#naajnaaj

126 posts
  • bal_ram_pandey 103w

    ।।।अहंकार।।

    मानव क्यों इतराता है..........

    अस्तित्व
    सार्थक है कहां
    के हो जिस
    जीवन- धन- नाव
    में एक छिद्र
    समस्त वैभव जीवन
    समेटे कदाचित
    डूब जाता है.......................

    साक्षी है
    इतिहास
    नेपोलियन, हिटलर,
    कंस ,दशानन,
    रावण ,दुर्योधन ,जरासंध,
    हिरण्यकश्यप
    जैसे
    जाने कितने
    अहंकारी
    रणबांकुरे
    प्राप्त हो गए मृत्यु को
    अहंकार है फल
    विषैला जो ग्रहण करें
    काल ग्रसित हो जाता है ......

    अहंकार वश
    धन ,वैभव ,मान-सम्मान
    जीवन -सृजन
    का पुष्प
    प्रलय-घन
    में नष्ट हो जाता है ...................

    मित्र विषैले अहंकार के
    काम ,क्रोध,
    मद लोभ
    हर एक क्षण
    पी रहे रुधिर
    जीवन के छाती की
    जीवन एक दिन
    इनके कारण शक्तिहीन
    अस्तित्वहीन हो जाता है............
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 103w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @_aahana_#anitya
    #rangkarmi_anuj
    @jayraj_singh_jhala
    #osr##naajnaaj
    @naushadtm
    #odysseus
    #anjali_chopra#agentrkd007
    @vishal__
    #lafze_aatish
    #fairygurl
    #mirakeeworld#universe.

    #abhivyakti11
    @akankshanandan066 ji

    बहुत दिनों बाद पेशे खिदमत है कुछ अशआर
    सच्चाई शब्द (अल्फाज़) पर����

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    मेरी आंखों में देख और, सच कह दे
    मैंने भी की है खता कई बार, सच कहने की

    मतलबी दुनिया में कहते हैं, कोई किसी का नहीं
    झूठ सब का मगर ,सच कभी किसी का नहीं


    होठों पर सच्चाई आंखों में हया रखो
    जिंदगी जीना है तो दिल में दया रखो

    जितनी बार भी बुलाओगे चला आऊंगा
    सच का पुजारी हूं ,बुझे चराग जलाऊंगा



    सच लिखी कलम ने छुपा दी गई
    किताब, किताबखाने में
    यूं ही रोज़ बिकते रहे झूठ के किस्से,
    सच बन के ज़माने मे


    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 103w

    ।।मोह।।
    मोह के कारण
    शरीर किये कई धारण
    भटके जन्म हजार
    रही अब तक बंजारन...........
    मोह के कारण..................

    करें इंद्रियां
    मन-मोह का शोषण
    परिवार -बच्चों
    का लालन पोषण
    खोई चेतना
    हो गई हिय मारण..........
    मोह के कारण...............

    मन भंवरा
    विषयन लिपटाए
    काम क्रोध के
    बदरा छाए
    दर्शन नहीं तेरा
    झेल रहे दुख दारन..........
    मोह के कारण...............

    तन मोह से
    मोह से मन है
    मोह जनित संसार
    फंसे हैं भवसागर
    आये न कोई तारण.......
    मोह के कारण.............

    पहन शरीर के
    नए वस्त्र
    ले कर्मों के
    नए शस्त्र
    जन्म मरण के चक्रव्यू से
    मुक्त करो हे तारणहारन..........
    मोह के कारण........ .............

    पुष्प प्राण
    के सुख रहे
    तुझ बिन
    स्वप्न रूठ रहे
    ढूंढत फिरे हम
    छुपे तुम किस कानन.....
    मोह के कारण.............
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 104w

    #abhivyakti 09
    #abhivyakti10

    मिराकी के समस्त दोस्तों को मेरा सादर नमस्कार

    #abhivyakti 09
    के इस श्रृंखला में नए रचनाकारों और दिग्गज लेखकों ने एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाएं प्रस्तुत की, मैं आप सभी का हृदय तल से आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने अपनी रचनाओं द्वारा जीवन दर्शन, जीवन परिभाषा, जीवन में संघर्ष, हमारे उत्तरदायित्व तथा विभिन्न अनछुए पहलुओं से हमें परिचित कराया।

    दीपक का है, कर्म यही कि
    अंधकार मिटा दे,
    लेखक का है धर्म ,यही कि
    'जीवन' में सवेरा ला दे।।

    मैं
    #abhivyakti10
    के आगामी श्रृंखला के लिए मीराकी के चहेते रचनाकार आदरणीय @rangkarmi_anuj ji
    को "शब्द" चयन प्रक्रिया हेतु आमंत्रित करता हूं। कृपया शब्द या विषय चयन कर हमें अनुग्रहित करें। अग्रिम धन्यवाद।
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 104w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @_aahana_#anitya@rangkarmi_anuj@jayraj_singh_jhala
    #osr##naajnaaj@naushadtm
    @anjali_chopra#agentrkd007
    @vishal__#lafze_aatish#fairygurl
    #mirakeeworld#naajnaaj#univers
    **********************************
    #abhivyakti09
    #nema_ji@anita_sudhir ji
    #deepajoshidhawan ji#rikt_ ji
    #rangkarmi_anuj ji#vipin_bahar ji
    #saroj_gupta ji@prashant ji...........

    #abhivyakti 09

    सुप्रभात आदरणीय मित्रों ����

    #अभीव्यक्ति की आज की अगली कड़ी में रचना सृजन हेतु आ0 प्रशांतगजल जी द्वारा *शब्द* चयन प्रक्रिया का उत्तरदायित्व मुझे सौंपा गया है ।उनका आभार प्रकट करता हूं।

    मैं आज रचना सृजन हेतु मेरी ओर से एक सार्थक शब्द "जीवन" प्रस्तावित करने की अनुमति चाहता हूं। आशा है विद्वान लेखक और नए रचनाकार अभिव्यक्त की इस श्रृंखला मे अपनी रचना प्रस्तुत कर मुझे अनुग्रहित करेंगे ����

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    #abhivyakti#09

    इस ज्ञान यज्ञ की हवन कुंड में मेरी छोटी सी आहुति .......

    * जीवन*
    शब्दों
    के अर्थ ,
    पंक्तियों
    की संवेदना ,
    पृष्ठों
    की फड़फड़ाहट ,
    अनुभूतियों
    का व्याकरण ,
    जीवन खुली किताब की तरह ..........

    जल
    की शीतलता ,
    ज्वार भाटा का
    समीकरण ,
    रत्नाकर
    की गहराई ,
    गरजती
    लहरों का स्पंदन ,
    जीवन एक समंदर की तरह..............

    अरुणोदय
    की लालिमा ,
    गीत
    गुनगुनाती हवा ,
    दोपहर
    की तपिश ,
    सांझ
    की
    चहल-पहल ,
    रात
    का सूनापन ,
    जीवन गुजरते दिन की तरह............

    मेड़ों
    की सीमाओं से
    गिरी क्यारियां
    भूमि
    की उर्वराकता ,
    लहलहाती फसलों में ,
    कहकहाता बसंत ,
    बंजर
    भूमि की तृष्णा ,
    पगडंडियों
    का मायाजाल ,
    जीवन खेत की तरह.............
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 104w

    (नारी)
    बेटी जब लिपटी गले,
    पिता के ठिठके पांव
    खुशियां तीनो लोक की
    उसे मिली उस ठांव

    फूल सा सुकोमल तन
    और वज्र सा मन है
    सबके हित की भावना,
    नारी तुझे नमन है

    नारी की शत्रु नारी जब
    बने,बिगड़े सारे काज
    बिगड़े परिवार संतुलन ,
    कलंकित होत समाज

    सत संयम सम्मान पिया
    का, सिया सा हो त्याग
    नर मैं हो राम की झांकी
    क्यों जाएं काशी प्रयाग

    पशुता त्यागे नर यदि दे ,
    नारी को उचित अधिकार
    समाज करे उन्नति ,
    खुशहाल रहे देश परिवार
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 104w

    सैनिक

    तन वज्र है ,
    मन व्यग्र है ,
    आंखों में प्रलय ,
    सांसों में ज्वाला,
    हम हैं शिव ,
    पीकर हलाहल ,
    देते देश को ,
    सोम का प्याला.......।।

    रक्त का चंदन ,
    शीश का वंदन ,
    हाथ में मुंडो ,
    की माला ,
    होकर निर्भीक ,
    संहारे रक्तबीज ,
    त्याग स्वजन मोह ,
    देश प्रेम व्रत पाला.......।।

    जल थल नभ ,
    हम विचरे सब,
    जगते हर प्रहर,
    जीवन कठोर ,
    किंचित कर डाला ,
    ध्येय देश रक्षण ,
    करें शत्रु भक्षण ,
    दुष्ट दलन का ,
    प्रण लेकर भटके ,
    पर्वत घाटी औ ,
    नदी नहर नाला.....।।
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 104w

    ।।आत्म निर्भर।।

    हम भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं......

    अविरल प्रगति ,
    की धारा अब ,
    एक आत्मनिर्भरता ,
    लक्ष्य हमारा अब,
    कठोर शिला चीर निर्झर बह सकते हैं...

    अपमानित बनकर,
    जीवित रहना
    राष्ट्रभक्ति उपेक्षित
    करते रहना
    आत्मसम्मान बेचना नहीं सहन कर सकते हैं...........

    वस्तु स्वदेशी का
    उत्पादन बढ़ाना है
    विदेशी संक्रमण
    से देश बचाना है
    सूखे हृदयों में विश्वास दीप जल सकते हैं....

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 104w

    ।। राष्ट्रभाषा हिंदी ।।
    शब्दों के सुमन हैं , तुझको अर्पित
    अश्रु धार है मां , तुझे समर्पित

    तेरा गौरव , तेरी कीर्ति ,मां अमर रहे
    मेरी भी आहुति ,जब तक समर रहे

    पाकर आश्रय तेरा ,पनपी बहु भाषाएं
    तुझसे है जुड़ी ,कोटि-कोटि आशाएं

    राजमुकुट तू ,भारत के माथे का चंदन
    तू राष्ट्र स्वर आजादी का ,तुझको वंदन

    वर्तमान पीढ़ी करें ,संस्कृति की पहचान राष्ट्रभाषा हिंदी मांगे,नए तुलसी- रसखान
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 104w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @_aahana_#anitya
    @rangkarmi_anuj
    @jayraj_singh_jhala
    #osr##naajnaaj
    @naushadtm
    #odysseus
    #anjali_chopra#agentrkd007
    @vishal__
    @lafze_aatish
    @fairygurl
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe


    #abhivyakti03
    #Vipin_bahar
    @nema_ji
    @kishor634
    @deepajoshidhawan
    #rangkarmi_anuj����

    कविता में किसी भी पंक्ति में किसान शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है����

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    ।। किसान।।

    इतिहास रहा सदियों से, संघर्ष हमारा
    वारिस हैं मां के, धरती से संबंध
    सत्ता के सिंहासन, हमसे सुख पाते
    अन्न उगाते है हम ,दुख से हैं अनुबंध

    है कोलाहल के स्वर शहरों में
    मेरी 'बखरी 'का आंगन सूना
    मैं अपने अधिकारों से वंचित
    सरकारी बाबू लगा जाते हैं 'चूना'

    दीप सा जलकर बुझ जाते
    कांटो में खिलके मुरझा जाता
    पीड़ाओं से लिखी गई मेरी गाथा
    वैभव हीन ,सूखी रोटी से नाता

    मेरे अथक परिश्रम का बोध
    ऐसे किया गया
    लागत रुपए "सौ"
    रुपए "पचास " दिया गया

    मुझसे ना होगी खेती
    कोई ले लो 'परती' या 'अधिया'
    मुझे क्षमा करना मेरे पूर्वजों
    रख दिया कुदाल, खुरपी, हंसीया

    मेरे मन की व्यथा समझे
    कौन सा सरकारी तंत्र
    कुर्की और नीलामी का
    सौगात में मिलता है तंज

    सूखे पड़े खेत खलियान
    कभी आंखों में पानी
    चील उड़ रहे सूखे बादलों से
    मेरी लाश पड़ी है बेमानी

    मेरे बच्चे भी अब
    परदेसी सारे हो गए
    कहते हैं गांव वाले अब
    उनको देखे बरसों हो गए

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 105w

    ( कलम )

    शब्द चुनता हूं
    संवेदनाएं बुनता हूं
    मैं हूं कलम हर जन की
    समस्याएं सुनता हूं

    आकुल हृदयों की
    वाणी हूं मैं
    प्रज्वलित आहों की
    स्याही हूं मैं

    मैं दिव्य ज्ञान को
    आलोकित करता
    पावन मंत्र रिचाओं से
    जन ह्रदय सिंचित करता

    मैं ग्राम- शहर
    का प्राण - पुष्प
    देश - विदेश की
    चेतना करता प्रबुद्ध

    सदियां कितनी बीती
    मैं प्रलय से रहा अछूता
    रच डाला ग्रंथ अनेकों
    रामायण और गीता

    मैं हर कालखंड की
    गरिमा का रखवाला
    मैने समय प्रहरी बनकर
    उर में बड़वानल पाला

    मैं कवियों का अमर धरोहर
    मुखरित करता राष्ट्र - स्वर
    जन-मानस का परिचय मैं
    लोकतंत्र करता सबल

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 105w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    #mirakeeworld#naajnaaj#univers्््््््््््््््््््््््््््््
    नवाजे -जंग =रणक्षेत्र
    खुशामदी =चापलूस
    बेसूद =अर्थहीन
    सियाही =अंधेरे
    दस्ताने -मलाल=दुखो की कहानी
    तस्कीन =अमन चैन
    तखय्युल=दिमाग
    खु़लुस =प्यार

    Read More

    ग़ज़ल

    दिल में अपने दस्ताने -मलाल रखना
    लबों पर मुस्कुराहट हज़ार रखना

    ज़िंदगी हो गई है आज मुहाजे-जंग
    वफादार अपने कोई साथ रखना

    खुशामदी मिलेंगे हमनफस बनकर
    बंदा-ए-उल्फत कोई ख़ास रखना

    बेसूद है भटकना सियाही में दोस्तों
    सफ़र में पास अपने चराग रखना

    खुले रखना अपने दर गरीबखाने के
    आने जाने पर उनके निगाह रखना

    बदलते ख़्याल , तखय्युल , खु़लुस में
    हर वक़्त के लिए ख़ुद को तैयार रखना

    लाज़िम है तस्कीन के लिए मुल्क में
    लबों पे गीता आंखों में क़ुरान रखना

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 106w

    चाहे सांवरा ,
    मन बांवरा,
    कठिन है डगर,
    समझे ना.........

    माया राधा ,
    मन में बसी,
    कर्म की डोरी,
    पइयां फंसी,
    तन बटोही,
    सुन ले ना............

    अहं का रथ ,
    मन की सवारी,
    सारी उमरिया,
    मत की मारी,
    कबहु चिन्ही,
    प्रितमे ना.............

    भाग्य से सारे ,
    रिश्ते नाते,
    जीवन - मरण,
    सुख-दुख पाते,
    कर्म की तराजू,
    उलझे ना ............

    सोने की लंका ,
    जग ये सारा,
    विषयों में फंसे,
    मन बेचारा
    चाह पिया ,
    की सुलझे ना..........

    चाहे सांवरा ,
    मन बांवरा............
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 107w

    आंसू हैं चिंतित, पलकों के
    तटबंध ,ऊंचे बन गए

    टूट गए , आईना ए अश्क
    प्रतिबिंब , हजारों छन गए

    शब्दों की मर्यादित,मौन व्यथा
    एहसासों के ,तंबू तन गए

    मन फकीर ,जन्मों की यात्रा
    विरह में , कितने जन्म गए

    हास्य , रुदन -पीड़ा, विरक्ति में
    हाय! कितने वृथा क्षण गए

    कमल मन मुस्काए, अंबर बरसे
    मन मुदित हर्षित, भीग तन गए

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 109w

    तुझको पाकर भी तेरा तलबगार रहे
    कटती रही शाखें पेड़ साऐदार रहे

    तू होशियार है, दुनिया भी कम नहीं
    गफलत में इसी हम बेपरवाह रहे

    ख्वाहिशें, जरूरतें , दौड़ाते रहे दिनभर
    शाम ए गुरबत में तेरा इंतजार रहे

    बुझ गई शम्मां ,जुगनू टिमटिमाते रहे
    आब ए वफ़ा से अंजुमन गुलज़ार रहे

    खुशामद ऐ ज़िंदगी कितनी कराएगी
    रखना तुझसे उम्मीद ए वफ़ा बेकार रहे

    हमने देखा मौसम रिश्तो के बदलते
    अशआर मेरे ग़ज़ल के वफादार रहे

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 109w

    ज़िंदगी की भट्टी , सांसो की आग में
    रिश्तों का धुंआ दिखा,सपनों की राख में

    अश्कों से भीगी मिली पंख तितलियों के
    कौवें करें कांव-कांव करे आज बाग में

    शब ए शहर गुजरी रोज बेचैन शहर में
    सुहानी नींद आई गांव की टूटी खाट में

    शतरंज की बिसात सियासत यूं ने चली
    बढ़ने लगी जनता मज़हब जात पात में

    क्या बांटी मिठाईयां कैसे मनाए त्यौहार
    मरे सिपाही सीमा पर दिवाली -फाग में

    किस्सा ए मोहब्बत सुन लेना गज़ल में
    वादा है आएंगे कभी हम तेरे ख्वाब में

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 109w

    मेरी कुछ अनकही बातों का हिसाब रखना
    करेगा वक्त सवाल तो तैयार ज़वाब रखना

    जो गुज़र गया है आलम गुजर जाने दो
    आगे चलकर आंखों में कुछ ख़्वाब रखना

    सूरत से नहीं होती सीरत की पहचान
    कड़वी ज़बान हो मगर नीयत न ख़राब रखना

    वाईज समझाते रहे ना जाओ मयखाना
    पीलाना हो तो साकी आंखों में शराब रखना

    खुदा करे और भी हो जाओ अमीर तुम
    मां बाप के नाम मगर‌ कुछ ज़ायदाद रखना

    फ़र्ज़ ए वफ़ा है तुझ पर इश्क़ करने वालों
    आंख में दर्द के मोती ,उसके सर ताज रखना
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 110w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @my_world_of_words#anitya
    @rangkarmi_anuj
    @jayraj_singh_jhala
    #osr##naajnaaj
    @naushadtm
    #odysseus
    #anjali_chopra#agentrkd007
    @vishal__
    #lafze_aatish
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe

    बस यूं ही लिख दिया कृपया ����
    बिना किसी पूर्वाग्रह के पढ़िएगा

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    आपको ख्वाब हवाई चाहिए
    हमें भी तो वाह वाही चाहिए

    जख्म ए दिल ठीक नहीं होता
    हमें भी अब दवाई चाहिए

    नींद नहीं आती गद्दों पर
    हमें गांव की चारपाई चाहिए

    कब तक खाएं सूखी रोटी
    हमें भी अब रसमलाई चाहिए

    कब तक भरोगे तिजोरी अपनी
    दूसरों के करनी भलाई चाहिए

    मैंने दर्द में जीना सीख लिया
    अब दर्द भी मुझे पराई चाहिए

    हो गई बहुत चाय पर चर्चा
    ईमानदार अब एक 'नाई' चाहिए

    रोज चलती गोलियां सरहद पर
    हमें रक्षा मंत्री एक 'कसाई' चाहिए

    उगता सूरज , चमकता चांद
    हमें दिन - रात रोशनाई चाहिए

    जो ना देखें धर्म, जात ,भाषा मेरा
    ऐसा मुझे एक 'भाई' चाहिए

    मेरी सुख सुविधा छीन लो सब
    लौटा दो मुझे मेरी 'माई' चाहिए

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 110w

    मजदूर ----एक ग़ज़ल

    जिस मंज़िल को निकले ,वह सफ़र ना मिला
    मौत मिली, रोटी ना मिली, घर ना मिला

    चलते रहे कदम ,धूप की तपिश में दिन भर
    भूख मिली, आंसू मिली, सायेदर शजर न मिला

    ऊंची ऊंची इमारतें, मीले, क्या-क्या न बनाया मैंने
    मजदूर मजबूर हूं ,रहने को कोई दर ना मिला


    महामारी कोरोना ना आती ,तो आंखें ना खुलती
    गांव बुलाऐ मां की तरह, सपनों का शहर ना मिला

    सियासत की रोटियां सेकते हो, वादों के तवे पर
    छालों को लगाए मरहम, ऐसा हमसफ़र ना मिला

    रेल की पटरी मिली, ट्रक के गर्म 'पतरे' मिले,
    गर्म लू मिली, धूल मिली ,चैन का बिस्तर ना मिला

    तेरे रिसॉर्ट है, बंगले हैं ,कितने ही देशों में पता है मुझे
    मुझे झोपड़ी मिली, निवाले ना मिले, डॉलर ना मिला

    जर्जर नाव, टूटे पतवार, थका हुआ है ना खुदा
    कितनी अखियां सुख गई ,राह में समंदर ना मिला

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 112w

    ।। दोहे ।।

    कितने प्रगाढ़ अनुबंध थे,तुमसे थे सब ख्वाब
    वक्त हाथ में लिए मिला ,सूखा हुआ गुलाब

    रिश्ते नाते दिखे नहीं , पड़ीं आंख में
    धूल
    दौलत के प्रभाव में ,गए मित्रता
    भूल

    गीता और कुरान में, हो रही भयानक
    जंग
    शत्रु राम का हुआ रहीम, बिगड़ गये
    संबंध

    हंसकर जब भी मिला ,स्नेह से मैंने की बात
    मित्रता अनोखी देखी , जेब रहे हैं
    काट

    धर्म और सियासत ने, ऐसा रिश्ता किया कबूल
    खेत में गुलाब के, अब उगने लगे
    बबूल

    प्रेम प्रसंग है तोड़ रहे, जात-पात
    विधान
    मां बाप भाई बहन ,कर रहे इसका भुगतान

    ©bal_ram_pandey