#rachanaprati94

13 posts
  • goldenwrites_jakir 8w

    #rachanaprati94 #rachanaprati95 @loveneetm G @anandbarun G @vipin_bahar G @anusugandh G @jigna_a G ��������������

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    मेंहगाई ✍️

    #rachanaprati पाठशाला में आप सब का स्वागत है
    #लवनीतम भाई का तहदिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ
    जिन्होंने मुझे संचालन की जिम्मेदारी दी.....
    आज का बिषय = "मेंहगाई " है
    आज के दौर में आम इंसान के पास काम नही
    और मेंहगाई उसकी परेशानी का सबसे बड़ा दुख है
    आज हम सब इस पर होनी कलम से समझ के सामने एक आईना रखे
    ©goldenwrites_jakir

  • loveneetm 8w

    सभी महानुभावों को मेरा नमन जिन्होने इस श्रृंखला को आगे बढ़ाने हेतु अपनी उत्कृष्ट रचनाए प्रस्तुत की। सबकी रचनाएँ अद्भुत थी।सभी मेरे लिए विजेता है। पर इस श्रृंखला को आगे बढ़ाने हेतु मै @goldenwrites_jakir जी का चयन करता हूँ और सफल संचालन हेतु हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
    #rachanaprati95
    #rachanaprati94

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    #rachanaprati95

  • anusugandh 8w

    #rachanaprati94
    @loveneetm

    नारी को दुर्गा
    असल में मानोगे
    नारी को भी
    तभी जानोगे
    ������

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    कटु सत्य

    सब बोलें दुर्गा मां हो
    समझता कौन है
    दिल सब दुखाते
    मनाता कौन है
    काम भी सारे
    करती क्या हो
    सहती सबकी
    समझती कब हो
    घर की मालकिन
    नाम की हो
    बस करो कहना दुर्गा
    इज्जत करता कौन है
    समाज में दफ्तर में
    काम का लोहा मानता कौन है
    गाड़ी चलाती हो
    अरे मार देगी महिला है
    कुछ भी करती काम
    अव्वल समझता कौन है
    पूजते कन्या को उन्हीं दिनों
    और दिन मानता कौन है
    समाज में करते व्यभिचार
    दुर्गा मां को तब जानता कौन है
    ©anusugandh

  • psprem 8w

    नारी दुर्गा

    नारी तो बस नारी हैं। दिखने में बेचारी है।
    नारी स्वयं में एक है।लेकिन रूप अनेक हैं।
    यह दुर्गा है,यह सरस्वती है ,बड़ी प्यारी है।
    जन्मदात्री ,पालनकर्ता, बच्चों की लाचारी है।
    दुर्गा रूप धर रक्षा करती,लक्ष्मी बन करती
    पालन।
    सरस्वती बन शिक्षा देती,करती सबका मन पावन।
    सहचरी बन साथ निभाती,पुरुष को अर्पण कर तन मन।
    बन कर साथ सदा ही रहती,उसका ही जीवन
    दर्पण।
    सुंदर सूरत ,मोहिनी मूरत,और मासूम सी रहती है।
    अपना दुःख खुद सह लेगी, नहीं किसी से कहती है।
    भूख गरीबी,लाचारी में, भी साथ कभी ना छोड़ेगी।
    अपने पति से मिलाके कंधा,साथ उसी के दौड़ेगी।
    अपनी संतान के आगे, बन जाती कमजोर है।
    और जरूरत पड़ने पर,बन जाती बड़ी कठोर है।
    ये जिसको चाहने लगती है,खुद को अर्पण कर देगी।
    यदि अपनी जिद पर अड़ जाए तो तर्पण कर देगी।
    इसीलिए तो नारी दुर्गा शक्ति कहलाती है।
    ममता की मूरत बनकर,सबका दुख हर लेती है।
    ©psprem

  • piu_writes 8w

    शक्ति

    नारी ही दुर्गा है और नारी ही तो काली है नारी ही कड़वी है और नारी मिस्री की डाली है नारी शक्ति का स्रोत और नारी ही कोमल कली है नारी ही संघर्ष का नाम नारी ही नाजो पली है
    नारी के रूप कई और हर रूप में ढली है नारी ही शक्ति रूपा है वही सृजन की देवी है नारी के हैं कोटि रूप नौ देवी रूपेण भली है
    ©piu_writes

  • goldenwrites_jakir 8w

    #jp #jakir #rachanaprati94 @loveneetm G @anandbarun @alkatripathi79 @anusugandh @jigna_a

    गुस्ताखी माफ़ ����������

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    नारी शक्ति ✍️

    ज़िन्दगी की कल्पना बिन नारी अधूरी है
    फलक हो या हो जमीं हर जगह नारी है
    देख जिसे मिलता हौसला वो जगजन्नी
    माँ दुर्गा हर इक नारी की कहानी है ,,,

    सूरज उगने से पहले उठ जाती अम्मा
    भूलकर वो अपनी ख़ुशी दर्द को छुपाती अम्मा
    कैसे लिखूं मैं उसकी कहानी उसकी मेहनत
    वो परिपूर्ण हर इक स्तर पर ऐसी हमारी अम्मा

    त्याग की परिभाषा जिससे - जिसने सहे हर दुख गम
    देकर अग्नि परीक्षा करती खुद को साबित ऐसी सीता मैया
    हर इक रूप में जिसकी तस्वीर वो नारी का स्वरुप
    बनकर बेटी बनकर बहन बनकर पत्नी हर इक रिश्तो में
    जान अपनी लगा देती करो उनका सम्मान
    नारी शक्ति की इज्जत पे जो लगाता इल्जाम
    रख कर ख़ुदको इंसान नारी को पीछे छोड़ जाता इंसान

    बंद तालों में क़ैद जिसकी कहानी
    जो छूना चाहे आसमाँ ऐसी है नारी की उड़ान
    देखा जिसने ख़्वाब उड़ने के उसने छुआ चाँद
    ऐसी है उसकी हिम्मत शक्ति जिसने पहचानी अपनी उड़ान

    ना बाँध सको उसकी हिम्मत तो ना तोड़ो उसका विश्वास
    वो खुदमे ही जिन्दा दुर्गा है उसकी इज्जत से ना करो खिलवाड़
    नारी शक्ति है तो हम है - इस बात का रखो ख़्याल ....
    ©goldenwrites_jakir

  • jigna_a 8w

    नारी ही दुर्गा

    सुबह सवेरे
    मुर्गे की बांग संग उठती,
    दिखने के दो हाथ
    मगर अनदिखे और छः हाथों का काम,
    एकसाथ करती,
    कपड़ें, बर्तन साफ़ करती,
    सबका टिफ़िन बनाती,
    साथ साथ धूप, अगरबत्ती संग,
    भगवान जी को भी समझा देती,
    अपनी दुर्गा कोई अष्टभुजा से कम कोई?!

    साईकिल पे ऐसे सवार,
    जैसे नवदुर्गा शेर पे निकल पड़ी,
    सर पे बोझा ढ़ोती सारा दिन,
    तेज़ धूप में पूरा दिन रहकर खड़ी,
    घर वापिस आ पूरे घर का ब्यौरा लेती,
    सब्ज़ी अगर महंगी हो तो,
    प्याज़, नमक को पिज़्ज़ा, बर्गर घोषित कर देती।

    रात में तेल का दीपक जलाती,
    कई कहानियाँ सुना सुना,
    अपने घर को थपकियाँ दे कर,
    मीठी नीँद में सुलाती,
    बिन बाप के जिन बच्चों को,
    पेट काटकर जो माँ पालती,
    हर रूप से वो नारी,
    नवदुर्गा कहलाती।
    ©jigna_a

  • anandbarun 8w

    नारी ही दुर्गा

    नारी धरा को धारण करती रही है
    सृष्टि की वो 'कारण-कर्म-कृति' है
    यह अतिशयोक्ति कथमपि नहीं है
    अपितु जैविकीय तथ्यों पे खड़ी है

    शास्त्रों ने उन्हें आद्याशक्ति कही है
    नियति से जन्म का आधार बनी है
    त्रुटिपूर्ण शुक्राणु अनगिनत रची है
    पर अंडज की स्थिरता ध्रुव धूरी है

    स्त्री साक्षात अन्नपूर्णा कहलाती है
    धैर्य की असह ऋतु सह के तपी है
    विकट परिस्थियों में स्थिर रहती है
    परिपक्वता त्वरित धारण करती है

    दुर्गा रूप नारी की शाश्वत शक्ति है
    प्रतिरोधक क्षमता उनकी महती है
    विषमता को बेहतर सह सकती है
    जीवन कायम रखने की पुञ्जी है

    जैविक श्रेष्ठता उनकी जगजानी है
    भावनात्मक प्रज्ञा की वह थाती है
    विज्ञानियों ने इसे तथ्यों पे मानी है
    मातृसत्तात्मक समाज ही भावी है

    वीर्य पे स्थितिप्रज्ञता की जयति है
    महिषासुरमर्दिनि कथा ये कहती है
    माता दुर्गे करती सिंह की सवारी है
    मनुष्य पूजता है पर मानता नहीं है
    ©anandbarun

  • alkatripathi79 8w

    #rachanaprati94
    @loveneetm

    मुझे वो दिन काफ़ी अच्छे से याद है.. हम चारो भाई बहन को एक साथ वायरल बुखार हुआ था... एक दिन तो पापा हमारी देखभाल किए मम्मी रसोई संभाली मगर दूसरे हीं दिन पापा को भी तेज़ बुखार हो गया... घर मानो अस्पताल बन गया था ... माँ अकेली सब संभाले हुए जैसे दस हाथ निकल आए हो कभी किसी को गर्म पानी देती कभी खाना देती कभी पट्टी देती कभी किसी का सर और पैर दबाती... जब हम सो जाते तो बाजार जाती फल,सब्जी, दवा, सब ले कर आती....
    जब भी वो दिन याद आता है सोंच में पड़ जाती हूँ माँ कर कैसे ली सब कुछ? जब की घर में आज जैसी सुविधा भी नहीं थी.....
    इतनी सेवा और इतना देखभाल की हम चारो भाई बहन 5 दिन में स्कूल जाने लायक हो गए थे

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    नारी तो शक्ति है

    लेकिन उसी दिन मम्मी को बुखार हो गया देखते ऐसा लगा मानो कोई पहाड़ टूट पड़ा हो माँ को हम सबसे ज्यादा चिंता इस बात की थी की ”अभी सब बुखार से उठे है और मुझे बुखार हो गया अब मैं इनकी देखभाल ठीक से नहीं की तो सबको कमजोरी हो जाएगी "
    दीदी जबकि बड़ी थी लेकिन माँ उनको कहती तुम अभी रसोई में मत जाओ कमजोरी होगी... और आज भी यकीं नहीं होता सबके मना करने के बाद भी खाना माँ हीं बनाती थी... लेकिन कैसे?
    वो दिन याद आते हीं एक सहज सा मन में जवाब आता है नारी तो शक्ति का रूप होती है वो अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकती है।
    और यही कारण है की आज जब मेरे बच्चे बीमार पड़ते है तो मुझे शक्ति मिलती है, कुछ भी कर जाने की बिना थके बिना सोए।
    ©alkatripathi79

  • loveneetm 8w

    नारी ही दुर्गा

    यह अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं,
    कि हर नारी ही दुर्गा है,
    यह सत्य अटल अविनाशी है,
    कि हर नारी ही दुर्गा है।

    कलयुग की दुर्गा एक नही,
    हर दिन दानव का वध करे,
    लड़ती है नित रणभूमि मे,
    बिन मुख से कोई शब्द कहे।

    यह दुर्गा शक्तिशाली है,
    मेहनत से भरती थाली है,
    जीवन भर सहती कष्ट सदा,
    यह संकट हरणे वाली है।

    यहाँ क्रोध प्रेम का संगम है,
    अब भी नारी मन संयम है,
    गुणशील गुणी गुणवान प्रबल,
    वो राह दिखाने वाली है।

    यह कहना की यह अबला है,
    नारी पुरूषो पर भारी है।
    यह अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं,
    कि हर नारी ही दुर्गा है।
    @लवनीत मिश्र।

  • loveneetm 8w

    @jigna_a जी का हृदय से आभारी हूँ की मुझें इस श्रृंखला को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी। आप सब गुणीजनों की रचनाओं का इंतज़ार रहेगा । #rachanaprati94

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    विषय

    नारी ही दुर्गा।

  • jigna_a 8w

    #rachanaprati93
    #rachanaprati94

    @loveneetm भाई जी अगली कड़ी की ज़िम्मेदारी मैं आपको सौंपती हूँ।

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    शब्द सीढ़ी के अंतर्गत उत्साह से भाग लेने हेतु सबका हृदयपूर्वक धन्यवाद सबकी रचनाएँ उत्कृष्ट थी। विपीन जी की ग़ज़ल बहुत करीब थी तो अनु दी, आनंद जी, ममता, राखी, ज़ाकिर भाई, आर्या जी, वैश्नवी, सौरभ भाई सबकी रचनाएँ अत्युत्तम थी।

    मगर लगभग हर विधा में माहिर कलम के धनी, हर रस में लिखने वाले लवनीत भाई को मैं विजेता घोषित करती हूँ। @loveneetm

    मैं एक निवेदन अवश्य करूँगी, मात्राएँ, व्याकरण लेखन की आवश्यकता है। भाव बहुत अच्छे होते हुए भी मैं कुछ कृतियों को नहीं छाँट पाई। सीखे, सीखे और सीखे।
    ©jigna_a

  • mamtapoet 22w

    नारी सम्मान

    रामायण भी देखी और गीता सार भी पढ़ा
    भले और बुरे का नतीजा हर एक को पता।

    क्या मैंने और किस के साथ गलत किया
    उस युग में अंतरात्मा ने ये सब बता दिया।

    फ़िर भी अग्नि परीक्षा दी सीता ने
    दांव पे लगाया द्रोपदी को युधिष्ठिर ने।

    विध्वंस की फुलवारी कब किस औरत ने चुनी
    रावण और धर्मयुद्ध की वजह क्यों पतिवृता ही बनी।

    अहं पुरुष का सदैव ही भारी रहा
    हर फैसला उसका दो मुँह आरी रहा।

    क्यों धरती में समाने से नहीं रोका सीता को
    क्यों बलिदान करना पड़ा पुत्रो का द्रोपदी को।

    देवी होकर भी पत्नी रूप में न सुख सेज पे सोई
    कोई भी ना पुत्रो के संग सुख के आँसू रोई।

    जब धर्म युग में भी न मिला नारी को
    उसके हिस्से का सम्मान,
    क्यों उपेक्षित रही सदा, क्या था कुसूर
    मिल घोर अपमान।


    अब कलयुग का तो मैं क्या ही करू बखान
    सबकुछ मैं भी जानू तू भी जाने।

    पढ़े लिखे बहुत है बालक
    पर संस्कारो काथोड़ा कम है ज्ञान,
    एकल परिवार के साथ साथ
    सोच में भी सिमट गयी पहचान।

    जितना उपर उड़ी बन पंछी नारी
    कीमत भी चुकानी पड़ी है भारी।

    नारी जुड़े अपराध में क्यों दिनों दिन
    हो रही बढ़ोतरी,
    पाप न धुल रहे, फ़िर लोग क्यो
    नहा रहे, कभी गंगा कभी यमुनोत्री।

    दूसरों से न अगर बदलने की उम्मीद करे,
    नारी सम्मान की पहले खुद ही मिसाल पेश करे
    बचपन में ही बराबरी का पाठ पढ़ाया जाए,
    एक ही गलती पर लड़का लड़की समान दंड ही पाए।

    नींव यदि उन्नत संस्कारो की डाली जाए
    तो बोलो भला अपमान कौन नारी किसी नर से पाए।।
    ©mamtapoet