#savetree

28 posts
  • ammy21 27w

    Nature

    Nature is love, Nature is life
    Save trees, rivers nd save yourself
    Your time starts now
    One two three four five
    ©ammy21

  • kikasu 50w

    Aaj inhe cehchane de...

    Aaj inhe chahakne de,
    Basti hui nai duniya mai inhe khilkhilane de..
    Ye v prakriti k hi den h..
    Yeh Or koi nhi hame subah subah uthane wale pakshi anek hai....
    Nhi chinte h inse jindagi,
    Isiliye chaliye aaj inhe chahne de...
    insta_mahuma_p0etr
    Aaj in pr koi rok na kre,
    Jha jati hai inhe jane de...
    Choti si hai ye zindagi..
    Chlo inhe nai khushiya batne de...
    Isiliye chlo aaj inhe chachane de...

    Har pakshi k prajati anek hai..
    Inke jati v na ek hai...
    Lekin ye nhi krte hai jatiyo k bhedbhav kuki,
    Inke irade hmm manushyu se nek hai..
    Hmm manushyu ke gande irade se hi ye dokha kha jati hai..
    Kuki dana dalte hi ye use pyar smj dharti chum aati hai..
    Toh chlo hmm aaj ek sankalp le aate h..
    ki inke aashiyane pedo ko na katte hai..
    Or phir aaj inhe swatantr rup se chahane dete hai...
    mahuma_p0etr
    ©kikasu

  • ypravin054 55w



    Dil lagaane se achha hai,
    Paudhe lagaye,
    Ye ghaav nahi ,
    Chhaav denge.
    ©ypravin054

  • khwahishaan 89w

    Happy World Poetry Day 2020

    साहब, ये उदासी क्यों चारों ओर है?
    बहती नदियाँ मगर दरारें हर ओर है
    विश्वस्तरीय ढ़ेरों लोग यहाँ रहते है
    फिर भी यहाँ सब बस हरियाली खोर है
    नियत दिखाने को बेफज़ूल है दिखाते
    सुनो उन सिक्कों की ना खनक ना शोर है
    भीड़ भी है बसी वहाँ उन खोरों की
    जहाँ कागज़ों में लिपटी बस इनकी लोर है
    सस्ते है सौदे मालिक, यहाँ कहते
    फिर ना माटी सजती ना पौधें यहाँ
    देखो कैसा झूठा बंधा डोर है
    टूटेगा डोर हरियाली ना हुई देखो
    मर जाओगे बिन इनके कहते ये खुद
    हर ओर है कहते हर ओर है

    महसूस करो साँसों में बातें
    कहते बिन बोले ये पौधों की शोर है
    ©ख़्वाहिशाँ

    #worldpoetryday #2020 #gdp #indianeconomy #environment #gogreen #savetree #savelife #mirakee #mirakeeworld #instagram #instagramwriters #tweeterwrites #tweet

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    ....

  • sharan_creator 109w

    (प्रकृति)

    जिन पेड़ो को काट ते थे ।ये मनुष्य
    कभी उसी के नीचे बैठकर अपने दुख बाट ते थे।ये मनुष्य
    अपने हित के लिए जो प्रकृति को बिगड़ देगा
    मत भूल उपर खुद बैठा है।
    वो आने वाला तेरा कल बिगड़ देगा।
    ©sharan_creator

  • areesha__07 110w

    Humans logic

    Cut trees to make paper from them



    And write "SAVE TREES" on it

  • mustafizray_ 112w

    ​Cries that make the lips smile,
    Reaching for something that no one can hold,
    Summer plane on the winter snow,
    Ice skedaddle's grapes fall from the mountain blue.

    Cries that make the heart smile,
    Wrapping in blue coat to soothe the pain,
    Matchlight incase no flashlight,
    Mountain snow is jumping down,
    Red River liquifying why So fast.

    Mother nature crave the touch,
    Laying abandon for one to cradle it's eyes,
    Shut down without that one last drop of love,
    Ripping apart because no one to sow her back,
    Why are we so bad,
    Is that what humanity came to a still,
    So cruel that it even makes the God heart cry.

    By Mustafiz Ray

    Tags-
    #mirakee #MirakeeWorld #mothernature #love #cry #pod #reachforsome #writersworld #writerscommunity #feature #writtenfromheart #original #beau​tiful #crying #climatechange #protectourenvironment #savetree @mirakee @mirakeeworld @writersnetwork @twinkling_girl

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    Laugh with tears

    ​Cries that make the lips smile,
    Reaching for something that no one can hold,
    Summer plane on the winter snow,
    Ice skedaddle's grapes fall from the mountain blue.

    Cries that make the heart smile,
    Wrapping in blue coat to soothe the pain,
    Matchlight incase no flashlight,
    Mountain snow is jumping down,
    Red River liquifying why So fast.

    Mother nature crave the touch,
    Laying abandon for one to cradle it's eyes,
    Shut down without that one last drop of love,
    Ripping apart because no one to sow her back,
    Why are we so bad,
    Is that what humanity came to a still,
    So cruel that it even makes the God up above cry.

    ©mustafizray_

  • mahijain 112w

    शहर

    आगे क्या होगा ज्यादा कुछ नहीं
    मेरा गाँव भी एक शहर बन जायेगा

    फिर क्या गनीमत ही होंगी
    कोई परिंदा मेरा घर, आँगन को आएगा

    तुम बस इमारते बना डालो मतलबियों
    फिर पता नहीं कब ये *शहर* भी बंज़र बन जायेगा !!
    ©mahijain

  • summit_aroraa 128w

    ©summit_aroraa

  • jeetzaan 130w

    मत काटो

    काट दिया पेड़ों को तुमने
    साँस कहा से लाओगे
    बन्द डिब्बो से बोलो तुम
    कितने दिन काम चलाओगे
    खत्म हो जायेगा सब कुछ
    क्या तब जाके पेड लगाओगे
    छिन जाएगी सांसे जब
    क्या तब सन्सार बचाओगे
    क्या होता हे पिपल नीम
    केसे बच्चों को समझाओगे
    क्या फोटो दिखाकर उनको तुम
    जंगल कि सैर कराओगे
    स्वार्थ में अंधे लोग है ये..
    जीत केसे उन्है समझाओगे
    ©jeetzaan

  • _jainain44 130w

    पर्यावरण

    विश्व पर्यावरण दिवस लोगों ने यूँ मनाया,
    पौधे के साथ लेकर सेल्फी प्यार जताया ।
    पर भूल रहें हैं काफी कुछ वे,
    शायद किसी ने उन्हें याद नहीं दिलाया ।।

    पर मुझे भी जब स्मरण आया,
    मेहमानों की दस्तक लेकर जब कौआ नहीं आया ।
    पशु पक्षी भी पर्यावरण का ही भाग हैं,
    उनका ख्याल तो किसी को नहीं आया ।।

    कल गली से गुजर रहा था मैं जब,
    तो नल का साफ पानी बह रहा था ।
    और चिल्ला चिल्ला के कह रहा था,
    मुझे बचाने का ख्याल तो किसी को नहीं आया ।।

    आज ए.सी. में बैठकर कह रहें हैं,
    कुछ बेकसूर लोग ।
    कि किसानों ने प्रदूषण फैलाया है,
    हमने तो हमेशा पर्यावरण ही है बचाया ।।

    न कोई गैर समझा सकता है,
    न सरकार बता सकती है ।
    आपकी अपनी सोच पर्यावरण को बचा सकती है,
    मैंने तो आपको बस ये याद है दिलाया ।।

    ✒ JAI NAIN
    ©jainain44

  • puneetasingh 130w

    सूखा पेड़

    हाँ , हाँ , मैं वही सूखा वृक्ष हूँ,
    जिसकी परवाह किए बिना सब आश्रय पाते थे l
    भीषण सी तपती गर्मी में,
    कितने लोग पूरी-पूरी दुपहरी बिताते थे ll
    किन्तु कभी भी मुझे नहीं सींचा लोगो ने, मेरी जड़ों के पास जमा की मिट्टी जिससे बरखा का जल भी न समाया ll
    कौन थे ऐसे लोग स्वार्थी जिनको,
    मेरी इस हालत पर तरस न आया ll
    जड़ हूँ मैं, चेतन होता तो शायद,
    इस पहाड़ से उस पोखर तक निश्चित जाता ll
    भीषण गर्मी से जब रात को निवृत होता,
    छक कर पिता नीर नित्य ही प्यास बुझाता ll
    किन्तु क्या करता, मूक था कुछ संवाद नहीं था,
    बोल नहीं सकता था कोई विवाद नहीं था ll
    कभी क्रोध में किसी को मारी सुखी डाली,
    उल्टा ही परिणाम मिला खाई थी गाली ll
    उससे भी जब क्रूर को शान्ति नहीं मिल पाई,
    एक हरी-भरी डाल तोड़कर पास गिराली ll
    कौन समझ सकता था आखिर मेरी पीड़ा ?
    मेरी नरम शाखों पर बच्चे करते थे क्रीडा l
    आस पास कुछ छोटे पौधे उगे तो थे
    पर चरवाहों की बलि चढ़ गए , पशु भी खा गए l
    खेत बन गए लोगों के बस इसीलिए तो
    समतल हुईं ज़मीने, पोखरें भी सब पटा गए ll
    अब सूख गया हूँ तो लोगों की बातें सुनता हूँ बड़ी प्रशंसा करते हैं मेरी, बड़ा अच्छा था ये वृक्ष,
    अरे हमने ही देखभाल नहीं की अन्यथा बच जाता ये बेबस ll
    पिछले सत्तर वर्षों से सेवा करता था बेचारा हरदमl
    किन्तु बुजुर्गों ने भी तो नहीं किया कोई जतन,
    नहीं तो जीवित होता आज चूमता गगन ll
    अब भीषण गर्मी में इनके पांव जला करते हैं,
    तब नित नई कहानी मेरे लिए गढ़ा करते हैं l
    काश ! मुझे थोड़ी-थोड़ी भी देखभाल मिल जाती,
    मैं अम्बर के छाये रहता ये, बांछें खिल जातीं ll
    किन्तु आपके आलस का परिणाम तो सर्व विदित है l
    आपके आलस मैं ही तो मेरा मरण निहित है l
    वृक्ष लगाना ही केवल पर्याप्त नहीं निश्चित है l
    उनकी देखभाल में ही तो उनका जीवन निहित है ll
    Copyright © BP Singh

  • anithoughts 138w

    बूढ़ा दरख़्त

    खामोश स्याह रातों में ,
    कङकङाती खिङ्कियों से
    आती थी आवाज़ें
    खौफ़नाक मगर दर्द-भरी
    अजनबी नहीं जानी-पहचानी सी
    शायद दूर खङे उस दरख़्त से
    एक रोज़ मैने जुटाई हिम्मत
    और चल पङी आवाज़ की ओर
    धङकते दिल से अपने लबादे में
    काँपते हाथों को छुपाते हुए
    तेज साँसों पर काबू पाते हुए पहुँची
    पर वहाँ मुझे कोई न मिला
    सिवाय उस बूढ़े झार के
    हाँ मगर उसके पास ही उगा था
    एक नन्हा शज़र
    रात की चाँदनी बूढ़े झार से छनकर
    उसकी नाजुक पत्तियों पर पङ रही थी
    और उसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ रही थी
    पर दर्द भरी आवाज़ ने फिर ध्यान भंग किया
    मैने कभी पेङ पौधों से बात नहीं की थी
    बिना कुछ समझे ही वापिस लौट आयी
    मगर एक बैचेनी सी बनी रही ...
    कुछ समझाना चाहती थी वो आवाज़ें
    मैं ये तब समझी ,
    जब कुछ दिनों बाद , चार पाँच लोग आये
    और उस बूढ़े दरख़्त को काटकर ले गये
    और आवाज़ आनी बंद हो गयी
    पर मेरी बैचेनी अब तकलीफ़ में तब्दील हो चुकी थी
    क्योंकि वहाँ वो नन्हा शज़र अब नहीं था ,
    सूख चुका था , या यूँ कहूँ मर चुका था


    ©anithoughts

  • annie_01 150w

    The woods are dying
    Though we appear large
    You think we are endless
    But we end quickly

    We appear large on the outside
    But we are hollow
    So do not take us for granted
    Because we will soon be gone

    Unless you see
    That we are hollow
    And you sow the seeds
    And make us full

    ©annie_01

  • annie_01 150w

    Under the tree they stood
    Watching the sun rise
    They cared not for the evil of the land
    Nor the evil of the world
    They cared for the tree
    The tree spread hope and love through all the dark places
    It gave children sweet dreams and warriors the strength to fight against all evil
    The tree gave hope and meaning to all that was for it they would give a thousand lives
    ©annie_01

  • ayush_09 151w

    Yes, I heard,
    A groan,
    Which comes through wind,
    It gives me some message,
    That is still clung in my vein,
    she craved, Not only ones,
    That,
    "Please don't dissolve venoms",
    Yes, I felt,
    A pain,
    That comes from nature,
    Like He wants to ask something to someone,
    "Why my life became more cumbersome",
    ©ayush_09

  • durgesh_chouhan 165w

    #SAVETREE
    कोई हक़ नहीं की हम उस डाल को कांटे
    जिस डाल की ठंडी छांव ने भरी गर्मी में साथ दिया।
    #वृक्ष #हिन्दी #शायरी #दोपंक्तियां #twoliner #storyteller #hindi #hindiwriters #writersnetwork #writers #kavigiri #savetree @hindiwriters @writersnetwork @mirakeeworld

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    पेड़ की छांव

    कल ही तो उसने इक डाल कांटी थी
    आज उसी पेड़ की छांव में दिन कांटा है
    ©durgesh_chouhan

  • selflove 163w

    इस कविता के माध्यम से मैंने मानवीकरण का प्रयोग करने का प्रयास किया है ।
    यहां पेड का संबंध "बेटे" से है और टहनी का संबंध" बेटी " से एवं "मां" यहां जड़ को कहा गया है । यह उस वक्त का दृश्य है जब एक लालची लकड़हारा अपनी जेब भरने के लालच मै एक निर्दोष की हत्या करने के लिए आगे बढ़ता है । जिस प्रकार से वह अपनी कुल्हाड़ी से पेड़ एवं टहनी को काटने के लिए आगे बढ़ता है तो किस प्रकार से उनकी मा उसे रोकती है ।
    Everything on earth is a creation of almighty and we don't have any right to harm them ..so stop threating animals , harming and cutting down trees ,they also have emotions .... #savetree #saveearth #naturelove ...
    This is my first try so please let me know if there is any mistake.. suggestions are welcome �� .... #aryan22 #panchdoot #hind #osr #piaa_choudhary #smb @vijay_rangvani @vrishabh @sanjay_writes @aurangzeb @mrbolbachan @ek_kosish @drinderjeet @panchdoot @trickypost @rayaan @devesh_official @iammusaafiir @succhiii @manish_ojwani8797 @poorvashukla

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    वृक्ष की गाथा

    ठहर जा मेरा बेटा है वो
    शरीर से थोड़ा बड़ा ज़रूर
    पर दिल से अभी भी नाज़ुक है वो
    प्यारा मेरा वो तुम्हे छाया देता है
    फिर क्यों तू उसे ही काट माया लेता है ?

    अरे ! मुश्किल से रोका तुझे
    पर अब तु कदम कहाँ बढा रहा
    कितना दुष्ट है अपनी नजरें टहनी पर घुमा रहा l

    सुन सता मत उसे
    मेरी बेटी है वो
    चंचल ज़रूर पर बड़ी कोमल है वो
    प्यारी बिटिया मेरी तुम पर फल बरसाती है
    फिर क्यों आखिर तुम्हारी कुल्हाड़ी उसीपर से गुजर जाती है?

    पेट तुम्हारा मेरे बच्चे भरते है
    ज़िन्दगी जिओ तुम इसलिए ऑक्सीजन प्रदान करते है
    पर आखिर तुम अपना रूप दिखा ही देते हो
    उन्हें काट कर पैसे खूब कमा ही लेते हो l

    बड़ा बेरहम है तू समझ नहीं रहा
    बच्चो को छोड़ अब मुझे मारने आ गया
    क्या अब मॉ को नष्ट कर
    बच्चो को अलग करेगा ?

    आखिर अब तू मेरे क्रोध से
    कब तक बचेगा ।


    -Anshika Tiwari ©selflove

  • kusumsharma 169w

    || आओ हम सब मिलकर संकल्प करें ||
    धुँए को तिलांजलि दें, पौधों को जीवन दें
    || दोगे न ||

    @hindii द्वारा दिये गए चित्र पर आधारित


    सिगरेट सबके लिए हानिकारक है ये सबको पता है फिर भी नही छोड़ते।लेकिन कोशिश तो कर ही सकते हैं।और कहते हैं कोशिश करनेवालों की कभी हार नही होती।
    तो देर किस बात की... सोचिए.. लागू करिए.... परिणाम आपके सामने होगा..
    और जिन्होंने छोड़ दी है एवं जो नही पीते और जो भबिष्य में न पीने का संकल्प ले चुके हैं उनके लिए मेरा तहेदिल से शुक्रिया

    प्रकृति हमारे प्राणों का संचार करती है।पेड़ पौधे उसकी धरोहर हैं।
    इसको मिटाने की जगह हमें अपने साथ साथ हमारी आने वाली पीढ़ियों को कईं गुना बढ़ाकर देना है।
    तुलसी पीपल ऐसे हैं जो चौबीस घंटे औक्सीजन देते हैं।
    आईये हम सब मिलकर अपनी प्राणवायु का संरक्षण करें।
    जीवजंतु पशु पक्षियों आदि के घरों को न उजाड़े।
    सब मिलकर पौधरोपण करें...
    ✍��


    #hind #hind_pic1#mirakee #writersnetwork #readwriteunite #pod #hindii #du #hindiwriters #panchdoot #plants #environment #nature #naturelover #life #quote #savetree @panchdoot @mirakeeworld @hindii

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    तिल तिल करके जला रही
    होंठों से लगा ख़ुद का वज़ूद मिटा रहे
    हर एक कश़ के साथ
    साँसों से खिलवाड़ कर रहे

    जिस शाखा पर बैठे हो
    उसी की डाली काट रहे
    सबके उज्जवल भबिष्य के लिए
    एक एक पौधा लगाने का
    आओ हम सब संकल्प करें
    ©kusumsharma

  • writerrai 176w

    बारिश !

    ©writerRai

    आधा सावन बरसा था जो ये सोचकर ,
    अगले बरस फिर आएंगे वो मेघ लौटकर ।।

    सुखी ज़मीन भिगाऐगे नदीया समेटकर ,
    अफ़सोस के सावन को नहीं ख़बर ।।

    वो मेघ लौट गए शहर छोड़कर ,
    सूख गए हैं सारे पौधे उस सावन के छोर पर ।।

    आधा सावन बरसा था जो ये सोचकर ,
    अगले बरस फिर आएंगे वो मेघ लौटकर ।।

    @लेखकRai