#rachanaprati75

13 posts
  • me_shubhangi 12w

    इस रोशनी से पुछो हाल मेरे, मेरी ज़िंदगी में कितना अंधेरा है ।
    उन बादलों में छिपे कोई चांद से पुछो, आखिर कितनी दूर ये सवेरा है||

    सपने नहीं दिखते मेरी नजरों में, जिम्मेदारियों का इनपर पहरा है।
    दर्द नहीं देता कोई दर्द मुझे, उस हार का ज़खम अभी गैहरा है||

    दूर से चमकती है, उन ख्वाहिशों का रंग सुनेहरा है |
    नूरानी सी लगती है जीत मेरी, उन घटाओं को बताओ ज़रा,
    मेरा अर्श भी ज़मीन के स्पर्श को तरसा है||
    ©me_shubhangi

  • suryamprachands 12w

    जीवन

    जब मन तन से हट जाता है
    क्या करें समझ ना आता है
    अंतर्मन करता है प्रहार
    भर देता है मन में विकार
    मन को पथ दुर्गम दिखता है
    मन,ध्येय कठिन है,लिखता है
    स्मृति का भूला बिसरा क्षण
    आकर के घर कर जाता हैं
    जाने क्या अब होने वाला...
    ये सोच हृदय डर जाता है
    जब चित में इक चित्कार उठाकर
    नियति मौन हो जाती है
    प्रति प्रश्नों की आधारशिला
    कर रहा कौन? हो जाती है


    उस क्षण जो हिय में भाव एक
    आकर के बसने लगता है
    हर कठिनाई की ग्रीवा में
    आ फंदा कसने लगता है
    वो भाव भोर सा लगता जो
    हर लेता सारा अंधकार
    उन हठी विकारों से लड़कर
    कर देता हिय को निर्विकार
    प्रति प्रश्नों के प्रत्युत्तर में
    वो लक्ष्य दिखाता है हमको
    पथ की दुर्गमता आधी कर
    पथ सुगम दिखाता है हमको
    भय मेट चित्त से गिरने का
    उठना सिखलाता है हमको
    है शक्ति समाहित हममें सब
    करना सिखलाता है हमको
    बस भाव वही भव का स्वामी
    हर क्षण ही उसमें नूतन है
    बस अमर भाव वो "जीवन" है
    बस अमर भाव वो "जीवन" है

    ©Suryam Prachands

  • shruti_25904 13w

    Zindagi ek safar to nahi, ek kahani hai
    Jiske kirdaar hai samay aur aayu
    Aayu dekhkar maut nahi aati
    Aur samay dekhkar ghatnaein nahi hoti
    Kya hi panne paltein is benaam zindagi ke
    Wo to khud hi apni jeevangatha sunaa jaati hai
    Jab samay aur aayu saath ho jaaein
    To zindagi ek swarg ban jaati
    Par agar hum zindagi chhod samay aur saanse ginne lage to ye ek nadaani hai
    Zindagi ek safar to nahi, e kahani zarur hai
    Samay aur aayu ki gatha likhi jisne, wo hi hai zindagi ke saarthi
    Kya kahu zindagi ko, isne to chuppi ko bhi bolne par majboor kiya
    Aur jisne bolne ki himmat ki... Usey to dabaa diya gya...
    ©shruti_25904

  • tejasmita_tjjt 13w

    #rachanaprati75

    @d_p_love
    @goldenwrites_jakir

    जिन्दगी की कहानी भी अजीब है
    जितना समझते हैं उतना ही उलझ जाती है
    कभी अपनों को रुसवा करती है तो
    कभी गैरों से मिलाप करवा देती है
    ये जिन्दगी भी ना.....

    कभी इतने आंसू देती है कि
    जीने की ख्वाहिश फना हो जाती है
    कभी इतनी खुशियां देती है कि
    इंद्रधनुषी छटा सी बिखर जाती है
    ये जिन्दगी भी ना ......

    कभी इतनी सरल लगती है कि
    चलना बहुत आसान लगता है
    कभी इतनी कठिन हो जाती है कि
    मरने को जी चाहने लगता है
    ये जिन्दगी भी ना.....

    जिन्दगी की पहेली को कौन समझ पाया है
    कभी हंसा देती है तो पल में रुला देती है
    जो समझ गया जिन्दगी को
    उसने जी लिया अपनी जिन्दगी को
    ये जिन्दगी भी ना......

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    जिन्दगी

    जो हम सोचते हैं जिन्दगी वो नहीं
    जैसा हमारे साथ होता है वो है जिन्दगी
    ये जिंदगी भी ना......
    ©tejasmita_tjjt

  • prakritiofficial 13w

    #rachanaprati75
    @d_p_love

    जीवन/जिंदगी
    ❤-------------------------❤

    ��जिंदगी हर पल हैं एक पहेली ��

    ��कभी बन जाती हैं सहेली��

    ��साथ में खेलती हैं रोज नये-नये खेल ��

    ��तो कभी नाराज़ होकर कर लेती हैं बैर��

    ��कभी प्यार से सर सहलाती हैं��

    ��तो कभी ठोकर दे जाती हैं��

    ��बूझो तो और कठिन हो जाती हैं��

    ��रूठो तो झट मना जाती हैं��

    ��तन्हाई भी वही देती हैं��

    ��हर राह पर साथ भी वही चलती हैं��

    ��जिन्दगी बस एक पहेली हैं ��

    ��बस एक पहेली हैं ��

    ❤----------------------------❤

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    जीवन

    जीवन एक दर्पण की तरह हैं।
    यदि आप उसपर मुस्कुराते हैं।
    तो यह भी आपको मुस्कान देगा।
    ©prakritiofficial

  • sadhana_the_poetess 13w

    जीवन ✍

    कौन कहता है ज़िन्दगी गुलज़ार होती हैं जबकि,
    सुख और दुःख दोनों ही जीवन का सार होती हैं।
    ©sadhana_the_poetess

  • goldenwrites_jakir 13w

    ज़िन्दगी ✍️

    ख़ुशी की तलाश में -- ज़िन्दगी को उलझाता चला गया
    कभी कर्म कभी तक़दीर की लकीरों पर एतवार करता चला गया
    भुल कर छोटी छोटी खुशियों को - बड़ी ख़ुशी के लालच में
    ज़िन्दगी को गम के साय में धकेलता चला गया
    देखता रहा दुसरो की ज़िन्दगी - अमीरी की तलाश में
    और गरीब होता चला गया ,,,,,,,
    अपनों को खोकर - अपनों के लिए - भटकता रहा
    भूलकर ज़िन्दगी के मायने - ख़ामोशी में जीता रहा
    क्या पहेली है ज़िन्दगी - उस सत्य से मुँह मोड़ता रहा ....
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 13w

    #Rachanaprati75

    आप सभी का तहदिल से
    आप सब ने अपना कीमती समय इस पाठशाला में दिया
    आप सब की रचना कमाल की खूबसूरत है
    सबने लाज़वाब शब्दो से परछाई का एक आईना दिखाया
    आप सब से गुजारिश है इसी तरह आगे इसे बढ़ाते रहें
    हर इक पहलू पर कलम से कागज़ पर तस्वीर बनाते रहें ,,,
    अब पाठशाला को आगे बढ़ाने के लिए @d_p_love G
    को आमंत्रित करता हूँ ----
    एक बार आप सब का दिल से हार्दिक अभिन्दन आप सब की कलम कागज़ पर हर इक शब्द को अल्फाज़ बनाती है

    ©goldenwrites_jakir

  • anandbarun 16w

    #rachanaprati75

    मैं अपनी यह रचना नामांकित करता हूँ अद्यतन स्चनाप्रति में, जो मेरा, जीवन का अर्थ और उद्देश्य समझने का एक प्रयास मात्र है। कहते हैं जीवन आगे बढ़ते रहने का एक उपक्रम है जिसमें कितने पीछे छूट जाते हैं और छोड़ जाते हैं असह रिक्तता, पर समय हर खाई को पाट देता है। आशा है आप सभी को भी अच्छा लगे��

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    चरैवेति

    वो कौन अंधेरों जला करे
    जीवन की झंझावातों में
    विस्तृत नभ के सूनेपन में
    एकाकी जलते उल्काओं से
    भूली हैं दिशा जिसे कब से
    किस ओर चली किसके सदके
    क्या पाने की है चाह उसे
    क्या खोया है आगे बढ़ते
    कौन गिने बीते लम्हे
    नित आस नई गढ़ते गुजरे
    अंधेरों में मिल गई गति उसे
    मिटने की गाथा कहें इसे
    या हुति में अर्पित हविषें
    परिवर्तन रचती राह नए
    जीवन का प्रादुर्भाव गहे
    सदियाँ बहती बीती कितने
    मिलने समय के सागर में
    तुम भी आ जाओ बढ़ते
    क्यूँ बैठे हो यूँ पाषाण बने
    ना बचा रहे कुछ भी पीछे
    कोई धूल उड़ाने वाला आगे
    सोचोगे वो किस ओर गए
    क्यूँ दिये नहीं कुछ सीख नए
    ©anandbarun

  • mamtapoet 27w

    जिंदगी

    ख़्वाब सुहाने दिखा के तरसाए ये जिंदगी, मृगतृष्णा सी भुलावा है जिंदगी।।

    इस जीवन( जिंदगी) की चादर में
    साँसों के ताने बाने है,
    दुःख की थोड़ी सिलवट है
    सुख के थोड़े धागे सुहाने है।

    क्यों सोचे कल क्या होगा?
    जी ले, आज का हर पल,
    कल जाने कहाँ तेरे मेरे ठिकाने है।

    चख ले अंजुली में जो खट्टे मीठे तराने है
    रिस रिस के बह तो यूँ भी रहा
    कभी पसीना तो कभी रेत के बिखरे दाने हैं।


    श्वेत श्याम सभी रंग बड़े प्यारे है
    जो मिले तुझे रंग वो भी तो औरों से न्यारे है।
    जितना समझेगा इसे, उतने ही उलझे जाने है
    ये जिंदगी है बंदे, तेरी मेरी कहा माने है।।
    ©mamtapoet

  • mamtapoet 65w

    Dear jindagi

    कभी जुबान पे शिकायत तो कभी आँखों में पानी है,
    कभी मीठी सी हँसी, तो कभी जिंदगी दरिया सी रवानी हैं।

    बारिश की बूँदों सी कभी रह रह के तू बरसी,
    और कभी मैं धूप की एक टुकड़े को भी तरसी।

    खट्टे मीठे पलों की कभी तू गवाह बनी,
    कभी नीम की बूटी सा, तू काढा बनी।

    नये नये मोड़, नई नई राहे दिखाई,
    कभी जुदा हो गई, कभी संग चली बन के परछाई।

    अपने और गैरों में फर्क करना सिखाया,
    गुरु बन सच्चा, पाठ पढ़ाया।

    कभी लब मुस्काये, कभी नैना भी भर भर आये,
    पर मन का परिंदा एक ही बात दोहराए_

    Love you dear jindagi
    ©mamtapoet