#rachanaprati95

8 posts
  • goldenwrites_jakir 15w

    #rachanaprati95 #rachanaprati96 @alkatripathi79 @anandbarun @loveneetm @jigna_a @anusugandh
    आप सभी का तहदिल से शुक्रिया पाठशाला को सफल बनाने के लिए
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    #rachanaprati96

    आप सभी का #rachanaprati पाठशाला में स्वागत है
    आप सभी की रचना जानदार थी आप सभी विजय हैं
    इसे आगे बढ़ाते हुए #अलका दी को संचालन की जिम्मेदारी देकर आग्रह करता हूँ इसे आगे बढ़ाएँ
    ©goldenwrites_jakir

  • jigna_a 15w

    क्यों निर्भर रहते
    दूसरों की स्वीकृति पे,
    क्यों आशंकित होते,
    स्वयं की आकृति पे,
    निरंतर आहत करते
    सतत घातक बनते,
    स्वयं के स्मित के,
    महंगाई के संसार में,
    सबसे ज़्यादा शुल्क हो गया,
    स्वयं से प्रेम का,
    अपनी तरंगें बदलो,
    संसार स्वयं बदलेगा,
    खुद से प्रेम करो तुम,
    जग सारा बरसेगा।
    ©jigna_a

  • anandbarun 15w

    महँगाई

    महँगाई एक सापेक्षिक मानक है
    इसके प्रति कुढ़न मात्र भ्रामक है
    धन हो तो वैभव फीकी साधन है
    वर्ना सूखी रोटी भी एक दावत है
    ©anandbarun

  • alkatripathi79 15w

    #rachanaprati95 @goldenwrites_jakir


    क्या करें कोई.....जब से बढ़ी महंगाई है
    सौ पचास तो छोड़ो
    दो हज़ार ने भी दौर लगाई है
    पता नहीं ग़रीबो का कौन मसीहा होगा
    बेघर को अब रोटी होगी कि कपड़ा होगा

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    महंगाई

    भूखा है खेत में जेब में ना है धेला
    महंगाई के बाजार में अमीरों का है मेला
    ...............................
    कीमत बढ़ती अनाजो की
    ग़रीब फिर भी किसान है
    इनके सिर पर हीं नाचते
    नेता जी बनते महान है

    सड़कों पे निकले रैली
    बंगलों के सुःख चैन में
    नेता जी खड़े हाथ जोड़े
    किसानों के रोते नैन में

    हर दिन करते आस ये
    आस ये पड़ती भारी
    महंगाई के बाजार में
    बिलखते है नर नारी
    ©alkatripathi79

  • anusugandh 15w

    #rachanaprati95
    @goldenwrites_jakir

    महंगाई इश्क की एक हास्य व्यंग....

    इस जमाने को न जाने क्या हो गया है
    इसको भी महंगाई का रोग लग गया है
    एक मुस्कुराहट ही बहुत थी प्यार जताने को
    अब मुस्कुराहटें वस्तुओं की मोहताज हो गई है
    एक फूल से भी कभी रिश्ते बनते थे
    अब बिना मोबाइल बात बनती नहीं है
    पेड़ पौधे पार्क कभी मन लुभाते थे
    अब बड़े बड़े मॉल में दिल लगाने लगे हैं
    ना रही पहले जैसी दोस्ती ना पहला सा प्यार
    अब मोबाइल में रिश्ते कैद होने लगे हैं
    आज महंगी हो गई दोस्ती महंगा हो गया प्यार
    सारे रिश्ते ताक पर रख दिए, बन गया व्यापार

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    महंगाई इश्क की

    बड़ी महंगी अब दोस्ती और मोहब्बत हुई
    देखो ज़माने में यह कैसी तब्दीली हुई
    ©anusugandh

  • loveneetm 15w

    मंहगाई

    हे!दुर्गे माँ कैसे बोलो,
    निर्धन दीप जलाएगा,
    कैसे इस लाचारी में माँ,
    तुमको भोग लगाएगा।

    काम अधिक वेतन थोड़ा,
    महँगाई सागर भांति है,
    आवश्यकतानुसार नही,
    यह दंश हृदय तड़पाती है।

    भूख से तड़पे जगवाले,
    ऐसे क्या मंदिर जाएगा,
    हे!जगजननी कैसे बोलो,
    मंगल गीत सुनाएगा।

    फिर भी हम माँ बच्चे तेरे,
    तेरी शरण लगाएंगे,
    तेरी राह छोड़ भवानी,
    बोल कहाँ हम जाएंगे।

    मंहगाई महिषासुर का माँ,
    दमन करों चतुराई से,
    बच्चे तेरे आनन्दित हो,
    मंगल गीत सुनाएंगे।
    @लवनीत

  • goldenwrites_jakir 15w

    #rachanaprati94 #rachanaprati95 @loveneetm G @anandbarun G @vipin_bahar G @anusugandh G @jigna_a G ��������������

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    मेंहगाई ✍️

    #rachanaprati पाठशाला में आप सब का स्वागत है
    #लवनीतम भाई का तहदिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ
    जिन्होंने मुझे संचालन की जिम्मेदारी दी.....
    आज का बिषय = "मेंहगाई " है
    आज के दौर में आम इंसान के पास काम नही
    और मेंहगाई उसकी परेशानी का सबसे बड़ा दुख है
    आज हम सब इस पर होनी कलम से समझ के सामने एक आईना रखे
    ©goldenwrites_jakir

  • loveneetm 15w

    सभी महानुभावों को मेरा नमन जिन्होने इस श्रृंखला को आगे बढ़ाने हेतु अपनी उत्कृष्ट रचनाए प्रस्तुत की। सबकी रचनाएँ अद्भुत थी।सभी मेरे लिए विजेता है। पर इस श्रृंखला को आगे बढ़ाने हेतु मै @goldenwrites_jakir जी का चयन करता हूँ और सफल संचालन हेतु हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
    #rachanaprati95
    #rachanaprati94

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    #rachanaprati95