#rachanaprati85

15 posts
  • alkatripathi79 10w

    #rachanaprati85 —86

    माँ दुर्गा के लिए कुछ भी लिखा जाए तो वो सुन्दर ही होगा... सभी कि रचना काफ़ी अच्छी थी.. लवनीत जी,,हैप्पी जी,, और नितिन ( bad_writer ) ने तो काफ़ी ही अच्छा लिखा है...
    मैं rachanaprati86 कि बागडोर @bad_writer को सौपती हूँ... बधाई हो @bad_writer
    ©alkatripathi79

  • loveneetm 10w

    दुर्गा पूजा

    काठ माटी से बना के विग्रह,
    भक्त करें श्रृंगार,
    जैसी जिसकी भावना,
    वैसा रूप व्यवहार।

    भक्तो की नव टोलिया,
    भ्रमण करें दिन रात,
    उत्सव पूजन देखने,
    निकले सबके साथ।

    व्रत पूजन संस्कार नियम,
    विधिवत पूजन ढंग,
    वस्त्र आभूषण से सजे,
    माँ का पुलकित अंग।

    पुष्प माल नैवेद्य धूप,
    अर्पित कर शुभ गान
    कन्या पूजन कर सभी,
    माँगे शुभ वरदान।

    नाच गान मृंदग पर,
    झूमे जग संसार,
    भक्तो के मन आस्था,
    और माँ के मन में प्यार।
    @लवनीत

  • bad_writer 10w

    #rachanaprati85 @alkatripathi79

    नवरात्रि पर्व की नवमी तिथि का भी अत्यंत महत्व है। इसी तिथि को त्रेतायुग में भगवान श्री रामचंद्र जी का जन्म हुआ था। नवरात्रि पर्व के पवित्र नौ दिन सभी के मन में आस्था, भक्ति, प्रेम, विश्वास, धैर्य व प्रसन्नता को उजागर करते हैं। इस वर्ष नवरात्रि का यह पर्व समस्त सृष्टि को पावन, स्वच्छ, शीतल तथा सरस भावों और अनुभूतियों से सराबोर कर दे। इसी कामना के साथ प्रस्तुत है यह कविता

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    नवरूपों की सौगात

    सिंह पर सवार होकर, रंगों की फुहार लेकर।
    आई माँ दुर्गा नवरूपों की सौगात लेकर।।

    भक्ति की भावना भरके, आस्था सहज सजग करके।
    पावन संदेश लेकर, नवरात्रि की बहार लेकर।।
    सोलह श्रंगार लेकर, खुशियां जीवन में भरके।
    आई माँ दुर्गा नवरूपों की सौगात लेकर।।

    सुख का वरदान देकर, विश्वास अपार देकर।
    स्वादिष्ट प्रसाद बनकर, जीवन में मिठास भरकर।।
    अमृत कलश लेकर, दीप चमत्कृत लेकर।
    आई माँ दुर्गा नवरूपों की सौगात लेकर।।

    भक्तों को आशीष देकर, चहुँ दिश प्रेम भरकर।
    कामनायें पूर्ण करके, समस्त सिद्धियों को लेकर।।
    मन में विश्वास बनकर, हर कदम पर ढाल बनकर।
    आई माँ दुर्गा नवरूपों की सौगात लेकर।।

    दुष्टों का संहार करके, शांति का प्रसार करके। 
    कष्टों में धैर्य देकर, संयम अथाह देकर।।
    सागर सम जीवन में प्रेरणा की पतवार देकर।
    आई माँ दुर्गा नवरूपों की सौगात लेकर।।
    ©bad_writer

  • alkatripathi79 10w

    #rachanaprati85

    माता के नौ रूप स्वरुप नौ कन्या पूजन����

    मिथ्या और तथ्य......

    नवरात्रि के अष्टमी एवं नवमी को कन्या पूजन या कंचक पूजन किया जाता है ऐसा माना जाता है की नौ कन्या पूजन नौ देवी स्वरुप है.. और इनकी पूजा साक्षात् देवी पूजन के समान है... छोटी बालिकाओं का निर्माण स्वयं देवी ने ही किया था इसलिए इन देवी स्वरूपा बालिकाओं के पूजन से देवी प्रश्न्न होती है.....
    कन्या पूजन दो से नौ वर्ष की बालिकाओं की कि जाती है......

    मिथ्या.....
    दो से नौ वर्ष कि बालिकाएं शुद्ध होती है क्यूंकि इन्हे माहवारी नहीं होती.....
    हमसब शायद यही जानते है.... अधिकांश यही मानते भी है.. परन्तु सत्य यह नहीं है.... दुर्गा माँ स्वयं नारी है और उन्होंने भी सारी अवस्थाएं देखीं है...

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    तथ्य...

    देवी भगवती शक्ति का स्वरुप हैं। छोटी बच्चियों को कंचको में इसलिए बिठाते हैं क्योंकि छोटी लडकियां मासूम होती हैं। वे मनुष्य के रूप में देवी के शुद्ध रूप का प्रतीक हैं। धर्म के रूप में देखें तो एक कुंवारी छोटी लड़की शुद्ध बुनियादी रचनात्मक शक्ति का प्रतीक है। मूर्ति की पूजा से पहले इसकी प्राण प्रतिष्ठा करके देवी की शक्ति का आह्वान किया जाता है। छोटी बच्चियों का निर्माण भी देवी ने किया है। छोटी लड़कियों में स्त्री ऊर्जा चरम होती है। इसके अलावा उनमें अहंकार नहीं होता और लालच नहीं होती हैं।इसलिए छोटी बच्चीयों को बिठाया जाता है

    ऐसी मान्यता है कि 2 साल की कन्या के पूजन से दुख और दरिद्रता दूर होती है, 3 साल की कन्या के पूजन से संपूर्ण परिवार का कल्याण होता है, 4 साल की कन्या के पूजन से सुख-समृद्धि मिलती है, 5 साल की कन्या के पूजन से व्यक्ति रोग मुक्त होता है, 6 साल की कन्या के पूजन से ज्ञान, बुद्धि और यश की प्राप्ति होती है, 7 साल की कन्या के पूजन से सुख और ऐश्वर्य मिलता है, 8 साल की कन्या के पूजन से यश, विजय और लोकप्रियता प्राप्त होती है और 9 साल की कन्या के पूजन से समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं और शत्रुओं का नाश होता है।इसलिए कन्या पूजन होता है।
    माता रानी सबकी मुरादें पूरी करें
    जय माता दी

    ©alkatripathi79

  • anusugandh 10w

    माँ

    नौ रूप दुर्गा मां के करती सबका उद्धार
    हर्ती दुखड़े प्राणियों के देती खुशियां अपार
    ना कोई खाली हाथ जाता मां के द्वार से
    झोलियां भर भर लाता होता सब का कल्याण
    नौ रूप सभी देवियों के एक ही मां में समाए
    नाम अलग है पर सब भक्तों का बेड़ा पार लगाए
    जय माता दी
    ©anusugandh

  • bad_writer 10w

    शक्ति

    शक्ति के उपासक हैं ये लोग
    यहाँ स्कंदमाता की पूजा होती है
    गणेश कार्तिक को भोग लगता है
    और अशोक सुंदरी फुट फुट रोती है
    चंदन नही, रक्त भरे हाथों से
    देवी का शृंगार करते हैं
    गर्भ की कन्याओं का
    जो वंश के नाम संहार करते हैं
    अचरज होता है क्यूँ शक्ति के नाम पर
    नौ दिनो का उपवास होता है
    कहाँ मिलेंगी कंजके लोगों को
    जहाँ गर्भ उनका अंतिम निवास होता है
    कभी मन्त्र से, कभी जाप से
    नर तुमको छल रहा है
    मत आओ इस धरती पर देवी
    यहाँ तो चिरस्थाई भद्रकाल चल रहा है
    ©bad_writer

  • loveneetm 10w

    माँ दुर्गा

    कनक सिंहासन बैठी दुर्गा,
    चरण विराजे व्याघ्र,
    त्रिनेत्रो से देखे देवी,
    करूणा भक्ति अनुराग।

    ब्रह्माणी लक्ष्मी संग आए,
    संग आए कार्तिक नाथ,
    प्रथम पूज्य गणपति गणेशा,
    सदा रहें संग साथ।

    शरद ऋतु माँ धरती आए,
    सुन भक्तो की बात,
    दे आशिष,हरे संकट सारे,
    शीश रखे निज हाथ।

    भक्त बिछाए नयन राह पर,
    कब आए वह रात,
    जिसकी सुबह लाए संग में,
    माँ दुर्गा का साथ।
    @लवनीत

  • happy81 10w

    माँ ओ माँ..
    क्या है.. ?
    फिर आयी तू..
    जा खेल पढ़. क्या दिनभर सवाल जवाब पूछा करती है..
    अरे बता ना माँ तुझसे ना पूछूं तो किससे पूछूं..
    अच्छा पूछ.. माँ नवरात्री क्या है.. अरे देवी माँ का नौ रूप है.. नवरात्री नौ रातें जग कर लोग माँ की पूजा आराधना जागरण सब करते है.. माँ ये देवी माँ कौन है.. लोग कन्या भोज क्यों करते है.. अरे बिटिया कन्या ही देवी का रूप होती है.. मानते है छोटी छोटी कन्याओं को देवी मान कर उनको भोज करवाते है पूजा करते है.. क्युकी माँ निश्छल है ममता का रूप है.. माँ स्त्री स्वरुप है..
    माँ.. फिर क्यों बस 9 दिन.. सारे दिन क्यों नहीं..
    क्यों लोग बात बात पर गाली देते है माँ की बहन की..
    क्यों माँ..
    बिटिया यहीं तो दुर्भाग्य है अपना.. माँ को याद करने के लिए नवरात्री मनानी पड़ती है.. वरना इन नौ दिन के अतिरिक्त बलात्कार..,, छेड़छाड़,, हिंसा.. से ही लोग स्त्री पूजा करते है.. बिटिया..
    माँ.. पर माँ के नौ रूप प्रतीक है शक्ति के साहस के.. जब जब कोई भी अत्याचारी स्त्री की शक्ति को ललकारेगा..
    बच नहीं पायेगा.. जरुरत पड़ने पर ममता स्वरुप माँ काली बन कर संहार भी करना जानती है.. !!..

    ©happy81

  • happy81 10w

    मैं इतनी ज्ञानी नहीं फिर भी व्यकुलता ने मुझे मजबूर किया की नवरात्री पर कुछ विशेष पढ़े.. पढ़ने के बाद मुझे बहुत कुछ पता लगा सब कुछ तो यहां आ नहीं सकता तो थोड़ा ही कट पेस्ट करके लिखा है..

    #rachanaprati85

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    5-नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। इस देवी की चार भुजाएँ हैं। यह दायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कन्द को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बायीं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है।
    6-माँ दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। उस दिन साधक का मन 'आज्ञा' चक्र में स्थित होता
    इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं।
    7-माँ दुर्गाजी की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं। दुर्गापूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन 'सहस्रार' चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्माण्ड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है
    8-माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है। नाम से प्रकट है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है!
    पति रूप में शिव को प्राप्त करने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी।
    9-माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं।नवरात्र के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है।मान्यता है कि इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। हिमाचल के नन्दापर्वत पर इनका प्रसिद्ध तीर्थ है।
    यह देवी सर्व सिद्धियाँ प्रदान करने वाली देवी हैं। अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व आठ सिद्धियाँ होती हैं।©happy81

  • happy81 10w

    माँ दुर्गा ने इन नौ दिनों के दौरान दानव महिषासुर के साथ लड़ाई के बाद उसका वध किया था। इस त्योहार पर लोग उपवास रखते है और नौ देवियों की पूजा करते है, जबकि दसवें दिन विसर्जन किया जाता है। इसको विजय दशमी या दशहरा के रूप में मनाया जाता है।

    #rachanaprati85

    @alkatripathi79

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    नवरात्री आने को है.. और शुभ आगमन के उपलक्ष्य में मैं चाहती हूँ की नवरात्री के महत्व और कथा को हम सब जाने जिससे दो चीज होंगीं एक तो हमारे सामान्य ज्ञान में बढ़ोतरी और दूजी नवरात्री की पूजा को और रस और विधि विधान से पूरा कर सकते है..

    आइए नौ रूपों को विस्तृत समझे..

    दुर्गाजी पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा।नवरात्र पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। इस देवी ने दाएँ हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और बाएँ हाथ में कमल सुशोभित है। यही सती के नाम से भी जानी जाती हैं।

    2- नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली।

    भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया।

    3-चंद्रघंटा माँ -सिंह पर सवार इस देवी की मुद्रा युद्ध के लिए उद्धत रहने की है। इसके घण्टे सी भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस काँपते रहते हैं। नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा का महत्व है

    4-नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्माण्डा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मन्द, हल्की हँसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्माण्डा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अन्धकार ही अन्धकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है।

    आगे का पार्ट 2 में..
    ©happy81

  • loveneetm 10w

    नव दुर्गा

    नव दुर्गा नव रूप देवी का
    नव भावों का सार,
    जो जन समझे बात यह,
    उसका सुखमय संसार।

    प्रथम भाव माँ शैलपुत्री का,
    जो मन दे संतोष,
    और जिसके मन संतोष बसा,
    उसके मिट जाए रोष।

    द्वितीय भाव माँ ब्रह्मचारिणी,
    जो दे बुद्धि ज्ञान,
    सहज रूप से सिखलाए माँ,
    तनिक ना कर अभिमान।

    तृतीय भाव है माँ चंद्रघंटे,
    जो मन अभिमान मिटाए,
    मन असमंजस दूर कर,
    सरल सहज बनाए।

    चतुर्थ भाव कुष्मांडा माता,
    हृदय विकार मिटाए,
    काम लोभ का नाश कर,
    सुख समृद्ध बनाए।

    पंचम भाव है मात स्कन्दा,
    जो ममता बरसाए,
    जीवन की हर आस भवानी,
    सुने सहज बनाए।

    षष्ठम भाव है माँ कात्यायनी,
    जो ऐश्वर्य दिलाए,
    तन व्याधि रोग दोष सब,
    बाधा मुक्त कराए।

    सप्तम भाव माँ कालरात्रि,
    सब संकट हर जाए,
    बुरी नजर ईर्ष्या की ज्वाला,
    पल मे शांत कराए।

    अष्टम भाव है माँ महागौरी,
    जो सब कष्ट मिटाए,
    जो पूजे इस रूप को,
    वो सब शक्ति पाए।

    नवम भाव माँ सिद्धिदात्री,
    सब भावो का सार,
    समानता संतुलन हृदय हो,
    तो मन बढ़ता प्यार।

    दुर्गा उत्सव सुख उदघोष,
    जो जग पाठ पढ़ाए,
    नारी के यह नवम भाव ही,
    दुर्गा उन्हे बनाए।
    @लवनीत

  • goldenwrites_jakir 10w

    #jp #zakir #rachanaprati85 @alkatripathi79 दी "
    गलति के लिए माफ़ करना -

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    #rachanaprati85

    भक्ति के सागर में - सबसे ऊपर इक नाम " माँ तेरा नाम
    ममता की तू मूरत - पापियों का तू काल ऐसी है तू माँ
    लक्ष्मी जिसकी पहचान वो बिद्या सरस्वती है तू माँ
    गंगा की जल धारा में तेरा ही गुणगान ऐसी है तू माँ
    कलम भी मोहताज शब्दो की वो किताब ज्ञान की है तू माँ
    ©goldenwrites_jakir

  • shruti_25904 10w

    #rachanaprati85 @alkatripathi79

    आ रही है वो सिंहवाहिनी, आप सब की रक्षा को
    अब इस कोरोना को, अपनी त्रिशूल की नोंक पर दबोचने वो
    कभी बालिका तो कभी चंडी रूप में आप सबकी मन पढ़ने वो
    वो फिर आ रही इस वर्ष, जल्द ही हमारी सूनी धरती की गोद में रंग बिखेरने।।।

    जय माँ दुर्गे !!!������������❤️❤️❤️
    ©shruti_25904

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    आ रही है वो सिंहवाहिनी, आप सब की रक्षा को
    अब इस कोरोना को, अपनी त्रिशूल की नोंक पर दबोचने वो
    कभी बालिका तो कभी चंडी रूप में आप सबकी मन पढ़ने वो
    वो फिर आ रही इस वर्ष, जल्द ही हमारी सूनी धरती की गोद में रंग बिखेरने।।।

    जय माँ दुर्गे !!!❤️❤️❤️
    ©shruti_25904

  • alkatripathi79 10w

    सबसे पहले मैं anonymous_143 जी का धन्यवाद देती हूँ की एक बार पुनः मुझे rachanaprati की बागडोर देने के लिए.

    आप सबके लिए विषय है ‘माँ दुर्गा के नौ रूप''....
    आशा करती हूँ आपसबको विषय पसंद आएगी और काफ़ी कुछ पढ़ने को मिलेगा परिणाम कल दोपहर 3 बजे घोषित करुँगी
    धन्यवाद
    ©alkatripathi79

  • anonymous_143 10w



    मैं अपने आप को खुशनसीब मानता हूँ की मुझे इस रचनाप्रति
    के संचालन में जुड़ने का मौका मिला,
    सभी प्रतियोगीयों @alkatripathi79 @anusugandh @piu_writes @happy81 @goldenwrites_jakir का दिल से शुक्रिया की रचनाप्रति में भाग लिया...मेरे लिए आप सभी विजेता है...
    मैं @alkatripathi79 जी को निवेदन करुंगा कि #Rachanaprati85 की बागड़ोर अपने हाथों में ले...और संचालन को आगे बढ़ाये...धन्यवाद

    ©anonymous_143