#naveenksanadhya

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  • naveensanadhya99 2w

    वजन

    वजन तो आज़ भी हमारा वो ही है....
    वो तो लोगों ने हमे थोड़ा हल्के में ले लिया।
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 4w

    सूई - कैंची

    सूई बनने की चेष्टा रखें, कैंची बनने की नही....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 4w

    चाणक्य नीति

    निस्पृहो नाधिकारी स्यान्न कामी भण्डनप्रिया। नो विदग्धः प्रियं ब्रूयात् स्पष्ट वक्ता न वञ्चकः॥

    अर्थात् (Meaning)

    विरक्त व्यक्ति किसी विषय का अधिकारी नहीं होता, जो व्यक्ति कामी नहीं होता, उसे बनाव - शृंगार की आवश्यकता नहीं होती । विद्वान व्यक्ति प्रिय नहीं बोलता तथा स्पष्ट बोलनेवाला ठग नहीं होता ।

    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 5w

    हिन्दी

    एक दीन् - हि - न्दी को अपनाकर तो देखिए।
    बड़ा गर्व महसूस होगा।।
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 5w

    जय हिन्दी

    मैं जय हिन्दी के, जय हिन्दी के उद्घोष लगाता हूं....
    मैं इस हिन्द, उस भारत मां का लाल कहलाता हूं....
    मैं उद्बोधन, उस संबोधन अपने को प्रकाश में लाता हूं....
    और जय हिन्द, जय भारत का मै नारा लगाता हूं....

    मैं केसरी, भगवा ध्वज को देख कर यूं इतराता हूं....
    मैं हिन्द का, है हिन्द मेरा, गर्व से कह पाता हूं,
    क्योंकि मेरे मुख पर हिन्दी भाषा का साथ जो पाता हूं....
    मैं मातृभाषा, इस राष्ट्रभाषा में देश समेट पाता हूं,
    क्योंकि हिन्दी के इस माधुर्य को हर देशवासी के,
    हर भारतवासी के, मुख पर पाता हूं....

    मैं हिन्दी को, महसूस करके मंद मंद मुस्काता हूं....
    क्योंकि हिन्दी हैं हम, हिन्दू हैं हम,
    यही विचार फिर मन में लाकर, संतुष्टि पाता हूं....
    और हिन्द, इस राष्ट्र को नतमस्तक हो जाता हूं....

    मैं जय हिन्दी के, जय हिन्दी के उद्घोष लगाता हूं।
    मैं इस हिन्द, उस भारत मां का लाल कहलाता हूं।।

    जय हिन्द, जय भारत
    मेरे द्वारा मेरी हिन्दी, मेरे हिन्द को समर्पित एक छोटी सी प्रस्तुति....

    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 6w

    बयां

    मैं कैसे बयां करूं अपने दिल की बात....
    उस पर कब्ज़ा तो तूने कर रखा है।
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 9w

    आईना

    क्या ज़रा मैने आईना दिखा दिया,
    कि उन्होंने तो चेहरा ही देखना छोड़ दिया....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 9w

    दर्पण

    ख्यालों का दर्पण,
    और आत्मसमर्पण....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 9w

    पुस्तक

    कहीं खो सी गई थी पुस्तक मेरी,
    आज़ यादों के झरोखों में मिली....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 9w

    प्रभु मेरे

    मैने तो यूंही प्रभु को याद किया,
    और वो मेरे संग हो लिए....
    - राघव

  • naveensanadhya99 9w

    सोच - समझ

    तुम समझ ना पाओगे, ऐसी बात कह जाऊंगा....
    कि तुम सोचते रह जाओगे, ऐसी बात कर जाऊंगा।
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 9w

    हमने....

    तोड़ दिए वो सारे रिश्ते, जो सिर्फ नाम के थे....
    हम तो वो शख्शियत रहे हैं, जो कब किसी के काम के थे....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 11w

    मेरे दोस्त....

    पायल की झनकार, मुझे दोस्तों की याद दिलाती है।
    मेरे चैतन्य की अवस्था, मुझे दोस्तों की याद दिलाती है।
    सांझ की किरण, मुझे दोस्तों की याद दिलाती है।
    कुछ मेरे दोस्त ऐसे हैं, जिनकी छाप मेरे ज़हन को महकाती है।
    दोस्ती का ऐहसास ऐसा, कि सोचकर ही रूह में जान आ जाती है।
    मेरे दोस्त....
    - नवीन कुमार सनाढ्य (राही का हमराही)
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 14w

    ऋतु

    मौसम की परिचायक, ऋतु
    बसंत राग मल्हार है, ऋतु
    तपतपाती गर्मी है, ऋतु
    शीतल ठंडी सर्दी है, ऋतु
    बारिश वो घनघोर है, ऋतु
    पतझड़ प्रकृति का बुढ़ापा है, ऋतु
    हेमंत सर्द आगाज़ है, ऋतु
    तापमान पर्याय है, ऋतु
    अवधि आए और जाए है, ऋतु
    शून्य है स्थूल है, ऋतु
    ना होकर भी सबकुछ है, ऋतु
    जीवन का ये अर्थ है, ऋतु
    वर्ष का कालखंड है, ऋतु
    भिन्न - भिन्न वो दृश्य है, ऋतु
    रोचकता है, सरसता है और
    जीवन की पूर्णता है, ऋतु
    आभास है, अहसास है,
    जीवन की वास्तविकता है, ऋतु
    रोमांच है, सर्वत्र है, बदलाव का प्रमाण है....
    एक ऋतु ही है एहसास वो जो जीने की उमंग है
    जीवन को प्रकृति से जोड़े रखने का,
    एकमात्र वो साधन है, ऋतु
    एकमात्र वो साधन है, ऋतु
    ऋतु ही जीवन है,
    और जीवन में ऋतु ही है।
    - नवीन कुमार सनाढ्य (राही का हमराही)
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 15w

    लिखता

    मै लिखता नही....
    बस कलम चल जाती है।
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 16w

    कहां

    कहां गलत था मैं....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 17w

    मै

    मै पत्थर तो नही,
    पर दिल बहुत तोड़े हैं मैने....
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 17w

    पापा

    जो ना कुछ "पा"कर भी....
    ना "पा"ना कुछ चाहे....
    वो "पापा" है।
    नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 20w

    हम

    हम उन भूले हुए पन्नों में से हैं....
    जो कभी इक बेमिसाल क़िताब का हिस्सा हुआ करते थे।
    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • naveensanadhya99 22w

    ध्यान देने योग्य

    जन्मोत्सव व जयंती के बीच का फर्क

    जो भी महानुभाव या बुद्धिजीवी जन्मोत्सव और जयंती में फर्क ना जानते हों, यह जानकारी उनके लिए है।

    जन्मोत्सव यानी जन्म का दिवस, प्राकट्य दिवस इत्यादि

    और जयंती यानी शहीद दिवस, देह त्याग दिवस इत्यादि

    आगे से कृपा करके जन्मोत्सव को जयंती ना लिखे, अन्यथा इससे आपके ही ज्ञान पर संदेह होगा। कृपा करके पूरी जानकारी प्राप्त किए बिना इस प्रकार का कुछ पोस्ट ना करें।

    नकल में भी अक्ल होनी चाहिए

    धन्यवाद

    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99