#sanak

28 posts
  • ynandini_ 32w

    Jab dil k ghaw dimaag par chadh jaye to vo sanak kehlati h..
    Sanak vo jiski junooniyat bhi beyhadh hoti hai..
    ©ynandini_

  • ynandini_ 34w

    Jo chiz meri marzi se chalti hai
    Vo meri marzi se hi rukegi
    Bhale hi vo gaadi ho
    Ya fr mohabbat..
    ©ynandini_

  • bhaktishinde 37w

    Meaning of love..

    Pyaar ek junoon hai ek dewaangi ek bimari ek sanak ek aisi hadh jise paar kiye bagair rha nhi jata aur agar paar kar bhi liya toh saha nhi jata....
    ©bhaktishinde

  • knlraheja 57w

    MAQSAD

    Janam naa hota,
    Hoti jo maut ,
    Toh zindagi ka kya samajh aata,
    Maqsad ke kyu aaye hum,
    Banke insaan,
    jab humse bana nahi jaata.

  • wind_chime 76w

    औकात

    तेरा मरना क्या इतना ज़रूरी था
    हमें हमारी औकात याद दिलाने को
    ©wind_chime

  • so_relatable 95w

    guzarish

    najane kya punya kia tha
    jo wo mila
    pr safar itna haseen kaha tha

    uski kadar jane bina apne pyaar k jail m use kaid kr dia
    uski ghutan ko andekha krte krte
    or apna pyaar smjhte smjhte
    ye bhool gyi
    ki mene use pyaar ni, uska sauda Bhagwan se kr dia

    ek baar fir milne ki guzarish h
    iss baar m kaid hokr whi ghutan sehna chahti hoo
    fir chahe ye badla ho ya uski bhagwan se koi shikayat
    ©dimplegola

  • wind_chime 102w

    मौन

    उसने सोचा होगा
    उसकी बेवफ़ाई के बाद
    मैं
    चिल्लाऊँगी .. रोऊँगी दहाड़े मार मार
    उड़ा दूँगी चिथड़े .. उसकी बातों के
    कालिख़ पोत दूँगी .. उसके नाम पर
    हँसूँगी उसकी दग़ाबाज़ी पे
    लौटाऊँगी उसको उसके दिये तोहफ़े
    हर बात के उलाहने के साथ
    और भी न जाने क्या क्या .. !!
    लेकिन मैं
    उसे तोड़ना नहीं .. उसका विध्वंस चाहती हूँ
    मैं उसके भीतर उसके किये का डर हमेशा बरकरार रखूँगी
    नहीं ..मैं .. उसे तोडूँगी नहीं .. उसकी नींव में भय भर दूँगी
    अपने .. मौन से।
    ©wind_chime

  • wind_chime 104w

    समय

    रुकी पड़ी है समय की हलचल .. किताबों से जब से मोहब्बत हुई है
    मेरा समय ठहरा पड़ा है .. जब से मोहब्बत की कहानी अधूरी हुई है

    ©wind_chime

  • wind_chime 105w

    सन्नाटा और तुम

    मैं .. सन्नाटा हूँ
    और तुम .. आवाज़ .. चीख .. शोर .. धुन ..
    ..
    तुम्हें हर सांस मुझमें खो जाना है
    मैं खुद में ही अनंत हूँ
    तुम्हें एक पल तो गुज़र जाना है
    मैं खुद ही में हर पल हूँ
    तुम्हें कभी तो ठहर ही जाना है
    मैं खुद से ही अटल हूँ
    तुम्हें एक रोज़ तो मर जाना है
    मैं खुद से ही अमर हूँ
    ..
    मैं .. सन्नाटा हूँ
    और तुम .. .. ..
    ©wind_chime

  • tumharapyar 112w

    Mohabbat mein agar sanak hoti toh har aashiqui mukammal hoti.

    ©tumharapyar

  • wind_chime 134w

    प्रेम धर्म

    मैंने हर धर्म से परे एक धर्म गढ़ा था
    नाम दिया जिसे .. प्रेम
    सदियों तक संघर्ष किया था उसने
    खुद के अस्तित्व को बनाये रखने की ख़ातिर
    ..
    इस सदी के बाशिंदों ने उसे नंगा नाच नचाया ऐसा
    ..
    हाथ खड़े कर .. रुख़्सत ले रहा है .. आज वो धर्म
    हर इंसां की तरबियत से ...
    ..
    उफ़्फ़ .. !! ये हश्र तो जाइज़ नहीं प्रेम का ..
    ..
    देखो .. कितनी हैरानी से .. तकती है आने वाली नई सदी इसे !!

    ©wind_chime

  • wind_chime 139w

    इंतज़ार

    बेशक़ .. अंतहीन ही लिखा होगा

    इंतज़ार .. ईश्वर ने

    प्रेम में

    ©wind_chime

  • wind_chime 139w

    प्रेम

    वो कश्ती बेहतरीन ओहदे पर है
    जिसका जीवन .. तुझमें .. खुद का समर्पण है
    वो जीती है तुझमें .. वो मर जाती है तुझमें
    वो सफ़र करती है .. तो केवल और केवल .. तुझमें

    किनारे पर खड़े रहकर .. मैं गवाह हूँ ..
    समन्दर से उस कश्ती के ..
    इस अमर प्रेम की

    ताज्जुब है ..
    समन्दर .. कश्ती के मरे बिना ..
    उसे अपनाता तक नहीं

    क्यूँ नहीं कर सकता समन्दर .. कश्ती से ..
    अपना प्रेम अ-मर

    ©wind_chime

  • wind_chime 141w

    चिठ्ठियाँ

    वो सारी चिठ्ठियाँ .. मैंने .. नदियों में बहाईं थी
    .. जो लिखी थी मैंने .. तुम्हारे नाम ..
    पहुँचा भी दी थी .. मेरी सारी चिठ्ठियाँ .. नदियों ने तुम तक
    कम मीठी थी .. शायद चिठ्ठियाँ मेरी ..
    कि तुम में .. घुली नहीं .. गल गई
    हार गई .. तुम्हारे खारेपन से ..
    भूल गई थी मैं .. तुम समन्दर थे ..
    एकदुम खारे ..
    और मैं .. बस नदी जितनी ..
    उतना ही प्रेम मेरा .. जो दिखता ही नहीं तुम्हें
    और तब .. हार जाता है .. प्रेम भी .. !!

    ©wind_chime

  • wind_chime 141w

    चिठ्ठियां

    भेजी थी मैंने .. हवा के परों पर रख
    रेत पर लिखी .. चिट्ठियां .. नाम तुम्हारे
    ..
    रेत को .. समन्दर से प्रेम था
    हवा को .. इसका इल्म था
    मेरा प्रेम .. उस प्रेम से .. शायद ज़रा कम था
    ..
    हवा ने मेरी चिठ्ठियां .. समन्दर में गिरा दी
    रेत और समन्दर का .. मिलन
    मेरे आंसुओं के सैलाब पर हुआ था
    ..
    सुना है
    नम रहती है .. समन्दर की ज़मीं

    ©wind_chime

  • wind_chime 150w

    चाँद

    ..
    चाँद की छाती पर .. आज
    फिर एक .. ज्वालामुखी फूटा
    राख़ हुआ .. थोड़ा सा बदन .. चाँद का
    ..
    ज्यादा कुछ नहीं .. एक तमन्ना .. और मरी होगी
    ..
    ©wind_chime

  • wind_chime 159w

    जायज़ - नाजायज़

    जिसमें सब कुछ जायज़ हो

    दरअसल

    वही सब कुछ नाजायज़ है

    ©wind_chime

  • wind_chime 159w

    तुम सी मोहब्बत

    मैंने जो मोहब्बत की .. तुमसे

    शायद .. पुरानी कोई बात लगती है

    तुम .. ठहरे नए ज़माने के

    तुम्हारी तरह की मोहब्बत ..

    तुमसे करने की खुद में मैंने आग भरी है

    अब तुम हैरान ना होना .. कि कैसे हम ख़ामोश रहे

    कि किस्से मेरी बेवफ़ाई के .. तुम्हारे लबों पर से उतरेंगे नहीं

    ©wind_chime

  • wind_chime 159w

    प्रेम

    प्रेम को परिपूर्ण करना .. एकमात्र काम था तुम्हारा

    जो .. तुमने खुद चुना था

    फिर ये इत्मिनान .. कहा खो गया तुम्हारा

    जो .. तुमने मेरी आँखों मे भरा था

    ©wind_chime

  • wind_chime 166w

    चाहता है..

    वो रक़ीब ही होगा मेरा
    जो मेरी उम्र ज़रा लम्बी चाहता है
    वो नसीब ही होगा मेरा
    जो सिर्फ़ और सिर्फ़ मुझे चाहता है
    ©wind_chime