#naari

69 posts
  • taj_pg 5w

    What is the
    'Cause' of 'Rape'


    "छोटे कपडे देखके मन मचल जाता है|"
    "ताली तो दोनों हात से बजती है|"
    "She was asking for it"
    "रात में अकेली लडकी, सड़क पे खुली तिजोरी है। फिर चोरी तो होगी।"
    "Mobile phones are responsible for provoking rape."
    " लडकी को घर से निकलने ही मत दो! घर की लक्ष्मी घर में ही रहे तो अच्छा रहता है| "
    -- Candid opinions of the average male population in India.

    The spine chilling 4-letter word *RAPE*. This most underrated global Pandemic since eons, has sunken it's roots deep into our society. Yes, in 2019,NCRB reported an average of 88 rape cases daily across the country, which is just the tip of the iceberg. Substantial undocumented cases of Rape have also transpired, owing to the above vile & unscrupulous beliefs that rationalise this heinous act. The Appaling accounts of Kathua, Delhi, Ajmer, Unnao & most recently, the Hathras, a meer mention of these makes your blood boil isn't it? Just imagine! There are innumerable Nirbhayas and Asifas out there, who await justice. Being, the most bruital violation of consensual Sex, Rape,within or outside marraige is a shameful crime against humanity and must be strongly condemned. *Here, where do we stand?* Would conducting candle marches suffice? The twisted mentality of Rapists needs to be called out! The genesis of a rapist is fuelled by the misogynistic, sick mindset of our very own citizens, it's about time we Uproot it. Agreed, the transition won't be overnight. Yet, let's start small, *Initiate with your family & friends. Encourage proper sex education, emphasize the Importance of Consent, Rape is NOT cool! Curb female objectification, & destigmatize legal consensual Sex.* Else, the perverted curiosity may forever withold the restoration of the Rape-public to Republic.
    ©taj_pg

  • poetrani 9w

    ममता का रुप

    चाहे हूँ रूपवती, चाहे मैं कुरूप हूं
    कोमल सा हृदय लिए ममता का एक रूप हूं
    मूल्य चुका ना पाया वो कर्ण भी मेरे दूध का
    दानवीर कहता जिसे इतिहास दूर-दूर का
    यज्ञ से जन्मी अग्नि मैं, रक्त से केश भिगोए है
    जाने कितने दुष्टों के पाप धरा ने धोए हैं
    बनकर कभी भीलनी मैंने ईश्वर को झूठ खिलाया है
    वहीं कहीं बन अहल्या स्पर्श का आनंद पाया है
    सीता बन दुर्भाग्य को अब भी गले लगाती हूं
    राधा बन निश्चल प्रेम को अश्रुओं से नहलाती हूँ
    जान बचाने अपने लाल कि उसको खुद से दूर किया
    देवकी अभागन बनने को जब सृष्टि ने मजबूर किया
    बन यशोदा शिशु किसी का हृदय से अपने लगाया है
    नारी दुर्बल कहते तुम?अरे,मुझमें ब्रह्मांड समाया है
    उस युग से इस युग और अगले कईं युगों का कूप हूँ
    कोमल सा हृदय लिए ममता का एक रूप हूं
    ©poetrani

  • prathyushakusuma 16w

    Ishq ke bazaar mein..
    Sab uske tan naapte reh gaye,
    Kisi ne uski mann naapna zaroori nahi samjha..

    ©prathyushakusuma

  • angel_sneha 29w



    सब पर भारी

    INDIAN नारी ....... ✊

    ©angel_sneha

  • mirza_raj 38w

    NAARI

    wo kuch khaubo khayal jesi hai meri kavita se nikle har sawal jesi hai kabi kisi ki maa to kabi kisi ki behn jesi hai wo naari sab ke dilo ka abhimaan jesi hai..!

    Baat ho uske Abhimaan ki mardani ban takrati hai..!!

    Deti hai shero ko Janam Wo Maa Mata Gujari bhi kehlati hai..!!

    Woh Naari hai Janab Humko Har Rup rang me Dikh jati hai..!!
    ©mirza_raj

  • vakilankita 38w

    Tu Sita
    Lakshmi tu
    Tu Sheetal
    hai Agni tu
    Tujh mein hai brahmand pura
    hai aurat,
    khud hi bhakti tu!
    Tu Shakti
    hai Maa Durga tu
    na smjh kamzor khudko
    hai naari,
    khud hi Mahakaali tu!
    ©vakilankita

  • boundless_stories 38w

    Wo Sabdho Ki Jaal Se Tumhra Dil Jeetne Ki Koshish Karega, Sun Naari Tum Kamjor Mat Padna
    ©boundless_stories

  • piu_writes 39w

    औरतें

    देखा है मैंने अक्सर अपने घर परिवार बच्चों को सम्हालते हुए , सब की जिंदगी संवारते हुए खुद को भूल जाती हैं हमारे मुल्क की औरतें परोपकार में ही सुख पाती है ,आज के युग मे पतियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नौकरी पर भी जाती है मगर अपने ही वेतन से अपने लिए कुछ खरीदने से पहले सौ बार सोचती है शर्माती है , अपनी हर छोटी बड़ी ख्वाहिशों को मन में दबाती है, अपने शौक भुला कर अपने हुनर भुला कर सिर्फ घर परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए अपने सारे जीवन की आहुति दे जाती है , आता है फिर बुढ़ापा तो नाती पोतों में रम जाती है, पर कभी कभी अपने या दूसरों के तानों या उल्लहानो को सुन कर दिल ही दिल में कसमसाती है, फिर सारे जीवन का लेखा जोखा देख कर खुद को बहुत अधूरा पाती है, इसी लिए औरतें आप से ये निवेदन है कुछ अपने भी मन का करें आखिर आप का अपना जीवन है कुछ पाले अच्छे शौक अपने ,अपने पसंद का भी पहने खाए बस केवल कर्त्तव्य की मूर्ति बन कर अपने जीवन को यंत्रवत ना बनाये
    ©piu_writes

  • sonalbhatiarandhawa 49w

    मैं नहीं बेचारी...

    कभी ऐसी कोशिश ना करना
    ना ख़रीद सकोगे तुम मेरी ख़ुद्दारी
    मैं नहीं बेचारी
    मैं हूँ आज की सशक्त नारी

    चलूँगी कदम से कदम मिलाकर
    पर ना बनूँगी परछायीं तुम्हारी
    मैं नहीं बेचारी
    मैं हूँ आज की सशक्त नारी

    ग़लत हुई जो मैं तो माँगूँगी माफ़ी
    पर बनूँगी नहीं ढाल गलतीयों की तुम्हारी
    मैं नहीं बेचारी
    मैं हूँ आज की सशक्त नारी

    तुम्हारी ज़रूरतों का रखूँगी ख़याल
    पर बनूँगी नहीं कभी बाँदी तुम्हारी
    मैं नहीं बेचारी
    मैं हूँ आज की सशक्त नारी

    जो लगेगा ठीक मान लूँगी मैं
    ना करूँगी पर ग़ुलामी तुम्हारी
    मैं नहीं बेचारी
    मैं हूँ आज की सशक्त नारी

    साथ दूँगी तुम्हारा हर दम
    जो रखोगे क़ायम मेरी ख़ुद्दारी
    मैं नहीं बेचारी...
    -सोनल
    ©abhivyaktiyan_expressions

  • saloniiiii 54w

    @writersnetwork @mirakee #Agnipariksha #Naari
    @hindiwriters @hindinama

    अग्नि परीक्षा

    आज फिर एक प्रश्न उठाती हूँ
    सीता को नहीं राम को
    अग्नि परीक्षा दिलाती हूँ
    आज फिर एक हरण कराती हूँ
    सीता का नहीं रावण का
    हरण कराती हूँ
    आज फिर एक प्रश्न उठाती हूँ
    सीता से नहीं राम से
    हर क्षण का लेखा मंगाती हूँ
    आज फिर एक भूचाल लाती हूँ
    सीता को नहीं रावण को
    मिट्टी में मिलाती हूँ
    आज फिर एक प्रश्न उठाती हूँ
    क्या हक था सिया के राम का
    क्या यही पति परमेश्वर की कृपा है
    एक नारी के चरित्र पर प्रश्न उठाने का
    क्या यही वचन आपने
    अग्नि के समक्ष लिया है
    आज फिर एक प्रश्न उठाती हूँ
    क्या हक था लंकापति रावण का
    क्या यही पुरुष की करणी है
    एक नारी के दामन पर दाग लगाने का
    क्या यही सबक तुमने पाया है
    आज फिर एक प्रश्न उठाती हूँ
    नारी को नहीं
    हर नर को आत्म निरक्षण का
    पाठ पढ़ाती हूँ

    Saloni Ojha...✍

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    अग्नि परीक्षा

    नारी तुम दुर्गा हो, तुम लक्ष्मी हो
    तुम काली हो, तुम शक्ति हो
    तुम आदि हो, तुम अन्त हो
    फिर क्यूँ तुम औरो के
    हाथों की कठपुतली हो
    ©saloniiiii

  • deepak2019 64w

    Naari- shakti/Lachari

    Suna tha jism ki saudebazi hoti hai
    Bas Hawas ke bazar mein
    Ab toa phool si bachiya roudi ja rhi hai
    Hari gli aur bazar mein

    Kyun char ladki ghumane wale ko stud kaha jata hai
    Parantu ishke viprit ho toa ladki ko vesya ka name diya jata hai

    Yeh purush pradhan samaj nhi toa aur kya darshata hai
    Phir kyun article (14)-equality before law ka jhunjhuna ish desh mein diya jata hai
    ©deepak2019

  • insanesmiley 67w

    Happy Independence Day

    देश नारी, मां नारी, फिर क्यू कोई नारी की ना सोचता
    बाते करते सब बड़ी बड़ी पर हर कोई नारी को यूहीं खरोंचता ।
    भ्रष्टाचार और आतंकवाद ठीक होते होते हो जाएंगे
    पर नारी का रहा हाल यही तो हम इन्सानियत को खो जाएंगे ।।
    ©insanesmiley

  • anshikasinha_ 68w

    नारी

    मैं आग हूं, मैं राख हूं,
    मैं पानी हूं, सैलाब हूं,
    ऊपर से शांत सुशील मैं,
    मन से जंग का मैदान हूं।

    मैं पत्थर भी, शीशा भी मैं,
    अभिशाप हूं, गीता भी मैं,
    इस धरती की मैं जान हूं,
    मैं भोले का वरदान हूं।।।
    ©anshikasinha_

  • tiwaripriti 71w

    नारी वाद

    गूँज रहा है मन मे
    मेरे इक सवाल
    क्या नारी नहीं
    खुद इक मिशाल
    जिस नारी शक्ति
    ने सृजन कर
    हमें दे दी पहचान
    फिर क्यों नही
    नारी शक्ति कर
    सकती अपनी
    भी इक पहचान

    पहले नारी पर थे
    सारे रीति-रिवाजो के
    बंधन घुट-घुट करके
    चार दिवारी में ही
    हर पल जीती थी
    यह नारी
    परतंत्र की बेड़ी में
    हरपल पिसती थी
    यह नारी

    आज तो नारी के
    बदल गये हैं रूप
    परतंत्र की बेड़ी
    काट कर हो गई
    वह भी तो स्वतंत्र

    आज की नारी
    बना रही है अपनी
    तो इक अलग ही
    पहचान छू लेती
    है ये तोआसमानों
    का सीना फार
    नहीं है किसी से
    भी कम हमारे
    इस भारत देश
    की यह नारी

    नारी के इस बदलते रूप के
    साथ ही ये तो बन गयी हैं
    अबला से सबला नारी
    हो गई है आज इनकी
    भी इक पहचान
    नारी सृजन सृष्टि
    के साथ ही
    ये तो बनी
    इक मिशाल
    ©tiwaripriti

  • tiwaripriti 72w

    नारी

    नारी तू नारायणी ।
    नारी तू नारायणी।।

    तू है गुणों की खान।
    हां गुणों की खान।।

    सृष्टी का बिन तेरे ।
    ना हो बेड़ा पार।।

    नारी तेरे कई रूप हैं।
    माँ,बेटी ,बहन और पत्नी।।

    नारी तू माँ बन ।
    करती हो पालन।।

    बेटी बन कर ।
    मात -पिता का सम्मान।।

    बहन बन कर करती ।
    तुम रिश्तों का आदर।।

    पत्नी बन कर ।
    हर पल साथ निभाती हो।।

    नारी तू नारायणी ।
    नारी तू नारायणी।।



    "Naari"

    Naari tu Narayani .
    Naari tu Narayani.

    Tu Hai Guno ki Khan.
    Han Guno ki Khan.

    Shrishti ka bin tere.
    Na Ho beda Paar.

    Naari tere Kai Roop Hain.
    maa ,Beti, Bahan, aur Patni.

    Naari tu maa Ban.
    Karti Ho palan .

    Beti Ban kar .
    Maatu-pita ka Samaan.

    Bahan Ban kar karti.
    Tum Rishton ka Aadar.

    Patni bankar.
    Harpal sath Nibhati Ho.

    Naari tu Narayani
    Naari tu Narayani.

    ©tiwaripriti

  • monikakapur 74w

    अंत करने दानवों का
    नारी में चण्डी चाहिए
    आज जीने के लिए
    इक शिखण्डी चाहिए

    ना हो चौसर का पासा
    ना वस्तु तुम निर्जीव हो
    हार दी जाए जो यूँ ही?
    जागो, तुम निर्भीक हो
    बिकती हो जहां शीलता
    ना ऐसी मंडी चाहिए
    आज जीने के लिए
    इक शिखण्डी चाहिए


    लांघ लो रेखाएँ अब सब
    रावणों से ना डरो
    शक्ति हो, अग्नि हो तुम
    नाम को पूरक करो
    धर लो साहस,बल पताका
    हाथ जय की झंडी चाहिए
    आज जीने के लिए
    इक शिखण्डी चाहिए


    अब ना केशव आएँगे
    तेरी रक्षा के लिए
    युग के युग बीते हैं यूँ ही
    अधरों को अपने सिए
    गर्व से प्रज्वलित हो
    वो लौ अखंडी चाहिए
    आज जीने के लिए
    इक शिखण्डी चाहिए



    ©monikakapur

  • shoreofwords 83w

    #mirakee #naari #love #writersnetwork #respectwomen....my old post dedicated ❤️ to all women��......��we're the ultimate power��

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    .

  • __swati_ss__ 83w

    नारी

    एक ज़िन्दगी जिसमें बस्ती,
    एक ज़िन्दगी के लिए जो तरसती।।
    एक नारी,
    जो हैं सबके लिए भारी।।
    बोझ हैं मानता जग उसको,
    खुद को साबित करे, वो अब, किस किसको।।


    ©__swati_ss__

  • prashantchauhan 90w

    नारी

    स्नेह है,प्रेम है,समर्पण है,
    नारी तुझसा नही कोई
    तू समाज का दर्पण है,
    कभी माँ,कभी बहन,कभी पत्नी
    हर रुप में किया तुमने
    हे नारी समर्पण है।
    ©prashantchauhan

  • dilkepost 90w

    Naari hu main
    Shaktishaali hu main
    Par shakti mai sabko
    Dikhati nahi
    Baat apno ki
    Aati hai to
    Jhukjati hu main
    Akad apni apno ko
    Main dikhati nahi
    ©dilkepost