#kuchunkahealfaaz

54 posts
  • an_merciful_friend 18w

    _*मेरी नई कविता..*_

    नमस्ते, कैसे हो आप? आशा है कि सब खैरियत होगा।

    साल भर में ऐसे कई दिन आते है जब हम किसी व्यक्ति, किसी अच्छी या बुरी घटना और उनसे जुड़े लोगों को याद करते है, उनकी सराहना करते है।

    वैसे तो साल में तकरीबन हररोज अपने कुछ खास लोगों से बात व याद करना चलता रहता है पर प्रशंसा करने की बात उस एक दिन पर ही आती है।

    शायद ऐसा हो सकता है की बाकी के वक्त हम मन की बातों को कह नही पाते या फिर भागदौड़ भरी ज़िंदगी में भूल जाते है।

    आज भी वैसा ही एक खास दिन है उनका जिन्हे हम *पापा, डेडी, पप्पा* या फिर और कई समानार्थी नामों से बुलाते है, तो दुनिया के हर पापाओं के लिए लेकर आया हुं एक प्यारा सा नज़राना, कैसा लगा ये हो सके तो ज़रूर बताना।

    अर्ज़ किया है..

    जो उनके मन की बातें ज्यादातर या कभी नहीं कहते और जिसे हम कभी या ज्यादातर कई बातें कह नही पाते, वो है *पापा*।

    पूछना चाहता हुं में जिन्हें की वक्त जो गुज़र रहा है वो तो ठीक है पर कुछ ऐसा है जो करना है *आगे की राह पे* जिसे चलते हुए रास्तों पर कर नही पाते, वो है *पापा*।

    मुझे भी है जिनकी तरह गाने गुनगुनाने का शौख, घुमने व खाना खाने का चस्का और है कुछ बातें जिनमें मैं उनके जैसा हुं पर मेरी *सोच व अनुभव* है जो मुझको जिनसे अलग है बनाते, वो है *पापा*।

    जिनके अच्छे स्वास्थ्य की मैं दुआ करता हुं, चाहता हुं कि जल्दी वह मौका आए की उनसे मुलाकात हो, अपने हाथों का खाना खिलाऊ और कहना चाहता हुं की अगर वह तुम्हारे साथ है तो उन्हें यह कहना मत भुलना की "हैप्पी फादर्स डे" क्योंकि साल के बाकी दिनों पर ये जिसे हम कह नहीं पाते, वो है *पापा*।

    आज की मेरी कविता उन सब पापाओं के नाम जिनमें कुछ अपने किरदार के साथ मां की भी कमी पूरी कर रहे, कुछ मां ऐसी है जो एक पिता का किरदार भी निभा रही और कुछ वो जो उनके बच्चों को ऊपरवाले के दर से देख रहे है।।

    _*Wishing all the Dads in the world, "A very Happy and Healthy Father's Day"*_ ❤️

    लिखित द्वारा: _*बेटा*_ उर्फ अंकित महेता ‍♂️

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 42w

    घर और २०२०

    अर्ज़ किया है..

    जिस साल की हम आज बात कर रहे है और जो अब एक बीता हुआ कल बन चुका है जैसे कि चांद की रोशनी में भी अंधेरों का साया, वह साल है २०२०।

    जिस पुराने घर को काफी मरम्मत लगी हो, पर फिर भी जिससे हम सबकी बहुत सी यादें जुड़ी हो और आज के आखरी दिन जिससे अलविदा कहने का वक़्त है आया, वह अपना घर पुराना है २०२०।

    बीती हुई जिस याद में जहां घर की छत के नीचे हमें अपनों का समय और साथ मिल पाया तो वहां कोई अपने अपनों को ठीक से आखरी लफ्ज़ भी नहीं कह पाया, जहां किसीने अपनी जगहों को बेघरों का आसरा बनाया वहां जिस बीती यादों के सफर में किसीने किसीके दिल को अपना घर है बनाया, वह मन की अलमारी में बंध हो चुकी बीती हुई याद है २०२०।

    जो साल गुज़र चुका उसकी बातें तो होगई, अब चलिए देखते है कि जो साल आनेवाला है उसमें क्या होगा...

    अरे अरे परेशान मत होइए, आपके और मेरे दोनों के लिए ये सरप्राइज है और वो सरप्राइज ही रहेगा।

    यह जो पल है जिसमें आनेवाला कल हमारा आज होजाएगा, वो वह रास्ता है जो हम सब पुराने घर से नए घर जाने के लिए काटते है, बांटते है और खासकर के जीते है क्योंकि यह रास्ता पलक झपकते ही गुज़र जाता है।

    इसलिए और देर ना करके मेरा जिस नए घर में आपका स्वागत करने का मौका है आया, वह नया घर है २०२१।।

    WISHING YOU AND YOUR FAMILY A WONDERFUL, HAPPY, HEALTHY, POSITIVE AND PROSPEROUS NEW YEAR OF 2021 ✨

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 44w

    शोर और सन्नाटा

    _*कभी कहीं.. कहीं कभी*_

    जहां शोर है *मन में खयालों* का, वहां *ज़ुबान की आवाज़* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *रास्तों पर गाड़ियों* का, वहां घर की चार दिवारी में *जल रही रोशनी* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है दोस्तों के साथ खेलते हुए *दिल से निकली हसी* का, वहां *दिल के दर्द से सजे आंसु* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *दिल की धड़कनों* का, वहां *तेज़ सांसों* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *उमंगे और रोशनी* का, वहां *दुःख और अंधेरों* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *आत्मविश्वास और भरोसे* का, वहां *पछतावे और बुरी सोच* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *शांति और सुकून* का, वहां *क्रोध और टकराव* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *कुछ पूरी होती बातों* का, वहां *कुछ अधूरी रह जाती कहानियों* का है सन्नाटा।

    इस आखरी पंक्ति के जैसे ही मेरी ये "शोर और सन्नाटा" की कहानी *पूरी होकर भी अधूरी* है।

    हम सब की कहानी भी कुछ ऐसी ही है कि *पिछले कल* में ये पूरी है, *आज* इस कहानी का रहना जरूरी है क्योंकि *आनेवाले कल* के लिए ये अधूरी है।

    इसलिए मेरी बात को यहां पूरी करके में आपसे पूछना चाहता हूं कि *आप अपनी "शोर और सन्नाटा" की कहानी में वह कोनसी एक पंक्ति लिखते* ?

    अगर हो सके तो *ज़रूर बताना* और मेरी यह नई कविता *कैसी लगी* यह भी कहते जाना।

    _*आपको मेरी तरफ से शुभ दिन, शुभ रात्रि और बस अपना खयाल रखना।।*_

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 49w

    नमस्ते आप को

    आशा है कि आपके वहां सब खैरियत है।

    फुलझड़ी और आतिशबाज़ी के साथ मेरी मन की बातों का नज़राना फिर एक बार लेकर आया हुं।

    अर्ज़ किया है..

    जहां इस साल *होली* पर ना रंगों का मेल, ना *जन्माष्टमी* पर मटकीफोड का खेल और ना *नवरात्रि* पर रास - गरबा का तालमेल हो पाया, वहां जिस त्योहार के आने की खुशी ने घर के आंगन के साथ लोगों के अंतर्मन से लेकर उनकी आंखों की भी चमक ✨ को है बढ़ाया, वह है _*दिवाली*_।

    मिटी नहीं है वजह अभी भी कई महीनों के लोकडाउन की, लेकिन फिर भी जिस *पावनपर्व* ने दिया है होंसले से भरा एक मौका अपने चाहनेवालों से मिलने का, कहीं दूर बेठे अपनों से फिर जुड़ने का, और साथ मिलकर अपने सुनेपन के उस भाव को कम करने का जिस *रोशनी भरे अवसर* ने उत्साह है दिलाया, वह है _*दिवाली*_।

    जिस उत्सव की बातें अधूरी है नमकीन और मिठाइयों के बिना, जिसमें बन रहे है कहीं *लड्डु और चिवडा* तो कहीं *चकरी और शकरपारा*.......बस बस, अगर सारे नाम यहीं सुन लोगे तो हो सकता है कि आपके वहां कोई दूसरा ना खा जाए सारा खाना और फिर जिस शुभ दिन पर आप कहते ही रह जाओ कि, "क्या यार, थोड़ा मेरे लिए तुने क्यूं नहीं है बचाया?", वह है _*दिवाली*_।

    आपको मेरी ये बातें अच्छी लगती है तो इसका मतलब में अच्छा हुं ही पर आप बहुत अच्छे हो, इसलिए अगर आप इस कविता के बारे में या फिर यूंही कुछ अपने मन की बात ज़ाहिर करना चाहो तो ज़रूर कहना, आज जिस पवित्र घड़ी पर आप से बस यही था कहने आया, वह है _*दिवाली*_।।

    _*Wishing you and your family, A Very Happy and Prosperous Diwali*_

    द्वारा लिखित: दोस्त उर्फ _*अंकित महेता*_ ❤️

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 56w

    नमस्ते

    कैसे हो आप सब? आशा है कि सब खैरियत होगा। लेकर आया हूं इन तस्वीरों के साथ अपने मन का एक छोटा सा नज़राना, कैसा लगा यह सुनकर ज़रूर बताना..

    अर्ज़ किया है कि..

    कुदरत की ये करामातें हमेशा दिल को छू जाती है।

    आंखों में बंध यादों के डिब्बे में अपनी जगह बना जाती है।

    इन यादों को आप सब से बांटना अच्छा लगता है मुझे क्योंकि इस प्रक्रिया में थोड़े आपके तो थोड़ी मेरे चेहरे की खुशी मुस्कान में बदल जाती है।

    ये कुदरत और मेरा संदेशा है आप सबसे की ज़रा सर उठाके देखिए जी यहां, क्योंकि याद तो हमें भी आप सब की बहोत आती है।।

    द्वारा लिखित: *दोस्त* उर्फ _*अंकित महेता*_ ❤️‍♂️✌
    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 63w

    Happy Rakshabandhan 2020

    *सबको मेरा नमस्ते। आशा करता हूं कि सब खैरियत है।*

    आया हूं मिलने फिर आपसे लेकर फिर एकबार कुछ *मन की बातें* और ये *नज़राना*, *कैसा लगा* ये अगर हो सके तो ज़रूर बताना।

    _*मेरी नई कविता..*_

    कल मनाके दिन दोस्ती का आओ *सब* मिलकर मनाते है *भाई बहनों वाला* जो *त्योहार* आज, वह है *रक्षाबंधन*।

    इस साल जिस पर्व के दिन *बहनों की राखी* शायद ना पहोंच पाए *भाईयो तक* या फिर इस *सर्वव्यापी महामारी* के चलते हो सकता है कि *रूबरू मिलना ना* हो पाए, ऐसे वक़्त में करके *शुक्रिया* इंटरनेट, सोशियल मीडिया व पत्र व्यवहार का *जिनकी वजह से* हर भाई - बहन तक पहोंचा है *प्रेम, आशीर्वाद व रक्षा* का वो *अहसास* आज, वह है *रक्षाबंधन*।

    जो कई महीनों से इस कोरोना के चलते अपनी *दिन रात भुलाकर* कर रहे है *हमारी ज़िन्दगी और तंदुरस्ती की रक्षा*, उन हर *भाईयो - बहनों* को सर झुकाकर *नमन* और सर उठाके *सलाम* करता हूं में *पूर्णिमा* के जिस *शुभ अवसर* पर आज, वह है *रक्षाबंधन*।

    *"खयाल अपना भी तुम रखना"* ये कहके दुनिया की व मेरी हर बहनों को "*अच्छा स्वास्थ्य* और *खुशहाली* हमेशा बनी रहे ज़िंदगी में तुम्हारे" इस *आशीर्वाद* के साथ भेज रहा है यह भाई *शब्दों में समेटा* हुआ *जज्बातों व प्यारभरा* ये *तोहफ़ा* पूरा करने जिस *पावन घड़ी* को आज, वह है *रक्षाबंधन*।।

    _*Happy Rakshabandhan to All the sisters and brothers*_ ❤️

    द्वारा लिखित: भाई उर्फ *अंकित महेता* ✌

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 64w

    *मेरे प्यारे दोस्त*, कुछ कहने से पहले ये पुछना चाहता हूं कि *तुम कैसे हो?*

    जानता हुं कि काफी *वक़्त के बाद* कुछ लिखकर कहने और सुनाने आया हूं, इस देरी के पीछे वैसे तो बहोत कुछ है कहने को पर अभी के लिए बस इतना कहूंगा कि *मेरा मन* भी इस लॉकडाउन के माहौल में *क्वारांटाइन* हो गया था।

    वो *तुमसे मिलने* आया है लेकर अपने साथ ये *प्यारभरा नज़राना*, कैसा लगा ये अगर हो सके तो *ज़रूर बताना..*

    _*मेरी नई कविता..*_

    जिस रिश्ते को *आज मनाने का* और जिसके बारे में मन की कुछ बातों को *इज़हारे बयान* करने का है मौका, वह है *दोस्ती*।

    पिछले कुछ सालों में मैंने जिस रिश्ते के बारे में शायद *सबसे ज़्यादा* है लिखा, वह है *दोस्ती*।

    बढ़ती उम्र और जज्बातों के साथ आगे बढ़ती *जिसकी कहानी* में कभी *परिस्थितियां* तो कभी *छोटे बड़े पहलुओं* की वजह से होता रहता है नोका झोंका, वह है *दोस्ती*।

    *जाने अनजाने* में कोई करता है फरियाद कि उसने याद नहीं किया और फिर फरियाद करनेवाले ने ही उसे याद नहीं किया, जिस रिश्ते में कभी ना कभी ऐसा *अनुभव* तुम्हारा, मेरा या किसिका भी हुआ होगा, होता है और शायद होता रहेगा पर फिर भी उसको *निभाने की चाहत* ही बांधे रखती है जिसकी *अदृश्य डोर* का टांका, वह है *दोस्ती*।

    ऐसे कई अनुभव और कई *पाठ* है जो सिखाते है हमें तैरना *उतार - चढ़ावरूपी लहरों* के साथ और कहते है की *विश्वास से ही जुड़ा* है यह संबंध जिसका, वह है *दोस्ती*।

    जैसे मैंने पहले भी कहा था कि पता है मुझे की तुम ये सब जानते हो पर कभी भूल जाते हो तो कभी याद नहीं रहता, *एक बात कहूं..मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही है* इसीलिए तुमको और मुझको *याद कराने व लिखने* ये बातें जिस पे मन ने मेरे *अपने अंदर* है झांका, वह है *दोस्ती*।।

    _*हैप्पी फ्रेंडशिप डे, माय डियर फ्रेंड*_ ❤️

    शुक्रिया तुम्हारी दोस्ती का और मुझे आज सुनने का!!

    एक और दरखास्त है मेरे ए दोस्त की *क्या सोचते हो तुम दोस्ती के बारे में* ये अगर एक या कुछ शब्दों में हो सके तो ज़रूर बताना।।

    *द्वारा लिखित*: दोस्त उर्फ _*अंकित महेता*_ ‍♂️✌

    ©an_merciful_friend

  • tehrim_siddiqa 75w

    #kuchunkahealfaaz: 1
    Random thoughts at quarantine.. this confussion, dilemma, stress deep inside everyone has!!
    What to do any life.. what not!! Bt better is to enjoy the journey.. destination will strike it's path.

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    Chal toh rahi Hun raston pe,
    Manjilo se main waqif Nahi
    Maloom Nahi ke ye Safar Sahi bhi hai ya Nahi,
    Raston Ka kya hai
    Kabhi bhi Bina bataye mud jati hai,
    Musafir toh Hain sabhi yahan
    Magar iss padhi likhi duniya mein
    Musafir ki kadar Nahi,
    Jisko manzil Mili wahi kamiyab hai,
    Darr Lagta hai ke main bhataki toh Nahi,
    Ye padhi likhi duniya ka kya hai
    bol degi ke tum toh Kabil hi Nahi!
    Chal toh rahi Hun raston pe
    Manjilo Ka pata nahi..
    ©tehrimsiddiqa

  • an_merciful_friend 76w

    शीर्षक: मां

    नव महीने तक जो अपने पेट में पालकर एक नन्ही सी जान को बढ़ती दुनिया में कदम रखने अपने साथ उठाए, वह है *मां*।

    एक कुंवारी शहजादी से लेकर एक शादीशुदा रानी बनने के सफर पे आगे चलते हुए औरत अपने बेटी और बीवी होने के साथ साथ जो एक और किरदार भी निभाए, वह है *मां*।

    जिनके लिए अपना परिवार और खुद की दुनिया ही सब कुछ थी अब तक और जब उस दुनिया में नई जन्मी मुस्कान के आने के बाद वही जिनकी दुनिया बन जाए, वह है *मां*।

    जिनके लिए है ये पूरी ज़िंदगी उनके लिए वैसे तो शब्द, प्यार और जज़्बात कम पड़ेंगे कहने को पर आज के दिन जिनकी ज़िंदगी को खुशी से मनाने के लिए कुछ कहने से ये दिल भी रह नहीं पाए, वह है *मां*।।

    Happy Mother's Day to all the mothers in the world ❤️

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 77w

    नमस्ते, कैसे हो आप? ख्वाहिश है कि सब खैरियत है ��

    कुछ लिखा है दो सितारों के लिए जो ज़मीन पर आए थे कई साल पहले, अपनी चमक दिखाकर और छाप छोड़कर कल फिर आसमान की ओर चल दिए।

    "इरफान खान�� और ऋषि कपूर�� जी को मेरी छोटी सी श्रद्धांजलि"

    May Their Souls Rest in Peace ���� ��

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    यादें

    कई यादें जैसे हमारे साथ हमेशा के लिए रह जाती है वैसे ही कई लोगों के चले जाने के बाद उनके हसते चेहरों के साथ उनकी ज़िंदगी भी लोगों के दिलों में यादें बनकर रह जाती है।

    ऐसे ही सिनेमाजगत के दो मुस्कुराते चेहरों ने, उनकी पाक रूहों ने जन्नत -ए -जहान को आज अपना घर बनाया है और ऐसे दिग्गज अदाकारों की अदाकारी, उनकी कहीं बातें जैसे हमेशा से सबके दिलों में जगह बना चुकी थी वहीं यादें आज पुराने किस्से और सीख बनकर हमारे साथ रह जाती है।

    कई बरसों बाद यादों का सफर थोड़ा कम होता होगा पर वो शायद कभी ख़त्म नहीं होता, रूह की राह बदलने से ज़िंदगी बस वहीं थम जाती है लेकिन उस ज़िंदगी की यादें बढ़ते वक़्त के साथ यादगार बनकर रह जाती है।

    बॉबी हो या लंचबॉक्स, मकबूल हो या लैला मजनू, हिंदी मीडियम हो या कपूर एंड सन्स, और ऐसी कई कहानियां है इन हस्तियों की जो हमारी ज़िंदगी के खज़ाने में सुनहरी यादें बनकर रह जाती है।।

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 94w

    मेरे प्यारो.. नमस्ते

    _लौट आया है आपका *दोस्त* एक छोटे से ब्रेक के बाद, लेकर आया है आप सबके लिए एक *छोटी सी सौगाथ*।_

    _नए साल का स्वागत तो आप कर ही रहे हो, फिर कुछ कहने से पहले एक बात कहे! *स्वागत तो करो हमारा*!! _ ‍♂️


    चलते हुए इस सफर में *ज़िन्दगी की राहों* ने कई मोड लिए है इस साल।
    सिखी है बहोत सी बातें, जिया है कई खास लम्हों को, और बस उन लम्हों और बातों को बांटते हुए बित चुका है एक और साल।

    कई सारी बातें हमेशा के लिए याद रहेगी और कुछ बीती बातें *धुंधली सी* रह जाएगी आनेवाले हर साल।
    अभी इस लम्हे में, आपके साथ हो रही इन बातों में, आज और आनेवाले कल के बीच में वक़्त कुछ ठहर सा गया है *फिलहाल*।

    ...

    चलिए, साल २०१९ को अलविदा कहते हुए एक *आखरी नज़राना* आप के नाम करते है।
    खुशी की लहरों में बहकर, अाइए गुजरते हुए साल को अंतिम सलाम करते है।

    वक़्त जो बदलनेवाला है चंद लम्हों में उसे *पलके झुकाकर* प्रणाम करते है।
    कुछ युं ही आप और में *साल २०२०* के आने का ऐलान सरेआम करते है।

    द्वारा लिखित: *दोस्त* उर्फ *_अंकित महेता_* ✌❤️

    _*WISHING YOU AND YOUR FAMILY, A VERY HAPPY, HEALTHY, PROSPEROUS AND PEACEFUL NEW YEAR*_


    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 101w

    Gujjubhai ka Goodbye

    Aasmaan se baarish ki jo ye Boonde he AAI,
    Saath isike hua tha milan humara, ab isike saath ho rahi JUDAAI,
    Thi naa manzil ek hamaari naa the raaste ek, fir bhi kisi mod pe jo yun mile hum, ruke hum, bahot kuch jo saath sikhe hum, uss mod se ab apne safar pe aagey badhne ki baari he AAI,
    Yaad karo na karo tum mujhe, par tumko kabhi na bhulega ye GUJJUBHAI,
    Fir aise hi milenge kisi mod pe, par tab tak ke liye goodnight & goodBYE

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 104w

    साल का जो दिन हम अपनो के साथ _आंगन में दिये जलाकर_ मनाते है और कुछ उन गुज़र चुके अपनों की यादों को *दियों की रोशनी* में और उनके साथ बिताए पलों को *रंगों की रंगोली* में जिस शुभ दिन हम अपने दिलो में _ज़िंदा_ कर जाते है, वह है *_दिवाली_*।

    ज़िन्दगी को कभी कभी अपने परिवार के अलावा और रोशन करने जब एक *हमराही*, कुछ नए *दोस्त*, कुछ नए *परिवारों के रिश्ते* जुड़ जाते है और जिस अमावस्या के पर्व को _चार चांद_ लग जाते है, वह है *_दिवाली_*।

    हर साल त्योहारों का वक़्त वही रहता है पर _खुशियां और गम_ का वक़्त तो त्योहार देखकर नहीं आता ना, पहली बांटने से बढ़ती है और दूसरा बांटने से कम होता है इसलिए साल का *जो एक अवसर* हमें ये मौका देता है कि छोटी सी मुलाकातों में, कुछ पल की बातों में, खुशी के लम्हे सजाते हुए दो घड़ी अगर दिल का दुख़ भी बांट ले तो खुद से, अपनों से गिले शिकवे दूर हो सकते है और वही लम्हे लोगों के चेहरों पर प्यारी सी मुस्कान छोड़ जाते है, वह है *_दिवाली_*।

    मुझे पता है कि आप सब ये बातें जानते है और मानते भी है, पर क्या करे *इंसान* ही है तो कभी याद नहीं रहती तो कभी संकोच में रहकर कह नहीं पाते, इसलिए आज जिस शुभ अवसर पर आपको और आपके परिवार को एक *छोटा सा नज़राना* मेरे ये शब्द कह जाते है, वह है *_दिवाली_*।

    द्वारा लिखित: *दोस्त* उर्फ _अंकित मेहता_ ❤️

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 106w

    सुप्रभात

    आज फिर कई बार की तरह सुबह को मैंने सूरज के उगने से पहले देख लिया।

    सोचा "चल चलते है सूरज को सुप्रभात कहने", यह बात मन में रखकर गानों की आवाज़ के साथ में चल दिया।

    मगर आज घने बादलों ने सूरज की किरणों को उगने के बाद भी जैसे अदृश्य था कर दिया।

    अंदाज़ बदला सा था समंदर की लहरों का और पत्तों की सरसराहट ने भी बहती हवाओं का ज़ोर था पकड़ लिया।

    ऐसे मौसम में दूर कहीं थोड़ी सी रोशनी ने दस्तक थी दी और उन घटाओं के पीछे सूरज के साथ सुबह के होने का पहगाम था कर दिया।

    इस नए हफ्ते की शुरुआत पे बस यही कहना चाहूंगा की कभी कभी घने बादलों में छूप कर भी सुबह - शाम का होना, उगते और डूबते हुए चांद - सूरज का मिलना, यह कुदरत की होनी कभी नहीं बदलती, इस बात की सच्चाई को है मैंने आज मान लिया। ️❤️

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 108w

    हर साल कुछ नई ही उमंगों की ऊर्जा के साथ मनाई जाती है ये *नवरात्रि*।

    देश - विदेश में रहते कई हज़ारों लोगों को पास लाती है और सबको एक ताल पे नचाती है ये *नवरात्रि*।

    आगे बढ़ते वक़्त के साथ अच्छे - बुरे हालातों का आना - जाना तो दस्तूर है इस दुनिया का और जैसे बूरे हालातों पे विजय पाने के लिए हम अच्छे लम्हों को उपजाते है, वैसे ही कई खुशी के लम्हों की सौगात लेकर आती है ये *नवरात्रि*।

    हर बार ऐसे कई लम्हों की हीरे - मोती जैसी यादों को ज़िन्दगी की माला में पिरोते हुए उन छोटे छोटे लम्हों में जीना सिखा जाती है ये *नवरात्रि*।

    द्वारा लिखित: *दोस्त* उर्फ अंकित मेहता ✌

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 112w

    नमस्ते आप सबको कुछ दिनों बाद एक छोटी सी कहानी मेरे विचारों की लेकर आया हूं, आशा करता हूं आपको अच्छी लगेगी।

    गुज़रते वक़्त के साथ इन सुबह - शाम और उनके बीच के फासलों से एक रिश्ता मेरा बन सा गया है।

    कभी उगते सूरज की गरम रोशनी को तो कभी ढलते सूरज की पिघलती छांव को महसूस करना, देखना - दिखाना, मेरी ज़िन्दगी का ज़रूरी हिस्सा बन सा गया है।

    ना उम्मीदों को तोड़ा कभी मैंने और ना कभी होंसलो का साथ छोड़ा पर फिर भी जैसे हर सुबह - शाम से रूबरू आंखें में नहीं मिला पाता कुछ वैसे ही हर रोज़ उम्मीदों और होंसलो का साथ निभाना, थोडा कठिन काम बन सा गया है।

    कल रात इन विचारों को लिखना शुरू किया था पर उसे पूरा करने से पहले ही मेरा होंसला सो गया और आज एक नई सुबह के साथ एक नई उम्मीद ने आंखें खोली है... Good morning

    तो क्या हुआ कल की शाम कही आज की सुबह से मिल नहीं पाई, अब जैसे उम्मीद ने नींद से कम्बल हटाकर होंसले को भी जगाया है वैसे ही मेरी कुछ नई पुरानी बातों ने कई फासलों को घटाने के लिए एक पुल बनाया है और जो काम थोडा कठिन लगा था वो धीरे धीरे आसान बन सा गया है। ✌

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 113w

    कुछ वक़्त से बस सूरज की रोशनी को शामों में मद्धम होते देखा है।
    उगते सूरज के साथ कई महीनों बाद आज दिन की शुरुआत हुई है।

    रोशनी को अंधेरे में समाते हुए देखते देखते, आज फिर एक बार रोशनी को उजाले से मिलते देखा है।
    जो नजरअंदाज होगई थी कही रातों के अंधेरों में, उस परछाई से आज सुबह - सुबह मुलाक़ात हुई है।

    चलते चलते पिघलते आसमान के तले रोशनी की अंतिम रेखा देखली मैंने, पर फिर किसी नई शुरुआत की तरह जलते सूरज की किरणों से आसमान के नीले रंगों को छूते देखा है।
    कुछ इसी तरह लगता है कि जैसे एक नए नज़रिए के साथ इस ज़िन्दगी में नई उम्मीदों की बरसात हुई है।

    द्वारा लिखित: *दोस्त* उर्फ अंकित मेहता

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 114w

    नमस्ते। आपको और आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन की शुभकामनाएं आज के इस सुनहरे अवसर पर इस नाचीज़ की तरफ से एक छोटा सा नज़राना।

    जिस पूर्णिमा का दिन, हर भाई को सारी बहनों की रक्षा करने का वादा फिर याद है दिलाता, वह है रक्षाबंधन।

    भाई - बहन के इस रिश्ते में बातों जज़्बातों की थोड़ी नज़दीकी हो या थोड़ी दूरियां, पर कभी ना कभी सब ठीक जिस दिन हो ही है जाता, वह है रक्षाबंधन।

    हमारी उम्र के साथ या कभी उसके बिना इस पवित्र रिश्ते की उम्र तो बढ़ती ही जाती है, पर हर साल बहन और भाई के इस बढ़ती उम्र के रिश्ते की सालगिरह जो "पावन दिन" है मनाता, वह है रक्षाबंधन।

    आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हमारे वीर भारतीयों के सम्मान में आज ये भाई अपनी बहनों के साथ इस दुनिया की सारी बहनों की इज्ज़त और रक्षा करने का वादा जिस दिन के नाम है करता, वह है रक्षाबंधन।

    रक्षा और इज्ज़त करने का वादा तो कर लिया, पर उसके साथ ये भाई प्यार और आशीर्वाद जैसी मिठाइयां बांटने का वादा फिर एक बार जिस दिन अपनी बहनों से है करता, वह है रक्षाबंधन।

    सिर्फ बातों से आपका दिलोदिमाग और पेट ना भरके एक प्यारी सी मुस्कान के साथ ☺️ ये पगला भाई सारी पगली बहनों का मुंह मीठा जिस दिन है करवाता, वह है रक्षाबंधन । ❤️

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 114w

    Main kyun hoon main kya hoon yahi sochta hoon main, Mere hone ki uss wajah ko khojta hoon main..

    Zindagi ki raah pe chal rahe hai par manzil ki khabar nahi, Laakhon karodon milon ka hai ye safar koi chhoti si dagar nahi..

    Log kehte hai ki sapnon ke beena zindagi me koi safar nahi, Par ye saale paagal mann ko kaun samjhaye jis par ab bhi koi asar nahi..

    Zindagi ke din raat abhi baaki hai, Par uss zindagi ka kya jo humne kaati hai ?..

    Uss zindagi ko yaadon ke dibbe mein bandh karke rakhna yahi dastur hai zindagi ka, Har mauka ek pal hai aur yahi pal ek mauka he zindagi ka..

    Zindagi ko jeet ne nahi jeene aaye hai hum, Iss baat ko marte dum tak nibhaaenge hum..

    Har pal har mauke pe ye sab sochta hoon main, Aur usi pal ke kisi pal mein mere hone ki uss wajah ko khojta hoon main...

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 115w

    आज फिर एक नए दिन ने ज़िन्दगी के दरवाज़े पर दस्तक दी है।

    हर रास्ते हर मोड पर बरसती धूप के साथ साथ ठंडी छांव भी हमको अपने हस्तक दी है।

    जलते सूरज की रोशनी के आगे अपनी आंखें हमने नतमस्तक की है।

    यूंही पलको को झुकाकर हमने भी अपनी आंखों को ठंडक दी है।

    ©an_merciful_friend