#kavita

9004 posts
  • raman_writes 1h

    सितमगरों

    सितमगरों ने अपनी एक नई दुनिया बना ली ।

    फिर सितमगरों से भी उस दुनिया में ना रहा गया ।।


    ©raman_writes

  • moodymoonak 11h

    पेड़ों सी गहरी खामोशी है, मुझं में
    और हवाओं सी तेज़ बेरुखी भी,
    कभी बारिश की तरह बेवक्त बरसते आंसू है, मेरे
    कभी काली रात सी गहराई भी,
    खुले नीले आकाश सा दिल है मेरा,
    और कभी पत्थर की तरह सख्त हूं,मैं
    और कभी तारों की तरह चमकना अच्छा लगता है


    बस मौसम की तरह बदलना मुझे नही आता
    ©moodymoonak

  • moodymoonak 15h

    तेरी याद गर दिल से न जाए,
    तो क्या किया जाए?
    तेरे ख्यालों में दिन तेज़ी से बीत जाए,
    तो क्या किया जाए?
    रात भर गर नींद ही ना आए,
    तो क्या किया जाए?
    हर लम्हा दिल तुझ से मिलने को चाहे
    तो क्या किया जाए?
    दिल बिना बात के ही मुस्कुराए,
    तो क्या किया जाए?
    ©moodymoonak

  • raman_writes 1d

    यादें

    लोग मिलते है ज़िंदगी में बिछड़ जाते है ।

    यादें सलामत रहती है लोग भूल जाते है ।।


    ©raman_writes

  • imgarima 1d

    न सूट न सलवार,
    न बुरखे को कोसा है,
    इंसान में छिपे हैवानो ने ही,
    इंसानियत का गला घोंटा है,
    क्या दोष हमारे कपड़ो का,.
    जब सोच लोगो की छोटी है,
    महान हमारे देश में बेटियों की,
    रक्षा इस प्रकार होती है...?

    कितनी बहनो,
    कितनी बच्चियों की आवाज़ इन्होने दबायी है,
    कितने दरिंदो की दरिंदगी के,
    कारण कितनी बेटियों ने अपनी जान गवाई है,
    देगा कौन हिसाब इसका,
    जो हर दिन ऐसी घटना घटती है,
    किस पर करें विश्वास यहां,
    यहां तो हर आवाज़ पैसो में बिकती है,
    महान देश में हमारे,
    ये कैसा विकास हो रहा है,
    बेटियों की कोई सुरक्षा नहीं,
    और देश भर में बेटी बचाओ,
    का नारा हो रहा है...!!

    ~ गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • abhimanyukumar 1d

    Toota pull

    dil ko dil se na mila paaya
    bss aankhon ke daryaa mei beh sa gaya

    rahagir ko manzil bhi naseeb na
    bass yaadon ke tezz mei tehas nehas hai

    haan mei wo toota pull....
    ©abhimanyukumar

  • raman_writes 2d

    मौत

    हर रोज़ मौत को चकमा दे देते हो रमन ।

    हर रोज़ उसके आने की वजह पूछ कर ।।


    ©raman_writes

  • neha_warang 3d

    निरोपाची आरती घेता अश्रू धरले मना,
    बाप्पाचेही डोळे जणू बोलित होते भावना,
    विसर्जनाची घटिका आली बाप्पा गेले पाण्या,
    कैलाशे गमन करी तुजविण मखर झाला सुना,
    पुनश्च हरिओम होईल तुझा, पुन्हा येईल घरा शोभा,
    गणपती बाप्पा मोरया!
    पुढच्या वर्षी लवकर या!
    ©neha_warang

  • raman_writes 3d

    फ़त्ह

    आधी कोशिशें बेकार गई आधी कोशिशों के बाद हार गया ।

    आधा समंदर फ़त्ह कर लिया आधी जीत के बाद हार गया ।।


    ©raman_writes

  • vasubandhu 3d

    मानस

    बहता पानी भी कितने किरदार निभाता है,

    कभी कुरेदी लकीरों को भर जाता है।

    कभी बुझी लकीरों से परतें हटा जाता है,

    बहाव अटल तो तल की लकीरों की सूराख़ सच्चाई है।

    नश्वर वक्त को भी है दोनों की जरूरत,

    जिंदगी की किताब किसी एक के बगैर कहा पुरी हो पायी है।
    ©Vasubandhu

  • naveensanadhya99 3d

    जय हिन्दी

    मैं जय हिन्दी के, जय हिन्दी के उद्घोष लगाता हूं....
    मैं इस हिन्द, उस भारत मां का लाल कहलाता हूं....
    मैं उद्बोधन, उस संबोधन अपने को प्रकाश में लाता हूं....
    और जय हिन्द, जय भारत का मै नारा लगाता हूं....

    मैं केसरी, भगवा ध्वज को देख कर यूं इतराता हूं....
    मैं हिन्द का, है हिन्द मेरा, गर्व से कह पाता हूं,
    क्योंकि मेरे मुख पर हिन्दी भाषा का साथ जो पाता हूं....
    मैं मातृभाषा, इस राष्ट्रभाषा में देश समेट पाता हूं,
    क्योंकि हिन्दी के इस माधुर्य को हर देशवासी के,
    हर भारतवासी के, मुख पर पाता हूं....

    मैं हिन्दी को, महसूस करके मंद मंद मुस्काता हूं....
    क्योंकि हिन्दी हैं हम, हिन्दू हैं हम,
    यही विचार फिर मन में लाकर, संतुष्टि पाता हूं....
    और हिन्द, इस राष्ट्र को नतमस्तक हो जाता हूं....

    मैं जय हिन्दी के, जय हिन्दी के उद्घोष लगाता हूं।
    मैं इस हिन्द, उस भारत मां का लाल कहलाता हूं।।

    जय हिन्द, जय भारत
    मेरे द्वारा मेरी हिन्दी, मेरे हिन्द को समर्पित एक छोटी सी प्रस्तुति....

    - नवीन कुमार सनाढ्य
    ©naveensanadhya99

  • raman_writes 4d

    इंतज़ार

    इतना तो तय है के चिड़िया लौट कर आएगी ।

    तू इंतज़ार कर शाम हुई है अभी सूरज नहीं ढला ।।


    ©raman_writes

  • raman_writes 5d

    तबाही

    ख़ामोशी से बहता हुआ तूफ़ान सब कुछ उजाड़ रहा है ।

    मेरे भीतर चल रही जंग ने अभी तक तबाही नहीं मचाई ।।


    ©raman_writes

  • vinaypandey84 5d

    ये ना कैहना के वक्त नहीं तेरे पास,
    एक दफ्फा औधे हुए पनो को देख लेना,
    सारी गलतफमियां दूर हो जाएंगी,
    के यहा वक्त नहीं मेरे पास,
    ये शिकायते भी धूल जाएंगी...✍️ विनय पांडे
    ©vinaypandey84

  • ajayamitabh7 5d

    #Kavita #Duryodhana #Ashvatthama #Kritvarma #Kripacharya #Mahabharata #Pandav #Kaurav
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    किसी व्यक्ति के चित्त में जब हीनता की भावना आती है तब उसका मन उसके द्वारा किये गए उत्तम कार्यों को याद दिलाकर उसमें वीरता की पुनर्स्थापना करने की कोशिश करता है। कुछ इसी तरह की स्थिति में कृपाचार्य पड़े हुए थे। तब उनको युद्ध स्वयं द्वारा किया गया वो पराक्रम याद आने लगा जब उन्होंने अकेले हीं पांडव महारथियों भीम , युधिष्ठिर, नकुल, सहदेव, द्रुपद, शिखंडी, धृष्टद्युम आदि से भिड़कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया था। इस तरह का पराक्रम प्रदर्शित करने के बाद भी वो अस्वत्थामा की तरह दुर्योधन का विश्वास जीत नहीं पाए थे। उनकी समझ में नहीं आ रहा था आखिर किस तरह का पराक्रम दुर्योधन के विश्वास को जीतने के लिए चाहिए था? प्रस्तुत है दीर्घ कविता "दुर्योधन कब मिट पाया" का इक्कीसवां भाग।
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    दुर्योधन कब मिट पाया:भाग:21

    शत्रुदल के जीवन हरते जब निजबाहु खडग विशाल,
    तब जाके कहीं किसी वीर के उन्नत होते गर्वित भाल।
    निज मुख निज प्रशंसा करना है वीरों का काम नहीं,
    कर्म मुख्य परिचय योद्धा का उससे होता नाम कहीं।
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    मैं भी तो निज को उस कोटि का हीं योद्धा कहता हूँ,
    निज शस्त्रों को अरि रक्त से अक्सर धोता रहता हूँ।
    खुद के रचे पराक्रम पर तब निश्चित संशय होता है,
    जब अपना पुरुषार्थ उपेक्षित संचय अपक्षय होता है।
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    विस्मृत हुआ दुर्योधन को हों भीमसेन या युधिष्ठिर,
    किसको घायल ना करते मेरे विष वामन करते तीर।
    भीमसेन के ध्वजा चाप का फलित हुआ था अवखंडन ,
    अपने सत्तर वाणों से किया अति दर्प का परिखंडन।
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    लुप्त हुआ स्मृति पटल से कब चाप की वो टंकार,
    धृष्टद्युम्न को दंडित करते मेरे तरकश के प्रहार।
    द्रुपद घटोत्कच शिखंडी ना जीत सके समरांगण में,
    पांडव सैनिक कोष्ठबद्ध आ टूट पड़े रण प्रांगण में।
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    पर शत्रु को सबक सिखाता एक अकेला जो योद्धा,
    प्रतिरोध का मतलब क्या उनको बतलाता प्रतिरोद्धा।
    हरि कृष्ण का वचन मान जब धारित करता दुर्लेखा,
    दुख तो अतिशय होता हीं जब रह जाता वो अनदेखा।
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    अति पीड़ा मन में होती ना कुरु कुंवर को याद रहा,
    सबके मरने पर जिंदा कृतवर्मा भी ना ज्ञात रहा।
    क्या ऐसा भी पौरुष कतिपय नाकाफी दुर्योधन को?
    एक कृतवर्मा का भीड़ जाना नाकाफी दुर्योधन को?
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    अजय अमिताभ सुमन : सर्वाधिकार सुरक्षित

  • raman_writes 1w

    अकेले

    किसी फूल से दोस्ती हुई किसी से बस आँख मिली ।

    गुलज़ार में अकेले रहे पर किसी का दिल नहीं दुखाया ।।


    ©raman_writes

  • moodymoonak 1w

    कुछ संभले ही थे
    कि फिर अचानक गिर पड़े
    कुछ घाव नासूर और ज़ख्म ताजा ही रहे
    संभलना मुश्किल था जरा
    फिर भी हम हिम्मत कर, उठ खड़े हुए
    कसर न छोड़ी ज़माने ने हमको गिराने में
    पर हम भी जिद्दी कम न रहे
    बस ज़रा कोशिश करी,
    कुछ संभले ही थे,
    कि फिर अचानक गिर पड़े
    ©moodymoonak

  • raman_writes 1w

    मिट्टी

    किसी मिट्टी के बर्तन अच्छे बनते है किसी से इंसान ।

    मैं वहाँ रहता हूं जहाँ लोगो को मिट्टी की परवाह नहीं ।।


    ©raman_writes

  • raman_writes 1w

    ना-क़ाबिल

    आधी कीमत मिली उस हारे हुए आशिक़ को अपनी ।

    मोहब्बत में ना-क़ाबिल आदमी किसी काम का नहीं ।।


    ©raman_writes

  • raman_writes 1w

    क़ातिल

    तक़दीर कहाँ बदली किसी की किसी का क़त्ल करने से ।

    तफ़तीश जब भी हुई क़त्ल की क़ातिल ही पकड़े गए ।।


    ©raman_writes