#patjhad

23 posts
  • ammy21 8w

    Patjhad ki tanhayiyo me ye dil basant ka sukoon chahta hai
    Hn mera dil tumhe behad, be-intehaa aur beshumaar pyar krna chahta hai
    ©ammy21

  • ammy21 48w

    Vasant

    Meri patjhad si jindagi me
    Kuch vasant mausam sa
    nazar aane lga hai
    Grahan lga hai chand me
    Par chand me
    Roshan✨ sa kuch
    nazar aane lga hai
    Kya vo sach me grahan hai
    Kya jo kuch tha roshan✨ sa
    vo veham hai
    Bas yahi baat
    Dil❤ dimaag ko
    Dimaag dil❤ ko
    Samjhane lga hai
    Ki andheri padi zindagi me
    Roshan✨ sa kuch nazar aane lga hai
    ©ammy21

  • dil_k_ahsaas 52w

    " पतझड़ "

    पीला रंग चढ़ा कर जोगी बन चला हूंँ
    हरा था कभी, अब मोक्ष के द्वार खड़ा हूंँ।।

    लहराता था शाख पर, जवानी के जोश में
    अब बूढ़ा हो कर जीर्णोद्धार पर खड़ा हूंँ।।

    हवा का हल्का सा झोंका भी लगे तेज आंधियों सा
    छूट जाएगी शाख, इसी सोच में शाख पर अड़ा हूंँ।।

    लाल दिल बन शाख पर मैं कभी उगा था
    हरे रंग की बेवफ़ाई से, अब पीला पड़ा हूंँ।।

    था कभी पेड़ की शान अब बोझ बना हूंँ
    शाख ने भी किया तिरस्कार, अब जमीं पर सड़ा हूंँ।।

    पत्ते की जिंदगी और मौसम का अटूट रिश्ता है
    पुनर्जन्म के आश्वासन पर पतझड़ की भेंट चढ़ा हूंँ।।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • preranarathi 53w

    सूखे पत्ते

    फूलों को सहेज कर रखा जाता है,
    पतझड़ के टूटे पत्तों को बेकार समझा जाता है।
    फूलों से महकता है तुम्हारा आँगन,
    और सूखे पत्तों से तो बागों में गुलाब भी खिलता है।

    - प्रेरणा राठी
    ©preranarathi

  • drayeshakhan 57w

    Unke lafz ki taseer kuch yun muassar h
    Patjhad k baad jese bahaar ho koi,
    Unke lafz guftaar m kuch yun ada hue
    muaddab andaaz m jese mohobbat ada kre koi
    #drayeshakhan✍️
    #lafz #words #taseer #andaaz #muassar #patjhad #bahaar #guftaar #mohobbat #muaddab #andaaz

    @drayeshakhan @readwriteunite @writersnetwork @mirakee_assistant @mirakee #drayeshakhan

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    لفظ

    انکے لفظ کی تاثیر کچھ یوں مؤثر ہے
    پتجھڑ کے بعد جیسے بہار ہو کوئی،
    انکے لفظ گفتار میں کچھ یوں ادا ہوئے
    مودب انداز میں جیسے محبت ادا کرے کوئی

    उनके लफ़्ज़ की तासीर कुछ यूं मुअस्सर है
    पतझड़ के बाद जैसे बहार हो कोई,
    उनके लफ़्ज़ गुफ्तार में कुछ यूं अदा हुए
    मुअद्दब अंदाज़ में जैसे मुहब्बत अदा करे कोई।

    ©drayeshakhan✍️

  • dinosaur_abh 84w

    .

  • dil_ki_baate09 88w

    एक नन्ही कली

    पतझड़ के इस मौसम में क्यों कुछ ऐसा होता है
    टूट जाती है कुछ ऐसी कलियां जिनको जीने का हक होता है
    टूटने के बाद भी वह कुछ समय तक हंसती हैं
    ना जाने अब क्या होगा वह बस यही सोचती हैं
    खुद टूट कर दो दिलों को जोड़ती हैं , कभी मंदिर में बस्ती हैं
    किसी की किताबों से निकलकर यादें ताजा करती हैं
    पतझड़ के इस मौसम में कुछ कलियां टूटती है

    कभी किसी के गले में माला बनकर
    कभी किसी के पैरों में गिर कर उनका स्वागत करती हैं
    कोई उनकी भी सुने अब वह बस यही दुआ करती है
    पतझड़ के इस मौसम में कुछ कलियां टूटती है

    पर इस कलयुग में कौन किसकी सुनता है
    यहां लोग एक दूसरे को मारते हैं, फिर यह तो फूल है यहां इनकी कौन सुनता है.....

  • katara_rakesh 90w

    एहसास

    दो
    खूबसूरत रूह
    जब इक दूसरे में
    घुलती मिलती है
    तो पैदा होते है
    कभी ना मरने वाले
    खूबसूरत एहसास,
    जो पतझड़ में भी
    ठहरे रहते है और
    बसंत की बहार में भी
    महकते रहते है ।।

    ©katara_rakesh

  • mahtobpensdown 97w

    Patjhad

    Patjhad ka mahina kya shuru hua
    Ye patto ne bhi daal chod diye
    Jaise aansu tapak jaate h kabhi kabhi
    Kya ped ne bhi apne
    sukh dukh patjhad me bol liye?
    ©mahtobpensdown

  • kumar_adi 122w

    मुझे पतझड़ की कहानियों से उदास ना कर ऐ ज़िन्दगी.....
    नए मौसम का पता बता, जो गुजर गया वो गुजर गया....!!
    ©kumar_adi

  • juhigrover 130w

    बसन्त के बाद जो पतझड़ आई,उसकी क्या कहिए,
    कि जिसने खुद को ही खुद पर हँसना सिखा दिया,
    कभी हँसते थे दूसरों पर,
    आज खुद को ही अपना शिकार बना लिया।
    ©juhigrover

  • juhigrover 132w

    निशा
    जिससे सहम जाते हैं हम अक़्सर,
    आज अग्रसर हो कर उसने हमें,
    रोशनी की चमक दिखाई है।

    सूरज
    जो ढलता था कभी,
    आज उगता नज़र आने लगा है।
    किरणें शायद फिर से मिलने आईं हैं।

    पतझड़
    जो ज़िन्दगी का आईना था कभी,
    आज बसन्त के आगमन का संदेश देता है,
    शायद दुख को सुख से मिलाने लाया है।

    सुबह
    जो नई ऊर्जा का संकेत देती है,
    आँखों के सामने अंधेरों को रोशन कर देती है,
    जैसे हर पल आज हमीं से मिलने आया है।

    जीवन
    जो धीरे धीरे मृत्यु की ओर अग्रसर है,
    अगर उद्देश्य हो कोई,रास्ताें को रोशन कर देता है,
    जैसे सब कुछ भूल कर जीना सिखाने आया है।
    ©juhigrover

  • juhigrover 133w

    वो मुस्कुराना तेरा,
    दिल को धड़काना तेरा,
    वो नाराज़ हो करके
    दिल को तड़पाना तेरा,
    अच्छा लगता है,
    पास आना तेरा।

    यादों में बार बार आना तेरा,
    साँसों में समा जाना तेरा,
    और आँखों को बन्द करके,
    यूँ शर्माना तेरा,
    अच्छा लगता हैै
    मुझे महकाना तेरा।

    सीने के दर्द को जगाना तेरा,
    बेचैनी को बढ़ाना तेरा,
    दूर हो करके,
    बार बार ख़्वाबों में आना तेरा,
    अच्छा लगता है
    महसूस होना तेरा।

    मगर सावन में पतझड़ बन जाना तेरा,
    दूर होकर मेरी नज़्मों में आना तेरा,
    यादों में आ करके,
    तन्हाई का दर्द जगाना तेरा,
    अच्छा नही लगता
    दिवाना बना कर छोड़ जाना तेरा।
    ©juhigrover

  • suryarock 136w

    Patjhad

    Dekho patjhad ka mausam bhi aa rha h,
    Fir se apne sath vo na jane kitni sari yadein bhi la rha hai,
    Na jane is bar kis kisko ye pagal banayega,
    Todega kitno ka dil aur kitno ko rijhayega,

    Ped apni pattiyan girake nayi pattiyan lagayenge,
    Is chilchilati garmi ke bad ye rahat kuch dilayenge,
    Dharti bhi fir se ek bar kuch naye drisya dikhayegi,
    Odhegi fir se dhani chunariya jab Charo taraf hariyali chayegi,

    Par vo bhi to bahut kch is mausam ki tarah h,
    Purane thikanon ko bhulke vo bhi ab ek Naya asiyan banayenge,
    Ae patjhad tu bhi mujhe unki yaad dilata h,
    Tu bhi unhi ki tarah har pal mujhe satata h,

    Unki tarah tu bhi purane logo ko chor jata h,
    Nye logo se milke tu bhi purano ko bhul jata h,
    Sochta hu kahi tumhara aur unka koi khas rishta to nhi h,
    Kyuki jb bhi ae patjhad tu ata h hme fir se unki yaad dilata h.
    ©suryarock

  • sakshi_panwar 140w

    पतझड़-सा मौसम क्या आया
    वसन्त-सी ऋतू अब भाती नही ।

    पत्तियां जो शान थी कभी पेड़ की
    अब जमीन को भी सज़ाती नही।।


    ©rhea_chaudhary

  • indicpoetry 149w

    पतझड़ और यादें

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    मौसम कुछ बदल रहा है, हवाओं का मिज़ाज माँ की गोद जैसा हो गया है, मानो सर पर हाथ रखते ही मीठी नींद आजाए।
    इस मौसम में ना तो गर्मी का अहसास होता है नातो ठंड का। हाँ यही तो वक़्त होता है पतझड़ का।
    ये रूखा सा मौसम पता नही क्या खेल खेलता है, पुरानी यादों को फिर से ज़िंदा कर देता है।
    ऑफिस की खिड़की से मैं देख रहा हूँ झड़ते हुए पिले, लाल सुर्ख पत्तों को।
    पत्तो की होने वाली सरसराहट महसूस करा रही थी, वो स्कूल की खिड़की,
    हाँ इसी मौसम में सारे क्लास बोरिंग से लगने लगते थे ।
    जमाई को बड़े मुश्किल से होठों के बीच मे दबाते थे और कान इंतेज़ार करते थे स्कूल की बेल का,
    की कब बेल बज जाए और हम अपना बस्ता लेकर यहाँ से भाग जाए और इसी बीच यही पत्तों की सरसराहट, ध्यान खीच लेजाती थी खिड़की ओर और टीचर डांटकर कहते थे "क्या है बाहर हमे भी बता दो?"।
    शुरू होने वाले सालाना एग्जाम की टेंशन तो होती ही थी पर एक राहत भी थी आनेवाले गर्मियों की छुट्टियों की। प्लान्स तो तैयार होते ही थे कि इस छुटियों में कहा जाना है, मौसी के यहां या मामा के यहां।
    बॉल और बैट भी तैयार रहते थे, यही तो वक़्त था जब गाँव मे छोटे छोटे क्रिकेट के टूर्नामेंट होते थे।
    दस रुपये किर्केट के मैच में जितने कि ख़ुशी अब हज़ारो की सैलरी भी नही दे पाती,
    हाँ अब वो गर्मियों की छुट्टियां नही आती ।
    बस पतझड़ में उन दिनों की याद आती है ।
    शायद ये पतझड़ हमे बताने ही आता है, की सूखे पत्तों को अपनी जगाह छोड़नी है, तभी तो नए हरे पत्ते उनकी जगाह आएंगे।
    आज भी उस स्कूल की खिड़की से कोई बच्चा बाहर देख रहा होगा औऱ स्कूल की बेल बस बजने वाली होगी।
    ©indicpoetry

  • bekhayal 151w

    कम्बखत दिल की नादानियां बढ गई
    ख्यालों मे मेरे कहानियां गढ गई
    जिन पेडों पर पतझड के सिलसिले थे
    उन दरख्तों पे जवानियां चढ गई l
    ©bekhayal

  • missunkwnwriter 158w

    Paangal#patjhad#love❤understanding# togetherness

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    Paangal....

    Jevha mann nispanda hote, bhavna tivra hotat! Panavlya dolyat udyachi bhranta aste! Smrunti madhye aslelya madhur athvani chalvtat, thanda sparsha denya aivaji manala chatka ativ detat....Tevha! Junya hirvalila savay karavi lagate navya paangalichi.... Paangal sostana saavrave lagte manala ani savay karavi lagte yenarya navya rutuchi...Tujhatlya mala majhatlya tula navyane shodhave lagte...Harvlelya ekmekana shodhtana parat ekda mann guntvave lagte...Tevhach tar mannatli chinta, dolyatli bhranta ani swatahche othamblepan thambte! Yenari paangal sarun jaate ani survaat hote navya korya hirvya rutuchi!
    ©missunkwnwriter

  • surmayeeshayar 163w

    बहार-ए-गुलशन

    बहार-ए-गुलशन की याद,
    पल पल आती है,
    चली आओं सावन बनकर,
    यें पतझड़ बहुत सताती है।
    ©surmayeeshayar

  • shubhangiokhade 170w

    पतझड़ के पत्ते

    पतझड़ के मौसम में जब पत्ते,
    शाखाओं से मुक्त होकर गिरते हैं।
    वो रूखे-सूखे पत्ते न जाने,
    क्या-क्या अपने में समेटे होते हैं।
    बुजुर्गों की तरह ही वो खामोश,
    कितने ही भाव उनमे भी निहित होते हैं।
    ज्ञान उन्हें भी है सबका,
    के ये सांसारिक चक्र चलता रहता हैं।
    इस मौसम के कारण ही वे जन्मे थे,
    और अब इसी मौसम के कारण ही उन्हें जाना हैं।
    खुश हैं वे अपना स्थान देकर कि,
    नवीन पर्णो को आज फिर आना हैं।
    अपना दायित्व वे बड़े प्रेम से,
    बुजुर्गों की ही तरह निभाते हैं।
    चमक-दमक नही है अब,
    पर ये रूखे-सूखे पत्ते कितना कुछ सिखलाते हैं।

    ©shubhangiokhade