#mugal

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  • sh_gopal 163w

    #Rajasthan #veer #chittorgarh #30march
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    वन- वन में घूमे प्रताप जहाँ ,
    दल- दल में खिला कमल जहाँ ,
    कण - कण महकता हैं वहां।
    विरो रो स्थान जहाँ वो प्यारो राजस्थान हैं....।।

    चमचमाती हैं सोने सी जहाँ की धरती ,
    वीरो की वीरता नित्य जहाँ छलकती ,
    पुरुष ही नहीं , बच्चे भी देते शीश वहां
    प्रकृति हैं महेरबान वहां वो प्यारा राजस्थान हैं.।।

    इतिहास जहाँ का उजला हैं..
    राजवास वहां का किला हैं..

    वो सप्त रंगो का राजस्थान हैं ..

    वो प्यारा राजस्थान हैं ..
    वो प्यारा राजस्थान हैं..

    जहाँ जौहर को जन्म मिला
    जहाँ मुगलों को मात मिली
    वहां भामाशाह जैसे दानी मिले
    लहरा रहा आसमां में भगवा वहां

    वो प्यारा राजस्थान हैं ..वो प्यारा राजस्थान हैं..

    शासन जहां ,एकलिंग का
    आसन वहां , ब्रह्मा का

    लहलहराती हैं बालिया जहाँ
    बहती थी सरस्वती वहां
    वो उदार हृदय वाला....

    वो सप्त रंगो का राजस्थान हैं ..
    वो प्यारा राजस्थान हैं ..वो राजस्थान हैं

    ©Sh_Gopal

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    " राजस्थान "

  • khwabon_ki_udaan 205w

    एक प्रयास उस महा-मानव हेतु कुछ लिखने का, उस इतिहास को शब्दों में बांधा तो नही जा सकता पर कुछ दृश्यों को कागज पर उकेरने का।

    #महाराणा_प्रताप
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    @hindiwriters. @khayalo_ki__kalam_se
    #hindiwriters #postoftheday

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    महाराणा प्रताप

    इक राणा महाराणा वो,
    भीरु निडर साहसी था।
    शत्रुओं का संघरक वो,
    माँ धरती का प्यारा था।।

    दिव्य प्रताप ओजस्वी वो,
    नृप कुल का उजियारा था।
    पर कनक छोड़ कनक में वो,
    घास कि रोटी खाता था।।

    मातृ भक्त इक सच्चा वो,
    न मुगल राज अपनाता था।
    स्वराज्य का स्वप्न लिये वो,
    जा अकबर से टकराया था।।

    इरादों का फौलादी वो,
    ना साम- दाम में आया था।
    दण्ड-भेद मे न फसकर वो,
    राणा,महाराणा कहलाया था।।

    हल्दीघाटी का समर वो ,
    जहाँ इतिहास रचाया था।
    मुगल राज को पस्त कर वो,
    आदर्श अनूठा बन पाया था।।

    नील वर्ण का अश्व वो,
    चेतक महान कहाया था।
    जो निज स्वामी की रक्षा को,
    स्व प्राण झोंक आया था।।

    झाला,चेतक,भामाशाह वो,
    ने जो साहस दिखलाया था।
    उनके गठित प्रयासों से वो,
    राणा मानसिंह घबराया था।।

    ये गाथा चंद शब्दों की,
    उस देव तुल्य महा-मानव को।
    उन संयुक्त प्रयासों की,
    जो थे स्वाधीनता पाने को।।

    कुछ पंक्तियाँ इक लेख़क की,
    असक्षम हैं भाव वो जतलाने को।
    यूँ कहुँ तो चंद श्रद्धा-सुमन हैं,
    आदर वो जतलाने को।।

    ©khwabon_ki_udaan