#krati_mandloi

241 posts
  • krati_sangeet_mandloi 6w

    चलते-चलते

    चलते-चलते ज़िंदगी के सफ़र में, कभी रुकना नहीं,
    मुसीबतें होंगी सामने, तुम उनके आगे झुकना नहीं।

    टूटने लगे अगर हौंसला, तो हिम्मत को परवाज़ देना,
    बढ़ते जाना आगे, मंज़िल की ओर नया आग़ाज़ देना।

    पीछे मुड़ना नहीं, अपनी जीत की ज़िद बनाए रखना,
    ख़ुद का ख़ुद पर तुम, पूरा भरोसा जताए रखना।

    लोग तुम्हारी राह के बीच, काँटों की चादर बिछाएंगे,
    तुम गिरकर फिर उठ जाना, ये तुम्हे मजबूत बनाएंगे।

    माना पसोपेश होगी, ख़ाक होगी सब उम्मीद जलकर,
    लड़ते जाना हालातों से, सबर मत खोना पल भर।

    दर्द और ग़म से भरी कहीं, सहरा की बस्ती होगी,
    जीने का हुनर सीखना, फ़िर मौज़ भरी मस्ती होगी।

    इरादों में चमक रखना, अपनी ताकत को जान लेना,
    छोड़ कर औरों की बातें, ख़ुद को तुम पहचान लेना।

    चलते-चलते ज़िंदगी का पहिया, पार कर जाना है,
    इस जहाँ से निकल कर, उस जहाँ को पाना है।

    ©Krati_Mandloi
    (9-05-2021)✍️ (14-12-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 8w

    श्री कृष्ण भक्ति

    मन मंदिर में साँझ सवेरे,
    कर दो दूर अज्ञान अँधेरे।
    आई प्रभु मैं शरण तुम्हारी,
    चरणों में रखना हे गिरधारी।

    कटुता मेरी हर लो माधव,
    मधु कंठ कर दो मुरारी।
    प्रेम में तेरे तरती जाऊँ,
    होती जाऊँ तुझ पे बलिहारी।

    लीला तेरी समझ ना पाऊँ,
    बंसी करे तेरी चैतन्य फुहारी।
    अपूर्व स्वरूप त्रिभुवन है तेरा,
    सृष्टि का है तू पालनहारी।

    कृपा करो मेरे श्याम सलोने,
    दृष्टि को करो साक्षी हितकारी।
    विशुद्धि में मेरे आन बसो,
    विराट से हो सम्पूर्ण एकाकारी।

    ©Krati_Mandloi
    (4-12-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 8w

    ज़िंदगी भटकती रही, यहाँ-वहाँ ख़ुशी की तलाश में,
    कभी ना हुई वो क़ामिल, रह गई सिर्फ़ काश में।

    दस्तक नहीं दी कभी, सूना सा आशियाना कर दिया,
    ख़ुशियों ने, ख़ुद से जुदा कर, मुझे बेगाना कर दिया।

    दिन बीते, महीनें बीते, ऐसे ही साल बीतते गए,
    दूसरों पर खुशियाँ छोड़कर, दर्द से चश्म भीगते गए।

    मेरी ख़ुशियों का ठिकाना, दूसरों में ढूँढ़ती चली गई,
    संग उनके ख़्वाबो का, ताना-बाना बुनती चली गई।

    भूल गई की, मेरे दर से ही मुझे राहत मिलेगी,
    मेरी ख़ुशियों की चाबी, सिर्फ़ मेरे दर से खुलेगी।

    कश्मकश में ख़ुद मैंने, ख़ुशियों से नाता तोड़ दिया,
    दूसरों के साथ नहीं, दूसरों के सहारे छोड़ दिया।

    वो दिन जब मैं हक़ीक़त में, ख़ुशियों से रूबरू हुई,
    त'अज्जुब हुआ वो तो, मेरे ख़्वाबों सी हूबहू हुई।

    मेरी ख़ुशियों का दरवाज़ा, कहीं और नहीं, मेरे पास है,
    मेरे ख़ुदा की बख़्शी, तौफ़ीक़ पर मुझे विश्वास है।

    ए बंदे, मत ढूँढ़ बाहर, तेरे भीतर गहरा समुंदर है,
    ख़ुदा का बनाया, ख़ुशियों का दरवाज़ा तेरे अंदर है।

    ©Krati_Mandloi
    (30-04-2021)✍️ (29-11-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 11w

    संघर्ष

    संघर्ष वास्तविक हर्ष है, संघर्ष बिन जीवन व्यर्थ है,
    संघर्ष ही यथार्थ है, इससे होता जीवन कृतार्थ है।

    भाग्य भरोसे बैठने से, नहीं है कुछ भी मिलता,
    नित तपता है अग्नि में, तब कंचन रूप है मिलता।

    सहज-सरल जो मिल जाए, वो तो भीख समान है,
    परिश्रम करके प्राप्त हो, उसमें ही निहित सम्मान है।

    जीवन यात्रा में, राह की बाधाओं से लड़ना पड़ेगा,
    अंतः साहस जगा कर, कर्म-पथ पर चलना पड़ेगा।

    चंद श्वासों में क्या पता, जीवन कब सिमट जाएगा,
    सुखों की इच्छा में, अंत में पश्चाताप लिपट जाएगा।

    भय को त्याग, प्रबल इच्छा को लेकर गतिशील हो,
    उतार-चढ़ाव तो आते रहेंगे, प्रण संग प्रगतिशील हो।

    लक्ष्य पाना है तो, शूलों पर गौरवमय लेख लिख दे,
    संघर्ष से पार, सुखद कथा के अभिलेख लिख दे।

    जीवन को कर दे सार्थक, संघर्ष एकल विकल्प है,
    जब संघर्ष संग हो मैत्री, तब आवश्यक संकल्प है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (30-5-2021)✍️ (14-11-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 35w

    आप सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं������

    #krati_mandloi #Hindinama #26thmay_2021 @hindiwriters @hindinama

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    बुद्ध पूर्णिमा

    प्रेम से अनुराग से,
    शुद्ध हो जाएंगे हम,
    बुद्ध हो जाएंगे हम....

    हृदय को निर्मल कर,
    पावित्र्य की धारा बहाएंगे हम,
    बुद्ध हो जाएंगे हम....

    क्रोध के त्याग से,
    क्षमा का सागर बन जाएंगे हम,
    बुद्ध हो जाएंगे हम....

    अहम के वहम का पर्दा हटाकर,
    सभी एक हो जाएंगे हम,
    बुद्ध हो जाएंगे हम....

    संतोष रूपी धन संचय कर,
    प्रत्येक क्षण को आनंद में बिताएंगे हम,
    बुद्ध हो जाएंगे हम....

    सत्य से असत्य को परास्त कर,
    सत्यवादी बन जाएंगे हम,
    बुद्ध हो जाएंगे हम....

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (26-05-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 35w

    मरने के बाद

    जीवन है चार दिन का, एक दिन सबको जाना है,
    इच्छाएं है सौ साल की, कल का नहीं ठिकाना है।

    मोह, माया में उलझा मन, सत्य से दूर जा रहा,
    कुछ भी स्थिर नहीं, अस्थिरता को गले लगा रहा।

    कुछ भी तेरा नहीं यहाँ, फ़िर किस बात का गुमान है,
    मरने के बाद शरीर भी नहीं, जिसमें अटकी जान है।

    शरीर तेरा भी खाक़ होगा, मेरा भी खाक़ होगा,
    कुछ भी ना बचेगा, सब कुछ जलकर राख होगा।

    क्षणभंगुर अस्तित्व तेरा, शारीरिक सुख अनित्य है,
    आत्मा ही है अजेय-अमर, वही हर क्षण नित्य है।

    छल-कपट, द्वेष करेगा, बुराई में जीवन बिताएगा,
    मरने के बाद फ़िर ऊपर, कौन सा मुँह दिखाएगा।

    जन्म-मरण के फेर में, हर प्राणी संघर्ष से पिसता है,
    मानव जन्म अनमोल है, चौरासी योनि में मिलता है।

    महत्व समझ, अपने द्वारा तू अपना उद्धार कर ले,
    ईश भक्ति में लीन होकर, भवसागर को पार कर ले।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (2-05-2021)✍️ (25-05-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 38w

    ना दे

    खुदा मुझको ऐसी ख़ुदाई ना दे,
    दौलत पाकर तू, दिखाई ना दे।

    मग़रूर हो जाऊँ रंग-मिज़ाज में,
    तिरी आवाज़ तब सुनाई ना दे।

    दे तो, कुछ भी ना दे मुझे,
    बस मेरी तुझसे जुदाई ना दे।

    क्या करूँगी गर सब पा लिया,
    जब तू ही उनमें समाई ना दे।

    तेरे सिवा भूल जाऊँ सब कुछ,
    तेरी यादों से, मुझे रिहाई ना दे।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (4-05-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 37w

    ने'मत-ए-'उज़मा - बहुत बड़ी कृपा
    बदकार - बुरा करने वाले
    जहन्नुम - नरक
    दरकार - आवश्यक, जरूरी
    मुब्तिला - कष्ट या विपत्ति में पड़ा हुआ
    हिदायत - राह दिखाना, पथ-प्रदर्शन
    नाफ़रमानी - अपमान करना, आदेश नहीं मानना
    मशग़ूल - व्यस्त
    नजात - छुटकारा, मुक्ति
    माबूद - जिसकी पूजा की जाती है,( खुदा )
    मुक़ाबिल - प्रतिस्पर्धा
    जर्जर - टूटा-फूटा हुआ
    _______________________________________

    #krati_mandloi #Repost #12thmay_2021 @hindiwriters @hindinama #Hindinama

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    क़यामत का दिन

    क़यामत के दिन हक़ीक़त और झूठ का इंसाफ़ होगा,
    हुक़्म चलेगा खुदा का, सब आईने जैसा साफ़ होगा।

    नेक लोग खुदा की ने'मत-ए-'उज़मा के हकदार होंगे,
    बदकार लोग करम से, जहन्नुम के जवाबदार होंगे।

    गुनाहों की गिनती में, मुआफ़ी की दरकार नहीं होगी,
    अफ़सोस का मौका ना होगा, फ़रियाद नहीं होगी।

    कोई भी रिश्ते-नाते, ना माँ-बाप, औलाद काम आएंगे,
    ना दौलत, ना शोहरत, ना ग़ुरूर तब कोई नाम पाएंगे।

    शैतान कहेगा ये खुद गुमराह था, मुब्तिला में पड़ा था,
    खुदा ने जब हिदायत भेजी, ये ख़िलाफ़ में खड़ा था।

    मुज़लिम बना, सच को खुद अमल करने से रोका था,
    डर नहीं, ना फ़रमानी में खुद को आग में झोंका था।

    तब वो हर मशग़ूल शख्स, नजात की फ़िक्र में होगा,
    दुनियादारी में लगा था जो, रहम के ज़िक्र में होगा।

    सिर्फ खुदा माबूद है, इस बात से इंकार कर रहा था,
    पैदा किया जिसने, उसी से मुक़ाबिल कर रहा था।

    सोच भी नहीं सकता, कैसा खौफ़नाक मंज़र होगा,
    आह भी ना निकलेगी, इर्द-गिर्द सब जर्जर होगा।

    खुदा के नूरानी नूर को जो, बंदे दुनिया में फैलाएंगे,
    बनेंगे ख़ास वो उसके, कयामत के दिन इनाम पाएंगे।

    ए बंदे, संभल जा, अपनी ज़िंदगी का हिसाब कर ले,
    खुद से खुदा को जान, नेमतों की बरसात कर ले।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (21-04-2021)✍️ (12-05-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 40w

    श्री राम नवमी

    राम नाम के जाप से, मिले मुक्ति का धाम ।
    प्रेम भाव मन में जगे, हृदय विराजे राम ।।

    चैत्र मास नौवमी तिथि, लिए हरि अवतार ।
    सबहि को है तार दिया, कीर्ति छाई अपार ।।

    रामजन्म के पर्व में, गूँजे जय-जय राम ।
    भगति से पूरन हुए, सब जन के है काम ।।

    धर्म हानि जब-जब हुई, लिए हरि अवतार ।
    सत्य है विजयी हुआ, किया दुष्ट संहार ।।

    क्षमा त्याग की मूरत, मोरे प्रभु श्री राम ।
    मोक्ष द्वार खुल जावे, जौ ले रघुवर नाम ।।

    मर्यादित जीवन का, देते रघुवर सार ।
    वचन मान को राखिये, किजै सत आचार ।।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (21-04-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 39w

    रूठा सा इश्क़

    ना जाने रूठा-रूठा सा इश्क़, मुझे सताता क्यों है,
    मेरा झूठा-झूठा सा ऐतबार, इस पर आता क्यों है।

    क़ुर्बत में इसकी, मैं जितना करीब आना चाहती हूँ,
    उतना ही दूरियों का सिलसिला, ये बनाता क्यों है।

    दर्द-ग़म देता है, फ़िर दवा भी मयस्सर करता है,
    कैसा है ये, अलहदा रिश्ता मुझसे निभाता क्यों है।

    मैं वफ़ा लेकर चलती हूँ, इसकी वीरान गलियों में,
    तब बेवफ़ाई का मंज़र, ये मुझे दिखाता क्यों है।

    इश्क़ में, इश्क़ के ख़ातिर, होना चाहती हूँ फ़ना,
    लेकिन बेग़रज सा इश्क़, मेरे हिस्से आता क्यों है।

    जिसे पाया भी नहीं, जुदा भी जो मुझसे नहीं हुआ,
    मेरा इश्क़, मुक़र्रर इश्क़ के आँसू बहाता क्यों है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (21-04-2021)✍️ (26-04-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 40w

    अव्वल - प्रथम, सर्वश्रेष्ठ
    मख़लूक - रचा या बनाया हुआ
    ख़िलाफ़त - विरोध करने की क्रिया
    इल्म - ज्ञान, बुद्धि
    ग़ुरूर - अहंकार, घमंड
    ख़िदमत - सेवा
    दोज़ख - नर्क
    _________________________________

    #krati_mandloi #23rdapril_2021 #Respost #Hindinama @hindiwriters @hindinama

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    इंसान

    खुदा की दुनिया में अव्वल दर्जे का मख़लूक इन्सान,
    कश्मकश में खुद की, वजूद से अपने है अनजान।

    खुदा ने फ़क़त बख्शी है, इंसान को तमाम आजादी,
    अपनी हदों को पार करके, ख़िलाफ़त में की बर्बादी।

    इल्म के तख़्त पर इंसाँ, बैठकर सुनाता गया फ़रमान,
    शहंशाह खुद को समझने लगा, बढ़ता गया गुमान।

    बंटवारा किया सबका, बनाए मज़हब के कई नाम,
    बना वो तेरे लिए, कभी अल्लाह, जीसस, कभी राम।

    किस बात का ग़ुरूर तुझे, बुलबुले सी है तेरी जान,
    सर झुका कर चल, ख़िदमत में रख अपना ईमान।

    औकात क्या है तेरी, जो खुदा को कुछ भी देगा,
    दौलत अपनी पास में रख, देने वाला कुछ नहीं लेगा।

    सुन तेरे अंदर खुदा ने, अपना चिराग जला रखा है,
    दिखे साफ़ सब आईने जैसा, वो रास्ता बना रखा है।

    नफ़रत, फ़रेब, बेईमानी तुझे दोज़ख तक ले जाएगी,
    तेरी पाक नीयत, सच्चाई ही, जन्नत तक पहुँचाएगी।

    ख़ुशी और ग़म के बीच, उलझा हुआ तेरा सफ़र है,
    मुश्किल है, राहत भी है, ज़िंदगी की ऐसी डगर है।

    ए इंसान, खुद से खुदा को जानकर, भरम को दूर ले,
    खुदा के इबादत में बंदे, खुद को तू कोहिनूर कर ले।

    इंसान आए इंसान के काम, इंसान है इंसान ही रहे,
    शैतान का हो ख़ात्मा, इंसानियत की बोली कहे।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (20-04-2021)✍️ (23-04-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 40w

    मुस्तैद - किसी कार्य के लिए पूर्ण रूप से तत्पर
    तफ़रीक़ - अंतर, भिन्नता
    क़नाअत - संतोष, संतुष्टि
    _________________________________

    #krati_mandloi #Repost #yourquote
    #19th april_2021 #Hindinama @hindiwriters @hindinama

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    अमीर और गरीब

    दुनिया अमीरी-गरीबी को तराजू में तोल रही है,
    हैसियत के मुताबिक इंसान को मोल रही है।

    ज़माने में इंसानियत भी इसकी पाबंद में कैद है,
    दौलत के आगे चला ईमान होने को मुस्तैद है।

    सभी की रगो में लाल, रंग का लहू बहता है,
    इंसाँ में क्यों फ़िर तफ़रीक़ का नज़रिया रहता है।

    अमीर का हर ऐब भी, ज़माने को हुनर लगता है,
    गरीब का सच तो, लोगो को बेहद अखरता है।

    अमीर भरी झोली में, ज्यादा की चाह रखता है,
    गरीब कम में भी, क़ना'अत का मज़ा चखता है।

    ख़ुदा तो फ़क़त, नीयत और ज़मीर से तोलता है,
    इंसाँ अमीरी-गरीबी के फेर में ताउम्र डोलता है।

    चादर ओढ़ी जो भी, खाँक तो उसको होना है,
    फ़िर दोनों के बीच में, फ़र्क को क्यों बोना है।

    अमीर और गरीब को, मत कर खुद पर संवार,
    नेकी की आली शान में, ए बंदे जात निखार।

    हक़ीक़त में वही अमीर, ज़िंदा जिसका ज़मीर है,
    वही गरीब है, जो अपने किरदार से बे-ज़मीर है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (18-04-2021)✍️ (19-04-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 43w

    होली गीत

    आया होली का त्यौहार,
    छाया हर्ष उल्लास अपार,
    बरसी रंगो की बौछार,
    आओ, आओ रे.....
    सारे मिलजुलकर,
    प्रेम बढ़ाओ रे.....

    आओ बैर, द्वेष मिटाओ,
    आओ समता भाव जगाओ,
    भाई चारे का होगा प्रसार,
    एकता ही संस्कृति का सार,
    रंगो से रंगेगा ये संसार,
    आओ, आओ रे.............बढ़ाओ रे।।१।।

    आओ मंगल गीत गाओ,
    आओ भक्ति में रम जाओ,
    ईश को कर दो सब अर्पण,
    जगेगा तब मन का दर्पण,
    रक्षा में है उसका कर्पण,
    आओ, आओ रे..............बढ़ाओ रे।।२।।

    प्रकृति ने उपहार है पाया,
    पावन शुभ दिन है ये आया,
    हो जग में भारत उल्लेख,
    बदल दे हम भाग्य के लेख,
    ऐसे एक बने हम नेक,
    आओ, आओ रे...............बढ़ाओ रे।।३।।

    आया होली का त्यौहार,
    छाया हर्ष उल्लास अपार,
    बरसी रंगो की बौछार,
    आओ, आओ रे.....
    सारे मिलजुलकर,
    प्रेम बढ़ाओ रे.....

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (29-03-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 44w

    ना कर

    इंसाँ अपने ग़मो का हिसाब ना कर।
    ख़ुदा की रहमतों को नजरअंदाज ना कर।

    एक नज़र ड़ाल खुद को आईना दिखा,
    किसी की गलतियों को बेनकाब ना कर।

    कोशिशों को मुक़म्मल होता देख आज में,
    मनमुताबिक सही वक़्त का इंतज़ार ना कर।

    काँटे बिछा कर राहों में किसी की,
    अपने लिए गुलों की फ़रियाद ना कर।

    नीयत से परख किरदार की ख़ूबसूरती को,
    फ़क़त ख़ूबसूरती पर तू ऐतबार ना कर।

    जिस्म -ए- खाक़ी की चादर को ओढ़कर,
    ग़रूर में ज़िंदगी को बेकार ना कर।

    ख़ुद के अंदर ही मिलेगा ख़ुदा तुझको,
    उसे मंदिरो, मस्जिदो में तलाश ना कर।

    करने दे असर एहसासों को गहराईयों तक,
    ग़ज़ल में नियमों की बात ना कर।

    ©Krati_sangeet_mandloi
    (23-03-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 44w

    कविता

    कविता पर मेरी कविता

    प्रकृति ही कविता है,
    वास्तविकता की प्रदर्शक ही कविता है,
    आनंददायिनी ही कविता है,
    विचारों की पराकाष्ठा ही कविता है,
    भावनाओं की अभिव्यक्ति ही कविता है,
    चरित्र का चित्रण ही कविता है,
    शब्दों का सामर्थ्य ही कविता है,
    भाषा की शिष्टता ही कविता है,
    लेखनी की नींव ही कविता है,
    लेखक की अतिशयोक्ति ही कविता है,
    आत्मज्ञान ही कविता है,
    हृदय की पवित्रता ही कविता है,
    सत्य ही कविता है,
    सृजन की आवाज़ ही कविता है,
    सूक्ष्मता की परिचायक ही कविता है,
    परब्रह्म की भक्ति ही कविता है,
    ईश्वर की कृति ही कविता है ।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (8-02-2018)✍️ (22-03-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 45w

    कविता से विश्व परिवर्तन


    निःसंदेह कविता विश्व परिवर्तन नहीं कर सकती, लेकिन....
    मनुष्य के दृष्टिकोण को नई विचारधारा दे सकती है।
    हृदय के दर्पण पर जमी धूल को हटा सकती है।
    हृदय के मार्मिक स्थान को स्पर्श कर,
    हृदय परिवर्तन कर सकती है।
    मनुष्य की चेतना को आलौकिक कर,
    यथार्थ से अवगत करा सकती है।
    प्रत्येक क्षेत्र की निश्चित धारा में,
    कटाक्ष सत्य को प्रमाणित कर सकती है।
    मनुष्य को उसकी मनुष्यता का भान करा सकती है।
    प्रेम, करुणा, सुख, दुःख, क्रोध, घृणा,
    सभी की सरलतापूर्वक अभिव्यक्ति कर,
    उनमें उपयुक्त संबंध स्थिर कर सकती है।
    ईश्वर और भक्ति का सर्वोत्कृष्ट रूप प्रदर्शित कर सकती है।
    व्यक्ति विशेष का चरित्र-चित्रण सुगमता से कर सकती है।
    मनुष्य और प्रकृति के मध्य संतुलन स्थापित कर सकती है।
    समाज में फैली कुरीतियों की जड़ों पर प्रकाश डाल, समाज को एक नया आईना दिखा सकती है।
    कविता का मूलभूत उद्देश्य परिवर्तन है,
    जो विश्व को पारदर्शिता दिखा कर,
    एक सुंदर विश्व निर्माण में सहायक अवश्य हो सकती है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (30-03-2018)✍️ (16-03-2021)

  • krati_sangeet_mandloi 45w

    सरा-ए-फ़ानी ~ नश्वर दुनिया
    बेदार ~ जाग्रत

    #krati_mandloi #18thmarch_2021 #Hindinama @hindinama @hindiwriters

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    नजऱ में मिरी तू बहार-ए-करम है,
    करूँ जितना नाज़ उतना ही कम है।

    सफ़र-ए-ज़िंदगी की अंजान राहों में,
    हर कदम पर तू मिरा सनम है।

    दुनिया की अजब सरा-ए-फ़ानी देख,
    तू ही हक़ीक़त, सब कुछ भरम है।

    तिरे होने से फ़क़त वजूद है मिरा,
    तिरे बिना मौला सब कुछ खतम है।

    ना लगेगा दाग कभी मिरी नियत पर,
    दिल-ओ-जाँ को मिरी तिरी कसम है।

    क़ामिल हो जाए इबादत तुझे पाकर,
    बेदार रूह से सज़दा मिरा धरम है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (18-03-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 46w

    नारी

    प्रकृति का अनुपम पर्याय है तू नारी,
    सहनशीलता और उदारता की मूरत है तू न्यारी।

    प्रेम,समर्पण और त्याग की परिभाषा है तू नारी,
    ममत्व का अमृत्व बरसाती, धारा है तू प्यारी।

    शक्ति और साहस का अद्वितीय स्त्रोत है तू नारी,
    अन्याय के विरोध में बनती है तू प्रचंड चिंगारी।

    सुंदरता की सुंदरतम अभिव्यक्ति है तू नारी,
    अभिभूत मन से तेरे खिल-खिल जाए फुलवारी।

    मर्यादा रूपी गहने का गौरव है तू नारी,
    पावनता की सुगंध से वर्णित है तू चित्रकारी।

    सृष्टि की पालनहार और संरक्षक है तू नारी,
    हृदय लगाती सभी को महिमा तेरी है परोपकारी।

    हर युग में मानव की उद्धारक है तू नारी,
    सुदृढ़ और बलिष्ठ समाज की है तू अधिकारी।

    परमात्मा का सर्वोत्कृष्ट सृजन है तू नारी,
    देवता भी शीश झुकाते तेरी दिव्यता है विस्मयकारी।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (8-03-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 47w

    शरणदायिनी माँ

    हे, शरणदायिनी माँ धरती!!
    नमन तुझको बारम्बार है,
    जीवन दाता,अनुपम माता,
    शरण में तेरे यह संसार है,
    पीड़ा हरती तू सभी की,
    तेरे अनंत उपकार है।।

    हे, जगतजननी भूदेवी!!
    पंच तत्वों में तेरा सार है,
    ममता की न्यारी मूरत तू,
    बहाती प्रेम की धार है,
    सृजनकारी शक्ति में तेरी,
    विशालकाय विस्तार है।।

    हे अन्नदा, माँ अन्नपूर्णा!!
    तू सृष्टि की पालनहार है,
    तेरे आँचल की छांव में,
    शांत क्षुधा का द्वार है,
    कोख में तेरे प्राण बसे,
    जग की खेवनहार है।।

    हे रत्नगर्भा, माँ वसुंधरा!!
    तुझमें रत्नों का भंडार है,
    तेरे तेजस्वी सौंदर्य से,
    फैली चैतन्य बौछार है,
    मनमोहक हरित छटा ने,
    किया दिव्य शृंगार है।।

    हे क्षमात्मिका, माँ धरा!!
    उदारता की तू अवतार है,
    सहती भार सभी का तू,
    क्षमा की शक्ति अपार है,
    "प्रारम्भ" से "अंत" तक,
    किया सर्वस्व उद्धार है।।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (7-03-2021)✍️

  • krati_sangeet_mandloi 46w

    अनभिज्ञ - अनजान
    अनपेक्षित - अचानक
    औचित्य - उचित होने की अवस्था या भाव

    #krati_mandloi #10thmarch_2018 #5thfeb_2021

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    जिज्ञासा

    जिज्ञासा मानव प्रकृति की प्राथमिक नींव है,
    जिसके मूलतत्व के हर कोई समक्ष नहीं है।

    विचारों की यात्रा में अनवरत प्रयासों के बाद भी,
    कभी यह अपने लक्ष्य की दिशा में पूर्ण नहीं है।

    जीवन के प्रत्येक पड़ाव में बनती सहभागी है,
    जिसकी नित्य-निरंतरता का कोई छोर नहीं है।

    अंतश्चेतना के किसी कोने में यह अनपेक्षित है,
    जिसका परिप्रेक्ष्य दृष्टा के लिए समान नहीं है।

    कहीं जन्म से मृत्यु तक नाम मात्र में सीमित है,
    कहीं अवधारणाओं में ही यह प्रमाणित नहीं है।

    जो वास्तव में मानव के अंतः अर्थ से जुड़ी है,
    उसकी अपूर्णता में मनुष्य का सुखत्व नहीं है।

    एकमेव ब्रह्मजिज्ञासा से प्राप्त निर्विचारिता में,
    विभिन्न जिज्ञासाओं का कोई औचित्य नहीं है।

    जो यह प्राप्त हो जाए मानव "स्व" के अर्थ को,
    वहाँ किसी भी प्रश्न का होना सम्भव नहीं है।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (10-03-2018)✍️ (13-03-2021)