#lucknow

252 posts
  • guftgu 3d

    ये रात कम पड़ जाएगी ,इश्क जाहिर करने में,
    बातें कम पड़ जाएगी, सब कुछ कहने में!
    कैद कर लूं ये लम्हा या थाम लूं वक्त को,
    निगाहें पढ़ लूं तेरी या रोक लूं सेहर को !
    ©guftgu

  • guftgu 3w

    एक शोर सा खत्म हुआ दिवाली पे ,
    अगले दिन फिर खुद को तन्हा पाया मैंने!
    ©guftgu

  • guftgu 7w

    दो दिन से मौसम कुछ अलग सा लग रहा है ,
    दस्तक सर्दियों की है ,या तेरे लौट आने की !
    ©guftgu

  • guftgu 7w

    कभी ये सूनापन तो कभी ये आवारापन ,
    या तो मैं तन्हा हूं , या भीड़ में है ये मेरा अकेलापन !

    हर रोज की तरह चल रही है जिंदगी ,
    हर रोज ढूंढता हूं बातों में अपनापन !

    कभी साथ वक्त बिताया मैंने कश लगा के ,
    तो कभी हाथ में थी भरी शराब का फीकापन!

    कभी लोगो के ताने सूने ,
    तो कभी उनको महसूस कराया उनका खोखलापन!

    कभी खुद की खुशी को निगल लिया ,
    तो कभी गैरों में खुद को ढूंढ लिया !

    कभी ये सूनापन , तो कभी ये आवारापन !
    या तो मैं तन्हा हूं , या भीड़ में है विराज का अकेलापन!
    ©guftgu

  • guftgu 9w

    शिकवे और शिकायतें उन्हीं से हैं, जो दिल के करीब हैं,
    वरना हर शक्स यहां अपने आप में मशरूफ रहता है !
    ©guftgu

  • guftgu 10w

    Ek Aadhi Raat , Ek Aadha Ishq , Kuch Jazbaat aur Tumhare paas hone ka Ehsaas . Ye sab hai Aaj Saturday ko . ❤️��❤️

    @hindiwriters @miraquill @writersnetwork @hindinama @writerstolli #pod #love #podcast #poetry #lucknow

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    यूं रात जब भी होती थी मुस्कुराना तुम्हारा याद है ,
    खिड़की के छज्जे पे बैठ के यूं निहारना याद है !
    तुम्हारे लबों का सुनापुन क्या कुछ न कह जाता था ,
    तुम आंखे झपकती थी खिड़की से, प्यार मुझे आता था !

    वो सीढ़ियों से चढ़ते हुए खिड़की तक मेरा चले आना ,
    वो अनकहे जज्बातों को अल्फाजों में बयां कर जाना !
    वो दरवाजे की आहट पर तुम्हारी सांसों का सुनापन,
    एक पल मौन होकर तुम्हारी आंखों में डूब जाना !

    तुम्हारी उंगलियों का मेरी उंगलियों में कैद हो जाना ,
    तुम्हारे खामोश से लबों पे मेरी मुस्कुराहट सजाना!
    तुम्हारी गर्दन के करीब इन होंटो का चले जाना,
    और सुलगती सांसों का तेज हो जाना !

    थम के पीछे से कस के तुम्हे कैद कर लेना ,
    कमर में अपनी बाहों को सजाना ,
    उंगलियों से तुम्हारे बदन पर आकृति बनाना,
    धीरे धीरे माथे से जुल्फों को हटाना !

    एक चादर में मदहोश दो बदन को समेट लेना ,
    तुम्हारी आंहों को अपनी आंखों में छुपा लेना !
    तुम्हारी नाभी में अपनी उंगलियां पिरोना ,
    फिर अपने दांतों से इश्क की चुभन को गर्दन पे देना !

    इस सफर के हर कदम को हमदोनो के जिस्म पे भरी होना ,
    मुझे पकड़ के तुम्हारे मेरे सिरहाने लेट जाना ,
    मेरे करीब आकर मेरे सीने पे अपने निशान दे जाना ,
    मेरे उपर गिर कर वो रात मेरे नाम कर जाना!
    ©guftgu

  • preet_pakhi 14w

    लखनऊ ❤️

    हमें तमीज़ मत सिखाइये ज़नाब,

    हमारे शहर में अपने से छोटे को भी आप कहते हैं।
    ©preet_pakhi

  • guftgu 15w

    इन आंखो के सामने झुक जाते हैं कई फैसले मेरे ,
    बता गर रजा, तेरी हो तो मोहब्बत शुरू करे !
    ©guftgu

  • guftgu 16w

    वो तरस जाता है मेरे हालत को देख कर ,
    कमबख्त एक वही है जो मेरी सूरत ना देखता !

    मैं उसके अकेलेपन को अपना नाम देता था ,
    एक वो है जो मेरी सीरत ना देखता !
    ©guftgu

  • prose_of_soul 17w

    #Lucknow incident.....
    ...
    Feminism on road... Well it's just a cowardly act by a sick female...
    जिसका i think झगड़ा हो रखा होगा पति या so callled bf से
    और दीदी चड़ गयी बिचारे गरीब पे...
    ....
    Those guys or girls who think it's kind of heroic act to make anyone suffer just because they don't reciprocate...
    ......you guys are morons and cowards...
    ...
    अपने से ताक़तवर के सामने तुम्हारी फ़ट के हाथ में आती है...
    Same goes with boys and girls who after betrayal cheat others..
    Because they don't have a courage to take revenge from the person who caused them pain that's why they keep hurting innocents just to boost their shattered ego and gain strength and relief...
    .....

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    It's very easy to harass the unprivileged, the poor one's, the weak
    Just because we think we can easily dominate their beings and we are so sure that they will not reciprocate....
    ...
    ©prose_of_soul

  • guftgu 18w

    आंखों में भरी शिद्दत का नजारा देखो ,
    मैं फना हूं उसके इश्क में , मुझे आवारा देखो !
    ©guftgu

  • guftgu 18w

    किस बात से खफा हूं ,किस बात कि सजा दूं ,
    किस किस ने ना छोड़ा मुझे ,किस किस को अपना कहूं !
    किस मोड़ पे पहुंच आया हूं मैं ,
    किस इश्क को अपना , किस शौक को तन्हा कहूं !

    किस बात पे हैरान हो जाऊं ,किस बात पे रूठ जाऊं,
    किस किस्से की कहानी को अपना कहूं ,
    तन्हा यादों की रवानी में डूब जाऊं !
    ©guftgu

  • guftgu 19w

    मुराद है मेरी कि , तु दिख जाए मुझे लतीफों के शहर में,
    ए खुदा मेरी इतनी सी दुआ कबूल कर ले !
    ©guftgu

  • guftgu 21w

    अपना आशियां और गलियां मैने छोड़ दी ,
    और एक तेरा शहर जो अभी दिल से उतरा नहीं !
    ©guftgu

  • _himwrites 21w

    शहर!

    शहर!
    इक रोज़, इस शहर की गलियां जब भूल जाऊंगा,
    तब एक दफा, पूरे शहर को फिर से देखने आऊंगा।
    बाजारों, मजारों और मंदिरों में भी रहूंगा,
    गिरिजाघर और गुरुद्वारे में शीश न्वाऊंगा,
    देखा जाऊंगा, मैं उन सभी चौराहों पर,
    चाय की टपरी और खुली सड़को पर,
    इतराऊंगा,
    हर किसी से तब इस शहर की,
    आबो हवा का बखान सुनूंगा,
    और सुनाता जाऊंगा,
    तब,
    इस नवाबी शहर का गुरूर, देखने को होगा।
    मेरे हर अल्फाज़ में, वो खुद को खोजेगा,
    जब कोई ज़िक्र,
    ना तो इम्मबाड़ा,चौक,अमीनाबाद,
    नक्खास,चारबाग,
    आई टी, यूनिवर्सिटी,
    गंज और गोमती का होगा,
    होगा तो बस!
    कच्ची सड़को, गड्ढों,
    अस्पतालों की भीड़, नेताओं की गाड़ियों,
    नौजवानों की हड़ताल
    और बढ़ती हुई बदहाली का होगा,
    हां, तब,
    कुछ इस कदर, मैं इसी शहर में, खो जाऊंगा,
    और खुद को भी छोड़,
    मैं रिहा हो जाऊंगा।
    हां!
    इक रोज़, इस शहर की गलियां जब भूल जाऊंगा,
    तब एक दफा, पूरे शहर को फिर से देखने आऊंगा।

    ©_himwrites

  • preet_pakhi 21w

    ये जानते हुए भी कि वो नवाबों के शहर से है

    तुम इश्क करने की भूल कर बैठे...
    ©preet_pakhi

  • guftgu 24w

    महज कल्पना थी मेरी या इत्तेफाक था ,
    मसला मोहब्बत का था जो मेरे साथ था !
    तस्वीर हाथों में ले के खोया रहता था रातों में,
    ये उदासी मेरे दिल की थी या मौसम खराब था!

    मैं उलझा रहता था उसे सोचते हुए ,
    हां ये सपना अधूरा सही पर मेरे साथ था !
    काफी मशवरा भी लिखा मेरे नाम पे उसने ,
    मोहब्बत का रास्ता भी मुझसे अनजान था!

    कबूल कर के मोहब्बत को मैं कहां जाता ,
    वो मुझे मिल जाए ये किस्सा अब कुछ आम था !
    मैं कल्पना करता रहा उसके आने की ,
    खामोशियां ने दम तोड़ा ,मेरा लहजा खराब था !

    मैं महफूज हूं अब जो वो मेरे साथ नहीं ,
    दिल से दिल का रिश्ता था,जो अब सिर्फ मेरे साथ था!
    ©guftgu

  • guftgu 25w

    Kehte hain Har ek ❤️ mein chupa koi pyaar hai
    Bus pehchaane to koi ....

    Haan mujhe bhi uska intzaar hai ...

    @hindiwriters @hindinama @mirakee @writersnetwork @mirakeeworld #love #pod #poem #podcast #lucknow

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    ये मेरी कला है या मेरी कल्पना ,
    ये जख्म ताजे हैं , या इश्क बेपनाह!
    यूं कातिल ना बना मुझे अपना कह के ,
    तेरी बाहों में खुद को ना कर दूं मैं फना !
    ©guftgu

  • _himwrites 25w

    Intercity express! Part 1

    The train no 12345 is ready for departure from platform no 2. Passengers are requested to take their respective seats. Announcement in the background was creating disturbance.

    Hello, where are you !?
    I am at platform,
    Where? I can't see you, she replied in haste,
    Ah! You are at platform no1, come fast at no 2.
    Oh! I am sorry! Give me 2 minute.
    Somene is wearing kurta and cute smile too,
    Oh!! You can see me? But I can't, where are you?
    Come! And find me...
    You are everywhere my dear...
    .now don't do poetry here..

    The first glance of her, make me feel like jack...
    Covered with smile, full of energy,
    Hey!! So finally! the day has arrived,
    Looking so beautiful, I am so glad we met in this style...............................................................


    ©_himwrites

  • guftgu 25w

    सुकून जिनकी बातों से मिलता था ,
    आज उनकी खामोशियां मार डालती हैं !
    ©guftgu