#rachanaprati106

14 posts
  • jigna_a 10w

    #rachanaprati106 #rachanaprati107 @deepajoshidhawan मुझे लगता है दी अनुपस्थित है @lazybongnesd आप संचालन करें।

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    #rachanaprati106 के अंतर्गत बहुत सारी उत्कृष्ट रचनाएँ पढ़ने को मिली हमें। हरएक मन विविध ख़्वाहिशों से भरा है। हर ख़्वाहिश का एक अलग ही रस है, रंग है और रूप है। @anandbarun ji की शैली हो, @amateur_skm सौरभ भाई का अद्भुत अंदाज़, @glodenwrites_zakir भाईजान की भावपूर्ण रचनाएँ, @loveneetm भाई की सशक्त लेखनी @mamtapoet की सकरात्मक रचना @lazybongness की भावों के समंदर में गोताखोरी, हरकोई अपनेआप में उत्कृष्ट था।

    मगर आज की विजेता कृति है @deepajoshidhawan दी की मार्मिक रचना। झकझोर दिया, भाव से भिगो दिया। आपको अनेकों बधाई। आगे का संचालन आपके हाथों में दी।

  • loveneetm 10w

    ख़्वाहिश

    खुदा से मिलने की ख़्वाहिश खुदा से,
    कहीं रह ना जाएँ यह ख़्वाहिश अधूरी।

    है मुझको भरोसा,खुदा खुद से ज्यादा,
    कि मंजिल मिलेंगी,ख़्वाहिश होगी पूरी।

    हर ख़्वाहिश में तुम हो,हो तुम ही खुदा भी,
    फिर क्यूँ खुदा मुझसे रखी है दूरी।

    तुम ही तुम हो शामिल मेरी जिंदगी में,
    फिर कैसें रहेगी यह ख़्वाहिश अधूरी।
    ©loveneetm

  • anandbarun 10w

    @jigna_a #rachanaprati106
    विषय की मांग ना हो पाएगी पूरी..

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    ज़िन्दगी

    मन परिंदा सोचता है फिर यही
    क्यों अड़ते रहे हैं पंख मेरे कहीं
    होती है ख़्वाहिशों की मोल भी
    चुकाते कम पड़ जाती ज़िन्दगी
    न रहे कुछ भी, व्यर्थ सब खाली
    हैं बेजार हम खोदते क्यूँ बेखुदी
    जान तो बेजान सी धूल में सनी
    अनमने, घने पर्तों में रहती सोई
    उगे उससे फिर उसी में है मिली
    वृत्त सी जीवन चक्र यह फिरती
    परिधि पर चेतना सी है खिलती
    झलकती जो नैसर्गिक है रौशनी
    बसे अंतर भावों भरी ऐसी लगी
    चूकें ना हम, पल-पल की खुशी
    ©anandbarun

  • amateur_skm 10w

    क़फ़स/पिंजड़ा

    मन का परिंदा गाता एक गीत नवीन सा,
    शब्द हैं धुंधले लेकिन झंकार प्राचीन सा,
    स्मृति के झूलते वृक्ष पर
    जी चाहता की बन जाऊं
    चमगादड़ और देख लूं
    इस उल्टी दुनिया को सीधा
    हैं चिट्ठियों के ढेर सुलगते
    जी चाहता की बन जाऊं
    दीमक और चट कर जाऊं
    अपनी उदासी उन संग
    या बन जाऊं मकड़ी
    जो ढोती है उदासी का घर
    जीवन भर और
    उसी संग मर जाती
    लेकिन मन के परिंदे को कहां आजादी है
    अपने मन के करने की
    मन का परिंदा ये क़फ़स छोड़ किधर ही जायेगा,
    खुले आसमां में भी ख्वाहिशें घोंट मर ही जायेगा।

    /सौरभ

  • anandbarun 10w

    मन मतंग

    मन परिन्दा सोचता है...
    ख़्वाहिशें पड़ गयी भारी
    ज़िन्दगी ये आधी-अधूरी
    ओट में छुप लेती उबासी
    थी परायी, चाह उसी की
    जो पाया वह भी गँवा दी
    मीठी टीस यादों की हँसी
    कभी आँखें यूँ ही भर गई
    भीड़ में भी रहती तनहाई
    बस डसती रहती रुसवाई
    मन मसोस कर कुम्हलाई
    कभी होठों पे स्मिति छाई
    धूप-छाँव में भूली ज़िंदगी
    तू कितनी लगती तिलस्मी
    तुझे पहचानते हो गई देरी
    नहीं कभी से देर ही भली
    खुशियाँ बसे ना दूर कतई
    हर धड़कन में ज़िंदगी की
    ©anandbarun

  • mamtapoet 10w

    ख्वाहिशें

    मन परिंदा सोचता है
    तू उड़ गगन में उपर ही ऊपर
    पाँव रख अपने सदा जमीं पर।

    मन परिंदा सोचता है
    क्यों रिश्तों को सोने से तोलता है,
    दिल से निभा, क्यों तू कड़वा बोलता है,

    मन परिंदा सोचता है
    भीड़ भरा ख्वाहिशों का शहर,
    तू चुन ले जरूरतों की डगर।

    मन परिंदा सोचता है
    न जाने कौनसी बन जाए अंतिम उड़ान
    कम न खुद को आंक, स्वयं को तू पहचान।

  • goldenwrites_jakir 10w

    ख्वाइश ✍️

    मन परिंदा सोचता है तेरी मोहब्बत की साख पर
    ज़िन्दगी का गुलिस्तां सज़ा रहे
    कलम से तुझे लिखूं हर इक हर्फ़ में कागज़ पर
    मेरी रूह तेरी रूह में समाती रहे
    ख़्वाइश दिल की बस इतनी सी तेरे लबों की मुस्कान
    बनकर मेरी ज़िन्दगी तेरी किस्मत लिखती रहे ....
    ©goldenwrites_jakir

  • lazybongness 10w

    मन परिंदा सोचता है,
    ख़्वाहिशों की शोखियों में डूब जाए।
    चखकर इश्क़ की सरफरोशी
    के आज अरमानों के गिरफ्त में बंध जाए।।

    हो थोड़ी नोकझोंक, फिर निकले गिले-शिकवे,
    बहते टूटे अरमानों को क्यों न ज़रा हवा दे।

    माना की तकदीर की गिरफ्त में गिर्दाब बहोत है,
    फिर भी,,..
    ख़्वाहिशों के आसमाँ में मन परिंदा पंख फैलाए उड़ता है।।

    ©lazybongness

  • deepajoshidhawan 10w

    #rachanaprati106

    @jigna_a बहुत दिनों बाद वापस लौट रहे हैं हम।
    आपका विषय शायद इसका कारण है।
    ये ख़्वाहिश अपने लिए नहीं, सब उन माता पिता के लिए
    है जिनके बच्चे पढ़ लिख कर विदेश चले गए और वहीं के
    होकर रह गए। उन घरों में विदेश से भेजे गए पैसों से सब
    सुविधाएं थीं लेकिन माँ बाप की आँखों की चमक कहीं गायब
    थी।
    वो पल दो पल को तब दिखी जब वो अपने मोबाइल पर अपने
    उन नाती पोतों की तस्वीरें दिख रहे थे, जिनको उन्होंने कभी
    देखा ही नहीं।
    मेरी ख़्वाहिश यही है कि लोग इस बात को समझें कि पैसे सिर्फ
    सुविधाएं दी सकते हैं, खुशियाँ नहीं।
    जिन्होंने इस लायक बनाया कि देश विदेश में नाम हो सके,
    उनके पास आने का वक़्त निकालना ही होगा।

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    मन परिंदा सोचता है दूर गगन उड़ जाने को
    ख़्वाहिशों की दिखायी राह पर मुड़ जाने को

    ज़िम्मेदारियाँ आस लगाए बैठी हैं इन्तज़ार में
    इस बार परिंदा लाएगा खुशियाँ नयी बहार में

    रे मन चाहे जितनी ऊँची उड़ान तू भर आएगा
    थक कर अपना घोंसला याद बहुत ही आएगा

    सात समुंदर पार भले सपने नए सजाना तुम
    बाट जोहते पथराई ऑंखें ना भूल जाना तुम
    ©deepajoshidhawan

  • jigna_a 10w

    खो देने की ख़्वाहिश,
    और पास रखने की जद्दोजहद,
    इश्क़ में दोनों जायज़ है,
    दोनों में ही,
    एड़ी चोटी का ज़ोर लगाया जाता,
    मन परिंदा सोचता है,
    जिस ऐतबार के शज़र पे,
    अपना घोंसला बनाया है उसने,
    उसका हश्र तो सोचा भी ना जाता,
    ना खो देने की और ना ही पाने की,
    रुतबा इश्क़ का कायम रहे,
    बस इतनी अदना सी,
    है मन परिंदे की ख़्वाहिश।
    ©jigna_a

  • psprem 10w

    "मन परिंदा है"

    मन तो एक परिंदा है,जाने क्या क्या सोचता है।
    कभी खुशी कभी गम में रहकर सब कुछ झेलता है।
    कभी आशा कभी निराशा, में डूबा रहता है।
    कैसे जीवन यापन हो जीने की कला सोचता है।
    कभी कुछ करता कभी कुछ करता,पल पल बदलता है।
    कभी प्यार कभी तकरार,कभी खुद ही रूठा रहता है।
    कभी बड़ी बड़ी बातें औरों को खूब सुनाता है।
    कभी कभी खुशी में आकर,गीत खुशी के गाता है।
    जज्बातों में आकर ये आकाश में उड़ने लगता है।
    कभी चुपचाप बैठकर बातें क्या क्या सोचता है।
    इसका कोई पार न पाया,हर पल घूमता रहता है।
    इस से तेज नहीं दुनिया में कोई भी चल सकता है।
    मन तो एक परिंदा है,पल पल यूं ही मचलता है।
    बस मेरी एक ख्वाहिश है,उसको पूरा करदे भगवान।
    मेरे सभी दोस्तों को कुछ ऐसा दे दे वरदान।
    इस जीवन में हमेशा सुखी रहें उनके सब परिवार।
    जीवन में कभी कोई दुःख ना आए किसी के घर द्वार।
    ©psprem

  • goldenwrites_jakir 10w

    ख्वाइश ✍️

    ख्वाईशो के दरिया में दिल की आरजू डूबती रही
    मंजिल आँखों के सामने तड़प दिल की बढ़ती रही
    सैलाब बनकर आई थी ज़िन्दगी में तन्हाई
    हर इक ख़्वाब को चकनाचूर पल पल करती रही ...
    ©goldenwrites_jakir

  • jigna_a 10w

    #ख़्वाहिश

    अब जब यहाँ सब अपने ही तो क्या हिचकिचाना,
    क्या सोचते, क्या चाहते सब खुलकर बोल जाना,
    ख़्वाहिशों का क्या गुदगुदाती, उमड़ती है मन में,
    मज़ा इसका इसमें कि जो समझे वहाँ पे बोल जाना।

    आप सबको अपने मन की ख़्वाहिश को आलेखित करना है। शुरूआत की पंक्ति ये होनी आवश्यक है..

    " मन परिंदा सोचता है..."

    चलिए कस लिजिए कलम।

    समय सीमा कल रात 10 बजे तक।

    ©jigna_a

  • happy81 10w

    सर्वप्रथम सभी को राधे राधे, अतभुत, अनुभव था ये, इतनी सुंदर, सुंदर रचनाएँ तीन -तीन बार पढ़ी सब, फिर भी समझ नहीं आया, किसको संचालन की जिम्मेदारी दी जाये.. ?
    मुझे नहीं पता. ?कौन सबसे बेहतर है, यहां पर हर कोई बेहतर ही है.. देरी के लिए क्षमा चाहूंगी.. ... इंतजार की नई नई सोच नया अहसास नया प्रेम पढ़ कर थम नहीं रही मैं.. @mamtapoet ji , @aryaaverma ji , @shayarana_girl , @ajnabi_abhishek , @anusugandh, @goldenwriter_jakir , @26decmberborn. ,@chahat_samrat,@anandbarun ji .. @happy_ruapana ..@loveneetm ♥️.. बहुत सुंदर रचनाएँ थी वाक़ई.. ..
    सभी का बहुत आभार.....♥️☺..
    Mai.rachanaprati106 ke liye ..

    Jigna_an Didi .. को विजेता घोषित करती हूँ. ..♥️

    Thank you ....be Healthy..

    ©happy81