#rachanaprati63

39 posts
  • lataaaa 13w

    गुनाह

    गुनाह है समाज में औरत होना
    गुनाह है उसका स्वावलंबी बनकर जीना
    गुनाह है उसका अपने पैरों पर खड़ा होना
    बस पुरुष प्रधान समाज में
    पुरुष की सारी गलतियां बेगुनाह हैl

    गुनाह है बेटियों के पर होना
    गुनाह है उसका आत्मनिर्भर होना
    गुनाह है उसका सबल प्रखर होना
    बस वक्ष स्थल पर धरा का भार ढ़ो
    सब ख्वाहिशों का हाथ छोड़ चलना बेगुनाह है l

    मत सोच क्या अच्छा बुरा
    मत सोच क्या गुनाह है
    जो राह तेरा उज्जवल करे
    जो भविष्य तेरा सवार दे
    जो हाथ दे जो साथ दे
    जो जिंदगी भर प्यार
    वही बस बेगुनाह है
    ©lataaaa

  • iamfirebird 13w

    इस बार #rachanaprati63 #gunaah में 40 से ज्यादा सुंदर रचनाएं पहुँची .आप सभी की रचनाएं दिल तक पहुंचने वाली खूबसूरत विचारों और वजनदार शेरों से भरी थीं.Sabhi participants badhai ke paatr hain .Mai #rachanaprati 64 ki baagdor @junaidwrites ji ko saunpti hu

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    लॉन्ग पोस्ट me mai specially mention krungi @happy81@vi_shine0202@goldenwrites_jakir @loveneetm ji ki ranchnaye adbhut thi .Mai @______i ko winner announce krti hu
    थॉट (विचार) में @somefeel ji winner hain
    Two लाइनर (शेर) में @goldenwrites_jakir
    @anonymous_143 @anusugandh ji ke sher bemisaal the .Iss category me mai @junaidwrites aur @gunjit_jain dono ko vijeta maanti hu
    गजल में दो ही एंट्री थी @camyyy ki gazal khoobsurt thi aap sab padhien ,iss category me @prashant_gazal ji ki gazal gazab kr rahi h so vo winner hain .

  • goldenwrites_jakir 13w

    गुनाह

    ज़िन्दगी की हर इक - उन साँसो का "गुनाह गार हूँ मैं
    जिसमे अपनों को छोड़ - खुद के लिए जी गया मैं
    ©goldenwrites_jakir

  • camyyy 13w

    गुनाह

    है गुनाह उसका चाह भी
    है गुनाह आह का राह भी
    है गुनाह जुड़ा वो तार भी
    है गुनाह तेरा वो प्यार भी।

    पाती ये मन का पढ़ ले अगर
    साथी जो साथ रह ले अगर
    फिर साज रंगो की जिधर
    धूल जाए वो था जो गुनाह सर।

    है गुनाह बनना बुजदिल सगर
    है गुनाह चलना मतभेदों का डगर
    है गुनाह छोड़ना किसी का साथ भर
    है गुनाह तोड़ना किसी के यकीं का पर।

    गर सोच इससे मुक्ति की राह तू
    फिर अपनी आदर्श बना वो राह तू
    अपनी राहों का रख सम्मान तू
    बना गुनाह मुक्त जहान तू।
    ©camyyy

  • anusugandh 13w

    ✍️

    एक गुनाह जो हर बार किया हमने
    दुआओं में तुमको सदा मांगा हमने
    ©anusugandh

  • mamtapoet 13w

    गुनाह

    घूँघट की ओट से वो हमें तकते है
    मर तो हम पहली दफा में ही गए थे

    क्यों एक ही गुनाह वो बार बार करते हैं।

  • happy81 13w

    उपरोक्त पंक्तियों में सब कुछ मिश्रित है.. जैसा मनुष्य का स्वभाव.. वैसे वाक्य.. मैंने अभी देखा की गुनाह पर कुछ लिखना है.. समय के आभाव में मैंने सब कुछ एक ही रचना में परोस दिया है.. मीठा खट्टा नमकीन और पानी... मैंने कम समय में मन की अनुभूति व्यक्त करी.. शुक्रिया.. ����..

    गुनाह क्या है..
    गुण का ना होना..
    गुन का गायब होना..
    जब हमारे अंदर कोई चीज रिक्त रह जाती है तब उसी के अनुकूल गुनाह होते रहते है..
    गुनाह करना गुनाह नहीं है..
    गुनाह करके गलती ना मानना..
    या सजा कुबूल ना करना गुनाह है..
    पछतावा.. नए द्वार खोलता है.. अपितु.. घमंड गुनाह से भी गुनाह करवा देता है.. गुनाह करिये.. मानिये.. सही भी करिये.. ����

    #rachanaprati63

    #gunaah

    @iamfirebird

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    गुनाह...
    मोहोबत्त मेरी मुझसे छीन जाएगी..
    एक दीवानी की कहानी फिर से मशहूर हो जाएगी..
    मैं ढूँढती रहूंगी कातिल मेरे रिश्तो का...
    गुनाह से ढकी मेरी रूह बेबस हो जाएगी...
    वो दूसरे कुल का लड़का..
    मैं ऊँचे कुल की लड़की हूँ..
    इसी मासूम गुनाह में..
    जात बिरादरी छुप जाएगी...
    घूँट लेती है जब प्यासी तड़पन दुर्लभ रेगिस्तान में..
    तब गुरूर का क़त्ल कर देती है "प्यास "..इंसान में..
    मेरी हसरत मेरी चाहत सबब इबादत का बन जाएगी..
    गुनाह से ढकी मेरी रूह बेबस हो जाएगी...
    गुनाह किया जो हरि नाम से रही मैं वंचित..
    गुनाह मेरा जो कृष्ण की सेवा से दूर हूँ..
    गुनाह मेरा जो मन दर दर भटके..
    कृष्ण ही तो मेरा गुरूर है...
    गुनाह किया जो प्यासे को अमृत बाद पिलाया..
    गुनाह किया जो व्यर्थ चर्चाओं में दिन काटे है..
    गुनाह किया जो मुख नहीं जपता हरि नाम..
    गुनाह मेरा जो काम बाकी सारे आधे है..
    मातृ- पिता की सेवा नितदिन कर देती हर गुनाह से दूर..
    धरती सेवा, मेवा देती.. माँ भारती का यहीं जूनून..
    गुनाह जन्मता..
    आक्रोश को..
    करता मिथ्या कटु को नजदीक..
    गुनाह स्वीकार कर बनो श्रेष्ठ..
    करो सत्य धर्म का नीक..

    ©happy81

  • goldenwrites_jakir 13w

    गुनाह ❤

    हमदर्द ही बनकर रहा "मेरा गुनाह
    ज़ब तक रही दिल में धड़कन "
    मोहब्बत ही बनकर रहा "मेरा गुनाह !¡!
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 13w

    गुनाह

    गुनाह किया नही - फिर भी सज़ा काट रहा हूँ
    ए - इश्क़ तेरी मोहब्बत में - ख़ुदको भुलाए जा रहा हूँ
    ©goldenwrites_jakir

  • sweta_singh99 13w

    ना वादों से मुकरे ,ना ही इरादों से गुज़रे
    कटघरे में खड़े चुप हम उनके हर गुनाहों से गुज़रे

  • vi_shine0202 13w

    हां मेरी माँ वैश्या हैं !
    क्या ये मेरा गुनाह हैं ?
    अगर नहीं है, तो मुझे किस बात की सजा मिल रही हैं
    मेरा परिवार हो के भी मेरा कोई परिवार नहीं हैं
    जिस्म मह़ज जिस्म हैं
    तो क्यों दुनिया इतना बवाल कर रही हैं
    तुम्हारी माँ की तरह मेरी माँ भी साडी़ पहनती हैं,
    में जब भी सहम जाता हूं ,
    मुझे अपने आँचल के नीचे ढक् लेती हैं
    हां उसका पेशा जरूर हैं जिस्म बेचना
    मगर वो अपने कारोबार के साथ साथ
    कितनी ही मासूम जानों का दरिंदो से बचाव भी कर लेती हैं
    हां मेरी माँ वैश्या हैं
    ये अगर गुनाह हैं , तो गुन्हेगार मैं नहीं
    वो हर एक दरिंदा हैं जो अपनी हवस बुझाने
    कोठे का दरवाजा ठकठकाता हैं,
    हां मेरी माँ वैश्या हैं
    ये गुनाह हैं
    पर गुन्हेगार मैं नहीं, फिर भी मुझे सजा हैं /

    ©Vaishnavi ♥️

  • sadhana_the_poetess 13w

    साधना शायरी

    उसने बोला मैंने मुहब्बत करा है कोई गुनाह नहीं।
    मैंने बोला ज़रा दोबारा बोलना मैंने ठिक से सुना नहीं।
    ©sadhana_the_poetess

  • deepajoshidhawan 13w

    गुनाह

    दिल और दिमाग दोनों में, कहो किस की बात मानें,,
    एक समझे तुम्हें गुनाह तो दूसरे की तुम हो धड़कन..
    ©deepajoshidhawan

  • sadhana_the_poetess 13w

    @iamfirebird #rachanaprati63 #gunah
    25/8/21 (Wednesday)
    Happy Sankashti ganesh chaturthi
    Ganpati bappa Maurya.

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    #two liner✍

    उसे मेरी ज़िंदगी की करी हुई सबसे बड़ी गलती या गुनाह कह दूं ।
    मुहब्बत कहूं या उसके बदले जों मिला मुझे उसे संक्षेप में श्राप कह दूं।
    ©sadhana_the_poetess

  • gunjit_jain 13w

    #rachanaprati63
    @iamfirebird जी
    प्रयास...
    2122 1212 22

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    जो मिला है हबीब इक तुम सा,
    और दुनिया से चाह क्या करता,
    इश्क़ के दौर से गुज़र आया,
    और अब मैं गुनाह क्या करता।
    ©गुंजित जैन

  • somefeel 13w

    गुनाह ना करके भी लोग गुनहगार बन जाते है,
    जब वो गलत होते हुवे देख कर चुप रह जाते है,
    गुनहगार तो गुनाह करते जाते है,
    जब सही होते हुवे भी हम इंसान चुप रह जाते है,
    गुनाहों की गिनती बढ़ती जाती है,
    जब इंसानियत ख़तम हो जाती है,
    और जो यह इज्ज़त के चक्कर में चुप करवाते है,
    वो समाज के पीछे अपनों को नहीं बचा पाते है,
    हम इंसान घर से पहले समाज को क्यूं चाहते है,
    क्यूं हम किसी भी प्रकार का गुनाह रोकने से पीछे हट जाते है!
    ©somefeel

  • anusugandh 13w

    ✍️

    ना जाने क्यों जिंदगी जिए जा रहे हैं हम
    यूँ लगता जैसे कोई गुनाह किए जा रहे हैं हम

    तुम साथ थे तो लगता बहार है जिंदगी
    तुम क्या गए कोई कुसूर किए जा रहे हैं हम

    एक हसीन ख्वाब जैसी थी अपनी जिंदगी
    अब जिंदगी को बेवजह जिए जा रहे हैं हम

    क्या कहे क्या समझे अब इस जिंदगी की बुनाई को
    "अनु"लगता उधड़ी ज़िन्दगी बस सिये जा रहे हैं हम
    ©anusugandh

  • goldenwrites_jakir 64w

    गुनाह

    गुनाह बस दिल का इतना था

    इक मसला दो शेर
    वफ़ा और बेवफाई
    सब बस इक खेल

    क़ायनात लिखी मोहब्बत से
    हमने की बेईमानी दिल से
    यही हक़ीक़त बाक़ी सब
    सफ़ेद झूठ इक मसला दो शेर

    ☔️☔️☔️☔️☔️☔️☔️☔️☔️☔️☔️
    ©goldenwrites_jakir

  • tausifkhanofficial 68w

    .

  • goldenwrites_jakir 70w

    वक्त हवा का इक झोका है
    कहीं सूकून कहीं गर्म लौ का एक सन्नाटा है
    महसूस बस इतना करो -- आती जातीं धड़कन
    और जिंदगी इक फूल गुलाब .....

    #jakir #rachanaprati114 @anandbarun
    #jp #zakir #rachanaprati63 @alkatripathi @aka_ra_143 @beleza_ @anusugandh
    (✍️ ✏️✒️��)

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    अच्छा या बुरा ✍️

    अच्छा या बुरा जैसा भी हूँ - माफ़ करना

    क्या था मेरा गुनाह - वो सवाल का जवाब हूँ मैं
    अच्छा और बुरा दोनों ही वक्त के साय में रंगा हूँ मैं
    जिंदगी खूबसूरत --- हर एक एहसास को जिया हूँ मैं
    लगकर गले हर इक वक्त के कांधे पर सर रखकर रोया हूँ मैं
    संकट हो या हो ख़ुशी का दौर हर इक पल में रब का दामन नहीं छोड़ा हूँ मैं ,,,

    जलाकर दीप उम्मीद के - खुदको रोशन रखा हूँ मैं
    बदलते रंग दुनियां के हर इक रंग में रंगा हूँ मैं
    मोहब्बत - इश्क़ - वफ़ा के साहिल से
    दुनियादारी -- जिम्मेदारी --- घर परिवार सब के हित के लिए जिया हूँ मैं ,,,,,,,,,,,,,

    हर इक रंग हर इक पल मुस्कुराकर हर वक्त से कदम मिलाकर चला हूँ मैं
    अच्छा भी भी बुरा भी वक्त के साथ जिंदगी में इक फूल तरह खिला हूँ मैं ------
    कभी साबन कभी पतझड़ जिंदगी का एक हिस्सा बना हूँ मैं

    ©goldenwrites_jakir