#rachanaprati87

15 posts
  • hum_raaz 9w

    इत्तेफाक

    कभी सोचा ना था
    इक रोज तुझसे बात होगी
    बात इतनी बन जाएगी कि
    दिल्लगी होगी तुझसे

    ये महज इत्तेफाक था हमारा मिलना
    जो हमें बंधन में बांध गया
    फिर भी थे हम उन्मुक्त गगन में
    बनकर पंछी हिलोरे खा रहे थे
    मोहब्बत के सपनों की दुनिया में
    हम बंधे हुए थे
    प्यार की एक महीन डोर से
    स्वच्छंद विचरण करने को आतुर

    अब इत्तेफाक नहीं, सब सहज हो गया
    हम उतर चुके थे जहन में
    दो जिस्म एक जान बनकर
    तेरा ही ख्याल रहता था
    सुबह-ओ-शाम तु ही थी
    अंधेरी रात में ज्योति बन
    उजाला फैला दिया जिंदगी में
    रिश्ता बन गया सहज
    सरस हो गई बात हमारी

    लेकिन तेरा मुझसे बिछड़ना
    नितांत अकेलापन बना आवरण
    चारों तरफ छाई मायूसी
    मेरा तुझे अपनी में बाहों में रोकना
    इत्तेफाक नहीं लगा मुझे
    तेरा मुझे अपनी बातों से छलनी करना
    इत्तेफाक लगा तुझे☹️
    ©hum_raaz

  • tejasmita_tjjt 9w

    इत्तेफाक

    महज कोई इत्तेफाक नहीं है वो साहब
    जो जन्म लेते ही मां के दर्द ने
    बच्चे को भी रुला दिया

  • abr_e_shayari 9w

    अपेक्षा थी की और सुंदर लिखूं पर ना जाने क्यूं बस यही लिख पाई��
    अपना बहुमूल्य सुझाव देना ना भूलियेगा ��
    #rachanaprati87
    @anusugandh

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    इत्तेफ़ाक(dhai din ki dulhan)

    ढाई दिन के लिए ही , पर दुल्हन तो बनूं तेरी,
    गर' इत्फाकन हो ये तो इत्तेफाक ही सही!

    तेरे बालिन पे बैठूं, तेरा चेहरा निहारूं,
    तू तग़ाफ़ुल रहे तो तग़ाफ़ुल ही सही!

    तेरे नाम से जुड़े मेरा नाम एक दफा ही,
    तू नाराज़ रहे , तो नाराज़ ही सही!

    मेहंदी मोल लानी पड़े तो भी ग़म नहीं मुझको,
    तेरा नाम लिखा जाए तो मोल भी सही!

    ढाई दिन के लिए ही , पर दुल्हन बनूं तेरी,
    गर इत्फाकन हो ये तो इत्तेफाक ही सही !
    ©शायरा

  • amateur_skm 9w

    इत्तेफ़ाक


    इत्तेफ़ाक से तुम मिली होती
    जब हम छोटे बच्चे होते
    हम साथ साथ स्कूल जाते
    तुम चलते चलते थक जाती
    अपनी तोतली जुबान से कहती
    "सौलभ पिलीज!मेला बैग लेके घर तक चलो"

    इत्तेफ़ाक से तुम मेरे घर के पास ही रहती
    हम हर शाम को घर के सामने खेलते
    कभी आईस पाईस कभी लूडो कभी चेस
    इत्तेफ़ाक से मैं हर बार जीत जाता
    तुम गुस्से से अपनी तोतली जुबान से कहती
    "सौलभ! तुम बड़े निकम्मे हो"

    इत्तेफ़ाक से हम दोनों साथ साथ मेला देखने जाते
    दोनों हाथ पकड़ कर जाते
    मेरी जेब में बीस रुपए का नोट होता
    मैं तुम्हारे दुपट्टे की मैचिंग की चूड़ी खरीद लेता
    तुम उसे देख कर खिलखिला कर हंस देती

    इत्तेफ़ाक से हमारे कमरे की खिड़की आमने सामने होती
    किसी रात जब मुझे नींद ना आए
    इत्तेफ़ाक से तुम्हें भी नींद ना आए
    हम दोनों एक दूसरे को खिड़की से ही निहार लेते

    इत्तेफ़ाक से हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते
    मैं पढ़ने में ठीक ठाक लेकिन तुम तेज तर्रार होती
    मेरी हर बेवकूफी भरे सवाल के जवाब
    तुम प्यार से देती

    इत्तेफ़ाक से हम दोनों की शादी हो जाती
    कुछ सालों बाद हमारी बेटी होती
    बिल्कुल तुम्हारी तरह कत्थई आंखों वाली
    हां!हम दोनों में झगड़ा भी होता
    इत्तेफ़ाक से हम दोनों एक दूसरे को मना लेते

    इत्तेफ़ाक से याद आया की
    ईश्वर एक कुशल व्यापारी है
    जितना देगा उससे ज्यादा सूद समेत वापस ले लेगा
    इसलिए इत्तेफ़ाक से भी हम कभी न मिलें

    /सौरभ
    इत्तेफ़ाक से लिख लेते हैं

  • goldenwrites_jakir 9w

    इत्तेफाक ✍️

    क्या खूब इत्तेफ़ाक़ ज़िन्दगी में है आया
    जिसके लिए रहता था ये मन उदास
    वो लम्हा ज़िन्दगी में है आया ,,,
    ख़ून के रिश्तो में नही थी जो कहानी
    अजनबी एहसास की जुबां पर भाई का नाम आया
    इत्तेफ़ाक देखिए कोरे जीवन में mirakee परिवार आया
    सोचा नही था कभी ज़िन्दगी में वो मक़ाम आया
    हर इक दिल में मेरे लिए दुआ - मेरे लिए प्यार आया
    भुल गया उस दर्द को - ज़ब आप सब का साथ आया
    इत्तेफ़ाक ही सही - ज़िन्दगी में किसी बहाने आप सबका प्यार आया
    ©goldenwrites_jakir

  • happy81 9w

    इत्तेफाक ही सही हे मेरे गिरधर..
    तुम साथ हो मेरे विश्वास जरा भर दो..
    झोली फैलाये खड़ी हूँ दर पर..
    आस.. आशा.. मुझ गरीब को वर दो..
    चाहिए न्याय बस यहीं गुहार बांधती हूँ..
    मैं तुझको ही स्वामी सब कुछ मानती हूँ..
    दीपक जला कर मन में भाव का..
    अंधकार सारा क्षण में खत्म कर दो..
    इत्तेफाक ही सही मेरे गिरधर..
    तुम साथ हो मेरे विश्वास जरा भर दो..
    कब तक म्यान में पड़ी रहे शक्ति मेरी..
    संघर्षों की लड़ी को वार वार कर दो..
    मैं दासी ना सुख दुःख मांगू..
    इतना देदो जिसमे माँ को खुशियों से भर दूँ..
    अँधियारी सब गलिया जग की..
    मिलता नहीं है साथ यहां..
    तुमसे लिपटा मन जोगन का..
    और इसका कौन है यहां..
    मेरी प्रीत के खातिर..
    वफ़ा का आगाज़ कर दो..
    इत्तेफाक ही सही.. मेरे गिरधर.
    तुम साथ हो मेरे विश्वास जरा भर दो..
    चरनन रज की व्याकुल मैं हरि..
    तेरे पग को चूमती..
    भजन करूं बस राधे राधे..
    कृष्ण की धुन में झूमती..
    काँटे दो या देदो विपदा
    भूलूँ ना तुमको कभी मोहन
    इस दुखिया को याददाश्त भली देदो..
    इत्तेफाक ही सही.. मेरे गिरधर..
    तुम साथ हो मेरे विश्वास जरा भर दो.. !!

    ©happy81

  • psprem 10w

    #rachanaprati87
    @anusugandh.

    ये सारी जिंदगी ही इत्तफाक है।
    यहां कोई दूर है तो कोई पास है।
    जो होना है वो होता है।
    ना होना तो ना होता है।
    किसी का मिलन किसी का विछोह।
    यहां पर हर काम इत्तफाकन ही
    होता है।

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    इत्तफाक

    वो इक इत्तफाक था ,जब तुम मिले थे।
    नज़र जो मिली तो, चेहरे भी खिले थे।
    सफ़र का हमारे कुछ ,पता ना चला था।
    हंसते हुए साथ मिलकर दोनों चले थे।
    कसमें भी खाई थी जिन्दगी के सफर की,
    उम्मीदों के अपने दिल में दीपक जले थे।
    अब क्या हुआ जो हमसे दूर हो गए हो।
    हमसे मिलने को भी मजबूर हो गए हो।
    क्या ये भी इत्तफाक है जो समझा ना हमने।
    हमे देके धोखा तुम, जी हुजूर हो गए हो।
    ©psprem

  • alkatripathi79 10w

    इत्तेफ़ाक (संयोग)

    कर्ण के लिए एक संयोग था
    इन्द्र का उसका कवच कुंडल लेना
    परन्तु ये इन्द्र की योजना थी...

    अभिमन्यु के लिए संयोग था
    चक्रव्यूह का भागी बनना
    परन्तु ये कौरावो की योजना थी...

    सीता का हरण होना
    सीता के लिए एक संयोग था
    परन्तु ये रावण की योजना थी...

    संयोग........
    सुःख दे या दुःख
    इसके पीछे योजना अवश्य होती है
    भले ही योजना स्वयं ईश्वर प्रद्दत हो

    ©alkatripathi79

  • shruti_25904 10w

    #rachanaprati87 @anusugandh

    The view of coincidence is such that
    Without doing something, everything happens by default
    In a try to simplify, it all gets more complex
    To shake this silhouette-like hope, a dry coincidence is enough for it.

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    इत्तेफाक की दृष्टि कुछ ऐसी है मानो
    कुछ किए बिना ही सब हो जाता है
    सुलझाने की कोशिश में सब उलझ सा जाता है
    इस परछाई सी उम्मीद को डगमगाने के लिए इक रूखी इत्तेफाक काफी होती है।
    ©shruti_25904

  • goldenwrites_jakir 10w

    Collab ✍️

    @prem79
    इत्तेफ़ाक़ था तुम्हारा मिलना , प्यार होना
    क्या बिछड़ना भी इत्तेफ़ाक़ था ..

    मोहब्बत - इश्क़ नही क्या ये तुम्हारे लिए बस इक खेल था
    मैने तुम्हारी वफ़ा की इबादत की " तुम्हे खुदा समझना मेरी भुल थी क्या
    इत्तेफ़ाक़ दिल की लकीरों से तक़दीर की लकीरों में आना
    ये आरजू की दुआएं तुमने की थी क्या ?

  • prem79 10w

    इत्तेफाक था तुम्हारा मिलना, प्यार होना
    क्या बिछड़ना भी इत्तेफाक था।

    ©प्रेम

  • beleza_ 10w

    ख़ूबसूरत लफ़्ज़ नही, बयां करने वाला दिल था
    इत्तेफ़ाक से पढ़ने वाला भी दिलदार मिल गया
    ©beleza_

  • loveneetm 10w

    इत्तेफाक

    इत्तेफाक नही था,
    तेरा मेरी जिंदगी मे आना,
    तूने इस तुच्छ को भी,
    अपनी रहमत से है खास बनाया।

    जिसे पूछता ना था जमाना भगवन,
    उस अनजान को भी तूने
    हाथो से है सजाया,
    अपने पास है बुलाया।

    तेरा बुलावा आया मुझे,
    बहुत देर से गिरधर,
    पर जब आया बुलावा मुझे,
    तो जी भर कर है तूने,
    मुझे सीने से है लगाया।

    लोग पूछते है की,तुझे देखा भी है मैने,
    मै कहता हूँ जी रहा हूँ,
    वही काफी नही लोगो,
    मुझे तो मेरे गिरधर ने है,
    आम से यहाँ है खास बनाया।
    @लवनीत

  • piu_writes 10w

    इत्तेफाक

    इत्तेफाक है जिंदगी कल भी इत्तेफाक थी आज इत्तेफाक है , मौत के साये में जीती फिर भी ये गुलजार है , जीने का बस सबब रखो ग़म भी सारे पी जाओ ,इत्तेफाक हैं खुशी और ग़म जी भर के जी जाओ, रिश्ते नाते दोस्ती यारी सब इत्तेफाक हैं यहाँ याद रखो, यहाँ इत्तेफाक ही आए हो और इत्तेफाक ही जाना हो, इत्तेफाक ही यहाँ सब कुछ होता है कोई कभी हंसता ,और कभी कोई रोता है इत्तेफाक हर बात यहाँ , इत्तेफाक है शब्द लिख रहे हम आप हैं इत्तेफाक अब
    ©piu_writes

  • anusugandh 10w

    #rachanaprati87
    बहुत-बहुत धन्यवाद@bad_writer,rachanaprati86 का सफल संचालन हेतु हार्दिक शुभकामनाएं��
    इस श्रृंखला को आगे बढ़ाने हेतु मेरा चयन करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद����

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    #rachanaprati87
    विषय-इत्तेफाक
    समय सीमा- कल 29 September रात 9 बजे तक

    इत्तेफाक जिंदगी के कुछ यूं हुए
    ना हम तुम्हारे हुए ना तुम हमारे हुए
    जिंदगी भर यूं ही सोचते रहे
    जब आपके हम ना हुए तो किसके हुए

    सभी कलमकारों से उम्मीद करती हूँ कि आप एक से एक रचना लिखेंगे और इस में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे
    ©anusugandh