#rachanaprati174

11 posts
  • jk12345 4w

    School

    Nanhe khwab ko udan jisne di wo school hamara
    He yaden khoobsurat bachpan ki wo school hamara
    ©jk12345

  • alkatripathi79 7w

    Rachanaprati175

    सबसे पहले @gannudairy_ भाई का आभार की उनको मेरी रचना पसंद आई ...
    श्रृंखला को आगे बढ़ाने हेतु अगला विषय है ( हिम्मत, साहस )
    समय सीमा 20 मई शाम 6 बजे तक
    ©alkatripathi79

  • gannudairy_ 7w

    #rachanaprati175

    @camyyy जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया कि आपने मुझे मौका दिया कि मैं संचालन करूं... बहुत आनंद आया... आप सभी की रचना अप्रतिम थी... बहुत मजा आया पढ़ के महसूस करके...

    मैं @alkatripathi79 दीदी को विजेता घोषित करता हूँ और आग्रह करता हूँ कि स्कूल में तो injection से बच गयी थी यहाँ संचालन करके हमे नए विषय का injection दें..!!!

    ©gannudairy_

  • camyyy 7w

    स्कूल

    तेरी खुशियों का घर
    तेरे ख्वाबों का समंदर
    तेरे बगिए का खिलता हुआ फूल हूं मैं
    और कोई नहीं तेरा स्कूल हूं मैं।

    तेरे बचपन की निशानी
    तेरे आंखों की वो पानी
    तेरे बीते कल का धूल हूं मैं
    और कोई नही तेरा स्कूल हूं मैं ।

    जहां उम्र तेरा गुजरा
    जहां गलतियां तेरा सुधरा
    जहां दोस्तों की टोली
    तेरी अंगुली था पकड़ा वही मूल हूं मैं
    और कोई नहीं तेरा स्कूल हूं मैं।

    जो स्वप्न तुझे दिखाए
    तुझे सजग पथ पर लाए
    तेरी गलतियां पिरोके
    तुझे मानवता सिखाए वही रूल हूं मैं
    और कोई नहीं तेरा स्कूल हूं मैं।

    तुझे रूला के जो हसाएं
    तुझे दौड़ना सिखाए
    तेरा हाथ पकड़ के नई बात राह तुझे दिखाये
    तेरी पंख को उड़ना सिखाए वो शूल हूं मैं
    और कोई नही तेरा स्कूल हूं मैं।
    ©camyyy

  • khaire_patil 7w

    देर तक सोता था, स्कूल जाने रोता था
    छोटा बच्चा था, पढाई में थोडा कच्चा था

    स्कूल तो पसंद नहीं आता था
    लेकीन ऐसा कोई था,
    जिसके वजाह से स्कूल जाता था
    पढाई करना भी तो
    उसिने ही तो सीखाया था

    दोस्त सारे आज बिखरे है
    फिर भी जब जरुरत लगती है
    ये बिखरे हूये दोस्त ही तो आते है
    वो यार ही अलग थे
    जो एक दुसरे पे जान छिडकते थे

    वो स्कूल नहीं, पूरी दूनिया थी हमारी
    हमारा पेहला ऐहसास, दुसरा घर थी हमारी
    जीवन की हर अच्छी बुरी चीज
    स्कूल ने ही तो हमें थी सीखाई
    ©khaire_patil

  • anusugandh 7w

    स्कूल के दिन

    जिंदगी के सुंदर पन्नों में एक अध्याय जुड़ गया
    बड़े हुए तो स्कूल के साथ यादों का कारवां चल पड़ा

    जाने का मन ना हो तो तबीयत बिगड़ने का बहाना अंताक्षरी का मजा आता जब होता मौसम सुहाना

    ना जनरेटर थे न थे कोई एयर कंडीशनर
    तब भी खुश रहते थे ना रहती थी कोई फिकर

    गेम्स पीरियड का रहता था तब बहुत इंतजार
    होती थी वाद-विवाद प्रतियोगिता हर शनिवार

    बारिश के दिन साइकिल पर होती थी मस्ती
    भीगती थी किताबें माँ दिखाती थोड़ी सख्ती

    बेफिक्र से दिनों की याद में गुजरती है अब रतिया सोचते क्यों बडे हुए अब ना मिलती कोई छुट्टियां

    यूं ही याद आ जाते ज़हन में वो स्कूल के दिन
    कितने सुहाने थे वो खुशनुमा बीते पल छिन्न
    ©anusugandh

  • gannudairy_ 7w

    ये मेरी जिंदगी का सबसे हसीन समय था बहुत शैतान था मैं... पढ़ो हँसी आयेगी जिन्होंने ये सब किया है वो Emotional भी होंगे..
    #rachanaprati174
    @anusugandh @mamtapoet @_do_lafj_ @alkatripathi79 @jigna_a

    हो जाना सवेरा होना थोड़ा थोड़ा अंधेरा,
    दादा कहता पुत्र मेरा अभी सोया हुआ चल उठ शेरा,
    बैठ के मार चौकड़ी देख मम्मी तेरी दूध का ग्लास लिए खड़ी,
    आँख आधी खुलती फिर सो जाता था,
    पांच मिनट और यार पांच मिनट करते फिर सो जाता था,
    पांच मिनट में पता नहीं दिन कैसे दिन चढ़ जाता,
    सूरज मामा आके खिड़की पे अड़ जाता,
    छोटा सा छोटी निक्कर डाल बाल सेट कर बेड पर चढ़ जाता,
    मम्मी ये स्कूल वाले नहीं ये अच्छे नहीं लगते,
    मैं बिना फिते वाले डालूंगा इसी बात पर अड़ जाता था,
    उठा बस्ता Van में गाने गाते होते थे,
    छोटे छोटे बीच बैठ महफिल लगाते होते थे,
    छोटे छोटे जाने लगे स्कूल लगा के tie belt सुन्दर लगते बड़े,
    डेढ़ घण्टे में पहुँचते स्कूल जाते ही दिखते झूले,
    याद है मुझे जाते ही लेना मैं Slide वाला,
    Slow तो अब हो गया लड़का पहले तेज था बड़ा,
    कपड़े गंदे कर लेते इक दूजे से लड़ लेते,
    पीरियड चौथा शुरू होते ही नजर टिफिन पर रख लेते,
    मास्टर को पता ना लगे चोरी चोरी रोटी खा लेते,
    रब जाने इक हाथ से कैसे तोड़ के अचार लगा लेते,

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    स्कूल

    (पहले अनुशीर्षक पढ़ें)
    क्लास मॉनीटर से शुरू से हमारी दुश्मनी सी थी,
    जो लिख नाम टीचर को जाती थी,
    वापिस घर को चलते Van जहाज सी हो जाती,
    तुम्हारी का पता नहीं भाई हमारी तो तीसरे दिन पंचर हो जाती,
    सच्ची इशू याद बड़ा साथ बैठ Social की कॉपी पूरी करते थे,
    भाई साहिल साँस अटक जाता है पेट में मुक्का नहीं मारते,
    (ये दोनों बेंच पार्टनर थे)
    आज भी याद दिल पक्के पेंसिल कच्ची होती थी,
    डण्डे भी खाए छठी तक मुर्गा बनके भी देखा है,
    PTM से पहले मास्टर को 2 3 बार माथा भी टेका है,
    (शिकायत लगा देता था वो )
    अंडे आगे 2 टेस्ट था मैथ्स की पहेलियों का,
    मिंटो में बाहर निकल जाता टोला 7-8 यार बेलियों का,
    मुझे Table Tennis मैच याद क्रिकेट Ground याद है,
    मुझे Water Point याद पानी के लाए बहाने याद,
    दिन दिवाली का याद प्रिन्सिपल ऑफिस आगे बजाया पटाखा था,
    फिर ऐसे घर नहीं आए Parents को बुलाया था,
    Pen Fighting नहीं भूला ना भुला चोर पर्ची,
    रब जैसे टीचर याद ना भुला स्कूल की मस्ती,
    सोचते थे कब पीछा छूटेगा फिर ऐश से जिएंगे,
    अब लगा पता कैद हो गए हैं फिर नहीं ऐश ले पाएंगे,
    यारो लिखा तो बहुत कुछ था पर इतना ही सुना पाया,
    माफ़ करना मित्रों कॉपी घर भूल आया... !!!

    ©gannudairy_

  • gannudairy_ 7w

    #rachanaprati174

    @camyyy जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद आपने मुझे चुना... आशा है मैं इस कार्य को सम्भाल पाउंगा.... आप सबके साथ की आवश्यकता है..
    जैसे कि पहले विषय "बचपन" था तो हम बचपन से विद्यार्थी जीवन में जाते हैं और स्कूल में खूब मस्ती करते हैं
    तो #rachanaprati174 का विषय है "स्कूल/विद्यालय/शिक्षालय और वो यादें"

    समय सीमा - 17 May मंगलवार दोपहर 12 बजे


    ©gannudairy_

  • camyyy 7w

    रचनाप्रती

    सभी का तहे दिल से शुक्रिया की आपलोगो ने अपना कीमती समय निकालकर ,इतनी सुंदर रचनाए प्रस्तुत की।
    सभी को बहुत बहुत धन्यवाद
    स्पेशल थैंक्स @anusgandh ma'am & @kamini_bhardwaj1 ma'am को जो उन्होंने मेरा invitation accept Kiya aur बचपन विषय पर लिखकर हमे कृतार्थ किया।
    Thanku so much ma'am
    @gannudairy_
    @psprem
    @satender_tiwari
    @aryaaverma12
    @khaire_patil
    को शुक्रिया की उन्होंने इस रचनाप्रति में participate किया।आपलोगों की बचपन पर लिखी कविताएं इतनी अच्छी थी की दिल को छू गई ,और बचपन की याद दिला गई।
    बेहद उम्दा प्रस्तुति थी आप सब की।
    आज के दो विजेता जिनकी रचना उत्कृष्ट रही उनके नाम है
    @gannudairy_
    @aryaaverma12
    आप दोनो की रचनाए लाजवाब थी
    मैं @rachanaprati174 ke sanchalan ka bhar @gannudairy ko सौंप रही हूं।
    धन्यवाद
    ©camyyy

  • alkatripathi79 42w

    #rachanaprati174
    @gannudairy_

    #rachanaprati77
    @shayarana_girl
    स्कूल का पहला दिन

    मैं जब छोटी थी 3 साल की स्कूल नही जाती थी,तब 5 साल की उम्र में स्कूल जाते थे बच्चे सीधे पहली कक्षा में... मेरी दीदी और दोनों भईया स्कूल जाते थे... और उनके स्कूल जाने के पहले से लेकर जाने के बाद तक मैं राग सुनाती थी..... मुझे भी जाना है स्कूल मुझे भी जाना है,, दीदी के साथ जाना है.... माँ बहुत परेशान होती थी... एक दिन माँ बोली दीदी से एक बार ले जाओ इसे अपने साथ एक बार स्कूल देख लेगी तो चुप हो जाएगी.... दीदी तो मानने से रही... माँ भी मेरे आँसुओ के आगे विवश हो के एक दिन दीदी की टीचर से बात की जो मेरे मुहल्ले में ही रहती थी... उन्होंने कहा कोई बात नही भेज दीजिए... अब दीदी मजबूर थी ले जाने को......

    मैं उस दिन सुबह इतनी खुश थी जैसे चाँद सितारे हथेली पे दीदी रखने वाली हो,, मैं चली गई दीदी के साथ,, कक्षा में पहुंची तो दीदी की सभी सहेलियाँ मझे प्यार करने लगी.....

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    तभी एक लड़की आई और बोली अरे सुनो सब,, सुई देने वाले आए हैं.... उस दिन स्कूल में टीकाकरण था बच्चे सभी आए इसलिए किसी को बताया नही गया था.... और मेरी ओर देख पूछी अच्छा आज आई हो शायद सुई लेने.... मेरे तो काटो तो खून नही जैसी हालत थी.... जितना उस दिन तक स्कूल आने के लिए मैं रोई थी घर में उससे ज्यादा उस आधे घंटे में स्कूल में रो ली....

    लेकिन दीदी खुश थी मुझे घर पहुंचाने की अनुमति ने उनको भी सुई से बचा लिया.... लेकिन मेरी हालत ऐसी थी की सुई के डर से ज्यादा मैं स्कूल से डरने लगी थी...
    ©alkatripathi79

  • mamtapoet 99w

    बचपन के वो दोस्त

    बचपन को सोचू तो कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं,
    कुछ है खुशियों के खजाने तो कुछ आंखे नाम कर जाते है,
    रिश्तों को निभाने की चिंता न थी,
    न परवाह दुनियादारी की थी,
    दोस्ती में थे सभी रिशतें और स्कूल ही पूरी दुनिया थी,

    दोस्त यदि नाराज हुआ तो गुमसुम मेरा जहा हो जाता था,
    उसे मनाने कभी अध्यापक तो कभी पूरा परिवार खड़ा हो जाता था,
    छोटी छोटी बातों में नाराजगी,और हर लम्हे में चेहरे पर हंसी थी,

    किसी की मुस्कान गजब थी ,किसी की आवाज में खनक थी,
    किसी में लीडरशिप की कशिश थी,
    किसी की हर बात में कसम थी,
    किसी के टिफिन की महक जोरदार थी,

    चित्रकला में माहिर कोई तो कोई अभिनय,नृत्य में था निपुर्ण,
    सब मे अपनी अपनी ख़ूबी, हर एक था किसी न किसी में प्रवीण,
    जब भी किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को देखते वहीं बनने के ख्वाब हम देखते,
    स्लेट ,पेंसिल ,ब्लैकबोर्ड के सिवाय श्वेत श्याम न कुछ भी,
    सपनें थे रंगीन और वो दुनिया थी बड़ी हसीन,

    ©mamtapoet