#mohobbat

857 posts
  • nadeem1998 2w

    Allah

    Magar Hum Allah ki Muhabbat Tab daikhte hain
    Jab duniya ki muhabtain thaka daiti hai..
    ©nadeem1998

  • the_un_heard 4w

    कटाक्ष

    मेरे शब्दों में जो कटाक्ष है जो तीखापन है
    वो दिल टूटने की या बेवफाई की वजह से नहीं है

    मेरे लिखे हर एक अल्फाज़ की जो धार है,
    वो सिर्फ इस ज़माने को बस उसकी ही तस्वीर दिखाने को है

    जैसे आजकल सब अपनी जुबान पर तलवार लिए चल रहे है
    मैंने बस खुद के बचाव में अपनी कलम की नोक को ज़रा धारदार कर लिया है

    अगर तुम्हारे लिए मेरे शब्द बरदाश्त के बाहर हो जाये,
    तो मुझे कुछ कहने से पहले अपनी रूह से गुफ़्तगू करना

    क्योंकि यह जो तुम्हें दिख रहे मुझमे खोखले कुछ घाव है,
    वो किसी की ठोकर से नहीं जीवन की हर सीख पर गुरुदक्षिणा समान है

    ©--अनन्य

  • the_un_heard 4w

    शौक बहुत सी चीजों का रखता हूं,
    मगर आता कुछ भी नहीं है मुझे

    चलना आता है और रास्ते भी सारे जानता हूं
    मंजिल मगर चुन्ना आता नहीं मुझे

    यूँ तो सारी गिरहें सुलझाने का हुनर रखता हूं
    ना जाने किसने मुझको में ही उलझा रखा है मुझे

    शौक बहुत सी चीजों का रखता हूं,
    मगर आता कुछ भी नहीं है मुझे

    ©--अनन्य

  • imagin 8w

    Dil k darwaze pe phir s tere dastak mangu,
    Tujh se he fir apni pheli si mohobbat mangu,

    Vo chah jo hum mein the, phir se vahi chahat mangu,
    Tujh se he fir apni pheli si mohobbat mangu

  • sramverma 9w

    Date 15/02/2021 Time 2:19 PM #SRV #mohobbat

    ये इश्क़ है क्या ,
    अटकती सांसें
    बहती ऑंखें
    तड़पती रूहें
    धड़कती छतियाँ ;

    ये मोहब्बत है क्या ,
    सुहानी सांसें
    स्वप्निल ऑंखें
    मचलती रूहें
    सुकुनी छतियाँ !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    ,

  • darshanjain461 9w

    I love you ❤️

    ;Nishan
    ©darshanjain461

  • highlight4522 9w

    .

  • highlight4522 11w

    .

  • himanshuchaturvedi 11w

    इश्क़ में तुम्हारे
    कितना आसान हो गया हूं
    सब चालाकी छोड़ के
    कुछ और इंसान हो गया हूं
    और इस मोहब्बत का तो
    बेहद शुक्रगुजा़र हूं मैं जाना
    दिली फ़कीरी छोड़ के जो सुल्तान हो गया हूं

    ©himanshuchaturvedi

  • mankahi 12w

    Daastan

    छूट गये कुछ हाथ जीवन की राहों में,
    और कुछ राहे छूट गई थामे हाथ हाथों में|
    ©mankahi

  • himanshuchaturvedi 12w

    तुम्हे खुद में
    मै हर रोज़ जीता हूं
    कोई कह दे भूल जाओ उन्हे
    तो फ़िर क्या अब जीना छोड़ दें..?
    .
    ©himanshuchaturvedi

  • himanshuchaturvedi 13w

    प्यार ने तेरे..इस दिल में वो जगह ली है
    जो जगह दिल में मेरे खुदा की है
    चाहूं तुझे अब और कितना ही ज़्यादा
    मुस्कुराहट तेरी..मेरे जीने की वजह रही है
    और तुझे जो देखा था तब से...
    अधूरा मान लिया खुद को
    के खुद को कुछ भुला कर..
    तेरे लिए इस ज़िन्दगी में जगह की है
    अब मेरा होना ना होना तुझ पर है..
    मेरा मुझ पे अब कोई हक़ नहीं
    तो जो तू आए जताने हक़ गर कभी..
    तो बताना मुझे...
    तेरे लिए मैने इस जीवन के पिटारे में अपनी कई खुशियां जमा की हैं

    ©himanshuchaturvedi

  • himanshuchaturvedi 15w

    तेरी मुस्कुराहट को
    आंखों में बसा लेने को जी चाहता है
    जीवन के हर मौसम में
    तेरे संग खिलखिलाने को जी चाहता है
    चांद, सितारे, फूल, नदियां, बगियां
    ये तो सब निहारते हैं
    मुझे तो बस तेरे चेहरे को
    तकते जाने को जी चाहता है
    और...
    तुझ से मिला हूं जब से
    कुछ बोलना मुझे
    अच्छा ही नहीं लगता
    हरदम तेरी आवाज़, तेरी बोली
    बस तेरी मासूम बातें सुनने को जी चाहता है

    .
    ©himanshuchaturvedi

  • laconic_words 15w

    Lagti nazane vo,
    Kyun itni zaruri thi.
    Lgti nazane vo kyun itni zaruri thi.
    Jb badi mushkillon se chorda use,
    Jb badi mushkillon se,
    Chorda use.
    Tb smjh aaya ki vo aadat kitni buri thi.


    लगती नजाने वो क्यूं इतनी जरूरी थी,
    लगती नजाने वो,
    क्यूं इतनी जरूरी थी।
    जब बड़ी मुद्दतों के बाद छूटी वो,
    जब बड़ी मुश्किलों के बाद छूटी वो,
    तब पता चला, वो आदत कितनी बुरी थी।

    ©laconic_words

  • himanshuchaturvedi 16w

    मै अपने शहर से निकल आया
    तू अपने घर से निकल आना
    मेरी पल पल की तडपन को
    एक उम्मीद दिखलाना
    ये अपनी ज़िंदगी पूरी
    तेरे मै नाम लिखता हूं
    तू हो सके तो
    कुछ मोहब्बत
    मेरे नाम ले आना
    और बहुत थक सा गया हूं मै
    इस इंतजार में तेरे
    कुछ ना हो भी गर अब तो
    बस गले आ के तू लग जाना

    ©himanshuchaturvedi

  • mannu_love 16w

    Love

    तेरी मोहब्बत को अपनी आंखो में सजा रखता हूं मैं
    तेरी इबादत को अपने दिल में बसा कर रखता हूं मैं
    खाक होने तक तेरे तस्वीर में मेरी ज़िनदगी गुज़रे इस दुआ को अक्सर खुदा से साजदा में जा कर रखता हूं मै
    मेरे कन्धे पे सर रखकर जब वो आंखो को बंद करती है अपनी नज़रों को मुस्कुराकर रखता हूं मै
    उसके चेहरे पे उसी के इशारे में जीना है उसी के इशारे में मरना है मुझे इसी शामा को अपने दिल मै पल पल जलाकर रखता हूं मैं
    ©mannu_love

  • prince_shridhar 17w

    Teri Zid hi to thi.. jo mujhe todti rhi ..

    #shridhar_writes

    #mirakee #shayari #mohobbat

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    Zidd

    Toot jaegi teri zidd ki aadat
    us waqt ..

    Jb khabar milegi, k tujhe yaad
    Karne wala ..

    Khud yaad ban chuka hai !!

    ©unkahey_lafz

  • kaustubh_jumle 17w

    वक़्त से काम

    इस घड़ी में घड़ी को थाम ले हम, ये वक़्त है की वक़्त से काम ले हम,
    कहते है मोहब्बत के मायने है खुदकशी, ये जान कर मोहब्बत की जान ले हम,
    ये वक़्त है की वक़्त से काम ले हम।

    नशे का नशे से होता है कत्ल, बे-सुरूरी के लिये जाम ले हम,
    नींद छीनी है रातों ने मुझसे, इन्हे टालने के लिये उधारी में शाम ले हम,
    ये वक़्त है की वक़्त से काम ले हम।

    कहते है बंजारन तेरी सूरत को, सीरत की वदियों में मकान ले हम,
    मै जानू तेरी क़ुर्बत में है कुछ तो बात, इस लिए एक दूरी से सलाम ले हम,
    ये वक़्त है की वक़्त से काम ले हम।

    बुरी लगती है दिल की तस्करी बोहोत, तो कागज़-कलम की दुकान ले हम,
    कहते है तुझे गिला है घाट से, उसी लहजे में बनारसी पान ले हम,
    ये वक़्त है की वक़्त से काम ले हम।

    फ़रिश्तो से हमारा क्या वास्ता, बड़ी बेपरवाही से तेरा नाम ले हम,
    इश्क़ मोहब्बत प्यार की बातें, ये सब भरम ये मान ले हम,
    क्यो कि, ये वक़्त है की वक़्त से काम ले हम।

    ©kaustubh_jumle

  • kaustubh_jumle 17w

    बातें

    कभी रिश्तों की तरह उलझी ये बातें।
    कभी वीणा के तारो सी सुलझी ये बातें।
    कभी बाहों के दर्मियां सिमटि ये बातें।
    कभी होटों की नमी को चूमती ये बातें।
    कभी रोज़मर्रा की तल्ख़ियाँ ये बातें।
    कभी कभी-कभार की गलतियां ये बातें।
    कभी आचल पर गुलकारी सी ये बातें।
    कभी सिगरेट पर चिंगारी सी ये बातें।
    कभी दिमाग पर ज़ोर डालती ये बातें।
    कभी ज़ाहिर सी चीज़ें टालती ये बातें।
    कभी तितलियोँ की शोखिया ये बातें।
    कभी रातकली की झाकिया ये बातें।
    कभी ज़ाफ़रान सी महंगी ये बातें।
    कभी खुले आस्माँ सी सौंधी ये बातें।
    कभी पलाश की सादगी ये बातें।
    कभी दिलासों में लिपटी कागज़ी ये बातें।
    कभी गर्म चाय की चुस्की ये बातें।
    कभी सर्द बादलों की सिसकी ये बातें।
    कभी लाल मिर्ची सी तीखी ये बातें।
    कभी खिचड़ी सी फीकी ये बातें।
    कभी हलकी सी सरगोशी ये बातें।
    कभी महज़ खामोशी ये बातें।
    ©kaustubh_jumle

  • kaustubh_jumle 17w

    जुस्तजू

    तेरे ज़बीं की सुर्खियत इस कदर, की मेरी आखों को ज़ुल्फ़ों की जुस्तजू
    तेरी ज़ुल्फ़ों में अंधेरा इस कदर, की मेरे जिस्म को आगोश की जुस्तजू
    तेरे आगोश मे खामोशी इस कदर, की मेरे कानों को होटों की जुस्तजू
    तेरे होटों पर बेतकल्लुफी इस कदर, की मेरी इस्मत को आचल की जुस्तजू
    तेरे आचल में पर्दानशीं इस कदर, की मेरी तन्हाईयों को रानाइयों की जुस्तजू
    तेरे रानाइयों मे पुख्तगी इस कदर, की मेरी मोहब्बत को ऐब की जुस्तजू
    तेरे ऐब मे फरैब इस कदर, की मेरे खुलूस को नज़रों की जुस्तजू
    तेरे नज़रों मे नशा इस कदर, की मेरी नीम-बाज़ी को सादगी की जुस्तजू
    तेरी सादगी मे खुदाई इस कदर, की मेरी इंसानियत को खुराफत की जुस्तजू
    तेरी खुराफत मे नज़ाकत इस कदर, की मेरी चाहत को रिफाकत की जुस्तजू
    तेरी रिफाकत मे वफा इस कदर, की मेरी आशनाई को बेवफाई की जुस्तजू
    तेरी बेवफाई मे सितम इस कदर, की मेरे ज़ख्मों को ठंडक की जुस्तजू
    तेरे ठंडक मे मुसल्सल इस कदर, की मेरी ज़ुबाँ को दवा की जुस्तजू
    तेरी दवा मे कढ़वाहाट इस कदर, की मेरे ज़यके को हलावत की जुस्तजू
    तेरे हलावत मे नमी इस कदर, की मेरे खुमारों को रेग्ज़ारों की जुस्तजू
    तेरे रेग्ज़ारों मे खालीपन इस कदर, की मेरी बोरियत को लतिफों की जुस्तजू
    तेरे लतिफों मे ठाहाके इस कदर, की मेरी मुस्कराहट को सासों की जुस्तजू
    तेरी सासों मे सौन्धापन इस कदर, की मेरी पलकों को नींदों की जुस्तजू
    तेरी नींदों मे ख्वाब इस कदर, की मेरे सवेरे को शामों की जुस्तजू
    तेरे शामों मे मेहताब इस कदर, की मेरे जिया को अटरीया की जुस्तजू
    तेरी अटरीया मे समा इस कदर, की मेरे फ़ज़ा को आस्माँ की जुस्तजू
    तेरे आस्माँ मे लाज़वालियात इस कदर, की मेरी गुलामी को दायरे की जुस्तजू
    तेरे दायरे मे दिलकशी इस कदर, की मेरी दिल्लगी को ज़िंदगी की जुस्तजू
    तेरे ज़िंदगी मे राज़्दारि इस कदर, की मेरी ज़िंदगी को जुस्तजू की जुस्तजू
    ©kaustubh_jumle