#smriti_mukht_iiha

272 posts
  • smriti_mukht_iiha 3d

    यदा-कदा अपने मन के भावों को शब्दों के माध्यम से उकेरने के प्रयास में जो तृप्ति मिलती है, यह रचना उसी का प्रतिबिंब है। बचपन से सुनती आई हूँ कि 'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत'!
    और पराजय तो किसी को स्वीकार्य नहीं तो हम मन को साहस देते हैं, विश्वास बंधाते हैं कि 'कर्मण्येवाधिकारस्ते'। यह कृति लंबे समय पहले लिखी थी आज अचानक सम्मुख आई तो आप सभी से साझा कर रही हूँ, इसी आकांक्षा से कि आप सभी के अंतस में इसे पढ़ने के बाद क्षण भर को ही सही पर यह विचार कौंधेगा अवश्य ही.....
    "हूँ मनुज मैं!"
    (सुझाव अपेक्षित और त्रुटियों हेतु अग्रिम क्षमा��)
    ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
    बाँधो न सीमायें मेरी, आँको न मेरे विचार।
    एक मन हैं हस्त दो, स्वप्न नयनों में हज़ार।
    हो दुरूह मार्ग भीषण, क्रंदित पग में विलाप।
    किंतु मैं विकटता में भी, मुस्कुराना जानता हूँ।
    हूँ मनुज मैं !!
    स्वर्ग को वसुधा पे लाना जानता हूँ !!

    वियावान अनाम से, कालचक्र में पिसे।
    दण्ड धरके भाल, पौरुष विहंग फिरे।
    वृक्ष सारे पर्ण तज, करुण कथा कहे।
    तपती रेतीली भूमि में, बाग़ सजाना जानता हूँ।
    हूँ मनुज मैं !!
    स्वर्ग को वसुधा पे लाना जानता हूँ !!

    भूल चंद्र किरणें, तन सूर्य ताप सह रहा।
    नर्म कूपिकाओं में, गर्म रुधिर बह रहा।
    धैर्य चेतना संग आज, साहस से कह रहा।
    पाषाण हृदय भेद, रसधार बहाना जानता हूँ।
    हूँ मनुज मैं !!
    स्वर्ग को वसुधा पे लाना जानता हूँ !!

    तिरस्कृत गरल से, सृजन न मरने पायेगा।
    दम्भ धरकर प्रेम, कैसे सहज़ चल पायेगा।
    आदेश क्षत्रप का, निर्लज्ज ही ठुकरायेगा।
    शौर्य के संग्राम में, बस्ती बचाना जानता हूँ।
    हूँ मनुज मैं !!
    स्वर्ग को वसुधा पे लाना जानता हूँ !!

    आदि से उत्पन्न हूँ, अनादि तक संपन्न हूँ।
    अंत में भी मुखर होता, प्रारंभ का प्रसंग हूँ।
    ठोकरों से बाँह फैला, मिलता ज्यों मलंग हूँ।
    पद रज को मस्तक का, चंदन बनाना जानता हूँ।
    हूँ मनुज मैं !!
    स्वर्ग को वसुधा पे लाना जानता हूँ !!

    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hindipoetry

    Read More

    "हूँ मनुज मैं!"

    (अनुशीर्षक में पढ़ें.....)
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 1w

    अनुक्त बोल बतलाते अब,
    अस्तित्व मेरा है गौण प्रिये!
    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hks #hindiwriter

    Read More

    अनुक्त!

    जिन प्रश्नों के प्रतिउत्तर में
    रह जाती हूँ मैं मौन प्रिये!
    उनके भाव बताने बोलो
    अकुलाता भला कौन प्रिये!
    शब्द बिना सागर रिसता है
    बीहड़ नैनों के कोरों से,
    गागर में स्मृतियों की बूंदें
    यहाँ संचित करता कौन प्रिये!
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 16w

    #आजादी #ईहा��

    आज़ादी की शुभकामनायें!!
    कुरीतियों रूढ़ियों अवसादों से
    कलुषित मन के झंझावातों से..
    सुनसान रातों के पहरेदारों से
    चार दीवारी के अत्याचारों से..
    गिरगिट से नाते-रिश्तेदारों से
    उन बोली लगाते ठेकेदारों से..
    मेरी जग़ह बतलाते थानेदारों से
    आत्मा कुचलते हत्यारों से..
    आज़ादी मुबारक़ हो मुझको
    दोगलेपन से भरे ज़वाब-सवालों से.....
    आज़ादी की शुभकामनायें!!
    © Smriti Tiwari
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #independenceday #india

    Read More

    आज़ादी!

    मुल्क के आज़ाद होने भर से,
    सूरत-ए-हालात बदलेंगे भला कैसे।
    आज़ाद होगी जब हर सोच,
    खुद-ब-खुद ही इंकलाब आयेगा!!
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 17w

    थाह कितनी, कौन जाने
    गति कितनी भला कैसे पहचाने!!!
    ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
    © Smriti Tiwari
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    छायाचित्र आभार ���� : अंतरजाल(बोले तो internet)
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hindimirakee #hindikavita #hks #hindilekhan #hind #hindiwriters

    Read More

    थाह!

    'बाहर से हम बोध सागर बन पड़े हैं,'
    स्थिर पहाड़ से अड़े हैं
    शांत तन कर खड़े हैं!

    किंतु हम फेंक देते हैं...
    अंदर कौंधता हर गुबार
    रोष, आक्रोश, पीड़ा
    दूसरे की ओर....
    कभी चीख कर,
    कभी खीझ कर,
    तेजी से बस
    हर कुछ फेंक देते हैं....

    'हम अंदर से बहुत छिछले हैं!'
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 17w

    बात बेबात का एक अंश!
    © Smriti Tiwari
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit��

    Read More

    बात करनी है!

    अनमने ढंग से स्विच ऑफ का नन्हा बटन दबाकर प्रवेश किया 'बात करनी है' के अनचाहे गलियारे में। यह गलियारा मुझे कभी भी रास नहीं आता,यहाँ से गुजरते हुये सबसे पहले एक टीस भरा सन्नाटा मेरे साथ चलने लगता है।उसकी दो काली आंखें मुझे यूँ घूरती हैं जैसे मेरे अंदर चल रही हलचल के केंद्र को ढूँढ़ उसे उखाड़ फेंकना चाहती हों।

    यहाँ स्वतंत्रता के किवाड़ पर सांकल चढ़ी हुई है समझाइशों की।मैं सांकल पीटती रह जाती हूँ पर न ही किवाड़ खुलते हैं न कोई मुझे पुकारता है।यकायक सांकल में फंसकर मेरी सबसे छोटी उंगली का वह नाख़ून टूट जाता है,जिसे मैंने हफ़्तों तक बड़े ऐहतियात से लंबा किया था विद्रोह के गीत सुनाकर और कल ही उसपर लगाई थी स्वछंदता की सुर्ख़ 'Nail polish' गर्व से।दुःखद है न पर अभी अफ़सोस करने का समय नहीं है क्योंकि 'बात करनी है'।

    किवाड़ खुलने पर इन समझाइशों के 'One way' रास्ते से होकर गुजरना मजबूरी जान पड़ती है, यहाँ दीवारों पर उसी पुराने सवाल की सीलन है जिसकी महक से मेरे नथूने सड़ने लगते हैं,अस्तित्व को मूर्छा आने लगती है।अलमारियों में पुरानी परिपाटी वाले सामाजिक नियम के पुतले सजाकर रखे हुये हैं, जो मुझे मेरा परिहास करते जान पड़ते है। जी करता है इन्हें उठाकर फेंक दूँ इसी वक्त अपनी नयी उम्मीद वाली छत के छज्जे से नीचे। फिर देर तक ख़ुल कर हँसती रहूँ इनके बिखरे हिस्सों पर, लेकिन ऐसा फिर कभी करेंगे क्योंकि अभी 'बात करनी है'।
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 20w

    भावना के भँवर में प्रियतम धार निर्झर झर रही है,
    मिलन बेला की प्रतीक्षा प्रेयसी नहीं कर रही है!
    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hks #hindiwriter

    Read More

    ईहा!

    निकली मैं थी बन-सँवर कर
    जब तुम्हारे सामने,
    नयन झुका सहज तुम लगे
    जाने क्या निहारने?
    मधुर सी मुस्कान निश्चल
    खिंची फिर कमान सी,
    सतरंगी होकर साँसे गूँजी
    सुमधुर हृदय तान सी!
    अधर चुप हैं, चुप हैं नैना
    धड़कन कहानी कह रही है!
    अंतराल के मध्य हर क्षण
    स्नेह सरिता बह रही है!
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 20w

    तन छूने आतुर सब यहाँ पर,
    तुम आत्मा को छू लो साथी!
    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hindiwriter #hks #hindikavita #hindilekhan #hindipoetry
    @anougraphy

    Read More

    साथी!

    चुप्पियों की तह उतारो,
    लब की गिरहें खोलो साथी!
    गूँज जाये आज अंबर,
    कोई बात ऐसी बोलो साथी!
    रिसता है दुख लहू बन,
    आज खुलकर रो लो साथी!
    दोष के बादल घिरे हैं,
    मन की चादर धो लो साथी!
    चिटके ख़्वाब खंडों को,
    फिर प्रयत्न पर तोलो साथी!
    बारूदी चीखों से छिले,
    शब्दों में सरगम घोलो साथी!
    उम्र गुज़री दिन-दुपहरी,
    दो घड़ी थमकर सो लो साथी!
    उँगलियाँ छूटे कभी जो,
    तुम साथ खुद के हो लो साथी!
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 21w

    सारी राहें मिलन की,
    अब तेरी ओर मोड़ूँ।
    मैं जग के पैमाने पर,
    कहो प्रीत कैसे तोलूँ!

    @anougraphy
    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hindimirakee #hindikavita #hks #hindilekhan #hind #hindiwriters

    Read More

    बोलो! कैसे?

    साची-साची बतियाँ, कैसे तोसे बोलूँ।
    बोल मोरे सजना, मैं प्रीत कैसे तोलूं।

    मन भरमाये मोरा दुनिया ये सारी,
    इसमें ही उलझी है जीवन गाड़ी।
    गाड़ी के पहिये पर भरम सारे छोड़ूँ।
    बोल मोरे सजना
    प्रीत कैसे तोलूं।

    यादों की गुल्लक धरी है जतन से,
    सिक्के खनकते हैं कोर नयन पे।
    नयनों के पोरों से स्वप्न सारे जोड़ूँ।
    बोल मोरे सजना
    प्रीत कैसे तोलूं।

    ढ़लता सा बचपन चढ़ता सा यौवन,
    यौवन में दमके सिंगार का जोबन।
    जोबन छिपाने को चूनर मैं ओढूँ।
    बोल मोरे सजना
    प्रीत कैसे तोलूं।

    तुमसे मन का बंधन जुड़ गया जबसे,
    रीत की रस्सियां ढ़ीली पड़ी तबसे।
    जग बिसरा के मैं तेरी ओर दौडूं।
    बोल मोरे सजना
    प्रीत कैसे तोलूं।

    साची-साची बतियाँ, कैसे तोसे बोलूँ।
    बोल मोरे सजना, मैं प्रीत कैसे तोलूं।
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 21w

    मुझे भागीरथी सा थाम केशों में,
    शिवांश हो जाना तुम!
    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hindimirakee #hindikavita #hks #hindilekhan #hind #hindiwriters

    Read More

    यूँ आना तुम!

    जब टूटे भय का बाँध कहीं,
    सरयू सा बहे संत्रास कहीं।
    द्रुतवेग से पिघले हर पीड़ा,
    सुख बने अंतिम ग्रास कहीं।
    तब....
    आह की ओप गिरा करके ,
    क्रंदन के मेघ विदा करके,
    निर्झर हो झरते जाना तुम,
    यूँ मुझसे मिलने आना तुम!

    जब चक्रव्यूह अभेद्य लगे,
    अस्तित्व गिराने सेंध लगे।
    नियम कसौटी पर कसती,
    मर्यादा छल का केंद्र लगे।
    तब.....
    पैने शब्दबाण चला करके,
    लाज की ढ़ाल गिरा करके,
    मंतव्य ध्वजा लहराना तुम,
    यूँ मुझसे मिलने आना तुम!
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 21w

    पतित द्वेष उत्सर्ग कर,
    क्षमा हृदय से लगा लो!
    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hindimirakee #hindikavita #hks #hindilekhan #hind #hindiwriters

    Read More

    ग्रहण!

    भित्तिचित्रों पर सजा दो,
    पोथियों में ये लिखा दो,
    जो धधक जाये स्वयंभू,
    विद्रोह को ऐसी हवा दो!

    मन अमासी हो रहा है,
    आज सूर्य भी छिपा दो,
    सागर हुये अब कूप सूखे,
    भय भरे कंकड़ गिरा दो!

    टूटे तारों के रुदन पर,
    एक नई सरगम बजा दो,
    शृगाल ताके मौन साधे,
    मसान में आशा जला दो!

    भावी कल के स्वप्न सारे,
    नयन कोरों से बहा दो,
    स्मृति रहे नहीं शेष कोई,
    काया को अंतिम विदा दो!
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 22w

    ये भी एक परिचय है साथी !
    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hindipoetry #hindimirakee #hindikavita #hks #hindilekhan #hind #hindiwriters

    Read More

    दीप-बाती!

    एकाकी जीवन पाती,
    रैना भी यादें बिसराती।
    यौवन की चंचलता जो,
    रही हृदय को भरमाती।
    निश्छल अनुनय स्पर्श से,
    काया तनिक है सकुचाती।
    मनुहार मिलन का ऐसा हो,
    तुम दीप बनो और मैं बाती!
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 22w

    संगम पर छिड़ेंगे स्वरपूरित राग के!
    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hindipoetry

    Read More

    अर्पण!

    अंजुली भरी भावी सुख के अनुराग से,
    पोर से रिसते हैं जो भ्रम थे विराग के!
    अर्घ्य दे रही हूँ समर्पण का सहर्ष और,
    अर्पण किये निष्ठा पुष्प संग अंगराग के!
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 23w

    जब जागी हाय नहीं मिला कोई!!
    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hindipoetry

    Read More

    सपन!

    बीती रैना सीली अँखियाँ,
    सीली अँखियाँ भर मैं रोई!
    गीला काजल खारा सा मन,
    खारे मन से सूखी यादें धोई!
    सूना सा घर जो आवाजें दे,
    आवाजों में सुध-बुध खोई!
    कच्ची नींद से बुने सपन में,
    पिय काँधे सर रख मैं सोई!
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 23w

    यूँ ही कह गये बस!!!
    ������
    ☘☘☘⚜⚜⚜☘☘☘
    ~ स्मृति 'मुक्त ईहा'
    ••✍✍✍
    © Smriti Tiwari��
    Facebook�� : Smriti Mukht iiha
    Instagram❤ : Smriti_mukht_iiha
    छायाचित्र आभार�� : Internet
    ➖➖➖➖
    #smit�� #Smriti_Mukht_iiha #hks #hindilekhan #hind #hindiwriters #baithehai #kahgaebas @hindikavyasangam @hindilekhan @hindiwriters @hindiurdu_saahitya @hindii

    Read More

    बैठे हैं! -3

    इज्ज़तदार जब से उसूलों को ख़ास बनाये बैठे हैं,
    तब से हालात बदलने के हम कयास लगाये बैठे हैं।

    जिस्मों के टकराने से उम्मीदें रौशन सब बोले पर,
    हम तेरी खुशबू से अपने अहसास लगाये बैठे हैं।

    पाखी ख्वाहिश ढूंढे है उम्मीदों का उड़ता बादल,
    बंधे हाथ के सपनों पर हम काश लगाये बैठे हैं।

    टीस कम करे ऐसा हमको बतलाना कोई नुस्खा,
    दिल पर बीती यादों की हम फांस लगाये बैठे हैं।

    चीख़ती दलील की दुकां में चुप्पी का मोल नहीं,
    पट्टी बांधी आँखों से न्याय की आस लगाये बैठे हैं।

    कत्ल करने को बाग़ी ख़्वाब हथियार उठाये हैं सबने,
    हम बंजर आँखों में उम्मीद की प्यास लगाये बैठे हैं।
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 24w

    यह मर्म समझ नहीं आता है!
    ©स्मृति तिवारी
    ••✍✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #hindipoetry

    Read More

    सार

    निशा बाँसुरी, निद्रा मोहन।
    क्यों दिन गीता बन जाता है!
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 25w

    आखर पंक्तियाँ!!

    "ज्ञ" से ज्ञप्ति हर कहीं, ज्ञ से ज्ञपित है कौन ।
    ज्ञ से ज्ञापन सौंपते सब, ज्ञ से ज्ञानी सब मौन।

    #Aakhar #Varnmala_smit
    ©स्मृति तिवारी ✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #twoliner #hindiurdu #hindipoetry

    Read More

    "ज्ञ"

    ज्ञप्ति है चंहुओर वो फिर से लिख रहा है,
    रंग-रूप में बदलाव उसके दिख रहा है।
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 25w

    आखर पंक्तियाँ!!

    "त्र" से त्रयताप बाँधता, त्र से त्रसन में धीर ।
    त्र से त्रयंबक हर रहे, त्र से त्रयी संग पीर।

    #Aakhar #Varnmala_smit
    ©स्मृति तिवारी ✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #twoliner #hindiurdu #hindipoetry

    Read More

    "त्र"

    त्रयताप से सुलगती है जो काया-चित्त-श्वांस,
    श्री को सर्वस्व समर्पण कर तज दे मोहपाश।
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 25w

    आखर पंक्तियाँ!!

    "क्ष" से क्षमाशीलता शोभती, क्ष से क्षमतावान को ।
    क्ष से क्षम्य तभी होते जो, क्ष से क्षरित न करते मान को।

    #Aakhar #Varnmala_smit
    ©स्मृति तिवारी ✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #twoliner #hindiurdu #hindipoetry

    Read More

    "क्ष"

    क्षमाशीलता अलंकार है निर्मल हृदय का माना,
    किंतु सुपात्रों ने इसका महत्व कितना पहचाना?
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 25w

    आखर पंक्तियाँ!!

    "ह" से हज़ूर की नौकरी, ह से हथकड़ी बनी है ।
    ह से हदस में शौक़ भी, ह से हरजाना चुका रहे हैं।

    #Aakhar #Varnmala_smit
    ©स्मृति तिवारी ✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #twoliner #hindiurdu #hindipoetry

    Read More

    "ह"

    हज़ूर की हज़ूरी की आदत हमें कुछ यूँ लगी,
    बेख़ौफ़ सच कहने को अब ज़ुबान खुलती नहीं।
    ©smriti_mukht_iiha

  • smriti_mukht_iiha 25w

    आखर पंक्तियाँ!!

    "स" से सत्य सबके यहाँ, स से सर्वथा भिन्न ।
    स से समाहित हो रहे, स से समदर्शी चिन्ह।

    #Aakhar #Varnmala_smit
    ©स्मृति तिवारी ✍✍
    FB/IG❤�� : #smriti_mukht_iiha
    ➖➖➖➖➖➖➖
    #smit�� #twoliner #hindiurdu #hindipoetry

    Read More

    "स"

    सत्य का नहीं भान जब, हुंकार काहे मारते।
    प्रतिकार की तुला पर, विवेक सबके आँकते।
    ©smriti_mukht_iiha