसी है क्या

    क़ैद हो जाता हूं, जब भी देखता हूं
    आईना देखना भी खुदकशी है क्या

    ख़ुश होकर भी, मर जाता है कोई
    मौत की, ज़िंदगी से दुश्मनी है क्या

    तपती सड़क और , दूर है मंजिल
    धूप के बिना कहो ,चांदनी है क्या

    गुज़र जाता है दिन, जो साथ होते हो
    वक्त को न जाने इतनी जल्दी है क्या

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 119w

    हुनर को पहचाने मेरे ,अब वह नज़र कहां है
    पहुंचा दे मंज़िल मुझे वह रहगुजर कहां है

    मेरे तनाफ्फुस ना है क़ैद अब मेरे जिस्म में
    एहसास करें दर्द अब , वह ज़िगर कहां है

    कत्ल कर रहे हो जिससे सारे रिश्तों का
    छुपा के रखा हुआ तुमने वो खंजर कहां है

    साल भर देता था फल, फूल और पत्तियां
    सूख गया अब बूढ़ा सा प्यारा शजर कहां है

    उड़ गए सारे परिंदें अब गांव के शहर को
    गांव में बचा अब सुहाना वो मंज़र कहां है

    सूने चौपाल , कजरी सोहर और नाच गाने
    तीज त्यौहार पर मिलना अब अक्सर कहां है

    सुना है ,अब बहू -बेटे मां से अलग ही रहते हैं
    बुजुर्गों के हाथों से रखे नींव के पत्थर कहां हैं

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 119w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @riya_expression#anitya
    @rangkarmi_anuj
    #osr#jhala#naajnaaj
    @naushadtm
    @odysseus#sumit_
    #anjali_chopra#agentrkd007
    @Vishal__
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe

    गमगुस्सार..... दिलासा देने वाला
    इखलास........ प्रेम, श्रद्धा
    पयाम............ संदेश
    गमदीदा......... दुखित
    अब्सार......... आंखें
    इत्तहाद........... दोस्ती
    आब ए चश्म..... आंसू

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    चंद ख्वाब अभी हैं ज़िंदा,
    मचलने के लिए
    आए हैं तेरे शहर, कुछ
    दिन ठहरने के लिए

    तू ही है एक गमगुस्सार,
    मेरे नाशाद दिल का
    चल पड़े आज तेरी,
    गली से गुजरने के लिए

    कैसा होगा मंज़र ,
    रू-ब-रू होगा सितमगर
    आब ए चश्म तैयार हैं,
    कुछ कहने के लिए

    कोई समझा दे उनको ,
    इखलास मेरे दिल के
    पयाम ले कर आए हैं,
    इत्तिहाद करने के लिए

    गमदीदा है मेरे अब्सार,
    एक अरसे से
    अब्र ए उम्मीद छा गए हैं,
    अब बरसने के लिए

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 119w

    तू चैन में
    बेचैन मैं

    तू प्रभात में
    मैं रैन में

    तू प्राण बसी
    मैं नैन में

    हिय मुग्ध हुआ
    मीठे बैन में

    दुग्धालय सूने पड़े
    ज़हर बीके 'केन' में

    'कस्तूरी' ढूंढे कहां
    ईश बसे देह में

    कर्म उलझाते रहे
    'लेन' 'देन' में

    आंखें विरही भई
    प्रियतम प्रेम में

    मन अर्पण कृपासिंधु
    मुक्ति 'योगक्षेम' में

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 119w

    तन्हाई पढ़ना, सपनों में खो जाना
    बड़ा मुश्किल है, किसी का हो जाना

    उम्र बीत गई , साये लंबे होते गए
    साथ छूटेगा, डूबा सूरज तो जाना

    मझधार मे थे पड़े , खुली आंख तो
    देखा लहरों का ,कश्ती डूबो जाना

    आंखों के कुएं में , रहा हरदम पानी
    दिल की जमीं पर, इश्क तेरा बो जाना

    ख्वाबों के काफ़िले , लेकर चलना
    तन्हाई सिरहाने रख कर सो जाना

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 120w

    दुश्मनों के लिए भी दुआ कीजिए
    आये बात हक़ की तो लड़ा कीजिए

    चलना उजालों में आसान है कितना
    शम्आ बनकर कभी तो जला कीजिए

    हर ज़वाब पर नए करते हो सवाल
    दो कान है मुंह एक अजी सुना कीजिए

    नशा मोहब्बत का है शराब से जियादा
    बहक जाऊं तो सहारा दिया कीजिए

    लड़ें दंगों में सिर्फ ओ सिर्फ हैवान ही
    गीता - कुरान पर यक़ीन किया कीजिए

    आपकी बातों पर मुझको बड़ा यक़ीन है
    अमल कर सकूं ऐसी सलाह दीजिए

    बड़ी नफ़रत है मुझको झूठ ओ फरेब से
    नक़ाब चेहरे का हटाकर मिला कीजिए

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 120w

    बातों का फिर से , सिलसिला हो
    हो राब्ता उससे,जिसे ग़म मिला हो

    आओ रूत बदलें , खिजां की अब
    लायें बहार वहां, घर, जहां जला हो

    रखना कदम अब , होशो-हवास में
    ठंडी राख में, न जलता कोयला हो

    हैं सभी मोहब्ब्त से , सदियां हैं गवाह
    न तुझ से शिकवा,न मुझ से गिला हो

    है ज़ुस्तज़ू रब से, मेरे मादरे वतन में
    हर चेहरा, गुल सा खिला-खिला हो

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 123w

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    @gazal_e_vishal
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe


    ��
    दिल से दिल का मिलन
    मन से मन का मिलन
    विचारों से विचारों का मिलन
    शायद यही रूहानी मिलन है��

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    अंतरतम का, दीप हो तुम
    हम हैं धड़कन , मीत हो तुम

    बरखा की एक , बूंद हैं हम
    मोती हैं हम , सीप हो तुम

    बदला है , जब जब मौसम
    नैना हैं हम , नीर हो तुम

    थ़क जाता है जब तन यौवन
    हम थ़के मुसाफिर,नींद हो तुम

    जीवन है सुरताल का संगम
    गीत हैं हम, संगीत हो तुम

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 124w

    साजिशें हैं बादलों की बरसात कहां है दिखावटी रिश्तें हैं जज्बात कहां है

    वक्त के थपेड़े ख़ामोश सी है ज़िंदगी
    तेरे होठों पर अब वो गुलाब कहां है

    तकरीरों से कहां मिटती है भूख जानां
    बातें आपकी अच्छी हैं इमदाद कहां है

    न ख्वाइशें हैं न है रिश्तों का मसला
    रूह से हुए रूबरू तो घर-बार कहां है

    अब तुझसे कैसे निभाए रिश्ते ज़िंदगी
    दिल तनहा है आंखों में ख्वाब कहां है

    अहले-वफा ढूंढते हो नकाबो के पीछे
    मोहब्बत में वफ़ा के लिबास कहां है
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 127w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @riya_expression#anitya
    @rangkarmi_anuj
    #osr#jhala#naajnaaj
    @naushadtm#odysseus#sumit_
    @anjali_chopra#agentrkd007
    #gazal_e_vishal
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe

    Inspired by������

    मैं बनकर आईना रहना चाहता हूं
    जैसे को वैसा ही मिलना चाहता हूं
    @vishal_
    (कृपया रचना की दृष्टि से ही देखें��)

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    नव सृजन के बीज मन में बोना चाहता हूं
    एक बार तुमको पाकर खोना चाहता हूं

    यादें तुम्हारे सुनहरी हृदय में बसाकर
    अंधियारा आंखों में भर धूप पीना चाहता हूं

    परिस्थितियों की सारी तोड़कर अब सीमाएं
    तुमसे ना मिलने का व्रत तोड़ना चाहता हूं

    ज्ञात है मुझको प्रतिकूल होंगे सारे जग के रिश्ते
    एक बार हंस संग तेरे ताउम्र रोना चाहता हूं

    मेरा मुझसे है संघर्ष और तुम उत्कर्ष में हो
    जीवन के इस हवन में आहुति देना चाहता हूं

    आज बैठी है तन्हा मौन मेरे मन की उदासी
    पीकर सुधा स्मृतियों की सोना चाहता हूं

    सांसों की बाती प्रज्वलित जाने कब तक रहेगी
    मैं विरह मंदिर देहरी का दीप होना चाहता हूं

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 128w

    मायूसी है अनजाने डर से
    बेचैनी है सियासी ज़हर से

    ख़तरा लग रहा है आज
    क्यों गांव को शहर से

    सियाह रात को खतरा है
    जागरूकता के सहर से

    समंदर के तटों को खतरा
    सुनामी की लहर से

    स्वप्न हैं घबराए हुए
    सुबह की पहर से

    कुएं का जल सुखा
    बह रहा है पानी नहर से

    अबला को खतरा है
    रावण की नज़र से

    बावफा फिर हुआ रूबरू
    कहीं दूर चले इस नगर से

    ज़िंदगी बन गई है तमाशा
    मन के इस अगर मगर से

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 129w

    जिंदगी को हर हाल में गुनगुना कर देखा
    रोते चेहरे को जरा कभी मुस्कुरा कर देखा

    घंटों रूबरू जिससे होकर गुफ्तगू की हमने
    कभी ग़म में उसने मुझे मुंह छुपा कर देखा

    कभी हंसे तो खिलखिला कर हंसते रहे
    शबे गम में कभी तन्हाई को बिछाकर देखा

    सिकंदर की तरह लड़े औरों से हो मुतासिर
    अपनों से भी कभी हमने हार कर देखा

    हर तरफ दंगों में देखी बेजान बिछी लाशें
    तब गीता , कुरान सर पर उठाकर देखा

    सियासत की सियाही धुल गई दिलों से
    राम ने रहीम को जब गले लगाकर देखा
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 130w

    तू ने लिए है फैसले सारे
    दूरियां बढ़ाने वाले
    न रही परवाह अब ये कि क्या
    कहेंगे ज़माने वाले

    मेरे रू -ब -रू हैं कितने सारे मरासिस
    खूब- रू
    ज़ख्म कुरेदते है क्यूं वो ज़ख्म
    सहलाने वाले

    आईना भी पढ़ने लगा चेहरे पर
    खामोशी मेरी
    चुपचाप से क्यों है लब लोगों को
    हंसाने वाले

    बैठ गए बुझती शमा के पास पतंगे
    थक कर
    ढूंढ रहे हैं जुगनू... शमा की लौ
    जलाने वाले

    अब तो कह दो खुलकर तमन्ना ए
    दिल अपनी
    इंतज़ार में खड़े हैं कब से सब मुझे
    दफनाने वाले

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 131w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @ahsas_riya_ke#anitya
    @rangkarmi_anuj
    #osr#jhala#naajnaaj
    @naushadtm#odysseus#sumit_
    @anjali_chopra#agentrkd007
    @gazal_e_vishal
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe

    लम्हा लम्हा ..... दस साल का अरसा गुजर गया ..... इस ग़ज़ल को लिखे हुए....................
    .......ऐसा महसूस होता है जैसे कल का ही वाकया है........����
    (कृपया रचना की दृष्टि से ही देखें) ��

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    होकर मुझसे दूर भी जो पास रहा है
    वही शख़्स मुझे आज तलाश रहा है

    बेवफ़ा जो न रहा रूबरू अक्सर मगर
    ख़त जिसका हमेशा मेरे पास रहा है

    मेरे सपनों के क़त्ल का गुनहगार वो
    तन्हा तन्हा रात भर उदास रहा है

    न दर न दयार न मंज़िल न रास्ता कोई
    ज़िंदगी का तल्ख भरा जज़्बात रहा है

    आंसु किसे सुनाए हाले दिल अपना
    दर्द ही जिस का आगाज़ रहा है

    एक अक्स हजार बना देगा दिले आईना
    टूटे शीशे का अलग ही अंदाज रहा है

    नफ़रत करूं कैसे बड़ा मासूम है वो
    हमनशी हम नफस कभी ख़ास रहा है

    ©bal_ram_pandey