#rachanaprati102

12 posts
  • ajnabi_abhishek 6w

    परिणाम

    #rachanaprati102 के संचालन का कार्यभार सौंपने के लिए एक बार पुनः @anusugandh जी का आभार। मेरे द्वारा सुझाये गए विषय पर सभी रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत की और इस कड़ी को सफलता दिलाई जिसके लिए मैं सभी लेखकों-सह-पाठकों का हृदय से आभारी हूँ। सयोंग पर इतना कुछ लिखा जा सकता है, ये देखकर मैं अभिभूत हूं। @loveneetm @suryamprachands @anandbarun @anusugandh @piu_writes @psprem @goldenwrites_jakir @happy81 @jigna_a आप सभी ने उम्दा कृतियां रचकर इस श्रृंखला को शिखर तक पहुंचाया जिसके लिए एक बार पुनः सभी का आभार प्रकट करता हूँ। वैसे तो सभी रचनाएं श्रेष्ठ हैं, कारणवश चुनाव किंचित जटिल है।
    किन्तु किसी एक को चुनना इस कड़ी को आगे बढ़ाना अनिवार्य कर्तव्य है। अतः मैं उपहारस्वरूप अगला संचालन @suryamprachands जी को सौंपता हूं।

    जाने-अनजाने कारित किसी भी भूल-चूक के लिए सभी से क्षमा याचना सहित आपका अपना-
    ©ajnabi_abhishek

  • suryamprachands 6w

    #rachanaprati102

    इस कविता में चित्रित समस्त भावनाएँ पूर्णतः काल्पनिक हैं,इनका किसी भी वास्तविकता से कोई संबंध "संयोग" मात्र है..

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    हे प्रिय वो संयोग गज़ब था,

    मुझे देख कर वो छिप जाना
    सबसे बच कर छत पे आना
    आ कर जाना जा कर आना
    किसी तरह यदि आँख मिले तो
    दाँत दिखा कर मुझे चिढ़ाना
    फ़िर खिड़की के उस पर्दे में
    जिसमें कि सूरज चित्रित था
    अधर मध्य में उसे दबाकर
    घर में निकला चाँद छिपाना
    जीवन का वो दौर अजब था
    हे प्रिय वो संयोग गजब था

    विद्यालय में पहले आकर
    कोने-कोने धाक ज़माना
    कहीं सीट पर जमीं धूल में
    वो गुलाब के फूल बनाना
    मेरी वाली सीट साफ़ कर
    मुझे देख कर वो मुस्काना
    देख सभी को सब सा रहना
    मुझे देख कर हम हो जाना
    जीवन का वो दौर अजब था
    हे प्रिय वो संयोग गजब था

    लाल दुपट्टा चूनर वाला,जो
    लाया था मैं मेले से,
    वो छल्ले पे नाम लिखाकर,
    एक जनवरी को लाया था
    वो काला खट्टा चूरन औ इमली
    खाना खुब भाया था
    पक्के कैथे,करौंद खट्टी,अहा
    बताऊँ क्या लगते थे!!
    नमक छिपाकर तुम लाती थी
    आम तोड़ कर लाता था मैं
    बिन छिलके का तुम खाती थी
    छिलके वाला मैं खाता था
    जीवन का वो दौर अजब था
    हे प्रिय वो संयोग गजब था..

    ©Suryam Prachands

  • loveneetm 6w

    संयोग

    कृष्ण मेरे सर्वत्र बसे,
    फिर भी मन अनजान,
    नासमझी में अब तक भगवन,
    भटक रहा इंसान।

    तुझसे मिलना सहज नही,
    फिर भी कैसा संयोग,
    भटका मन ना जाने कैसे,
    पहुँच गया गोलोक।

    धरती का गोलोक कन्हैया,
    है वृंदावन धाम,
    जब से तन से लिपटी माटी,
    भूल गया सब काम।

    ऐसा पावन योग मुरारी,
    इस जीवन का संयोग,
    प्रेम तुम्ही से,भाव तुम्ही से,
    तुमसे ही सुख का योग।
    @लवनीत।

  • happy81 6w

    संयोग..
    तेरे मेरे योग से बना है ये योग..
    जिसे कहते है संयोग..
    कुबेरी बेला में मिले जब दो दिल..
    मुरझाये कमल भी गए खिल..
    राधे कृष्ण के जिसे दरस हो गए..
    संयोग से वो भी प्रेम मग्न हो गए..
    जिस तरफ दिया बाती..
    तेरे हाथ पर हो मेरा हाथ मेरे साथी.
    शक्ति से मिलते है जब भी शिव..
    अमृत बरसात की होती है..
    संयोग से ही ऎसी रात..
    सयोंग से शुरुवात होती है..
    मिल जुल कर तारे घेर लेते है चाँद को..
    सयोंग से किसी की फरियाद होती है..
    कभी दिखता दुँधला.. कभी आधा.. कभी पूरा..
    कैसे कैसे प्रेमियों की बात होती है..
    सयोंग से बरसती है लक्ष्मी..
    घऱ में जब बेटी की मुस्कान होती है..
    सयोंग से होती है बरक्कत..
    माँ की पूजा जहाँ हर शाम होती है..
    सयोंग से ही उफनती है धरती..
    राक्षसों की जब मात होती है..
    सयोंग से ही बनती है दुनिया..
    पुण्य कर्मो की जब शुरुवात होती है..
    सयोंग से ही मिलती है ऎसी दोस्ती..
    सुदामा कृष्ण की जहाँ मिसाल होती है..
    सयोंग से मिलते है दो हँस..
    जात पात की गाड़ी जहाँ दूरदराज होती है..
    सयोंग से टूटता है इंसान..
    हौसले की जब शुरुवात होती है..
    सयोंग से होती है खाली जेब..
    मेहनत की जहां शुरुवात होती है..
    सयोंग से ही बिछड़ते है प्रेमी..
    संस्कारो की जब परीक्षा होती है..
    सयोंग से आंका जाता है शिष्य
    कठिन जब गुरु दक्षिणा होती है..
    सयोंग से बहता है पानी..
    गर्मी में जब वहम आता है..
    सयोंग से पड़ता है सूखा..
    जब जब पानी बहक जाता है..
    सयोंग से होती है धरती हरी..
    किसानों का जब खून जलता है..
    सयोंग से होती है वृद्ध सेवा..
    गांव में भी महल लगता है..
    सयोंग से लगता है मेला..
    मार्केट गरीब जात नहीं जाती..
    सयोंग से हँसती है भारती..
    वीरों का जब बखान होता है..
    सयोंग से होती है गौ सेवा परोपकार का जब नाम होता है..
    सयोंग से पढ़ती है बिटिया पिता का तब नाम होता है.
    सयोंग से होती है शाम सुबहो का जब विराम होता है.
    सयोंग से उछलती है गेंद.. बच्चे का मन जब विज्ञान होता है.
    सयोंग से होती है भगवत कथा कृष्ण का जब आगमन होता है
    सयोंग से होती है ऐसी व्यथा हिन्दू मुस्लिम एक नाम होता है..
    ©happy81

  • psprem 6w

    संयोग

    यहां जो भी है बस ,सब कुछ संयोग है।
    प्रकृति में जो भी हो रहा है वह संयोग है।
    हमारा जन्म भी एक संयोग से हुआ है।
    पालन पोषण किसी के योग से हुआ है।
    हम जो करते हैं ,जो करना है यह संयोग है।
    यहां मिलना, बिछड़ना,सब संयोग है।
    क्या मिलना है ,क्या खोना है ,पता नहीं,
    फिर भी सब होता है,यह भी संयोग है।
    चाहने से कुछ मिलता नहीं,बिन चाहें ,
    जो मिल जाता है वह भी एक संयोग है। कहते हैं,ये सब हमारे कर्मों का भोग है।
    यहां जो भी है बस,सब कुछ संयोग है।
    ©psprem

  • anandbarun 6w

    @ajnabi_abhishek #rachanaprati102
    प्राक्कथन: जीवन कितना विकट संयोग है जिसका हमें सच में कोई भान नहीं है। बिल्कुल एक ऐसे स्तम्भ जैसा जो तलवारों को एक दूजे की धार पर संतुलित कर के खड़ा किया गया हो। किसी भी कारक का छुद्रतम व्यवधान - और सबकुछ छिन्न-भिन्न। हम इसका महत्व और उद्देश्य समझें। पर हमारा मन कितना चंचल है जो हमारी चेतना को सतत भरमाता रहता है। मेरी यह रचना इन विरोधाभास को अंतर्हित कर समझने का तुच्छ प्रयास है।

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    संयोग

    सुध, चेतना के द्वारे
    अहिर्निशि सुप्त, जागे
    सचेत, अवचेतन में
    धवल, घन से बरसे
    उर्ध्व प्राण, अंतर कैसे
    अमिट, शुन्य जीवन में
    विलग, आलिंगन जैसे
    अपरिचित, परिजन में
    गुण, निर्गुण बसे
    कैसे बताऊँ तुम्हें
    तुम कहीं से आए न थे
    फिर कैसे हो संग ऐसे
    अर्चना अंतर पट उगे
    दृग खोलूं, जो निसरे
    प्रेयसी अज्ञात अहे
    बस भूला है जग रे...
    ©anandbarun

  • jigna_a 6w

    संयोग/संजोग

    दो बूँदें रक्त की रोकी थी,
    द्रौपदी ने वस्त्र को फाड़कर,
    दो मुट्ठी तांबूल खिलाए थे,
    सुदामा ने पोटली से छानकर,
    कुब्जा की आँखें तरसी थी,
    आपका स्पर्श पारस मानकर,
    अर्जुन हिम्मत ना हारा था,
    आपका संगाथ पा कर,
    भीष्म ने साँसें ना छोड़ी थी,
    बिन आपसे वार्तालाप कर,
    संजय ने पलकें ना झपकी थी,
    विश्वरूप निहारकर,
    राधा प्रतिक्षण जलती थी,
    आपके विरह को प्रसाद जानकर,
    मीरा गरल तक पी गई,
    किया स्वयं को आप पे न्योछावर,

    मेरे कृष्ण,
    हर योग में संयोग आप,
    हर संयोग का आयोग आप,
    अहंकार में वियोग आप,
    समर्पण में प्रयोग आप,
    अपितु जीवन सार गीता का,
    हर अध्याय का विनियोग आप।

    ©jigna_a

  • anusugandh 6w

    #rachanaprati102
    @ajnabi_abhishek

    कल्पना की उड़ान ना जाने कहां से कहां ले जाए
    बस ऐसा हो संयोग कि... उसके मन में बस जाएं

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    संयोग

    कुछ ऐसा मधुर संयोग जो हो जाए,
    वह कृष्ण मैं उसकी राधा हो जाऊं!
    यमुना किनारे............ रास रचाए ,
    वह यमुना,मैं यमुना का जल हो जाऊं!
    नन्हीं नन्हीं बूंदों में...... नृत्य करूं जब ,
    वो बादल..... मैं उस की बूंदे बन जाऊं!
    समस्त नभ पर........... तब छा जाऊं,
    वो नभ........ मैं इंद्रधनुष बन हरषाऊँ!
    प्रकृति की एक-एक कली बन मुस्काऊँ,
    वह फूल बने, मैं उसकी खुशबू बन जाऊं!
    रोम रोम में बसा रहे ..........सदा वो ही,
    वो हृदय.. मैं उसकी धड़कन बन जाऊं!
    ऐसा प्रभु............. कुछ संयोग बना दो,
    बस उसके.......... चरणन में बस जाऊं!
    ©anusugandh

  • goldenwrites_jakir 6w

    #संजोग ✍️

    ज़िन्दगी के सफर में कुछ मुसाफिर अपने बने
    ना चाहते हुए भी दूर - हम उनसे ना रहे
    कभी यादों के आईने में उन्हें ढूंढ़ते तो कभी
    हक़ीक़त की परछाई में महसूस करते ,,,,
    ये संजोग के लम्हें ज़िन्दगी मैं कभी जुगनू बनकर
    तो कभी आसमाँ के सितारे से लगते हैं तो कभी आँखों से बहते दिल के अश्क तो कभी लबों पर मुस्कान कभी ख़ामोशी के रंग ज़िन्दगी में भर जाते हैं .......
    ©goldenwrites_jakir

  • piu_writes 6w

    एक संयोग है धरती पर आना एक संयोग है मनुष्य योनि पाना , मनवा रे कुछ ऐसा कर जा के सार्थक हो तेरा जीना
    ©piu_writes

  • ajnabi_abhishek 6w

    कार्यालय में कार्यभार अधिक होने के कारण हुए विलम्ब के लिए क्षमाप्रार्थी हूं....

    #rachanaprati102

    @anusugandh @goldenwrites_jakir @mamtapoet @anandbarun @piu_writes

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    रचनाप्रति

    सर्वप्रथम @anusugandh जी को सफल संचालन की हार्दिक बधाई एवं मुझे रचनाप्रति की अगली कड़ी (#rachanaprati102) के संचालन हेतु योग्य समझने के लिए सहृदय आभार। सभी सहित्य साधक रचना हेतु आमंत्रित हैं।
    #rachanaprati102
    विषय_संयोग
    समय-सीमा_27 अक्टूबर अपराह्न 12:00 बजे तक।

    गुणा-भाग हम भूल गए, भूल गए हर योग।
    नज़रों से नज़रें मिली, बना सुगम सयोंग।।
    ✍️✍️✍️✍️✍️
    ©ajnabi_abhishek

  • anusugandh 6w

    सबसे पहले piu ji का बहुत-बहुत शुक्रिया जिन्होंने मुझे संचालन के लिए चुना ।आप सब की रचनायें काबिले तारीफ है ।सभी ने अपने अपने जीवन साथी के लिए विचार बहुत अच्छे लिखे हैं
    Jigna ji ने- बहुत लंबा सफर है जीवन
    Anandbarun ji की 2 रचनाएं थी - पलकों में बंद मूरत बताया ,दूसरे में सपनों का राजकुमार के बारे में बताया
    ajnabi abhishek जी ने दीपक बाती जैसा रिश्ता बताया
    Lovneet जी ने राधा कृष्ण की प्रीत बताई
    Jakir bhai -मेरी पत्नी मेरी दौलत मेरा अभिमान
    Mamta ji ने परछाई बन साथ रहना
    Aryayaaverma ji जीवन साथी सच्चा लगता है से अपनी रचना को सजाया
    सुरेश जी ने दीपक बाती से रचना को सजाया

    आप सब ने इतना सुंदर लिखा है कि निर्णय करना बहुत मुश्किल है मेरे लिए तो सब विजेता हैं लेकिन मैं चाहती हूं कि किसी नये को यह जिम्मेवारी सौंपी जाए इसलिए#rachanaprati 102 के लिए @ajnabi_abhishek का चयन करती हूँ
    गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ