#rashmikavya

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  • masoom_bachchi 11w



    जीत सुनिश्चित कर लूं मैं
    कर्म मेरा अर्जुन सा हो !

    मृत्यु सुनिश्चित हो फिर भी व्यूह तोड़ू
    साहस मेरा उस अभिमन्यु सा हो !!
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 11w

    छन्न - छन्न (part-3)

    3 बजने वाला था ....किसी भूत की पिक्चर में उसमें देख रखा था कि 2:00 से 3:00 के बीच भूतों की शक्ति अपार होती है ..जैसे ही घड़ी पर नज़र गई उसका डर और बढता जा रहा था..
    घड़ी की सुई धीरे-धीरे आगे बढ़ती जा रही थी और खिड़की से थोड़ी थोड़ी रोशनी आनी शुरू हो गई ..अब जाकर खुशबू की जान में जान आई ...पर फिर भी वह अभी उठने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी.

    ..4:30 बज चुके थे ...इधर मम्मी के अलार्म बजे... और फिर कुछ समय बाद वह खुशबू को जगाने उसके कमरे की तरफ बढ़ी .…जैसे ही दरवाजा खोला तो उन्होनें जो देखा , उससे वो दंग रह गई... खूसबू अपने बेड पर एक कोने में बैठी थी मानो एक छोटी सी , डरी सहमी सी बच्ची है ..…... पसीने से लथपथ चेहरे को देखकर वह दौड़ती हुई ख़ुशबू के पास जाती है ,और पूछती है ...कि क्या हुआ तू इतनी परेशान क्यों है और इतनी ठंड में तुम्हारे चेहरे पर ये पसीने कैसे?... खुशबू ने एक-एक बात बताएं और फिर मानो वह रोने ही वाली थी कि तभी......


    .... मा ने उसे अपने सीने से लगाते हुए कहा -एम सॉरी बेटा !तुम ये पायल खोल दो, मैंने कल शाम को तुम्हें ज़बरदस्ती ये पायल पहनने को कहा था... लड़कियों के पैर में पायल अच्छा लगता है पर तुम्हें पहना कर से से शायद मैंने बहुत बड़ी गलती की है....।।,लाओ इधर मैं खोलती हूं इसे अभी।
    तब जाकर ख़ुशबू को पता चलता है कि उसके ज़रा से हरकत पर वो chhnn chhnn chhnn chhnn की आवाज क्यों आने लगती थी.… उसके ज़रा सा हिलने पर पायल इसलिए बज रहा था क्योंकि यह उसी के पैरों में था....
    और फिर चेहरे पर थोड़ा सा शर्म, थोड़ा सा डर, थोड़ा सा गुस्सा लिए मुंह बिचकाते हुए उसने अपने मम्मा से कहा कि मैंने कहा था ना कि मुझे यह सब नहीं पसंद है ...आपने फिर भी मुझे पहनाया मुझे और मैं रात के 2:00 बजे से अभी तक जाग रही हूं ,ऊपर से डर से मेरी हालत पंचर हो रही थी।

    मां ने हंसते हुए उसके पैरों से पायल को निकाला और कहती हुई चली गई "ये लड़की पागल है ।"
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 11w

    छन्न - छन्न (part-2)

    रात क दो बजे थे ... खुशबू नींद में ही अपने सिरहाने अल्मारी पर रखे बॉटल की तरफ हाथ बढ़ा रही थी कि तभी उसे कोई आवाज़ सुनाई दी ..chañchnn channññ

    पहले तो समझ नहीं आया फिर जब दोबारा बॉटल की तरफ हाथ बधाई फिर से उसे अवाज़ सुनाई दी ..मानो पायल की झंकार धीरे धीरे उसके कानों में नृत्य करते हुए प्रवेश किए हो... इतना सुनने के बाद उसकी नींद खुलती है और वो सहम जाती ह . आज उसकी प्यास भी बिना पानी के ही जा चुकी थी.....घबराहट में वो कुछ बोल नहीं पा रही थी....बस अपने चारो तरफ देखे जा रही थी जब भी वो थोडी भी इधर उधर हिलती तो मानो कोई अपना नृत्य सुरु कर दे रहा था र पायल की मद्धम झंकार उसके कानों में गूंज उठती थी। .…. उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कोई उस पर निगरानी रख रहा हो... वो और सहमति गई अब वो इस हालत में भी नहीं थी कि वो मा को आवाज़ दे ...

    उसे लग रहा था सिर्फ थोड़ी बहुत इधर उधर होने से पायल बजने लगा रही है तो ...आवाज़ निकालने पर कही आज मेरी वर्षों की भूत देखने वाली इच्छा पूरी ना हो जाए..…. वक्त बीते जा रहा था और वह चुपचाप सहमी हुई वहीं पर सावधान मुद्रा में लेटे हुई थी.…..

    इधर जब भी खिड़की के पर्दे हिलडुल रहे थे तो मानो इसके सांसों की गति अचानक से तेज हो जाती थी….. पसीने से लथपथ ठीक से सांस भी लेने में उसे डर लग रहा था। ...जब भी सड़क पर कोई गाड़ी जाती-आती है या फिर किसी तरह की आवाज आती थी वह डर के मारे चुपचाप से सहम जाती थी और उसका चेहरा लाल हो जाता है....

    Continued..,,✍️✍️
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 12w

    Bachchi

    जरूरतें पूरी नहीं हुईं मेरी
    मैंने मेरे हीं ख़्वाहिशों को दफना दिया,
    हालातों से कुछ यूँ समझौता हुआ मेरा
    उम्र से पहले हीं 'बच्ची' को बड़ा बना दिया।

    खिलौने की किमत ऊँची थी
    मैंने 'चाहत कलम की है ' बता दिया,
    सपनों से कुछ यूँ इश्क़ हुआ मुझे
    मैंने किताबों से दिल लगा लिया।

    चाहत तो थी मुझे भी मासूम रहने की
    पर वक़्त ने मुझे समझदार बना दिया,
    नादानियाँ करने की वज़ह नहीं थी मेरे पास
    वक़्त ने मुझे बेवजह ही जिम्मेदार बना दिया।

    मेरे संघर्षों को देखकर अक्सर
    उसने आँखों से आँसू छलका दिया,
    'प्रेरणादायी कहानी लिखूँगी, माँ! '
    ये कहकर मैंने उसको हँसा दिया।

    जरूरतें पूरी नहीं हुईं मेरी
    मैंने मेरे हीं ख़्वाहिशों को दफना दिया,
    हालातों से कुछ यूँ समझौता हुआ मेरा
    उम्र से पहले हीं 'बच्ची' को बड़ा बना दिया।
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 12w

    Meri zannat-e-jahan

    गर तेरी मन्नत-ए-क़बूल हूँ मैं
    तो मेरी जन्नत-ए-जहां है तू,
    गर तेरी नन्ही-सी-कली हूँ मैं
    तो मेरी महकती हुई बगिया है तू,

    गर तेरी आँखों की मोती हूँ मैं
    तो मेरी आँखों की ज्योति है तू,
    गर तेरी भविष्य की सहारा हूँ मैं
    तो मेरे जीवन का उजियारा है तू,

    हाँ, तेरी हीं साया हूँ मैं
    मेरी हर मर्ज़ की दवा है तू,
    हाँ, तूने हीं मुझको तपना सिखाया
    मेरी थकान में शीतल छाया भी तू,

    तू कहती है, तुझे कुदरत से मिली उपहार हूँ मैं,
    ये सच है माँ, मुझे क़िस्मत से मिली Iसन्सार है तू!
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 12w

    Happiness

    एक पंछी खरीदा मैंने
    और फिर पिंजरे को खोल दिया
    चन्द रुपयो के बदले
    मैने ढेर सारी खुशीयों को तोल लिया
    ©masoom_bachchi

  • masoom_bachchi 18w

    ....
    ©masoom_bachchi