#rachanaprati72

30 posts
  • alkatripathi 12w

    #rachanaprati72 —73
    @anandbarun ji

    Rachanaprati 72 का संचालन कर के मुझे बेहद हर्ष हुआ की इतनी अच्छी अच्छी रचना मुझे और आप सबको पढ़ने को मिली।
    विजेता कोई एक हो ये संभव ही नही है क्योंकी सबकी रचनाएँ इतनी अच्छी है.. loveneetm जी ने अभिमान में स्वयं को रखा,,
    Anandbarman जी ने मियां मिट्ठू में पूरा जीवन दर्शन ही लिखें _do_lafj जी ने अपनी आँखों के बारे में कहा,, abr_e_shayri श्रुति जी ने अहं ब्राह्मस्मि लिखा,, somefeel जी ने भी अपनी तारीफ़ में लिखा,, aka_ra_143 जी ने मैं अपनी हिम्मत लिखी,, goldenwrites_zakir भाई जी ने मैं, मैं नही में बड़ी खूबसूरती से ख़ुद को बताया beleza__ जी ने भी काफ़ी अच्छा लिखा,,
    mamtapoet जी ने दो रचनाएँ लिखी दोनों काफ़ी ही उत्तम थी
    chahta_samrat जी ने भी दो रचना लिखी दोनों काफ़ी अच्छी थी।

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    happy81 जी ने भी शुक्ला डॉन काफ़ी ही अच्छा बिल्कुल अलग सी रचना लिखी थी suryamprachands (छोटे ) ने तो प्रचंड में दिल ही जीत लिया yuvi7rawat जी ने ख़ुद की तारीफ़ बड़े अच्छे से मज़ाकिया अंदाज़ में किया bad_writer or pain_addicted दोनों ने भक्ति रस में स्वयं को रखा vi_shine0202 जी ने, aryaaverma12जी ने,anusugandh इन तीनों की रचना भी काफ़ी सराहनीय थी
    shruti_25904 ने, deepajoshidhawan जी ने और deeptimishra (Depu ) ने भी काफ़ी उम्दा रचना लिखी...
    सभी विजेताओं को बधाई
    Rachanaprati73 की बागडोर मैं anandbarun जी को सौपती हूँ। आशा है आपसबको मेरा निर्णय ठीक लगा हो...
    @anandbarun जी को ढेरों शुभकामनाएं और बधाई
    ©alkatripathi

  • loveneetm 12w

    परिचय

    मैं हरिदास का दास हूँ,
    मैं निम्न तुच्छ इंसान,
    धन दौलत का मन मोह नहीं,
    बस प्रिय मुझे घनश्याम।

    मैं प्रतिपल गोविंद कृष्ण भजू,
    जग कहें मुझे नादान,
    जब जग ना समझा राधा को,
    तो क्या मेरी पहचान।

    मैं दास हूँ श्यामा प्यारी का,
    मन मेरे है भगवान,
    हृदय सिंहासन बैठते,
    राधे संग घनश्याम।

    मैं पुत्र पौत्र भ्राता बंधु,
    हर रिश्ते का मन मान,
    पर प्रथम भाव मन सेवक का,
    जिसके स्वामी घनश्याम।
    @लवनीत

  • deepajoshidhawan 12w

    #rachanaprati72 @alkatripathi

    शायद कुछ ख़ास है नहीं तारीफ़ के लायक....

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    मैं

    सुबह -शाम 
    दिन - रात
    घर - बार 
    हाट - बाजार
    काम - काज
    साज - सफाई
    पढ़ाई-लिखायी
    हम - तुम
    बाल - बच्चे
    रिश्ते - नाते
    मायका-ससुराल
    अड़ोस - पड़ोस
    सब दुरुस्त रखा
    बस इन सबके 
    भारी भरकम
    वजूद  के बीच
    कुछ अकेला सा
    जाने किसके पीछे
    शायद बहुत नीचे
     दबा रह गया है
    डर लगता है
    दम घुटने से
    मर ही न जाये
    इसीलिए अब 
    ढूंढने निकली हूँ
    मेरा अपना "मैं"
    मेरी तारीफ़
    सिर्फ़ इतनी सी
    कि मैं......
    वही "मैं" हूँ
    ©deepajoshidhawan

  • deeptimishra 12w

    Mai meri fav hu����
    Ab aap smjh skte hai...
    Itna sara kaise likha gya hai����

    #rachanaprati72

    @alkatripathi
    Kam hogya mam����


    ------------------------

    सागर की तेज लहर में
    उम्मीद का नाव हूं
    जिंदगी की धूप में
    छाव की बहार हूं
    कहते है यार मेरे
    मैं.. सक्रात्मकता की पहचान हूं

    अपनो की मुस्कान हु
    गैरों के लिए एक राज हूं
    कहती है मां मेरी
    मुश्किलों में भी मुस्कुरादे
    ऐसी कली मैं ... उसके ज़मीन की हूं

    कठोर चट्टान सी दिखती
    पर मैं पंखुड़ी सी नाजुक हूं
    जमाना अनजान हैं..
    की मैं कितनी भावुक हूं��

    जितनी मैं चटोर हु
    उतनी ही उत्कृष्ठ अनपूर्णा भी
    सयंम में ठहरा वक्त
    बैचैनी में गुनगुनाती लोरी हूं
    छोटी हु परिवार में
    कहते हैं पापा मेरे
    मैं घर में सब की दादी हूं

    मोहिनी सी सूरत
    सीरत सीता सी बनाई है
    लम्बे बाल,, गेहुए रंग से
    पहचान मैंने पाई हैं
    कहते है कुछ लोग
    उफ..! ये क्या बला आई हैं��


    ---- दीप्ति

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    जिंदगी कितनी भी कठिन हो
    हिम्मत भरमार रखती हूं
    कभी बच्चो संग बच्ची
    कभी ज्ञान अपार बरसाती हूं

    मैं हु तितली मां के आंगन की
    सैर कर .. वापस उस के आंचल में
    लौट आती हूं
    बड़ी बड़ी बाते
    सलाह बिन मांगे दे देती हु
    मैं पापा की "पारी" नही
    भाग्यशाली कहलाती हूं...!

    ©deeptimishra

  • shruti_25904 12w

    खुद की तारीफ में क्या कहू, बस यू टकराते लफ्ज मेरे
    कि
    जैसी भी हूं खुश हूं, संतुष्ट हूं आसान सी जिंदगी से
    कुछ नादानिया होती मुझसे, संवारने की प्रयास रहती मेरी निरंतर

    इस फूल सी जहां में, कांटे तो रहेंगे ही
    इस सूखी धरा में, जल के फव्वारे तो फूटेंगे ही

    जिस प्रकार
    इक शांत चित्त में सहनशीलता की इक सीमा रहती है
    कुछ यूं कि अगर पवन की वेग गर अधिक झूमने लगे, फिर चक्रवात बनते देर नहीं होती।
    ©shruti_25904

  • anusugandh 12w

    #rachanaprati72
    @alkatripathi

    रिश्तों की तुरपाई करते करते एक उम्र गुजर गई
    लोग कहते हैं तुम फटे पुराने सुधारती बहुत हो
    पौधों की जड़ों को सींचते सींचते एक युग लगता बीत गया आज लगता वृक्ष कह रहे कमाल करती बहुत हो
    बच्चों के चेहरे पर मुस्कान देखने को खुद को मिटा डाला बोलते आप मुस्कान बिखेरती बहुत हो
    पूरी जिंदगी बिता दी घर और बाहर को संभालते संभालते
    सब बोलते तुम सामंजस्य बिठाती बहुत हो
    कभी समय नहीं मिला अपने को आईने में निहारने का
    अपनी चुगली खाने का अपनी तारीफ करने का
    आज मौका मिला खुद को खुद से मिलाने का
    तो जा खड़ी हुई आईने में खुद को निहारने को
    मौका मिला खुदा की बनाई चीज़ की बडाई करने का

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    तारीफ उस प्रभु की जिसने हमें बनाया
    हमारी क्या औकत जो गिनवाएँ उसमे कमियां
    तारीफ कहो या बुराई इसका तो पता नहीं
    किसी का दिल दुखाए यह हमारी आदत तो नहीं
    ©anusugandh

  • bad_writer 12w

    वासुदेव कृष्ण

    ना कौरवों के साथ हूं ना पांडवो का यार हूं,
    मैं करुणा और प्यार हूं मैं धर्म का आधार हूं,
    भीष्म की प्रतिज्ञा हूं तो द्रोण की परीक्षा हूं,
    कर्ण का सामर्थ्य हूं तो अर्जुन का भी ज्ञान हूं,
    धृतराष्ट्र सा अंध हूं पर गांधारी का त्याग हूं,
    सकुनी का सारा छल हूं तो द्युत का खेल भी हूं,
    शिखंडी का प्रतिशोध हूं तो द्रौपदी का क्रोध भी हूं,
    दु:शासन का दुष्कर्म हूं तो गीता का कर्म भी हूं,
    शून्य सा सर्वत्र हूं कल्प हूं विकल्प हुं तर्क हूं मैं मर्म हूं
    मैं वासुदेव कृष्ण हूं।।।
    ©bad_writer

  • goldenwrites_jakir 12w

    मैं और ✍️

    मैं और मेरी तारीफ़ - ये मजाक ख़ुदसे ही अच्छा हूँ
    गलतियों का मैं पुतला - बेबखूफ सबकी नज़र में अच्छा हूँ
    खाकर ठोकर कभी संभला ही नही
    फिर भी हर एक के लिए कभी अच्छा कभी बुरा हूँ ,,,,
    मैं और मेरी कलम ज़िन्दगी के पन्नो पर - अधूरा शब्द हूँ
    पढ़ सको जितना उतना ही उलझा उतना ही सुलझा
    ख़ामोशी की जुबान पर कलम की अवाज़ हूँ
    मैं और मेरी तारीफ़ ये मजाक ख़ुदसे ही अच्छा हूँ ....
    ©goldenwrites_jakir

  • yuvi7rawat 12w

    Khud ki तारीफ

    Aab aapne he muh se aapni kya "तारीफ" karu. Ha itna jarur boluga ki mere dwara kiye gaye kuch aache kam ha jinko aap sabko bhi karna chaheye, jaise ki:--

    1)

    2)

    3)

    4)

    5)

    Aagar aap ye 5 aache kam karege tho mere jaise mahan banege.
    ©yuvi7rawat

  • goldenwrites_jakir 12w

    मैं - "मैं नही ✍️

    मैं क्या हूँ - ये भी अब याद नही
    आया ज़ब हमसफर ज़िन्दगी में - मैं - मैं ना रहा
    वक्त के साथ रिश्ते और भी ज़िन्दगी में जुड़ते चले गए
    कब पिता दो बच्चो का बन गया
    ये एहसास ये उनका प्यार ज़िन्दगी में घर कर गया
    जिम्मेदारी की पोटली कांधे पर सुबह शाम रखी रही
    मेरी पहचान अब मेरे बच्चो से होने लगी
    पूछता ज़ब कोई अनजान मेरा नाम मेरा पता
    तब जिक्र मेरे बच्चो का होने लगा
    बच्चो के खेल कूद का हिस्सा मैं बनने लगा
    मैं पिता से फिर उनके साथ बच्चा बनने लगा
    बरसो पहले जिस बचपन को मैं भुल चूका था
    आज बच्चो के साथ मेरा कल आज फिर जिन्दा होने लगा
    उनके मासूम चेहरों में खुदकी ही परछाई नज़र आने लगी ,,
    मैं - अब मैं ना रहा -- वो कहानी की किताब देखी
    बच्चो की हंसी में अपनी ख़ुशी देखी
    उनकी ज़रूरत उनकी छुट्टियों में उनकी मरमर्ज़ीयां देखी
    क्या है मेरी ज़िन्दगी - उन सब के साथ इन लम्हो में
    दुनियां में ही जन्नत देखी .....
    मैं - मैं ना रहा - उनकी ख़ुशी में ही अपनी ख़ुशी देखी
    मुकम्मल है ज़िन्दगी सबके साथ - वो घर की रौशनी में
    मैने अपनी तस्वीर देखी
    मुझसे है उनके लबों पर मुस्कान वो कीमत अपनी ज़िन्दगी की देखी
    मैं - अब मैं ना रहा - उन साँसो पर उनकी उम्मीदों की एक दुनियां देखी .... ..
    ©goldenwrites_jakir

  • suryamprachands 12w

    मैं हकीकत नहीं जो कहीं कहीं मिलूँ
    मैं फ़रेब हूँ ज़बान-ज़बान पे रहता हूँ

    वैसे तो खुद की प्रशंसा लिखना या करना सबसे कठिन कार्य था किंतु पहले दीदी बाद में संचालक @alkatripathi दीदी का आदेश था सो प्रयास किया बाकी खुद से खुद की पीठ खूब थप-थपाई है ����
    #rachanaprati72

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    प्रचंड

    प्राप्ति का प्रयास है
    बस विजय का वास है
    वेग वक्ष फाड़ है
    सिंह की दहाड़ है
    राग भी है रक्त है
    शक्ति भी सशक्त है
    प्रेम की प्रदीप्ति है
    दिव्यता की दीप्ति है
    भारतीयता का एक छोटा सा ही खंड है
    बस वही प्रचंड है, बस वही प्रचंड है

    अज्ञानता भी ज्ञान है
    शौर्य शर समान है
    मृदुलता का मन्त्र है
    तथ्यवान तंत्र है
    लालसा है काल सी
    क्षुधा महाकाल सी
    बुद्धि का ही बोध है
    शब्द है, ये शोध है
    जय का जय प्रमोद है
    प्रेम निर्विरोध है
    टूटकर जो खंड किंतु भावना अखंड है
    बस वही प्रचंड है, बस वही प्रचंड है

    ©Suryam Prachands

  • happy81 12w

    #rachanaprati72

    @alkatripathi didi ji

    आप भी मेरी तरह इंसान की औलाद है..
    आप मुँह मांगी दुआ हम अनसुनी फरियाद है.. ��
    हम जहाँ खड़े होते है..
    मैटर वहाँ बड़े होते है..
    शुक्ला भौकाली..
    फ्रॉम कानपुर...
    बकैती मास्टर..

    शु शु शु... शुक्ला डॉन.. देखो आया आया आया शुक्ला डॉन..
    सलाम शुक्ला डॉन..
    तू है सबका डॉन..
    सलाम शुक्ला डॉन..

    लड़की संस्कारी है.. गारंटी जे हमारी है..
    कोई रिश्ता हो तो बताओ..

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    तो कहाँ से शुरू करू खुद को..
    मैं बेमिसाल..
    मतवाली चाल..
    तुम जान लो...
    मुझसा ना मिल पायेगा कभी कोई..
    मैं हूँ कमाल..
    तुम जान लो..
    कोई क्या जान पायेगा हैप्पी तुम्हारा मिजाज..
    किताब खोल कर सपनों में गुम सिसकियाँ भी संग लो..
    बैठी रहो सुबहों को खाली रातों को भारी रंग हो..
    तुम चमकती हो चुपचाप जैसे बहार रोशन ना हो..
    तुम जान लो..
    नजरे झुकाना पलके उठाना हर हद्द तक हो खूबसूरत..
    चेहरा पर दाग होंगे कई दिल से बाकमाल हो तुम..
    मेरी हैप्पी..
    तुम जान लो..
    भावनाओं से भरी.. कभी दुःख भरी..
    धोखे से बनी परिपक्विता से परिपूर्ण..
    कभी बचपना.. कभी नानीपना,
    कोयले से निकली कोहिनूर..
    है हैप्पी..
    तुम जान लो..
    हर श्वास में है परोपकार.. संस्कार..
    सर्वगुणसंपन..
    दुश्मनो को भी पानी देती.. ना कोई मैल रूह पर..
    सुनो हैप्पी..
    हर लट से लटकी हुई लिहाज की खुश्बू..
    चेहरा खुशहाल दिल बेमिसाल..
    सुन लो..
    ओ हैप्पी तुम हो अनोखी सी..
    ओ हैप्पी.. बूझी पहेली सी..
    ओ हैप्पी.. किरणों का संगम हो..
    हो हैप्पी....
    हँसती हो तो बिखरती है स्वर्ग से अप्सराओं की रौनक..
    कान्हा की भक्ति दुर्गा सी शक्ति सच्ची निर्मल तुम हो..
    हो हैप्पी.. क्या क्या अब मैं कहूँ हो हैप्पी..
    हो देश भक्त.. जबरदस्त..
    हो डॉन दिल से.. धड़कन से शीतल हो हैप्पी..
    वी लोब जू..
    ©happy81

  • aryaaverma12 12w

    खुद की प्रशंसा

    हू शून्य के जैसी मैं , जो किसी के काम न आयु मैं,
    जो किसी के साथ जुड़ जाऊँ तो....... तो उसकी किमत बड़ा दू मैं


    ©aryaaverma12

  • anandbarun 12w

    #rachanaprati72
    थोड़ी लम्बी छोड़ दी है
    जो किसी ने छेड़ दी है
    थोड़ी बोरियत ही सही
    वैसे कुछ खास है नहीं...

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    मियाँ मिट्ठू

    यह कैसा है सवाल
    खुद की जो तारीफ करूँ
    तो हो जाएगा बवाल
    याद आई इक मित्र की कविता
    'हूँ शुन्य पर सवार'
    था काला-कलूटा पिलपिला
    अनजाने कितनों ने समझा
    इस घर का नौकर यह भला
    था डरपोक महा
    पर लाचार जनों के लिए
    अँधेरों से भी लड़ जाता
    ना गुण का लेसमात्र कोई था
    पर असाध्य व्याधि से लड़ता
    अपने शहर का जाना-माना
    अल्पकालीन योग प्रशिक्षक बन बैठा
    फिर जिंदगी ने मुख मोड़ा
    जब इक साहित्यिक पुरोधा ने दी दिशा
    अल्पवय में पुस्तकालय का सदस्य बना
    और हिन्दी साहित्य का हो गया कीड़ा
    अंतर्राष्ट्रीय साहित्य पढ़ने के क्रम में
    मैक्सिम गोर्की की 'मदर' का
    अनजाने ही दर्जनों पृष्ट रट गया
    फलतः कक्षाओं में रहा रेंगता
    जब सहपाठियों ने अथक उद्यम किया
    मैं हर प्रतियोगिता परीक्षा में अव्वल फिसड्डी रहा
    भारी पड़ते जिंदगी के जुआ का असर था
    अपने परम रुचि को अल्पविराम दिया
    चक्की में पिसते कभी खून के आँसू भी रोया
    तो सतत प्रयत्नशीलता से सहकर्मियों का
    समग्रता से स्नेह और विश्वास भी जीता
    जीवन में पूँजी के मद में था ठन-ठन गोपाला
    पर विश्वास की पूँजी के बल उठाया बीड़ा
    व्यापार के गलियारों में नाम कमाया
    अल्प समय में सफलता का मुख चूमता
    पर नियति को कुछ और ही मंजूर था
    नव पल्लवन के क्रम में ऐसा फिसला
    आसमान से अन्ध गर्त में जा गिरा
    प्रश्न तय करता जीवन-मरण का
    ना जाने किन अंधेरों भटकता फिरा भूत सा
    किसी अदृष्य हाथ ने आ थामा
    कि जीवन के एक पल का है महत्व कितना
    धरा पे मौजूद समस्त खजानों से भी कहीं ज्यादा
    भला अर्थ की है कितनी महत्ता
    क्या कोई खुशी का इक पल भी खरीद सकता
    यह दुनिया है आनी-जानी
    कारण और परिस्थितियाँ बदलनी अवश्यंभावी
    इस पल में समाई अनंत सुंदरता...खुश रहो मीता...
    ©anandbarun

  • chahat_samrat 12w

    मुझमें मैं कहां

    कभी बहुत ज्यादा समझदारी,
    स्वाभिमानी
    न हारने की
    कोशिश, में मिलूं
    तो समझ लेना
    ये मुझमें मेरी मां है

    कभी बहुत अध्यत्मिक ,
    बच्चों सा मन ,
    भावनाओं सी बहती नदी ,
    या मदद को बढ़ता हाथ
    या समंदर सा उठता उफान दिखे मुझमें,
    तो समझ लेना ये मेरे पिता है

    किसी नासमझ की नाकामी के बावजूद उसे
    सिखाने की अनंत कोशिश जारी रखूं
    तो समझ लेना मुझमें ये मेरे
    बचपन के प्रथम गुरु हैं

    कभी बड़ी निर्दयता से पेश आऊं
    तो समझ लेना बेवकूफी में मेरी
    गुजरा कभी बहुत बड़ा हादसा है

    कभी बड़ी शालीनता से पेश आऊं
    तो जान लेना ये बुजुर्गों
    का मुझ पर हाथ हैं

    कभी भरोसा कर लूं तुम पर
    तो समझ लेना
    ये मेरे भाई की कलाई है

    कभी बेमाफ गलती पर भी माफ कर दूं
    तो समझ लेना
    मुझमें कहीं साधु है

    कभी संभालते संभालते खुद को
    रो पड़ूं गर तो समझ लेना ये
    किसी दिल के करीबी ने
    छिटक कर बिखेरी मेरी उम्मीद है

    कभी वक्त न दे पाऊं तो समझ लेना
    कभी न खतम होने वाला
    जिम्मेदारियों का एक गठ्ठर है मुझपर

    मुझमे मैं कहां हूं अभी ???

    जिंदगी के शुरूवाती छोर पर
    से सांसों ने हाथ थामा था

    सफर में धीरे धीरे अंकित
    ये उपरोक्त सब मिले मुझे
    और जिस व्यवहार में थे
    मेरी सहजता के अनुसार
    जैसे तैसे
    मिलते गए मुझमें,
    और मैं ढलता गया उन सब
    मुसाफिरों के व्यवहार अनुसार
    और जिस मुसाफिर का मुझपर
    ज्यादा असर रहा,
    मेरा किरदार
    ढल गया अपनी
    सहजता सहिष्णुता
    उसके व्यवहारनुसार


    तो मुझमें मैं कहां हूं अभी?
    मुझमें मैं अभी हूं ही नही

    मुझमें मैं मिलूंगी शायद उस रोज
    जिस रोज तुम मिलोगे मुझमें,
    उस रोज मैं मिलूंगी मुझमें
    और पहचान पाऊंगी खुद को
    तुम्हारे जरिए अपने भीतर
    कहां खोई बैठी हूं मैं

    ~चाहत

  • loveneetm 12w

    अभिमान

    मुझ सा सुख सबको मिले,
    मै करूँ खूब अभिमान,
    गोविंद है तन मन बसे,
    और राधा जी है प्राण।

    मैं मूर्ख था जन्म से,
    अब भी हूँ नादान,
    पर जिस दिन उनकी राह दिखी,
    मैं बन बैठा विद्वान।

    जिस रचना में वो नहीं,
    वो नही काव्य और छंद,
    शब्द भी तब बोझिल लगे,
    और अंतर्मन हो द्वंद्व।

    इस कारण अभिमान है,
    करूँ प्रशंसा श्याम,
    सेवक हूँ सेवक रहूँ,
    जन्म जन्म घनश्याम।
    @लवनीत

  • _do_lafj_ 12w

    ��"लोग कहते है आंखें बड़ी प्यारी है आपकी,
    उनको क्या मालूम हमने आंखों में सैलाब छुपाये है।।"��

    #rachanaprati72

    @alkatripathi @greenpeace767 @anusugandh @mamtapoet @aka_ra_143

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    ❣️

    बहुत बदला है हमने खुद को,
    एक शक़्स के बदल जाने के बाद।।
    अब कोई बात परेसान भी करती है,
    तो बस मुस्कुरा लेते है।।
    बहुत उलझ सी गयी है ज़िन्दगी,
    अपनी एक मुस्कान से सुलझा लेते है।।
    अब कोई दूसरा या पराया नही लगता,
    सबको अपना बना लेते है।।
    लोग कहते है आँखें बड़ी प्यारी है हमारी,
    सारा दर्द इन आँखों में छुपा लेते है।।
    कोई पूछ ना ले वजह इन लाल आंखों की,
    इसलिए बेवजह भी मुस्कुरा लेते है।।


    ©_do_lafj_

  • abr_e_shayari 12w

    स्वयं की प्रशंसा??? असम्भव ☹️
    क्यूंकि स्वयं में कोई प्रशंसनीय तथ्य दिखता ही नहीं मुझे!

    फिर भी आज बहुत मंथन के बाद स्वयं के नारी रूप की प्रशंसा करने का प्रयास किया है, आप सभी के सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी ����!
    सौजन्य से- #rachanaprati72
    प्रिय संचालक @alkatripathi दी!

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    अहं ब्रह्मास्मि

    मैं स्त्री रूप, जीवन दाता,
    मैं शिव , मैं ही अम्बा हूं,
    मुझ से ही मेरा संसार,
    मैं ही मैं , मैं ब्रह्मा हूं!

    मैं रुपा , मैं मोह ,लोभ
    मैं रति संयोग -वियोग का रुप!
    मुझमें उतरो तो पार नहीं,
    मैं रुपवती एक रम्भा हूं
    मैं ब्रह्मा हूं!

    छू लूं जो मानव शुक्र कण,
    तो कोमल नवीन प्रसूती हो,
    मैं जीवन देकर सींच दूं जीव,
    मैं सबके लिए अचंभा हूं,
    मैं ब्रह्मा हूं!

    मै ज्ञान धरोहर दो गृह की,
    मैं लिखूं , बात जन जन प्रिय की,
    मैं संजीवनी विद्या धन लिए,
    मैं"श्रुति" कल की संभा हूं

    मै ब्रह्मा हूं!
    मैं ब्रह्मा हूं!
    - श्रुति

  • mamtapoet 51w

    मैं और धूप

    सर्दियों की गुनगुनी धूप खिली थी,
    कल मैं अकेले में अपने आप से मिली थी।
    यादों की तिजोरी मन ने खोल दी,
    बिन आहट जुबान ने उसमें नमकीं मिठास घोल दी।
    अलग अलग किस्सों की खुरचन जो कोने में कहीं बची रह गयी,
    नैना ही बरसे थे तब ,जुबा चुप रह गयी।
    बीज से फूल तक का सफर नजरों के सामने घूमने लगा,
    दुःख कचोटने लगे, खुशी का पल मुख चूमने लगा।
    नासमझी वाली एक हाँ और ना ने, ये राहे किधर मोड़ दी,
    बहुत कुछ घटा दिया, पर कइ कहानी नई जोड़ दी।
    टटोल के देखा रिश्तों की चादर को,
    कहीं से चुभने लगी थी जो मुझको।
    किसी की सिलाई उधड़ गई,
    किसी रिश्तें की चमक धूमिल हो गई।
    लगी जरूरत किसी को तुरपाई की
    तो किसी को फिर से नये रंग में रंगने की।

    इस आज तक आते आते,
    न जाने कितने कल, कल में बदल गये।
    कितनी ही ठोकरे खाई,
    पर कैसे न कैसे संभल गए।
    ©mamtapoet

  • mamtapoet 69w

    मैं

    कभी कभी यूँ ही अड़ जाती हूँ मैं,
    जानती हूँ कि गलत हूँ,
    फिर भी दूजों से लड़ जाती हैं मैं,
    फितरत मेरी ऐसी तो नहीं हैं,
    समझ भी पूरी है कि कौन कहा सही है।
    जाहिर न हो डर मेरा, सबसे बड़े हीअभिमान से मिलती हूँ,
    सबकी नजरें सिर्फ मुझ पर ही है, इस झूठे गुमां में रहती हूँ,
    जुनून की सबसे आगे निकलना है,
    हो गर राह लंबी तो शॉर्टकट से गुजरना हैं
    बात जब खुद को साबित करने की होती हैं,
    सब है बेवकूफ कम अक्ल,
    बस मेरा मन ही सच्चा मोती।
    नज़र न लग जाये खुशियों को मेरी,
    दामन में एक तिजोरी रखती हूं,
    मांग न ले कोई कैसी भी मदद,
    किनारा हर शख्स से रखती हूं,
    जितना काम उतनी बात,
    हर एक से इतना ही वास्ता रखती हूं,
    बात ये केवल मेरी नहीं हैं,
    इसका,उसका और आपका भी हाल यहीं है,
    अब भी वक़्त है जरा संभल जाइए,
    अपनी सोच मैं से हम में बदलिए।
    ©mamtapoet