#rachanaprati51

12 posts
  • tejasmita_tjjt 17w

    #rachanaprati51
    @beleza_

    श्रृंगार जब करूं बस देख लेना इक नज़र
    माथे पे बिंदिया मांग में सजा देना सिंदूर
    फीका सा लगे अगर रूप
    होठों पे लाली लाल लगा देना
    देखकर एक नजर पूरा कर देना श्रृंगार

    हाथों में मेहंदी प्रिय तेरे नाम की रचाई
    देख कितना सुर्ख लाल रंग ये है लाई
    कंगना की खनक से सजी मेरी कलाई
    गले में मंगलसूत्र मेरा नाम तेरा ही पुकारे
    श्रृंगार मेरा प्रिय बस देख लेना इक नज़र

    आंखों में कजरा नाक में नथनी
    संवर गई साजन तेरी सजनी
    पांव में बजती छन छन पायल
    शोर मचाए करे तुझे घायल
    श्रृंगार जब करूं बस देख लेना इक नज़र

    तेरे दीदार के बिना अधूरा है मेरा श्रृंगार
    डालके इक नज़र कर दे इसे पूरा
    श्रृंगार किया मैंने प्रिय तेरे लिए
    देख ले बस इक नज़र भर

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    श्रृंगार

    रूप ऐसा सजाऊं जो प्रिय मन भाए
    करूं सोलह श्रृंगार जो उसे ही लुभाए
    ©tejasmita_tjjt

  • anusugandh 17w

    श्रृंगार

    एक सुखद अनुभूति का एहसास है श्रृंगार
    नारी के मन की अनबुझी प्यास है श्रृंगार
    जब-जब निहारती अपने को आइने में
    लगता आईने को भी प्यारा है श्रृंगार
    ©anusugandh

  • isikaa 17w

    श्रृंगार

    गहनों और सुंदरता से नहीं
    शब्दों से श्रृंगार करूं,
    गर मिल जाए कुछ वक्त मुझे
    फिर खुद से ही मैं प्यार करूं।

    भेद भाव क्यों है तेरे मन में
    जो रंग नहीं मेरा गोरा है,
    रंगों से क्या होगा अगर
    मन ही तेरा यूं कोरा है।।

    सावन हो या फिर हो बसंत
    बस झूमूं और मैं मौज करूं,
    गर मिल जाए कुछ वक्त मुझे
    फिर खुद से ही मैं प्यार करूं।

    ये भेद भाव क्यों करते हैं
    रंगों में यहां कुछ लोग,
    क्यों गोरे तन में ही बसता है
    सुंदरता नाम का रोग ।।

    रंग जाऊं मैं इश्क में मेरे
    और सपनों से श्रृंगार करूं,
    गर मिल जाए कुछ वक्त मुझे
    फिर खुद से ही मैं प्यार करूं।

    क्या हुआ अगर है रंग दबा
    हक है मुझको भी जीने का,
    क्यों सजूं मैं आकर बातों में उनकी
    रह जाएगा अहसास ही मेरा जब दबा हुआ।।

    क्यों आऊं मैं बातों में उनकी
    क्यों उनके लिए श्रृंगार करूं,
    गर मिल जाए कुछ वक्त मुझे
    फिर खुद से ही मैं प्यार करूं।...
    ©isikaa

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 17w

    श्रंगार ✍️

    वो कहती है तुम बिन ज़िन्दगी में अब कुछ भी बाकी ना रहा
    हाथो की चुडियां जंजीर सी लगती है
    माथे की बिंदिया - पैरों की पायल हर इक श्रंगार अब पराया सा लगता है
    तुम क्या गए ज़िन्दगी से - तुम बिन अब ये आईना भी टुटा हुआ दिल सा लगता है ....

    मोहब्बत के रास्तो पर "प्यार के कुछ ख़्वाब सुनहरे सजाए थे
    रखु हर साल तुम्हारे लिए करवा चौथ का ब्रत - होली के रंगों में तुम्हारे साथ रंग जाऊं -- दीपावली के दीपो की रौशनी में
    " मैं तुम्हारे साथ दिया बाती बनजाऊं
    आए ज़ब सावन --- संग तुम्हारे मैं मोर बन झूमू गाउँ
    लेकर अग्नि के साथ फेरे दुल्हन सी सजकर तुम्हारी ज़िन्दगी की सुबह बनजाऊं ,,,,
    मैं औरत हर इक श्रंगार से तुम्हारा मन बहलाऊं
    तुम्हारे हाथो से इस मांग में सिंदूर सजाऊँ - पहन मंगलसूत्र तेरे नाम का में जोगन - तेरी अर्धांगनी बनजाऊं .....

    हम दो रूह का मिलन ज़ब इक हो जाए
    नन्हे मुन्ने " फ़ूल ख़ुशीयों के घर आंगन को महकआए
    एक तुम्हारी परछाई एक मेरा साया - हमारी पहचान बनजाए
    बिन औलाद के एक औरत का श्रंगार अधूरा
    माँ बनकर में पूरी तरहा पूर्ण हो जाऊं .....
    बस इतना सा ही तो ख़्वाब देखा था संग तुम्हारे
    वो भी अधूरा रह गया .....
    ©bhaijaan_goldenwriteszakir

  • prakritiofficial 17w

    #rachanaprati51
    @beleza_

    तेरे झूमके संग , मेरा दिल झुल रहा है ।
    लेकिन अच्छा है, इसी बहाने तेरे गालों को चूम रहा है ।
    तेरे नाक की नथनी , जो तुम्हारे नखरे उठा रही है ।
    लेकिन इसी तरीके से, मेरी ख्वाहिशे जता रही है ।
    तेरा मंगलसूत्र , जो गले लग शोभा दे रही है ।
    लेकिन अच्छा है, तुझे मेरा हमसफर बता रही है ।
    तेरे नगीने वाली अंगूठी, मेरे आँखो में चमक ला रही है ।
    लेकिन, मेरे जीवन के हर लम्हे को दमका रही है ।
    तेरी चूड़ियां, जो कलाइयों को थामे हुए है ।
    लेकिन अच्छा है, मेरे जीवन को खनका रही है ।
    तेरी बिछिया, जो कदमों को चूम रही है ।
    अच्छा है मेरे दिल -- ओ -- जहाँ , में दस्तक दे रही है ।
    तेरी मेंहदी, जो हथेली को मेहका रही है ।
    लेकिन, मेरे जिदंगी को, प्यार के रंग से सजा रही है ।
    तेरी ओढ़नी, चाँद से मुखरे को सजा रही है ।
    लेकिन अच्छा है, लोगों कि नज़र से बचा रही है ।
    तेरा सिंदूर, जो तझे और भी मोहक बना रहा है ।
    लेकिन अच्छा है, तुझपे मेरा ही हक बताता है ।

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    श्रृंगार

    दर्पण सम्मुख बैठ के सजनी
    जब श्रृंगार करती हैं ।
    प्रियतम उसको रहे निहारे ।
    कितनी प्यारी लगती है ।
    हाय .....जब श्रृंगार करती ।
    ©prakritiofficial

  • shruti_25904 17w

    #rachanaprati51 @beleza_ @bhaijaan_goldenwriteszakir @isikaa @shivi_18 @anusugandh

    Ek ladki ki sarvshreshth aur manchaahi shringaar to uski muskurahat hoti hai ☺️☺️☺️

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    Shringaar karna usey bahut bhaata tha
    Sajti thi wo uske liye
    Haatho mein choodiyan, maathe par bindi
    Aankho mein kajra, gale me haar
    Laal saari tan par, lipstick uske hothon par
    Pairo par paayal, aur mukhde par foundation
    In sab ke bich wo ik gehna bhool rahi thi
    Yaad karne par bhi yaad aa nai rahi thi
    Jab sheeshe par nazrein daudai to paya
    Sab kuch to kar liya, par kuch to chhoot rha...
    Yaad aa hi gyi usey, apni komal si muskaan ki
    Jiske bina ye shringaar kabhi poorn ho hi nahi sakti
    ©shruti_25904

  • amateur_skm 17w

    #rachanaprati51 @beleza_

    ��सत्रहवां(17) शृंगार��


    दुनिया कितनी बड़ी है
    लेकिन मेरी कविताओं को छिपने के लिए
    नहीं मिला तुम्हारा हृदय

    मेरी कविताएं तुमसे
    उतना ही चिपक कर रहना चाही
    जितना तुम्हारे माँग में सिंदूर
    लेकिन उनकी किस्मत में आया
    विधवा का दुःख
    प्रेम के पन्नों पर लिखी तो गईं
    लेकिन बेरहमी से आंसूओं से धुली गईं

    जब तुम ब्याही जाओगी
    किसी दूसरे संग
    यज्ञ के पवित्र अग्नि में
    जलेंगी आम की लकड़ियां
    मेरी कविताएं दुःख में जलेंगी नहीं
    बस वो मर मर कर जिएंगी
    उनका जी चाहेगा
    बरगद के अर्थी पर जलने को

    जब किसी दूसरे के साथ
    तुम्हारे साड़ी का गांठ बांध दिया जायेगा
    फिर जब तुम लोगी सात फेरे
    मेरी कविताएं सात बार दम तोड़ेंगी
    वो समय ना जाने कैसे कटेगा
    हर फेरों पर
    तुम्हारे लिए दुआएं करूंगा
    तुम सुखी रहो और दोनों साथ रहना
    और मैं निर्लज्ज सा
    आत्मा में अपनी कविताओं के
    लिए सात बार राम नाम सत्य कहता रहूंगा

    देह तो कांपेगी
    साथ साथ आत्मा भी कांपेगी
    जब वो तुम्हारे माँग में सिंदूर भरेगा
    मेरे लिए दुःख का रंग लाल होगा
    और जब वो मंगलसूत्र पहनाएगा
    कविताओं का जी चाहेगा
    उसी मंगलसूत्र से लटक जाएं
    लेकिन विधवाओं को
    कहां मंगलसूत्र का सुख

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    तुम विदा हो जाओगी
    मेरे आत्मा का आधा टुकड़ा
    तुम्हारे कार के पीछे दौड़ता जायेगा
    वो जाकर छिप जायेंगी
    तुम्हारे सिंदूर के डिब्बे में
    और तुम्हारे साड़ी के पल्लू में

    तुम्हारा सोलह शृंगार
    पूरा हो जायेगा
    और इधर मेरी कविताएं करेंगी अपना
    सत्रहवां शृंगार
    वो लटकेंगी जाके बरगद के पेड़ पर
    होंगी एक हाथ में सिंदूर का डिब्बा
    और दूसरे हाथ में होंगी मंगलसूत्र

    आखिरकार मेरी कविताओं
    को अपना स्थान मिल जायेगा
    और शृंगार भी

    ~सौरभ

  • isikaa 18w

    #rachanaprati51
    @greenpeace767 @bhaijaan_goldenwriteszakir @beleza_ @aka_ra_143 @anusugandh

    सबसे पहले मैं @greenpeace767 दी का बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहूंगी जिन्होंने मुझे #rachanaprati50 का कार्यभार सौंपा और मुझे इस योग्य समझा ������
    मैं आप सभी को भी बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगी ���������� जिन्होंने "आजादी का महत्व" विषय पर बहुत ही सुंदर अपने- अपने विचार लिखे ।आप सभी की रचनाएं श्रेष्ठ थीं ।����������
    मैं आप सब से क्षमा चाहूंगी कि मैंने इतना समय लिया ,,वो अभी मेरी परीक्षाएं चल रही हैं जिसकी वजह से मैं इस पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही।।����इसके लिए मैं आप सभी से फिर से क्षमा चाहती हूं।।������
    अब मैं विजेता के रूप में @beleza_ , @aka_ra_143 aur @bhaijaan_goldenwriteszakir को घोषित करती हूं जिन्होंने बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत की।
    आप सभी को बहुत बहुत बधाई ������❤️❤️

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    आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद और आभार जिन्होंने मेरे इस विषय को पसंद किया और अपने अपने विचार व्यक्त किए। अब मैं आगे के संचालन का कार्यभार @beleza_ को सौंपती हूं।
    धन्यवाद।।
    ©isikaa

  • vaish_02 20w

    अब बस भी कर दे ,
    उसका तमाम इंतज़ार फरमाना ,
    इंतज़ाम में सोलह श्रृंगार चढ़ाना
    इत्र , पायल , चूड़ियां, अंगूठी ,गजरा
    झुमके , काजल , मेहंदी और तो और
    खुली जुल्फों से कहर ढाना
    अब बस भी कर दे

    रख दे वो चुन्नी ,
    वही अलमारी में बंद कर के
    अब बस कर दे उसे उड़ाना
    अगर उड़ जायेगा तेरे अंदर का खुला पंछी
    तो तेरे परिवार पे , थूकेगा ये जमाना
    अब बस भी कर दे
    यूँ खुली हवा में पंख फहलाना

    मैं जानती हूँ , वो जानता हैं
    मैं उसकी हूँ , वो मेरा हैं
    मगर यहाँ मसला इंसानियत का नहीं
    हमें जाती धरम को हैं निभाना
    अब बस कर दे
    यूँ प्रेम का पाठ पढ़ाना
    चल मिटा दे अब , वो नाम अपने ज़हन से
    अब बस भी कर दे
    जीते जी जन्नत के ख्वाब सजाना
    अब बस भी कर दे ,./

    ©Vaishnavi ♥️

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 24w

    #Rachanaprati all

    .
    ©bhaijaan_goldenwriteszakir

  • aka_ra_143 28w

    श्रगांर

    श्रगांर में कमी लगी उसे
    तो झुमके खरीद ले आया
    माथे की बिंदिया ले आया
    आंखों का कजरा ले आया
    गले का खूबसूरत हार ले आया
    मुझे खुश देखकर वो तो खुद
    ख़ुशी से फूला न समाया
    ©aka_ra_143