#rachanaprati92

23 posts
  • mamtapoet 7w

    #rachanaprati92
    #rachanaprati93

    @anandbarun sir, @anusugandh didi

    रंग विषय पर आप सभी लेखको की रचनाएँ अत्यंत खूबसूरत और भिन्न भिन्न रंगो से भरी है, जिसमें प्रेम रंग, भक्ति रंग, और नदी, मृत्यु शैय्या पर मांग में सजा लाल रंग, मन हर्ष से भर गया, आप सभी की रचनाएँ पढ़कर।

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    @anandbarun sir की जिंदगी के विभिन्न रंगो को दर्शाती तीन भिन्न भिन्न रचनाएँ, @anusugandh didiकी हास्य, श्रृंगार वीरता और नवरस के रंग से सजी रचना, @greenpeace767 द्वारा प्रियतम के आने से सजे रंग का वर्णन करती हुई रचना, @goldenwrites_jakir ji और @dubeyjii_14 की मोहबत के रंग से सरोबार रचना, @loveneetam ji और@diamond49 जी की कृष्ण भक्ति के सुंदर रंग से सजी रचना ने मन मोह लिया। @gauravs ji ,और@aryaaverma12 की बेरंग जज्बात और मन चाहा रंग न मिलने की टीस, @shayarana_girl ने सपनों की सतरंगी दुनिया पर अपनी कविता में प्रकाश डाला, @piuwrites didi की सपनों एवं कलम की रंगीन दुनिया के रंगो को सजाया। @psprem ji द्वारा प्रेम के रंग को सर्वोपरि बताना, @amateur_skm और@jigna_a दीदी की गजल ने हृदय छू लिया@alkatripathi79 द्वारा मृत्यु शैय्या पर और नदी, पुष्प तितली के द्वारा वर्णित अद्भुत रचनाओ ने भी दिल छू लिया।
    सभी रचनाएँ मेरी नजरों में सर्व श्रेष्ठ है, फिर भी किसी एक को चुनना है सो, मैं उन्हें हार्दिक बधाई देना चाहूँगी जो अभी इस रचनाप्रति में नये सम्मिलित हुए हैं।
    आज के विजेता है @jigna_a didiजी वो इस श्रृंखला को आगे बढ़ाये, मुझसे कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करे।

  • greenpeace767 7w

    Rang

    तू मेरी जिंदगी में आए तो ,
    -- ऐसा महसूस हुआ ,
    जैसे सूरज का पहली किरण ,
    -- मेरे चेहरे को पहली बार सो गई ।
    और जिंदगी पल भर में ,
    सदाबहार का रंग मैं बदल गई ।

    तू जिंदगी में आए तो ,
    -- ऐसा महसूस हुआ ,
    जय से आज की शाम का महफिल का ,
    -- रंगत दुगनी हो गई ।

    तेरी आने की खुशी में ,
    मेरी चेहरा गुलाल हो गई ।
    ऐसा महसूस हुआ की ,
    -- जैसे मेरी खून में ,
    आप समा गए ।

    तुम जो आए दिल में तो ,
    मेरे प्यार का रंग ,
    -- इंद्रधनुष में बदल गई ।
    मेरी जिंदगी की रात और दिन मैं ,
    -- प्यार की रंगोली बिखरने लगी ।

    तेरे आने की खुशी में ,
    मेरी अंधेरी जिंदगी मैं ,
    हजारों दीप जल गई ।
    और आंखों में नूर नजर आ गई ।


    ©greenpeace767

  • diamond49 7w

    इंद्र धनुष में रंग है सात
    सात सुर संगीत में
    कितने सजॆ हैं रंग
    हे कृष्ण तेरी प्रीत में

    अनंत रास करे गोपियाँ
    तेरी बांसुरी के धुन पर
    अनंत रंग मोर पंख के
    सजे तेरॆ मुकुट पर


    लाल रंग में सजी गोपिका
    केसर तिलक लगाये शीश पर
    पीत वस्त्र में चमक रहे कृष्ण
    हरॆ भरे पेड़ पौधे तट पर
    हल्का नीला रंग शाम का
    नीली आभा में यमुना
    बैंगनी फूल खिले उपवन में

    दुनिया सजे अपने रंग में
    हम हुए कृष्ण प्रेम में
    सतरंग


    ©diamond49
    #krishn
    #love
    #rachanaprati92
    @mamtapoet

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    "सतरंग"

    ©diamond49

  • loveneetm 7w

    रंग

    मोहे रंग चढ़ा है गिरधर का,
    नटवर नागर प्रभु हरिहर का,
    उनके रंगो से हृदय रंगा,
    मोहे भाव प्रिय है श्रीधर का।

    वो हृदय गगन के इंद्रधनुष ,
    वो अवतारी प्रभु महापुरुष,
    हर रंग प्रिय साजे तन पर,
    श्रृंगार करे जग होकर खुश।

    वो राधा के सतरंगी मन,
    वो ही धरती पर वृंदावन,
    वो है तो राधा जीवित है,
    वो भक्ति बुद्धि के शक्ति पुंज।

    हर दिन जीवन होली भांति,
    है कृष्ण गगन रवि भांति,
    जिनसे प्रकाशित मन आँगन,
    वो कृष्ण राधिका है जीवन ।

    ऐसा है रूप जग श्री वर का,
    मेरे कृष्ण चंद्र मुरलीधर का,
    उनके रंगो से हृदय रंगा,
    मोहे भाव प्रिय है श्रीधर का।
    @लवनीत

  • anandbarun 7w

    @mamtapoet #rachanaprati92
    समस्त ग़ज़ल प्रेमियों से ख़ास गुज़ारिश है की इस विधा में अनपढ़ की त्रुटियों को नज़रंदाज़ कर खामियों की वृहत व्याख्या करें और इस नाचीज़ को अवगत करा कर अनुगृहित करें��
    मतला, मिसरा, काफ़िया, शेर, बहर की अत्यल्प ज्ञान है पाई, अब मात्राओं की है अबूझ समझ की है बारी; यकीन जरा कीजिए, हतोत्साहित नहीं होऊँगा कभी��

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    ज़िंदगी के रंग

    उमंग जीवन में हर रोज नया लाती है ज़िंदगी
    रंग जितने भी हों सिमट पाए तो नूरानी है ज़िंदगी

    घन घोर घटाओं के घिर आने की घड़ी यों ही
    कट जाए मुश्किलों की ये रातें तो हँसी है ज़िंदगी

    जब हो सभी सही तो सब ख़ुशगवार है लगती
    पर लगा कर जान की बाज़ी जो खिली है ज़िंदगी

    करें अपनों की परवाह तो यह बात है अच्छी
    अदा दुश्मनों के मद भी दुआ तो राज़ी है ज़िंदगी

    बनते - बनते हर काम कभी यों ही बिगड़ जाती
    लगन सच्ची तो बरबस ही खुल जाती है ज़िंदगी
    ©anandbarun

  • alkatripathi79 7w

    इस जीवन में
    इस धरती से
    कोई रंग ना दे सके तुम
    जब रहूंगी मैं मृत्यु शैया पर
    तुम आना
    उस आकाश गंगा के पीछे से
    तारों की चमक ले कर
    मेरी मांग सजा देना

    और लाना
    उस इंद्रधनुष से चुरा कर
    उसके सात रंग
    मेरे वस्त्र बना देना

    सूरज की लालिमा से
    एक चुंदरी ला कर
    मुझे ओढ़ा देना
    सिर से ले कर पाँव तक
    ढँक देना मेरे चेहरे को
    की तुम्हारे सिवा
    कोई देख ना सके

    फिर मैं चलूँगी
    संग तुम्हारे
    चाँदनी रात में
    किए सारे वादे पुरे करने
    ©alkatripathi79

  • amateur_skm 7w

    @mamtapoet #rachanaprati92

    अगर प्रेम कोई नदी होती
    हमारी चिट्ठियां ही नाव होती है
    हम उसी पर सवार
    डूबते,तैरते,जीते और मरते
    लेकिन नदी के पार कभी नहीं जाते

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    रंग और तुम


    तुम हो तो
    ये सारे रंग है
    तुम जीवन के सुन्दर पुष्प
    और मैं तुम्हारी तितली

    तुम जब तक साथ होती हो
    अंदर की स्त्री खूब बातें बनाती है
    तुम्हारे जाने के बाद
    तुम्हारे लिए बुनती है कविताओं की साड़ी

    ये पीड़ा है या हर्ष है?
    जब भी तुम्हें सोच कर कविता लिखा
    लगता है जैसे कोई विधवा
    अपनी मांग में सिंदूर सजा रही हो

    मैं तुम्हारे ध्यान में ही हूं
    शमशान घाट पर तुम्हें मिलूंगा
    तुम चुपके से पास आना
    औघड़ बन कर
    अपने भस्म से रंग देना प्रेम के रंग में

    अगर विदाई हो अंतिम सत्य
    बन जाना विष का प्याला
    अगर मैं बन सकूं मीरा तो
    होंठों से छू,कर देना मुझे नीला

    अंततः!
    हम मिलेंगे देह के भौतिक बंधन के पार
    मुझे पुकारने की जगह छू लेना
    कर देना प्रेम का रंग और गाढ़ा

    /सौरभ

  • gauravs 7w

    मद्धम सा मुस्कुरा कर जब पलकों को झुकाते थे
    मुश्किल ज़िंदगी को कितनी आसां कर जाते थे
    मिल जाते जब भी राहों में थोड़ा सा ठहर कर
    मेरे बे-रंग जज्बातों में वो अपने रंग भर जाते थे

    ©gauravs

  • anusugandh 7w

    #rachanaprati92
    @mamtapoet

    प्यार के रंगों से जब सजती जिंदगी
    बन जाती है श्रृंगार रस
    प्यार ही प्यार नजर आता अंखियों में
    भर जाता प्रेम रस
    खुशी के रंग अपनी ही छटा बिखेरते
    ऐसा लगता हास्य रस में सारे रस बसते
    जब सुनते कहानी वीरों की
    अलग रंग हैं बिखरते
    सारी धरती करती जयकार वीरों का
    जब वीर विजय पाते
    रंगों में बस्ती करुणा जब
    देखते असहाय गरीब को
    कितना अद्भुत नजारा
    प्रकृति दिखाती
    तरह-तरह के रंग
    फिजाओं में है भरती
    इन रंगों को लगता ग्रहण
    प्रकृति भयानक जब रूप धरती
    रौद्र रूप होता जब
    मानव प्रकृति की अवहेलना करते
    सारे रंग बदल जाते विविध रंग में
    जब देखते विनाश लीला
    क्यों मानव छोड़ प्रकृति को
    पहुंच गया मधुशाला
    सारे रंग इकट्ठे तब है होते
    मां का वात्सल्य जब है मिलता
    भक्ति रस में रंग जाते प्राणी
    जब प्रभु का संग है मिलता
    यह पृथ्वी इन्हीं रंगों से सराबोर रहे
    फले फूले प्राणी खुशियों से लबरेज रहे

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    रंग लो जीवन को सब रंगों में
    ना जाने कब यह रंग छिन जाए
    जी लो जी भर कर खुशी से
    नहीं पता कब यह तन जल जाए

    प्यार के रंग नवरस के संग
    ©anusugandh

  • shayarana_girl 7w

    दुनिया भरी है रंगो से फिर भी बेरंग ही दिखती है,,
    जैसी है वो अंदर,, वैसी थोड़ा कम ही दिखती है।।

    खैर,,बहुत प्यारे प्यारे रंग है हमारी दुनिया में,,
    चलो सबका एक एक कर हिसाब देती हूं,,
    सतरंगी दुनिया के किस्सो पर,,
    मैं जरा फ़्लैश लाइट ऑन कर देती हूं।।

    दुनिया में विस्तृत है अनेकों रंग,,
    थोड़े भरे हुए है भ्रष्टाचार से,,
    तो थोड़े खिल रहे घूस केसेज के संग।।

    कहीं दिख रही पैसों की
    चमक अमीरों के चेहरों पर,,
    तो कहीं गरीब पड रहे हल्के,,
    करते करते दो रोटियों के लिए जंग।।

    विधवा तड़प रही सफेद वस्त्रों
    को संवारते संवारते,,
    तो वहीं सुहागन की अर्थी उठ रही,,
    ढक कर लाल वस्त्रों से उसका अंग।।

    खुद फेंक कर एसिड लड़की
    के चेहरे पर,
    कर रहे उनके चरित्र पर व्यंग,,
    जबकि काला तो हो चुका है,,
    उनके जीवन का रंग।।

    और बताइए ...कहां मिलेंगे एक साथ इतने रंग।

    और भी रंग है दुनिया में,,जिन्हें दिखाना इतना आसान नहीं,,
    नफरत मिल रहे राहों में,,और मोहब्बत का नामो निशान नहीं।।

    #rachanaprati92 @mamtapoet

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    (दुनिया में रंग...)
    अनुशीर्षक पढ़ें।

    ©shayarana_girl

  • aryaaverma12 7w

    रंग

    ऐसा नहीं था कि, रंगों की कमी रही ,
    पर जिसे हमने चाहा वो रंग मिला नहीं,,,,,
    आसमां में भी रंग बहुत थे,पर जिस रंग में
    हमने घुलना चाहा, वो रंग दिखा नहीं,,

    ©aryaaverma12

  • psprem 7w

    रंग

    ये दुनियां है रंग बिरंगी,इसके रंग हजार।
    इस दुनियां के रंगों का ,पाया नहीं किसी को पार।
    हर इंसान का अलग रंग है,अलग ढंग है।
    कोई सादे रंग में है और किसी के बहुरंग हैं
    जैसे पानी का अपना कोई रंग नहीं होता है।
    जिसमें मिलादो तो वैसा ही हो जाता है।
    ऐसे ही इंसान पर जैसा रंग चढ़ जाता है।
    वो इन्सान भी वैसा ही रंगीन हो जाता है।
    प्यार का रंग चढ़ गया तो प्रेमी बन जाता है।
    किसी धर्म का रंग चढ़ गया तो धार्मिक।
    शालीनता का रंग चढ़ गया तो मार्मिक।
    यदि दया का रंग चढ़ जाए तो दयालु। य यदिचढ़जाए रंग कृपा का तो कृपालु।
    सच का रंग चढ़ जाए तो सच्चा इंसान।
    और बेईमानी के रंग में रंग कर बेईमान।
    इसी तरह से जैसा चाहो वैसा रंग अपनालो।
    जैसे रंग में जीना चाहो वैसे रंग में जी लो।
    हरा गुलाबी लाल बैंगनी या हो नीला पीला।
    जैसे भाव तुम्हारे होंगे वैसी होगी लीला।
    "प्रेम"के रंग से बढ़कर कोई रंग ना दूजा।
    प्रेम शांति प्रेम है जन्नत और प्रेम है पूजा।

    प्रेम से ही संसार में मिल सकता भगवान।
    जो सब जीवों से प्रेम करे वो सच्चा इंसान।
    ©psprem

  • mamtapoet 7w

    रंग

    *सब रंगो के पंछी ,
    उड़ान भरे तेरे भीतर,
    तनिक भी तू बैचैन हुआ,
    हो गए सब रंग तितर बितर ।

    * पहला रंग बड़ा पवित्र था,
    जो चढ़ा था माँ के प्रेम का,
    धीरे धीरे इतना रंग चढ़ा दुनियादारी का,
    पुतला बनके रह गया है अब तू
    मिले जुले सब रंगों की हिस्सेदारी का।
    ©mamtapoet

  • piu_writes 7w

    रंग

    रंग फ़िज़ाओं में छाया कुछ ऐसे उसने रंगीन आँखों से देखा मुझे ऐसे मेरे बेरंग से जीवन में रंगीनी ऐसी छायी रोम रोम रंगा मेरा हिय मे प्रेम किरन छायी ले हिलोर मन रंग उठा ऐसे जैसे रुत मस्तानी हो आयी रंगीन मेरी सपनो की दुनियां हुई ऐसी मैं फ़िर उभर ना पायी
    ©piu_writes

  • anandbarun 7w

    रंगरेज

    तुम्हारा ख्याल आते ही
    खिल जाती हैं बाछें
    जग जाता है एक समंदर
    और उफनने लगती हैं लहरें
    हवाऐं तुम्हारा एहसास भरती हैं
    मैं लगता हूँ अटखेलियाँ करने
    पंछियों की तरह आसमां में
    अबोध सा उन्मुक्त विचरते
    पता नही कब ऐसे में
    समय रुक जाता है ठिठके
    खुशबुओं की मलयानिल बहके
    जज्बातों की महफिल में थिरकते
    मगन मैं नाचता तेरी धुन पे
    खिल जाते हो आसमां में मेरे
    बन कल्पनाओं के मूर्त्त साये
    समा लेती हो नक्षत्रों को इतने
    भूल जाता हूँ मैं अस्तित्व अपने
    हो जाता हूँ मैं लीन तुम में
    और चले जाने के बाद भी
    नहीं जाते हो तुम यकीं से
    सोया भी रहता हूँ अगर मैं
    जगे रहते हो तुम मेरे लबों पे
    सितारों की स्मिति से झलकते
    रंगों का इक गुबार उठता है
    और भींगो जाता मन को अंतर से
    ©anandbarun

  • jigna_a 7w

    @mamtapoet #rachanaprati92

    प्रस्तुत ग़ज़ल पूरी तरह बहर में लिखीं गई है। इस ग़ज़ल में मोहब्बत के रंग, इँसान और फिज़ा पे कैसे छा जाते हैं यह बताया है। यह मुसलसल ग़ज़ल है, जिसमें एक ही भाव पर पूरी ग़ज़ल होती है अन्यथा ग़ज़ल के हर शेर में अलग भाव होते हैं।

    ये मुलाकात इक बहाना है, इस गाने की तरन्नुम पे गुनगुनाइए। #nayab_naushad

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    रंग

    2122 1212 22/112

    रंग बिखरे जहाँ खिला मौसम,
    याद तेरी लिए मिला मौसम।

    छा रहा है खुमार रंगीनी,
    दूरियों में गज़ब खला मौसम।

    ड़ाल पे सूखते दिखा ऐसा,
    शाख पे ही बड़ा जला मौसम।

    दिल हमारा तुम्हें पुकारे हैं,
    रंग बिरहा लिए ढला मौसम।

    फैल कर रंग वो सताता है,
    बेरुखी से सदा डरा मौसम।

    लाल लाली सजी सनम ऐसी,
    छू लिया तो लगा भला मौसम।

    यूँ नहीं फूल सी खिली "जिगना",
    साथ उसका लिए चला मौसम।
    ©jigna_a

  • goldenwrites_jakir 7w

    रंग मोहब्बत के

    रंग मोहब्बत के शब्दो पिरो गए

    ज़िन्दगी के खूबसूरत रंग दिल से होकर शब्दो में घुल गए
    बनकर कागज़ पर तस्वीर मोहब्बत कलम की परछाई बन गए
    तुम लौट आते हो फिर ज़िन्दगी में -
    ज़ब एहसास की धड़कन दिल में धड़कती है
    तुमसे ही ज़िन्दगी खूबसूरत वो ज़ज़्बात मुस्कान बनकर इक कहानी हमारे कलम से कागज़ पर सिमट जाती है ,,,,
    इत्तेफ़ाक़ से ही सही बिगति पलकों को बेजान इक अवाज़ बनकर किसी दिल में उतर जाती है
    महसूस कोई करता कोई अनदेखा वो ज़ज़्बातों की कहानी कलम से कागज़ पर मेहफ़ूज़ हो जाती
    हर इक दर्द की दवा मरहम सी लगती - ज़ब छूता इक दर्द दूसरे दर्द से सबकी कहानी फिर अपनी सी लगती
    ज़िन्दगी के रंगों में रंग हजार मुस्कान सुकून से परे हम इंसान
    ना जाने क्यों ख़ुदको ही खुद से अजनबी रख कर बेरंग हो चले
    .......!¡!
    ©goldenwrites_jakir

  • anandbarun 7w

    सजना बिन तेरे संग, सोहे ना कोई रंग

    प्यासी पनघट, खो'यी डगर, संज्ञा छ्ल

    ©anandbarun

  • piu_writes 7w

    या देवी

    कलम में मेरी रंग भरो माँ रचाऊ ऐसे रचना साकार हर रचना में प्रेम भरा हो सब रंग हों एकाकार
    ©piu_writes

  • jigna_a 7w

    चाहत देखी, देखा लगाव,
    पर जबसे मन लागा तुझ संग,
    हर मोह से हुआ कुभाव,
    तू मेरा हो या ना भी हो,
    हृदय पे मेरे तेरा घाव,
    अब कोई मोहे भाए ना,
    मैं मीरा तू मेरा मोहना।

    #rachanaprati92 @mamtapoet ye kl rat likhi thi, tumhare prompt dene se pehle, yun hi ❤️

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    बेरंग हुई जबसे,
    तोहरी प्रीत में साँवरे,
    कोई और रंग चढ़े ना,
    भटकत नैना बावरे।
    ©jigna_a