#sanskrit

523 posts
  • 7secondsauthor 1w

    Contrary To You

    I don't write for any fame,
    But I write for the love of it.
    I want to learn many things,
    Writing is a way of practice.
    I am striving to be a polyglot,
    But Sänskřŧ is my ultimate goal.
    There are multiple languages,
    Yes, situationally in my novels too.

    ©7secondsauthor

  • bemisal_hum 15w

    भाषा

    इस पीढ़ी को जब नहीं आती अच्छे से #संस्कृत तो सोचिए आने वाली पीढ़ी को सिर्फ़ विलुप्ति का ज्ञान पढ़ाया जाएगा..
    ✋✋
    ©bemisal_hum

  • krishnaa_8 16w

    Rain

    Foamy sky
    Iron shadow
    Lightning sea shore
    Worship tree;
    Cloud-
    Chain of pearls
    ©krishnaa_8

  • roopanjali_singh_parmar 25w

    सौम्यक्रोधधरे सृष्टिरूपे महिषासुरनिर्नाशि चामुण्डे नमस्तुभ्यं।
    सर्वस्वरूपे महाविद्ये कपालिनी देवी नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

    अर्थ- सौम्यक्रोध धारण करने वाली, सृष्टिस्वरूपिणी, महिषासुर का नाश करने वाली देवी चामुण्डे तुम्हें नमस्कार है। सर्वस्वरूपा महाविद्ये कपालिनी नारायणि देवी तुम्हें नमस्कार है।
    ((संस्कृत लिखने का प्रयास किया है, कोई त्रुटि हो गई हो क्षमा करें))
    नवरात्रि की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

    ©roopanjali_singh_parmar

  • hasinikr 29w

    संस्कृथं

    Sanskrit is just not a language... It is the mother of all languages....

    ©hasinikr

  • zyxabc_aryoham 40w

    #sanskrit #hindi #hindiwriters #yog
    ।।समत्वम् योग उच्यते।। #thoughts #inspiration

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    सम्

    ना जीतने की खुशी
    ना हारने का गम
    स्वयं में स्थित रहें हम
    ©आर्योऽहम्

  • musings26as 40w

    She radiates
    so brightly
    as if
    she swallowed
    entire galaxy.

    ©26as

  • bhaskar_28 42w

    प्रिय वाक्य प्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
    तस्मात् प्रियं हि वक्तव्यं वचने का दरिद्रता।।

    ~> मीठे वाणी बोलने से सभी व्यक्ति प्रसन्न और संतुष्ट होते हैं इसलिए सदैव मधुर वचन ही बोलने चाहिए। वाणी हमारे अधीन है और इसका कोई मुल्य भी नहीं देना पड़ता तो मीठे वचन बोलने में दरिद्रता कैसी ?

    --> If people are addressed in a polite and pleasing way,
    they all are satisfied at it. Therefore . we should always
    speak pleasingly and politely, and why should we show
    our penury in the matter of our speaking to others ?

  • bhaskar_28 43w

    अस्थिरं जीवितं लोके ह्यस्थिरे धनयौवने ।
    अस्थिराः पुत्रदाराश्च धर्मः कीर्तिर्द्वयं स्थिरम् ॥

    इस अस्थिर जीवन/संसार में धन, यौवन, पुत्र-पत्नी इत्यादि सब अस्थिर है । केवल धर्म, और कीर्ति ये दो हि बातें स्थिर है ।

    Money, youth, son and wife etc. are all unstable in this unstable life. Only Dharma, and Kirti are these two things.
    ©bhaskar_28

  • writer_by_hobby 43w

    विरह अब और सहेज नहीं, इस तिमिर अंधियारे में।
    तू स्वाति की मेघ बन, बन जाऊ मै भी चातक सा।।

    #aniket_shukla
    ©writer_by_hobby

  • brmnzz_ 44w

    #brmnz#mirakeewriters#sanskrit#राम नाम # राम # भक्ति #हनुमानभक्त

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    राम-राम

    श्रीराम राम रामेति ,
    रमे रामे मनोरमे।
    सहस्त्रनाम तत्तुल्यं ,
    श्रीराम नाम वरानने।।

  • bhaskar_28 45w

    ><
    मूलम् संस्कृत-~
    यस्माच्च येन च यथा च यदा च यच्च
    यावच्च यत्र च शुभाशुभमात्मकर्म ।
    तस्माच्च तेन च तथा च तदा च तच्च
    तावच्च तत्र च विधातृवशादुपैति ॥

    सामान्य हिन्दी अर्थः-- जिस तरह से जिस वक्त पर जितना ओर जहां जो भी कर्म किया जाता है उसका फल उस तरह से उतना और उस है जगह पर प्रकृति के अनुसार प्राप्त होता ही है।


    पदविभागः--
    यस्मात् च येन च यथा च यदा च यत् च यावत् च यत्र च शुभ-अशुभम् आत्मकर्म । तस्मात् च तेन च तथा च तदा च तत् च तावत् च तत्र च विधातृ-वशाद् उपैति ॥

    अन्वयः--
    शुभ-अशुभम् आत्मकर्म, यस्मात् च येन च यथा च यदा च यत् च यावत् च यत्र च (आचरति) तस्मात् च तेन च तथा च तदा च तत् च तावत् च तत्र च विधातृ-वशाद् (फलम्) उपैति ॥

    तात्पर्यम्--
    यस्माद्धेतोः, येन-करणेन हस्तादिना, यथा च = येन च प्रकारेण ;
    यदा च = यस्मिन् काले च, यत्-शुभाशुभशुभम् अशुभं वा ;
    आत्मकर्म = स्वस्य पापपुण्य-सुखदुःखादिकं;
    यावत् = यावन्मितं;यत्र =यस्मिन्देशे च भावि; तत् = तस्मात् कारणात् ;
    तेनैव = उपकरणेन, तथा तेनैव प्रकारेण ;
    तदा च = तस्मिन्नेव काले च ;
    तच्च = तत्फलम् ;
    तावच्च = तावत् प्रमाणमेव ;
    तत्रैव देशे ;
    विधातृवशात् = भाग्यवशात् ;
    उपैति = शुभाशुभमात्मफलं स्वयमेव नरमुपयाति ॥

    तात्पर्यम्--
    जीवः- १. येन कारणेन, २. येनोपायेन, ३. येन विधानेन, ४. यस्मिन् काले, ५. यस्मिन् देशे, ६. यत्स्वरूपकं, ७. यत्प्रमाणकं च, -पापमथवा पुण्यकर्म आचरति, तस्य फलमपि तत्कारणकं, तदुपायकं, तद्विधानकं, तत्कालकं, तद्देशकं, तत्प्रमाणकं, तथैव च भवति ॥

    (हितोपदेश, १-४१)

  • musings26as 46w

    स्वार्थ के धागे में पिरोये,
    मोती जैसे रिश्ते ,
    जो स्वार्थ हटे तो माला टूटे,
    मोती बिखरे।

  • sarahrachelea 49w

    With gold saree she was wearing
    And red bindi in her forehead
    Wiggling bracelets in both her mehndi henna hands
    The scent of her presence
    Attached like a permanent tattoo
    On the back of his injured soul

    With her sea melodies and Sanskrit mantra
    She's an ashram, a sanctuary and his shelter
    Like a goddess of life
    She's dancing in nirvana of his deepest mind
    And keep him alive, keep him alive
    Alive

    ©sarahrachelea

  • writer_by_hobby 52w

    दरिया ने पानी समंदर को सारा दे दिया।
    तेरे लबों ने उसको झुकर सहारा दे दिया।।
    तूने बढ़ाए जो कदम समंदर की तरफ़।
    किनारों ने भी तुझको किनारा दे दिया।।

    #aniket_shukla
    ©writer_by_hobby

  • mastoi 57w

    music has the ability to repair brain damage.

  • rahularora__ 58w

    The Sloka my Sanskrit teacher forgot to teach !!!

  • writer_by_hobby 59w

    बहुत सुकून था जिंदगी में।
    फिर एक शाम, शाम हुई।।

    #aniket_shukla
    ©writer_by_hobby

  • writer_by_hobby 59w

    तू चंद चकोर प्रिय,
    स्वर में लिपटी वीणा सी।

    मृत्यु मुझ पर नाच रही,
    बन लोलूप क्रीड़ा सी।।

    #aniket_shukla
    ©writer_by_hobby

  • writer_by_hobby 59w

    तेरे नयनों में देखना प्रिय।
    मानो,
    जलज जलद सा जलधि।।

    #aniket_shukla
    ©writer_by_hobby