#rachanaprati112

12 posts
  • faiza_noor 8w

    #rachanaprati113

    आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया कि आपने मुझे सराहा और मेरा हौसला बढ़ाया और @kshatrani_words ji का भी धन्यवाद करना चाहुंगी जिन्होंने मुझे संचालन की भूमिका सौंपकर मेरा मान बढ़ाया।

    आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमसे न जाने कितना कुछ पीछे छूट जाता है एक मुस्कराहट ही है जो हर लम्हा हमारे साथ होती है, हमें ऊर्जावान दिखाने के लिए, हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए, और हमें खुबसूरत इंसान बनाने के लिए, इसलिए
    आज सुबह की शुरुआत, मुस्कुराहट के साथ

    आज की अभिव्यक्ति का विषय है- "मुस्कुराहट"
    ©faiza_noor

  • kshatrani_words 8w

    सबसे पहले sir @goldenwrites_jakir ji , jigna didi ji, ma'am @piu_writes ji , ma'am @/faiza_noor ji , sir Suresh ji , Sir anandbarun ji का तह-ए-दिल से आभार कि उन्होंने इस प्रतियोगिता में भाग लेकर हर बार की तरह इस बार भी सफल बनाया । आप सभी का और उनका भी बहुत बहुत आभार जिन्होंने समय निकाल कर आपकी अपने में ही एक से बढ़कर एक कविता को पढ़ा और सराहा।

    बात जब निर्णय और विजेता घोषित करने की आती है तो वो सच में बहुत कठिन सा प्रतीत होता है। वहीं दूसरी ओर आप सभी गुणिजनों आंकने के काबिल भी नहीं है हम। लेकिन जब दायित्व सौंपी गई है तो निभाना भी जरूरी हो जाता है, इसलिए कोई भी त्रुटि हुई हमसे तो नादान समझ कर आप सभी हमे माफ कर दीजिएगा।

    • Sir @goldenwrites_jakir ji ने जहां दी गई पंक्ति का भरपूर और एकदम सटीक प्रयोग करते हुए टूटे/हारे हुए इश्क को नई जां देने की बात को लफ्ज़ों में बड़े ही खुबसूरती से परोस कर रख दिया।

    • तो वहीं @jigna_a दीदी ने मार्मिक विषय चुन कर बाप और बेटी की भावनाएं बड़े ही उम्दा तरीके से कविता लिख डाली, जिसे पढ़ कर एक पल के लिए आंसू आ गए।

    • दूसरी ओर ma'am @piu_writes ji ने इश्क में मिलती कठिनाईयां और ना टूटने की बात को बड़े ही प्यारे और मजबूती से लिख दी।

    • Ma'am @faiza_noor ji ने जिंदगी की उतार-चढ़ाव, कठिनाइयां, परेशानियों को कविता का रूप देकर, उनसे लड़ने की बात लिख कर मानो हारे हुए को जैसे जान दे दी।

    • Sir @suresh_28 ji ने भी वहीं टूटे दिल की कशमकश की चाह को पूरी करने के लिए अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो कि दास्तां अभी और भी है को बड़े ही खूबसूरती से लिख डाला।

    • तो वहीं Sir @anandbarun ji ने सारी मुश्किलों को लड़ने के लिए बड़े ही बेहतरीन तरीके से अपने शब्दों के तार को जोड़ कर बड़े ही खूबसूरती से अपनी कविता के जरिए उलझन में पड़े व्यक्ति को नई सकारात्मक ऊर्जा दे दिए ।



    मेरे लिए तो आप सभी ही विजेता हैं , लेकिन एक निर्णायक के रूप में मैं @goldenwrites_jakir जी को विजेता चुनती हूं।

    पुनः अगर कोई त्रुटि हुई हो तो माफ़ी मांगते हैं आप सभी गुणिजानों से । ��

    सहृदय धन्यवाद।

    #rachanaprati112 #rachanaprati113

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    #rachanaprati113

    मेरे लिए तो आप सभी ही विजेता हैं , लेकिन एक निर्णायक के रूप में मैं #rachanaprati112 @goldenwrites_jakir जी को विजेता चुनती हूं।

    #rachanaprati113 के लिए मै ma'am @faiz_noor जी को आमंत्रित करना चाहती हूं। आपको बहुत बहुत बधाई ma'am.

  • anandbarun 8w

    @kshatrani_words #rachanaprati112
    समयसीमा में पूरा करना मेरे लिए मैराथन हो गया। ह:।

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    ये जीवन है..

    'अभी पर्दा न गिराओ, ठहरो,
    कि दास्तां आगे और भी है..'
    हार तो बस इक पड़ाव सा है
    कि चलना आगे और भी है
    ठोकरों की बुरी नीयत नहीं है
    कि सीखना आगे और भी है
    सामने जो ऊँची दीवार सी है
    कि रास्ता आगे और भी है
    अंधेरे कितने भी डरा देती है
    कि सवेरा आगे और भी है
    जब कोई राह दिखती नहीं है
    कि ढुंढ़ना आगे और भी है
    सफर पर कदम बढ़ता रहा है
    कि आसरा आगे और भी है
    उम्मीद का दामन ना छोड़ा है
    कि जीना आगे और भी है
    जो आँधियों में भी डटा रहा है
    कि जीतता आगे और भी है
    जो मुश्किलों से हार न माना है
    कि रहे ज़िंदा आगे और भी है
    ©anandbarun

  • suresh_28 8w

    अभी न पर्दा..

    अभी न पर्दा गिराओ,ठहरो,
    कि इन मयखानो को खुला रहने दो!
    गम के खरीदार कहां मिलते हैं,इनके सिवाय,
    कि दर्द-ए-जिगर को यूंही खुला बहने दो!
    टूटे दिल,कशमकशऔरअधूरी हसरतें हैं,
    ठहरो,कि दास्तां आगे और भी है!
    ©suresh_28

  • faiza_noor 8w

    इस पंक्ति को लेकर लिखना आसान काम नहीं था मेरे लिए फिर भी मैंने एक छोटा सा प्रयास किया है गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूं������

    मश्क़ - अभ्यास

    #rachanaprati112 @anusugandh ji @kshatrani_words ji @rangkarmi_anuj ji @goldenwrites_jakir ji

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    जिन्दगी रंगमंच सा सफ़र है,
    उसमें उतार - चढ़ाव का भंवर है,
    इसके अच्छे - बुरे कई हिस्से हैं,
    नज़रंदाज़ करने को इसके बुरे किस्से हैं,
    क्योंकि.........
    देखने को इसके अच्छे पहलू और भी है,

    "अभी न पर्दा गिराओ, ठहरों.....
    कि दास्तां आगे और भी है,"

    तरक्की की राहों में आती है कठिनाईयां,
    मेहनत और लगन से दूर होती है परेशानियां,
    नामुमकिन के पीछे छिपी होती है मुमकिन की रोशनी,
    मश्क़ से मिलती है कामयाबी की ज़मीं,
    मंजिल को पाने में मेहनत का नशा और ही है,

    "अभी न पर्दा गिराओ, ठहरों....
    कि दास्तां आगे और भी है,"

    ऊंचाईयों से उलझी हुई है आंखें हमारी,
    ज़मीं पर आकर नहीं टिकतीं यें बेचारी,
    कसूर इनका नहीं है ज़मानें के ढ़ंग है,
    जो इंसान को बनाते बेहुदा बेरंग है,
    ज़मीं से जुड़े रहने का मजा और ही है,

    "अभी न पर्दा गिराओ, ठहरों....
    कि दास्तां आगे और भी है,"
    ©faiza_noor

  • piu_writes 8w

    अभी पर्दा ना गिराओ दास्ताँ अभी और भी है
    ये इश्क़ नहीं आसां इम्तेहान अभी और भी है
    होंठों से इंकार, दिल में बातें और भी हैं
    मगरूर तू लेकिन ख्वाबों में मुलाकातें और भी है
    ©piu_writes

  • goldenwrites_jakir 8w

    #112 ( 3 )

    अभी ना पर्दा गिराओ , ठहरो , कि दास्तां और भी है
    रूह प्यासी दिल बेचैन इश्क़ कि कहानी में मोड़ और भी हैं
    कल फिर आऊंगा तुम्हारे लिए
    हर बार कि तरह इक और
    जन्म लेकर - अभी अधूरा ही सही कल होगा मुकम्मल इश्क़ मेरा वो इंतज़ार कि सुबह आनी और भी है
    अभी ना पर्दा गिराओ ,ठहरो, कि दास्तां और भी है ,,
    तुम बिन आज यादों का आईना देख रही मेरी ज़िन्दगी की तस्वीर
    कल मेरी परछाई में साया तेरा मेरे साथ और भी है
    आज रो लेने दे तन्हा ज़ी भरकर
    कल मुस्कुराना तेरे साथ और भी है अभी ना पर्दा गिराओ , ठहरो , कि दास्तां और भी है ,,,,
    छुपाकर रखा किताब के उन पन्नो में गुलाब तेरा
    जैसे जगमगता हो चाँद खुले आसमाँ में ----
    याद आता बहुत वो लम्हा ज़ब निकाल कर अपनी आँखों से काज़ल मेरे दिल पर तुम लगाती थी ना लगे किसी की नज़र मुझे वो दुआ करती थी - छुपाकर अपने आंचल में दिल कि आरजू बताती थी
    वो लम्हें वो पल सब याद बहुत आते
    खुदाया मेरे अब गिरादो पर्दा गम ए ज़िन्दगी का
    मुस्कुराना चाहता है ये दिल यार के पहलू में और भी है ...
    ...........
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 8w

    #112 ( 2 )

    अभी ना पर्दा गिराओ, ठहरो , कि दास्तां और भी है
    अभी तो आगाज़ कि चाँदनी इश्क़ कि जमीं पर उतरी
    मुकम्मल सहर कि सुबह बाकी और भी है ,,
    जुगनु बनकर ही चमका है चाहत का सितारा
    दिल के आसमा पर इश्क़ का चाँद रौशन होना बाकी है
    अभी ना पर्दा गिराओ ठहरो कि दास्तां और भी है
    अभी ना पर्दा गिराओ ठहरो कि दास्तां और भी है ,,
    रंग बदलेगी मोहब्बत उस राह के हम मुसाफिर
    ज़माने का डर - अपनो की ख़ुशी - धर्म कि बेड़ियाँ
    पहनना और भी है ,,
    इतिहास क्या लिखा इश्क़ के पन्नो पर - उस किताब में
    अपना लहू दिल का बहाना और भी है
    अभी ना पर्दा गिराओ ठहरो कि दास्तां और भी है
    अभी ना पर्दा गिराओ ठहरो कि दास्तां और भी है....
    कौन किसको कब तलक याद याद रखेगा
    बिछड़ जाने का वो दर्द और भी है
    तन्हाई पूछेगी इंतजार से हमारे मिलन का पता
    पलकों में छिपे हर इक दर्द कि वजह
    वो रात वो दिन ज़िन्दगी में आना और भी हैं
    अभी ना पर्दा गिराओ ठहरो कि दास्तां और भी है
    लगाकर रखना चहरे पर नकाब पर नकाब वो ख़ामोशी वो झूठी मुस्कान का सफ़र ज़िन्दगी और भी है
    अभी ना पर्दा गिराओ - अभी ना पर्दा गिराओ
    ठहरो ज़िन्दगी कि दास्तां और भी है
    और भी है और भी है ............
    ©goldenwrites_jakir

  • jigna_a 8w

    बाऊजी साधारण सी नौकरी करते,
    दो बेटियों के बाप, हमेशा ड़रते,
    बड़की का रिश्ता तय हुआ क्या,
    बाऊजी को जैसे साप सूँघ गया।

    खाने के निवाले उनके कम हो गए,
    जाने किन ख़्यालों में गुम हो रहे,
    बड़की अपनी देखती थी सबकुछ,
    कि उसके पिता कोई बोझ सह रहे।

    इक रोज़ बाबा से बोली ये बिटिया,
    बाबा खिलौना ना मैं कोई गुड़िया,
    क्या कोई लगाएगा मेरी बोली,
    बेटी आपकी नहीं गुड़ियों से खेली।

    मैं तोड़ आई उन झूठे रिश्तों के जाले,
    जिनको दहेज के लालची सब पाले,
    संतान आपकी, क्या बेटा क्या बेटी,
    सब सहूँगी कड़ी धूप और छाले।

    अभी ना पर्दा गिराना, ठहरो,
    कि दास्तां आगे और भी है,
    हौसलों की जीत की,
    कहानी विजय के शोर की है।

    ©jigna_a

  • goldenwrites_jakir 8w

    #rachanaprati112

    अभी ना पर्दा गिराओ , ठहरो , कि दास्तां आगे और भी हैं
    ज़िन्दगी गुजर रही तन्हाई की गलियों में इश्क़ दिल में और भी है
    आज गम का साया आँखों से बरसात जुदाई कि कर रहा है
    कल वफ़ा के फ़ूल लबों पर मुस्कान बनकर खिलेंगे
    वो ज़ज़्बातों का एहसास दिल में ज़िंदा आज भी हैं
    अभी ना पर्दा गिराओ ठहरो कि दास्तां आगे और भी है !¡!
    ©goldenwrites_jakir

  • kshatrani_words 8w

    #rachanaprati112

    सर्वप्रथम @anusugandh मैम का बहुत धन्यवाद कि मुझे इस बार के #rachanaprati112 का संचालन करने का मौका दिया । आपका बहुत आभार।

    जीवन के ऐसे कई पढ़ाव पर हमें ऐसा प्रतीत होता है कि बस अब हम हार गए हैं, अब हमसे और नहीं लड़ा जाएगा। शायद यही वह वक्त होता है, जब अगर हम धूल में गिर कर दुबारा उठे तो और मजबूती से और दोगूनी ताकत से लड़ते हैं, तब फकत जीत ही हासिल होती है ।
    इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए गुलज़ार साहब की कविता का शीर्षक - "अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो , कि दास्तां आगे और भी है!" को इस बार का विषय चुना है। आप सभी से अनुरोध है इस पंक्ति/शीर्षक को आप अपने कविताओं में प्रयोग करें, और बढ़-चढ़ कर इस प्रतियोगिता में भाग लेकर इसे सफल बनाएं।

    विषय - अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो , कि दास्तां आगे और भी है!
    समय सीमा - कल रात 8:00 बजे तक।

    आप सभी को शुभकामनाएं और धन्यवाद !

  • anusugandh 8w

    मैं एक बार फिर@aryaaverma12 जी का धन्यवाद करती हूँ। आप सभी एक से एक बढ़कर कलमकार है। सभी गुणीजनों ने अपनी कलम का जादू बिखेरा है मेरी तरफ से सभी विजेता हैं।
    #रचनाप्रति 112 के लिए प्रेम जी को आमंत्रित करती हूँ कि वो आगे का संचालन संभाले ।
    आपको बहुत-बहुत बधाई प्रेम जी
    @psprem
    ©anusugandh