#kisan

55 posts
  • goldenwrites_jakir 4w

    सर्दीयाँ ✍️

    बात पुरानी है पर लाज़मी है
    है सर्द हवा फ़िजाओं में
    और जिस्म पर कुछ ऊनि कुछ काटन के लिबास थे
    खेतो में चल रहा था पानी ठण्ड का असर जोरो पर था
    कैसे रात के अंधेरों में गेहूं चने की फसल पर दिया जाता पानी
    ज़ब दिन में नही मिलती बिजली रात के अंधेरों में
    खेत को खलियान बनाना होता है
    वो लम्हें लिखना महसूस करना आसान नही होता
    किसान की ज़िन्दगी की धुप छाव हर इक मौसम में इक पहेली होती है
    ©goldenwrites_jakir

  • goldenwrites_jakir 17w

    आसमानी बरसात भी - अजीब है
    कभी बेजान जमीं को - खुशहाल बनाती
    तो कभी खिलखिलाती फसल को उजाड़ जाती
    ©goldenwrites_jakir

  • pen_or_pain 22w

    किसान

    मिट्टी इस बार थोड़ी सूखी है,
    धरती भी बारिश की भूखी है।
    पर होगा ही क्या...
    सरकार इसे अकाल का नाम दे देगी,
    नरेगा के नाम पर
    किसानों को थोड़ा काम दे देगी।।
    ©pen_or_pain

  • deepakgill 27w

    ❤️

    ए बादल तू किन ख्यालों में खोया है,
    जरा आँखें खोल कर तो देख, किसान आज फिर रोया है,

    बारिश की बूंदों से नहाने की उम्मीद मे,
    आखिर थक हारकर, पसीने से ही "बदन" उसने धोया है,

    ए बादल तू किन ख्यालों में खोया है,
    तेरे बरसने की आस में, "बंजर" जमी पर भी बीज उसने बोया है,

    ए बादल तू किन ख्यालों में खोया है,
    किसान को तो देख, अरसों से जो कहां सुकून की नींद सोया है ।

    ए बादल तू किन ख्यालों में खोया है..??

    ©deepakgill

  • aman_singhai_ 43w

    यूं तो सड़क मेरे गांव से भी गुजर रही है
    पर लगता है यहां बोहोतो की ज़िंदगी उजड़ रही है !
    ©amansinghai

  • parihar_sahab 50w

    #farmersprotest #kisan #delhiprotest
    #mirakee #mirakeewriters #farmer
    #writersnetwork #poem #writer
    #shayari #dilse #mushkil #baatein
    _______________________________________
    कहा देशद्रोही आतंकवादी
    भी कह दिया..
    बिना समझे मुश्किलों को
    दिखावा भी कह दिया..
    छोड़ कर परिवारों को जो
    बैठे हैं अधिकारों के लिए..
    षड्यंत्र कर उनको सब ने
    बेसहारा कर दिया..
    भूलो मत कुछ बातें तुम
    सच को समझा करो..
    कुछ बोलने से पहले तुम
    मुश्किलें समझा करो..
    अगर समझ पाओ तुम
    मुश्किलें किसानों की..
    तब जाके बातें तुम
    किसी के हक की किया करो..
    न करो समर्थन तो
    विरोध तुम मत करना..
    हो सके तो करना कोशिश
    किसानों को जानने की
    मरते हैं हर साल वो कर्ज के बोझ से
    कह सको तो उनके बारे में ज़रूर
    बोलना..
    झूठ का साथ दे
    हिम्मत उनकी न तोड़ना..
    हो सके तो चुप रहो
    उनके जख्मों को न कुरेदना...
    ________________________________________
    please share ��

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    कहा देशद्रोही,आतंकवादी
    भी कह दिया..
    बिना समझे मुश्किलों को
    दिखावा भी कह दिया..
    ©parihar
    (अनुशीर्षक पढ़ें)

  • soamdigvijaykavi 52w

    "किसान-2"

    शायद तुम्हे नही पता कैसा होता है जीवन किसान का,
    सुनो देखो ऐसा होता है जीवन किसान का,
    रोटी नमक की रूखी-सुखी कैसी भी मिले,
    खेत के डोले पर बैठकर खा लेता है,
    जब थक जाये ज्यादा उन्हें डोले पर कुछ देर सो लेता है,
    तपती धूप में मेहनत के बल पर सूरज के बाहुबल को तोड़ देता है,
    शीतलहर जैसी हो सर्दी फिर भी पानी मे खड़े होकर खेतो को सींच देता है,
    खेतो मे उगाने के लिए सोना वो खुद सोना भूल जाता है,
    जब अपने घर मे ना जलाये चूल्हा तब जाकर तुम्हारे घरों मे चूल्हा जलता है,
    बेटों को भेजे सरहद पर बिटिया को डोली मे विदा करता है,
    खुद के साल दर साल एक जोड़ी कपडे मे बिना जूते के निकाल देता है,
    अच्छी-नयी फ़सल उगाने को अपना स्वाभिमान गिरवी रख वो क़र्ज़ लेता है,
    उस के हो जाने पर ख़राब वो माटी का लाल नमन कर माटी को चुप चाप फाँसी चुम लेता है।

    आरोप-प्रत्यारोप का दौर तुम जो चला रहे हो,
    एक-दूसरे पर उंगलियाँ तुम जो उठा रहे हो,
    देख लेना तुम्हारा भी हाल इनके जैसा ही हो जायेगा,
    इनको फैंक दिया गया तुमको भी फैंक दिया जायेगा,
    वक़्त है संभल जाओ इनकी बातो को मान जाओ,
    बहस बंद करो MSP को कानून बना दो,
    वरना सच मे 24 मे झोला उठाकर चले जायोगे,
    तब तक मे क़लम को नही रोकूँगा केवल अंगार-अंगार लिखूंगा,
    हक नही मिल जाने तक मे किसान-किसान केवल किसान लि
    ©soamdigvijaykavi

  • ajit___ 54w

    खबर अखबार की है, या किसी ने अफवाह फ्लाई है.?
    किसानों के सामने दिल्ली की सियासत दहल'आई है!
    ©ajit___

  • mr_chouhan30 56w

    Jab aapka aany(अन)daata hi pareshan ho
    toh aap chain ki nind kaise soo sakte hai..
    Rip- sant baba ram singh ji
    Kisan andolan
    ©mr_chouhan30

  • princesunnyrajput 58w

    ਕਿਸਾਨ

    ਮੈਂ ਹਾਂ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਆਮ ਕਿਸਾਨ
    ਮੈਨੂੰ ਵੇਖ ਕੇ ਕਿਉ ਹੁੰਦੇ ਓ ਹੈਰਾਨ
    ਕਰਜ਼ੇ ਚੁੱਕ ਚੁੱਕ ਮੈਂ ਵਾਹੇ ਖੇਤ ਆਪਣੇ
    ਘਟੀਆ ਬਿੱਲ ਨੇ ਕੀਤਾ ਮੈਨੂੰ ਪਰੇਸ਼ਾਨ
    ਜਦੋਂ ਸਾਥ ਨਾ ਮੇਰਾ ਕਿਸੇ ਨਾ ਦਿੱਤਾ
    ਫਾਂਸੀ ਲੈਕੇ ਮੈਂ ਤੁਰਿਆ ਇਸ ਜਹਾਨ
    ਜਾਲਮ ਸਰਕਾਰੇ ਕਿਉ ਬੈਠੀ ਐ ਜਿੱਦ ਕਰਕੇ
    ਆਪਣੀ ਮਤੀ ਤੇ ਮਾਰ ਥੋੜਾ ਜਿਯਾ ਧਿਆਨ
    ਸਾਡੇ ਕਰਕੇ ਹੈ ਪਕਦੀ ਰੋਟੀ ਘਰਾਂ ਚ
    ਇਸ ਗੱਲ ਦਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵੀ ਹੈ ਗਿਆਨ
    ਛੋਟੀ ਸੋਚ ਨੂੰ ਥੋੜਾ ਵੱਡਾ ਕਰਕੇ
    ਹੱਕਾ ਸਾਡੀਆ ਲਈ ਹੁਣ ਦਿਓ ਬਿਆਨ
    ਬੇਦੋਸ਼ੇ ਲੋਕ ਹਾ ਅਸੀ ਕੋਈ ਅੱਤਵਾਦੀ ਨਹੀਂ
    ਜੇ ਚਲੀ ਬਦਮਾਸ਼ੀ ਤਾ ਕਡ ਲਵਾਂਗੇ ਕਿਰਪਾਨl
    ©princesunnyrajput

  • ankit_tiwari 58w

    क्या कहदें?

    क्या कहदें?
    ये है देश मेरा ।

    या कहदें?
    ये है दोष मेरा ।

    के रोष में उनके कदम चले।
    और जमीन पे उनकी वीराना।

    कुछ पे होती लाठी की वर्षा।
    और कुछ को वर्षा ने तरसाया।

    कुछ कहते आतंकी उनको।
    और कुछ कहते बहकाया ।

    कुछ कहते ना हल है उन पे।
    और हल तो उनकी ही इक काया।

    कुछ लड़ते नाम पे उनके।
    और हाथ में उनके बस साया।

    क्या कहदें?
    ये है देश मेरा ।

    या कहदें?
    ये है दोष मेरा ।
    ©ankit_tiwari

  • chahat_samrat 59w

    #fictious_pen_s
    #kisan

    ������----------- मेरा गांव ही मेरी शान---------������
    _____________________________________________________


    हो मौसम मूसलाधार वर्षा
    या हो कड़क सर्दी कोहरा,
    नित भोर खोल नयन तड़के
    सारा दिन की थकान सहके!

    चल पड़ती फिर खेत खलिहान
    करने को निराई गोड़ाई!
    लगे हाथों पशुओं के चारा पानी
    बिना लिए जरा अंगड़ाई!

    कर फिर स्नान ध्यान पूजा पाठ,
    रसोई ने अब उलझाई!
    शांत मन लिए, सहज मुस्कान,
    बन्ध धैर्य में सब निपटाई!

    देख चक्कर घड़ी फिर आज देरी,
    भरा जल्दी से बस्ता,
    पूछा मास्टर ने रिंकी फिर आज देरी,
    मास्टर!खराब था रस्ता!

    हुई छुट्टी सखियों संग खुशी खुशी,
    लौटी घर को,
    आते ही काम, सुकून नहीं उसे जैसे,
    एक पल को!

    गायों को पानी चारा , गोबर कंडा,
    बिना चाय की चुस्की लिए!
    लगी भोर से बस दौड़ दौड़ और दौड़,
    जैसे बस बैलों को रस्सी लिए!

    ढलते सांझ फिर खेत से लकड़ी, सब्जी,
    रात्रि भोज का तयारी करे!
    सुबह से शाम बैठी ना वो एक पल ,कैसे,
    रोबोट सी सब जिम्मेदारी करे!

    सर्र सर्र दहलीज से इधेर से उधर दौड़ती,
    दर्पण इंतजार में निहारे!
    सवारती पूरा घर बचपन से यौवन तक,
    कभी खुद को भी सवारे!

    अरे मायूस रिंकी आजकल है अब इतनी,
    बात क्या है, मुरझाई सी?
    शहरी किसी सोनम ने उसके चेहरे के दागों,
    की कर दी थी बड़ी बुराई!

    ओह! सोनम बात तुम दोबारा ये दाग़ ध्ब्बे,
    खूबसूरती की करना मत!
    फिर किसी खूबसूरत सी मुस्कुराती लड़की,
    के कान बेवजह भरना मत!

    दिखाना जब धूप छांव खेत, खलिहान,
    चारा पानी, चूल्हा, कंडा सब मे हाथ लगाना!
    दिखाना अपनी खूबसूरती फिर बढ़ाकर,
    इनसे ज्यादा जब असल कर्मों से गुजर जाना!

    उगाई इन्हीं के हाथो की तरकारी फल सब,
    तुमने खा कर कुछ चमड़ी पर भी लगाई है!
    ये भूलों मत वो ना हो गर तो इतनी सुंदरता
    बगैर अन्नदाता के सब पल भर में कुंभलाई है!

    रिंकी निभाती खुशी से जिम्मेदारी हर, यौवन में,
    बेनकाब वो , लिबास उसके बड़े अच्छे है!
    गांव की बेटी है, घर बार, खेत खलिहान अव्वल
    काले किसी के दिल से ये दाग़ बड़े अच्छे है!

    ©chahat1samrat

    ______________________________________________________

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    बड़ी सहजता से निभाए ,
    जो घर बार, खेती;
    बिन संवरे दर्पण में,
    बड़ी सुंदर है वो खेतिहर बेटी!
    ©chahat1samrat

  • ajit___ 76w

    वो रोए गा नहीं,
    लेकिन तुम्हें रुला जाएगा,
    पाठ जिंदगी का एक
    तुम्हें पढ़ा जाएगा,
    ..
    मिट्टी से उसने इश्क़ किया,
    मोहब्बत वतन से कर रहा,
    पेट पालता है दुनिया का,
    वो आज अंदर ही अंदर मर रहा,
    ...
    खेलना जुआ,
    हराम है मुल्क मे अपने,
    वो खेलता है जुआ हर वर्ष,
    मिट्टी में बोता है अनेकों सपने,
    ...
    मिल जाए उचित दाम,
    लागत उसकी ढक जाए,
    सपना उसका कितना बड़ा है,
    की हर घर में सांझ की रोटी पक जाए,
    ...
    ©ajit___

  • yash_mehta 76w

    किसान

    हल चला,बहा पसीना भी
    यहां मोती,यहीं नगीना भी
    दिन चढ़ा,खेत खलिहानों से
    फिर खफा बरसात,किसानों से
    बीज- बीज को,सींच खून से
    बेहतर फसल,उगाते है
    हाथ फावड़ा,लिए ही चलते
    यह अपनी भूख,मिटाते हैं
    ©yash_mehta

  • suno_naa 79w

    इश्क़ - बेरोजगार (2)

    अपनी माटी से इश्क़ मुझे यूँ हुआ
    की मैं वो किसान जो इस दुनिया का पालनहार है
    और सरकारी नौकरी ठुकराकर अपना हल और बैल उठाया
    तो समाज ने मुझे बेरोजगार कह दिया
    ©reenu312

  • thepoeticvyas 93w

    खून-पसीना

    खून की कुछ बूँदे पड़ी दिखी फर्श पर
    खून थोड़ा पतला शायद पसीना मिला था
    नींद बस टूटी ही थी, आंखे बस खुली ही थी
    मेने फर्श से वो गेहूं के दाने उठा लिए...
    `लफ्ज़-ए-लव´
    ©thepoeticvyas

  • iamshrish 99w

    हमारा अन्नदाता...

    सूरज से पहले वो उग जाता
    कड़ी धूप में भी हल चलाता
    ठंड की शीतल हवा हो या बारिश का हो साल
    डटा रहे वो हरदम समय से आगे उसकी है चाल
    अन्नदाता है हमारे जीवन के विधाता है किसान
    चले जीविका उनसे,हमारी आशा है किसान
    हर मौसम हर मुश्किल मे अडिग रहे वो खड़ा
    पर आज क्यो वो बैठा है क्यो दुखी होके है पड़ा
    कुछ पल मैंने विचार किया तो आया ये सामने
    हम है इसके दुख के कारण पड़के अपने अभिमान मे
    वो किसान जो किसी से नहीं था डरता
    आज वही उदास,खाली पेट है मरता
    नजाने हमें पेड़ो को काट के क्या खुशी मिलती है
    दर्द इनका उनसे पूछो जिनकी जीविका इनसे चलती है
    अगर वो पेड़ रहा होता तो आज यहा वर्षा होती
    उस किसान की माँ बेटी क्यो भला तब यू रोती
    अरे बंद करो ये धंधा अपना इसमें न तेरा कुछ
    बस इसमे घाटा संसार का है न मेरा कुछ
    ©iamshrish

  • the_sonam 111w

    Subah Ka Intezar karta,
    Bail liye kheton ko chalta.

    Fasal ko hain sich Raha ,
    Pasina se tan uska Bheeg Raha .

    Tej dhup Se Na Use Dar hai,

    thand Ki Barish bhi
    Uske Badan par be Asar Hai

    Do Waqt Ka ann Ho,
    Do Jode kapde Badan pr,
    girvi Rakh aaya hain jo ghar ,
    Mausam Ki mijaj se hi hai usko Dar.

    Barish na aayi
    Badal bhi Khamosh Hai .
    Kisan soche,Baithe yhi,
    Garibi Mein Uske Kiska Dosh Hain.

    Fasal Jal Gai dhup se,
    Ghar Jal Gaya Mausam ke Badalte Roop se.

    Jimmedariyo se hara,
    Bhookh ka maara.
    Dekh sochta ped har ek,
    Ki jaha mare the sapne uske,
    Maut hogi aaj fir ek.

    ©the_sonam

  • the_lifeline_ 123w

    भूखे पेट दिन रात भाग रहा है,
    सुबह और रातों में जाग रहा है,
    बेईमानी के पेट भरे हैं,
    खुद देने वाला भीख मांग रहा है।

    #Farmers Distress #kisan

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    ©the_lifeline_

  • prakashinidivya 129w

    सावन...

    सावन तुम तो आ चुके ...
    क्या "बूंदे" छोड़ कर आए हों?
    ऐसी भी क्या मजबूरी थी....
    जो "बरसना "भूल कर आए हों..

    कुछ मेघ घूमड़ पड़ते हैं.....
    आशा थोड़ी जगा जाते हों..
    ये नादानी हरकत क्यूं करते..
    क्या सिर्फ" "किसानों ""को सताने आए हो?

    मिट्टी पूरी सुख चुकी है...
    वसुंधरा में दरारे ले आए हो..
    सूरज की ये कैसी मनमानी..
    उन्हें साथ क्यूं ले आए हो...
    ©prakashinidivya