#stree

45 posts
  • unwantedfellow 27w

    ସ୍ୱାମୀକୁ ନିଜ ସ୍ତ୍ରୀ କେବେ ସୁନ୍ଦର ଲାଗେନା
    ଆଉ ସ୍ତ୍ରୀକୁ ସ୍ବାମୀର ରୋଜଗାର..!
    ©unwantedfellow

  • preranarathi 39w

    ........Continued (द्रौपदी)

    खैरात में आऊ ,

    द्रौपदी कहलाऊ ,

    पांचाली बन जाऊ ,

    पांडवों से विवाह रचाऊ ,

    वेहशिया कहाऊ ,

    दासी बन जाऊ ,

    बेइज़्जत हो जाऊ ,

    इज़्जत गवाऊ ,

    चीर हरण सह जाऊ ,

    सबर का घूँट पी जाऊ ,

    और धर्म भी मैं ही बचाऊ | 

    और आज भी कुछ लोग कहते है, महाभारत का युद्ध द्रौपदी ने कराया था ,

    मैं तो सिर्फ जरिया थी, धर्म का डंका तो कृष्णा ने बजाया था | 

    दुर्योधन का लालच था, युधिष्ठिर धर्मराज कहलाया था ,

    कोरवो और पांडवों के बीच युद्ध का मोहरा मुझे कृष्णा ने बनाया था | 

    मित्र ने ही मित्र का जीवन दाँव पर लगा दिया ,

    कृष्णा ने मेरा बलिदान देकर धर्म स्थापित करा लिया | 

    गीता का ज्ञान बाँट दिया युद्ध के मैदान में ,

    धर्म भी सीखा दिया कौरवो के विध्वंस से | 

    पर आज मेरा अस्तित्व क्या है ,

    जो है वो कृष्णा है ,

    गीता का ज्ञान अजर है ,

    पर मेरा योगदान भी अमर है ,

    आखिर द्रौपदी हूँ मैं ,

    मुझ में ही महाभारत हैं | 


                                        - प्रेरणा राठी 
    ©preranarathi

  • preranarathi 39w

    द्रौपदी

    यज्ञ से जन्मी, थी यज्ञसैनी मैं ,

    पिता को चाहत थी पुत्र की ,

    उस ईनाम के साथ खैरात में थी आई मैं | 

    द्रुपद के घर थी जन्मी, द्रौपदी कहलाई मैं ,

    पांडवो से विवाह किया, वेहशिया भी कहाई मैं | 

    मित्रता मिली कृष्ण की, 

    जिसने अर्जुन के दिखाए ख्वाब मुझे, 

    कर्ण को भी ठुकरा दिया कहने पर जिसके मैंने | 

    कुंती ने जबान दे दि , कहा बाँट लो मुझे ,

    धर्म कि रक्षा के लिए चढ़ा दिया बलि मुझे | 

    मेरा मुझ पर ही हक ना रहा, पति ने हक जताया था ,

    जुए में दाँव पर लगा कर, मेरा गौरव मिट्टी में मिलाया था | 

    बालों से घसिटी गई , हाँथ भी उठाया था ,

    दुष्ट दुशासन से फिर वही हाँथ मेरे वस्त्र की ओर बढ़ाया था | 

    अपना आँचल फाड़ कर कृष्ण के जखम पर लगाया था ,

    उसी आँचल से फिर कृष्णा ने मेरा चीर बढ़ाया था | 

    चींखी, चिलाई, इंसाफ के लिए गुहार लगाई ,

    मगर पुरुषों की भरी सभा ने मुझ पर ही थी ऊँगली उठाई | 

    पाँच पांडवो से सम्बंध रखने वाली स्त्री कहलाई ,

    द्रौपदी, पांचाली, साम्रगी होकर भी मैं सिर्फ वेहशिया ही कहाई | 

    पवित्र होकर भी अपवित्र समझी गई मैं ,

    लालच पुरुषों का था, मगर तवाईफ़ समझी गई मैं 

    क्रोध का ज्वाला भड़क उठा, था टुटा सबर मेरा ,

    गांधारी ने जो न रोका होता, भरी सभा को श्राप मेरा के देता स्वाहा | 

    ............... .......To Be Continued in Next Post

  • achetna 45w

    स्त्री-मन

    स्त्री मन प्रतीत हो चंचल
    कभी विकट, कभी विकल

    हृदय में लिए थोड़ी आस
    कभी प्रार्थना, कभी प्रयास

    प्रेमपाश, ममता से संभ्रांत
    कभी निरंकुश, कभी निशांत

    घनिष्ठता का सरस स्पर्श
    कभी हर्ष, कभी संघर्ष

    स्त्री मन तो अति विशिष्ट
    कभी निष्ठ, कभी निकृष्ट

    ©achetna

  • bagdi_kanya 45w

    ये शब्द गांव और शहरों में उन लड़कियों की आवाज है, जिन्हे समाज की कुरीतियों या छोटी सोच के चलते आगे नहीं बढ़ने दिया जाता


    #internationalwomensday #stree #womensday #8march2021 #hindiwriters #hindi #quotes #mirakee #mirakeehindi #mirakeewriters #writerscommunity #hindikibindi #bagdikanya #morning #8march2021 #aurat #twoliners #life #hindisahitya #morning #midnightthoughts #thoughts #change #bagdikanya #hindilekhan #shayari #urduhindishayari #womensday2021
    @hindiwriters @hindikibindi @hindinama @hindikavi @hindilekhan

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    International women's day

    बंद हूं, पाबंद नहीं बेशक..

    समाज की बेड़ियों से जकड़ी हूं पर रजामंद नहीं।
    ©bagdi_kanya

  • shobharani 46w

    #hindii #mirakee #stree #pinterest
    स्त्री हूं मैं..
    गर्व है मुझे कि स्त्री हूं मैं..
    मेरा स्त्रीत्व मेरी कमजोरी नही...
    अपितु मेरी ताकत का आधार है...
    मेरा स्त्रैण ही मेरा असली श्रृंगार है...
    जिसके आगे साजो-सज्जा निराधार है...
    सृजन, पोषण, परिवर्तन...
    मैं सृष्टि के हर कला में दक्ष हूं..
    ये दक्षता ही धरोहर है मेरी..

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    स्त्री हूं मैं..
    गर्व है मुझे कि स्त्री हूं मैं..
    मेरा स्त्रीत्व मेरी कमजोरी नही...
    अपितु मेरी ताकत का आधार है...
    मेरा स्त्रैण ही मेरा असली श्रृंगार है...
    जिसके आगे साजो-सज्जा निराधार है...
    सृजन, पोषण, परिवर्तन...
    मैं सृष्टि के हर कला में दक्ष हूं..
    ये दक्षता ही धरोहर है मेरी..
    ©shobharani

  • ayshu288 47w

    Aurat

    Khili hui ful hu...
    Ki murjhayi hui kali.
    Naam mujhe stree mila.,
    Hui na izzat meri.


    Khulke kisise kuch na kheti hu...
    Hr drd bhi kushi se sheti hu.,
    Khud ke hit mai mujhe khud hi ldna hai.
    Aage phir smbhlker mujhe chlna hai.

    Ki smjh lete hai meri khamosi ko mera dr..
    Pr smjh na pate vo ek aurat ke krm.
    Ki ldna pdta hai mujhe puri duniyaa see..,
    Ki mai bhi hu duniya ke ek hisse se.

    Mai aurat hu ek kisse mai.
    Jaha ek tukda nhi mere hisse mai.
    ©ayshu288

  • kaach_ka_panchi 52w

    मर्यादा और बंधन

    जब एक स्त्री किसी पुरूष के प्रेम में होती है,
    तो वो अपनी मर्यादा और बंधनो से ख़ुदको मुक्त कर लेती है।

    और जब एक पुरूष किसी स्त्री के प्रेम में होता है,
    तो वो उस स्त्री को अपनी मर्यादा और बंधन बना लेता है।

    ©kaach_ka_panchi

  • shivam__choudharyy 68w

    स्याही सुख नहीं पाती अखबारों की
    और नई खबर आ जाती है बलात्कारों की...।।

  • shivam__choudharyy 68w

    वो संस्कारी थी जब तक सहती रही,
    बदतमीज हो गयी जब बोल पड़ी।।

    ©shivam__choudharyy

  • hindikibindi 73w

    एक स्त्री नदी की तरह होती है..!
    समेटने को आतुर
    तुम्हारें सारे दुःख, क्षोभ, पीड़ा
    और बदले में देती है
    शीतल धारा के साथ सुकून!
    राह में पढ़ने वाले अवरोधों
    से टकरा कर भी
    बहती होती है निरन्तर अपने पथ पर
    अपने कर्तव्यों से विमुख कहाँ जी
    पाती है वो।

    स्त्री नदी की तरह होती है..
    कभी सीमा से अधिक पीड़ा आतुर कर देती है
    बाढ़ में बदल 'काल' का रूप लेने को
    और फिर दूसरे ही पल
    शांत हो जाती है जैसे आँखों
    से बहते निर्झर अश्रुओं के बाद हृदयतल ।

    हाँ स्त्री नदी की तरह होती हैं
    कभी सौम्य, कभी रौद्र, कभी
    बच्चों सी चंचल
    अपनी ही धुन में मस्त।

    हाँ स्त्री नदी की तरह होती है
    सारी अपवित्रता खुद में समा
    कर रखने के बाद भी
    पवित्र गंगा जल सी!

    ©नेहा नंदिता मिश्रा

  • wild_aish 77w

    #stree

    Born in red
    Hurt in red,
    Proposed in red,
    Expected even
    To dress in red.
    Zoned in red
    She even bleeds in red
    She is just
    A remarkable shade of red.

    //Thee need to be born a woman
    In thy next life
    To know what it means
    To live in red.//

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    Red- An Identity

    ©wild_aish

  • s_k_p_writes 78w



    जो कहते है स्त्रियाँ, फूलों सी कोमल होती है
    वह गलत कहते है।
    क्योंकि फूलों को डाल से तोड़कर,
    उनकी इच्छा के विरुद्ध अर्पण कर दिया जाता है।
    परन्तु स्त्रियाँ अपनी इच्छा से अपने सम्पूर्ण जीवन का समर्पण कर देती है।
    ©s_k_p_writes

  • achetna 86w

    स्त्री-मन

    स्त्री मन अति चंचल
    कभी विकट, कभी विकल

    हृदय में लिए थोड़ी आस
    कभी प्रार्थना, कभी प्रयास

    प्रेम और ममता से संभ्रांत
    कभी निरंकुश, कभी निशांत

    घनिष्ठता का सरस स्पर्श
    कभी सहर्ष, कभी संघर्ष

    स्त्री मन अति विशिष्ट
    कभी निष्ठ, कभी निकृष्ट
    ©achetna

  • shivimishra 86w

    स्त्री जब प्रेम मे होती है
    एक नही, अनेको किरदार हो जाती है
    रात भर भीग कर इंद्रधनुष के रंगो मे
    सुबह पुष्प हरश्रृंगार हो जाती है।।

    प्रेम की पराकाष्ठा जब पार कर जाती है
    सब भूल कर राधा बन जाती है,
    कभी लालसा मे अहिल्या हो जाती है
    विरह की अग्नि मे जल कर
    कभी उर्मिला हो जाती है।

    यदि बात आये प्रेमी के सम्मान पर
    सबसे लड़ कर सावित्री बन जाती है
    लोक लाज से बचने के लिए
    कभी कुंती, कभी शकुंतला हो जाती है

    स्त्री जब प्रेम मे होती है
    एक नही अनेको किरदार हो जाती है
    दिन भर तप कर सूरज की आग मे
    साँझ ढले सुरजमुखी हो जाती है।

    अपने प्रेम को पाने की खातिर
    अपनों के विरुद्ध रुकमणि हो जाती है
    जात पात के बंधन को पाट कर
    इंद्र की शुचि हो जाती है।

    स्त्री जब प्रेम मे होती है
    एक नही कई किरदार हो जाती है
    श्रृंगारविहीन रहने वाली रामणी भी
    प्रेम मे गुल बहार हो जाती है!!!
    As a kid I heard a folk tale, a women once fell in love with son, when she proposed him, Sun told him if she would come closer to him, the high temperature would burn her to ashes, the stuborn woman, madly used to stare sun all the day, her gaze would rotate in the direction of moving sun, at the end one day, she turned into a flower, the ���� which blooms in the east and whithers in west, facing the direction of the sun!!! #stree #hindi #pod #shabdanchal #hindikavita #shiviwrites
    #hindikavysangam #hindikavysangam #hindiwriter #yoalfaaz #kalamkar #shabdalay @mirakee @mirakeeworld

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    स्त्री जब प्रेम मे होती है
    (Read the caption)
    ©shivimishra

  • saraslekh 90w

    स्त्री और भी बहोत कुछ है,
    केवल बिस्तर और रसोई स्त्री की परिभाषा नहीं,
    न मोहताज है स्त्री किसी परिचय की,
    तुमने तो अभी तक उसे देखा भी नही है,
    जो आंखों से उतारोगे हवस की काली पट्टी,
    तो देख पाओगे उस अद्रश्य ब्रह्मांड को,
    जो वो अपने आँचल में समेटे हुए है।
    जो देखोगे मन की आंखों से तो दिखेगा तुम्हे निश्छल प्रेम,
    वहीं कोने में दिखेगी तुम्हे एक अमृत भरी शीशी जो भर देती है सारे शारीरिक और मानसिक घाव जो तुमने ओर तुम्हारे समाज ने दिए हैं उसको,
    एक डायरी भी रखी होगी कहीं,
    जिसमे लिखा होगा पता,तुम्हारी लाल टाई का,
    और उसमें लिखीं होंगी तुम्हारी पसन्द नापसन्द भी।
    एक मंदिर भी होगा जिसमें भगवान की जगह तुम्हारी प्रतिमा होगी।
    कुछ सपने भी देखोगे तुम जो बन्द है उसके जूड़े में,जिन्हें उसने बंधन सीख लिया था शादी से पहले ही।
    उसके शास्त्रीय संगीत के शौक को सीमित कर लिया है उसने उस आवाज़ तक जो उतपन्न होती है कंगनों के टकराने से,
    उसने अपने कंगनों की आवाज़ तक सीमित कर लिया है।
    शादी से पहले जो पेंट ब्रश उसका साथी हुआ करता था आज बदल लिया है उस ब्रश ने खुद को बेलन में,
    और जो लाल रंग उसका सबसे प्रिय हुआ करता था जिसे वो हर पेंटिंग में सबसे ज़्यादा इस्तमाल करती थी,
    आज उस लाल रंग को उसने एक चुटकी तक सीमित कर लिया है और फैला दिया है अपनी मांग में।
    यूँ कहने को तो एक चुटकी भर ही है ,पर उसके लिये उसने सजा लिया अपना सारा विश्व उस लाल रंग से।
    स्त्री अपने अंदर समेटे हुए है अखिल ब्रह्मांड को।
    पर तुम्हे तो अब भी बिस्तर ओर रसोई दिख रहा होगा न?
    चश्मा जो अब तक नही उतारा तुमने...
    -सरस
    ©saraslekh

  • souls_solace 97w

    कपड़े की सिलवटों में सिमटी थी
    उसी कपड़े को सिल-बुन पंख बनाए।
    खुद के साथ, दूसरों को पेहनाए
    और अंबर में उड़ गई।

    इतनी सी रवानी, हर स्त्री की कहानी।

    Happy Women's Day
    ©souls_solace

  • rp_writes 97w

    काँटों से घिरी रहती है,
    चारों तरफ से वो
    फिर भी खिली रहती है,
    क्या कमाल है स्त्री।

    ©rp_writes

  • dreams_in_moonlight 99w

    स्त्री पुरुष से उतनी ही श्रेष्ठ है, जितना प्रकाश अंधेरे से।
    - मुंशी प्रेमचंद

  • renurawat3101 105w

    Dedicated to all my lovely ladies ❤️
    #stree #girls #power

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    स्त्री

    तुम वो शराब हो जो बूझी को भी आग देदे।
    तुम वो कली हो जो सूखे पत्ते को भी गुलाब देदे।
    तुम ना फुलझड़ी हो और ना ही कोई शबनम
    तुम तो वो रोशनी हो जो रात को भी आफताब देदे।
    ©renurawat3101