#republicday

424 posts
  • rohitsayyed 16w

    Independence day

    जिसे जकड़ा था जालिमो ने ज़नजीरो में कभी,
    वो देश मेरा आज़ाद हुआ है बलिदान से उन वीरो के सभी,
    इसकी मिट्टी भी महकती है उन शहीदों की कहानी से,
    ये तीरंगा शान से लहराता है उन जांबाज़ों की कुर्बानी से,
    हमे गर्व है अभीमान है उन वीरो के बलिदानी पे।।।
    हमे गर्व है अभीमान है उन वीरो के बलिदानी पे।।।

    ©rohitsayyed

  • love_your__life_18 19w

    Country

    ©love_your__life_18
    Together We Can Protect Fight &
    Also We Can Support...
    Each & Every Fair decision....

    Vande Mataram

  • anuradhasharma 39w

    ये रीत रिवाज़ तुम निभा लेना,
    अभी जीने दो मुझे।

    कब्रिस्तान बन जाऊं,
    सब निभा लेना।

    इस दर्जे का निभाने,
    का क्या मतलब।

    जो जीते-जी
    कब्र बन जाए,

    मन में।

    ©anuradhasharma

  • anuradhasharma 39w

    ©anuradhasharma

  • anarchy_ 45w

    ये कौन लौग है !

    राजनीति हमारी आवाज़ को ये क्या रूप दे रही है
    फकत कांटेदार दरख़्तों को ही धूप दे रही है
    कल तक जो इरादे खौफजदा थे जहन में आने को भी
    आज उनको हौसला दे रही है और क्या खूब दे रही है।

    जो हथेलियां सूखे में भी सोना उगा रही है
    वही दो वक्त की रोटी से महरूम हो रही है
    शहर में सल्तनत होना भी कैसी कामयाबी
    अगर पीछे गांव में हमारी माँ रो रही है।

    जो दरख़्त खुश हो रहे है रंगीन शाख देखकर
    नीचे कतार से उनकी भी जड़ें कट रही है
    जो विदा किए है बेटी को अपनी जमीन बेचकर
    उन्हें भी ससुराल से उम्मीद हो रही है।

    सड़कों पर है अन्नदाता अपना सर्वस्व छोड़ कर
    ये कौन लोग है जिनके कारण पगड़ी धूल हो रही है
    क्या हिन्दुस्तान से कोई भूल हो रही है
    क्या हिन्दुस्तान से कोई भूल हो रही है।


    ©anarchy_
    भाषा (Bha.Sha.)
    26 Jan 2021

  • gadudada24 45w

    Sone ki chidiya kaha karte the jisse
    Ab toh bas sone k saudagar reh gaye
    Dil mein rakhte the jis desh ko
    Ab bas nakli jazbaat reh gaye

    Umeed hai ki suhane din wapas aayenge
    Dikhave k liye nahi dil se yeh tyohar manayenge
    Ek chotisi prayas karne ki shapath khayenge
    Ki is desh ko phirse sone ki chidiya banayenge

    ©gadudada24

  • manthanprateek 45w

    कौन हूँ मैं,
    कागज के पन्नो में लिखी न जाने कितने ऐसे बाते हैं जिसका महत्व काफी बड़ा है लेकिन फ़िर भी मैं इतना अहम क्यों हूँ.... मेरी आवश्कयता क्यों हैं, क्यों सर्विपरि हूँ मैं आखिर क्यों सब धर्म ग्रंथों से भी ऊपर मेरा दर्ज़ा हैं?
    कौन हूँ मैं?


    2 साल 11 महीने 18 दिन का परिणाम हूँ मैं,
    395 अनुच्छेद
    8 अनुसूचियां
    22 भाग में विभाजित निर्माण हूँ मैं।
    299 सदस्यो की लगन
    11 सत्र संग 165 दिनों की बहस

    अखंड भारत का कल्याण हूँ मैं
    भारतीय संविधान हूँ मैं।


    मूल प्रारूप से मैं भी बदला हूँ
    104 संशोधन मुझमे भी हुए हैं
    570 अनुच्छेद
    12 अनुसूचियां
    25 भाग में विभाजित

    समस्त भारत की एकता का प्रमाण हूँ मैं
    भारतीय संविधान हूँ मैं ।

    मूल कर्तव्यों का निर्वहन मुझमें हैं
    लोकतंत्र का गणतंत्र मुझमें हैं
    मौलिक अधिकार मुझमें है
    महान भारत का सार मुझमें है

    स्वतंत्र भारत का अभिमान हूँ मैं
    भारतीय संविधान हूँ मैं ।




    #manthanprateek
    #republicday

    Read More

    कौन हूँ मैं,
    कागज के पन्नो में लिखी न जाने कितने ऐसे बाते हैं जिसका महत्व काफी बड़ा है लेकिन फ़िर भी मैं इतना अहम क्यों हूँ.... मेरी आवश्कयता क्यों हैं, क्यों सर्विपरि हूँ मैं आखिर क्यों सब धर्म ग्रंथों से भी ऊपर मेरा दर्ज़ा हैं?
    कौन हूँ मैं?

    (Read in Caption)

    ©manthanprateek

  • bhavti 45w

    हे किसान..

    बात घर की थी,
    घर में ही रहती, तो अच्छा था।
    अनबन ये हम तुम में थी,
    हम तुम तक रहती, तो अच्छा था।

    तुम गलत नहीं जानते हैं हम,
    पर गलती तुम्हारी बस ज़रा सी है,
    मतभेद की आग में यूं ग़ैर,
    हाथ ना सेकते, तो अच्छा था।

    निर्दोष हो तुम, सदा ही थे,
    पर साथी चुनने में भूल हुई।
    समझ हितेषी भेड़ियों को,
    शह ना देते तो अच्छा था।

    कौन सही कौन गलत,
    हम क्या जानें नादान हैं,
    पर आवाज़ों के उठने में,
    लाठियां ना उठतीं, तो अच्छा था।

    तुम बड़े हो, परिवार निर्भर है तुम पर,
    कहना बस यही है कि,
    बर्तनों की आवाज़,
    मोहल्ला ना सुनता, तो अच्छा था।

    बात घर की थी,
    घर में ही रहती, तो अच्छा था..

    ©bhavti




    .

  • raman_writes 45w

    देश बन रहा है या टूट रहा है ?
    ________

    Follow for more amazing post..
    ________

    #follow #comment #share #like #tag
    ________

    Follow - @raman_writes
    Follow - @raman_writes
    Follow - @raman_writes
    Follow - @raman_writes
    Follow - @raman_writes
    ________

    Turn on the post notification
    ________

    Share and tag me
    ________

    Use - #raman_writes
    ________

    #shayar #shayari #shairi #shayri #hindi #hindinama #hindipoetry #hindiquotes #quote #quotes #poet #poetic #poets #poetry #urdu #urduposts #republicday2021 #republicday #india #country #anger #politicians #atheist

    Read More

    देश

    सिसायत दान अपनी ज़िद में है अवाम आक्रोश में ।

    इस खेल में मेरा देश बेवज़ह जल रहा है ।।


    ©raman_writes

  • payal_poems_atelier 45w

    Republic Day

    Raising voice in reverence for our motherland where
    Equality is fundamental
    Patriarchy is caged
    Upper is not allowed with class
    Bold is quite beautiful
    Love is free to fly
    Interracial is happily accepted
    Constitution is treated with responsibility
    Democracy literally exists
    Authentic is culture
    Yielding is in her nature

    ©payal_poems_atelier

  • truman 45w

    गणतंत्र है ये देश
    लोकतंत्र है ये देश
    पर देखो हमारी लाचारी
    सड़को पर जंग है जारी
    ये सपना नहीं था कभी गांधी का
    ना ही ये सपना था भगत पाजी का
    हक़ मिला हमको सड़को पर आजादी का
    पर हक़ नहीं हमे इस देश की बर्बादी का

    लालकिला सिर्फ जगह नहीं जहा तिरंगा फहराते है
    उस प्राचीर पर खड़े हो देश को याद दिलाते है।
    मिली है आजादी हमको कितनी कुर्बानियों से
    कितना झेला होगा उन्होंने अंग्रेजों की मनमानियों से
    आवाज़ बनो तुम भी उनकी कुर्बानी का
    पर हक़ नहीं हमे इसदेश की बरबादी का।

    जायज है मांग भी , आवाज़ भी उठानी चाहिए
    अपने हक़ की खातिर सरकार से बात करनी चाहिए
    हो सकता है सब कुछ मांगा नहीं मिलता
    पर मतलब ये नहीं कि सड़को पर हुड़दंग ही चाहिए।
    तरीके और बहुत है अपनी मांग मनवाने का
    पर हक़ नहीं हमे इस देश की बर्बादी का।

    किसान , मजदूर , जनता परेशान सब यहां है
    हर किसी ने इस तंत्र में बहुत कुछ सहा है।
    ये सिर्फ एक सरकार का विफलता है नहीं
    नागरिकों की भी देखो जिम्मेदारी कहां है।
    हिसाब करो बेशक सरकारों की खुदगर्जी का
    पर हक़ नहीं हमे इस देश की बर्बादी का

    भीड़ बन सड़कों पर हिंसा ये भाग नहीं हमारी संस्कृति का
    संविधान के खिलाफ कार्य करना, ये हिस्सा नहीं गणतंत्र का।
    लालकिले पर चढ़ाई करना, तिरंगे को वहा से हटाने का,
    हमला ये लोकतंत्र पर है, सवाल है तिरंगे के अपमान का।
    ले झंडा प्रचार करो अपने धर्म की आजादी का
    पर हक़ नहीं तुम्हे इस देश की बर्बादी का।

    आड़ किसानों की लेकर , जिसने ये उत्पाद किया
    देश की शान तिरंगे का यूं खुला अपमान किया
    पार हो चुकी हद उनकी , देशद्रोह का काम किया।
    गणतंत्र को उसने पूरे जग में बदनाम किया।
    ढूंढ उन्हें समझाया जाए मतलब इस नलायकी का,
    पर हक़ नहीं उन्हें इस देश की बर्बादी का
    ©truman

  • chickygupta 45w

    One conversation could fix so many things . Just by listening and being honest . But people always think you tryna argue instead of trying to communicate.
    @__midnight__diaries__

  • harsh77 45w

    Love you INDIAN Army
    I feel proud as Indian����
    #love #indian #india #happy #republicday #republic #72th #army #nation #we #stay #in #peace

    Read More

    Republic day

    Happy republic day guys
    This is for those who stays at border
    For our good sake,
    The temperature of Siachen is -30°c Normal human being can't resist the temperature of -30 and in rajasthan +40 i always wondered how they can survive in very lowest temperature a nd very highest temperature, they are incredible human being I've ever seen.
    They take bullets on their chest and sacrifice their lives for us so we can celebrate all festivals peacefully ❤️
    salute to Indian Army
    ©harsh77

  • ssaumya 45w

    Freedom is when you don't have to ask for it,
    ..By everytime reminding other's that this is my right,
    Or explaining someone why I deserve it,
    It's their like oxygen is there for everbody.
    -S.S
    ©ssaumya

  • soonam 45w

    ना जात देखा, ना पात देखा
    ना भाषा, धर्म, प्रांत देखा..
    सबको अपने गले लगा कर
    सबने हमारा हिन्दुस्तान देखा..!!

    शरण दी हमने सबको..
    भूखों को भी खाना खिलाया
    स्वयं संकट में रह कर भी
    सबको संकट से उबारा..!!

    जब देश हमारा ग़ुलाम था
    ना खान था, ना पान था..
    अंग्रेजों के अत्याचारों से
    दर्द में हमारा हिन्दुस्तान था..!!

    देशप्रेम जब चढ़ा सर पर
    सबने अपनी एकता दिखाई..
    कि.. जोश से सबने लड़ाई
    अंग्रेजों को धूल चटाकर
    स्वतंत्रता हमारे देश को दिखलाई..!!

    स्वतंत्र होकर भी ना शांत बैठा सबने
    क्योंकि..अब था समय
    देश संभालने की पारी..
    2 वर्ष 11माह 18दिन लगाकर
    आंबेडकर समिति ने बनाया संविधान, कानून हमारा
    26 जनवरी 1950 में पूर्ण रूप से पारित कर
    हमारा देश गणतंत्र कहलाया..!!
    ©soonam

    @writersnetwork @writerstolli @mirakee @mirakeeworld
    #republicday #freedom

    Read More

    गणतंत्र दिवस

    उठें सैकड़ों वीर हमारे
    आजादी का स्वप्न संवारने..
    बलिदान किया खुद को उन्होंने
    आजादी का झंडे लहराने..!!

    करें शुक्रिया उन वीर जवानों का
    जिन्होंने यह दिन बनाया..
    किया स्वतंत्रत और गणतंत्र हमारे देश को
    चारों तरफ खुशियों से आजादी का जश्न मनाया..!!
    ©soonam

  • ananyaa_superpoet 45w

    In My Country, My Father

    Where the land is enriched by soldiers' graves,
    And the great Indian ocean flutters its magnificent waves
    Where the blood of bravehearts gives pride to the sands,
    And the tri-colour is always saluted by young hands.
    In that country, my Father, may patriotism never cease
    And in that country, my Father, may prevail only peace.

    Where every single infant has an innate zeal,
    Serving his motherland, may be his only feel.
    Where every young mind is enlightened by valiant soldiers' blood
    And has such a determination, which can be washed by no flood.
    In that country, my Father, may there be happiness and health,
    And in that country, my Father, may sacrifice be the only wealth.

    Where each young mind stands undeterred in every storm,
    And be inspired enough, not to break any norm.
    Where every young child helps the poor and needy,
    Such should be the mentality: neither cruel nor greedy.
    In that country, my Father, may truth and honesty prevail,
    And in that country, my Father, may all say "Hail, martyrs, hail!"

    Where serving their motherland, be people's only goal,
    And discouraging corruption, they may purify their soul.
    Where patriotism and sacrifice lies in every fibre of our being,
    Such is my country! As the world even now, is seeing.
    In MY country, my Father, may the Tricolor be fluttered by every boy and girl
    And in MY country, my Father, may patriotism keep shining like a pearl
    Keep shining like a pearl!

    © Ananya Malhotra

  • vamikachaudhary 45w

    मोहब्बत सनम से हो या वतन से जानलेवा ही होती है।
    #republicday #lovepoetry #writersnetwork #poetryhub

    Read More

    A soldier in love

    मैंने सरहदों से इश्क़ किया तेरा आशियां कैसे बनाऊँगा,
    शपथ ली है वर्दी में कसमें वादे कैसे निभाउंगा,
    मेरी सांसों पर अब तो खुद मेरा भी हक़ नहीं,
    मेरी होली खून से होती है तेरा सिंदूर कैसे बचाउंगा।
    ©vamikachaudhary

  • aawaz_e_rooh 45w

    आज़ाद...

    पूरा देश तो कब का आज़ाद हो गया है,
    पर मेरा दिल तो अभी भी उसी का ही ग़ुलाम हे..!

    पूरे देश पर शासन चाहे किसीका भी हो,
    मुझ पर हक़ तो सिर्फ उसी का ही चलता है..!
    ©aawaz_e_rooh

  • manuhere 45w

    अनुपमा व्रत

    - मनु मिश्रा
    लिखो बांकुरों लिखो कबीरों
    भारत की अनुपम कहानी
    थिथिल धरा पर अडिग तिरंगा
    म्रत्यु पर छा जाए जवानी
    क्या परिचय उस देवलोक का
    सौरभ जिसकी माटी की मतवाली हो
    देवी गाए तो फागुन का मेला
    मुस्काए हर दिन दिवाली हो
    जिस के लोगों में बहता लहू
    चन्दन का पानी
    लिखो बांकुरों लिखो कबीरों
    ऐसे भारत की अनुपम कहानी
    नतमस्तक होता हो नभ
    जिस अम्बर की आभा में
    कौन झुका सकता वो मस्तक
    पराधीन परिभाषा में
    कश्ती है हिचकोले है
    मौसम न एक सा सानी है
    फिर भी मंजिल का जोश रगों में
    म्रत्यु पर छाती जवानी है
    सुनो बांकुरों सुनो कबीरों ऐसी
    भारत की अनुपम कहानी है

  • jazbat 45w

    गणतंत्र दिवस ‘अमर रहे’ !

    लंबे अरसे में कड़ी मेहनत से
    रात दिन एक करके बुद्धिजीवी
    और विशेषज्ञों की एक समिति ने
    ही तो ये संविधान रचा था ।
    भौगोलिक विविधता, वर्ण व्यवस्था
    धर्म प्रधानता, वैश्विक संगठनों
    सामाजिक विषमता क्या- क्या नही
    सोचा विचारा गया था ।
    फ़िर कहाँ चूक हो गयी !!
    क्यों संविधान की गरिमा धूमिल हो गयी ?
    क्यों आज सिर्फ़ झंडा फहराने, चंद पुराने
    देशप्रेम से भरे रिकार्ड बजाने, घिसे-पिटे
    जुमले दोहराने और अपने पसंदीदा
    स्वतंत्रता सेनानियों या राजनेताओं
    के नाम रटने और उन्ही के योगदान को
    अधिक गरिमामयी बताने की होड़ ही
    बस ‘गणतंत्र दिवस’ के आयोजन की
    औपचारिकता बन गयी है ?
    कब संविधान में दिए गए प्रावधानों
    की महत्ता घट गयी है ?
    क्यों अकसर ही संशोधनों की
    ज़रूरत पड़ रही है ?
    क्या नयी परिभाषाएँ और नवीन सुधार
    देश की संप्रभुता और सौहार्द
    की रक्षा कर रहे हैं ?
    क्या हम ‘लोकतांत्रिक’ देश की
    उपाधि का सही प्रदर्शन कर रहे हैं ?
    हम कोई खेती तो करते नही हैं !
    दो जून की रोटी के लिए अपनी एड़ियाँ
    घिसते हैं !
    हम वो भी नही जो बैंकों में ग़बन करते हैं !
    और ना ही बहुत बड़े ब्रांड के मालिक ही कहलाए जाते हैं ... तो ...
    चलो व्यर्थ के सवालों और मसलों
    से नज़र फेर लीं जाएँ !
    और मन में घुमड़ती शंकाओं से
    आँख मूँद ली जाएँ !
    चलो ‘गणतंत्र दिवस’ मनाएँ
    झंडा फहराएँ, गाने चलाएँ, थाली बजाएँ
    दीये जलाएँ, नौकरी ढूँढे, स्वदेशी अपनाएँ
    रोज़गार करें, देश को आगे बढ़ाएँ ।


    ©jazbat
    Ranjana B.(23/1/21)