#kaashi

19 posts
  • malhar_ 30w

    To be continue....

    *Haa poori nahi hai...pr ho jyegi....lambi hi thodi...aur ye aalas...

    #fromnotepad
    #Upcoming
    #kaashi
    #instalite

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    काशी, बनारस या वाराणसी आप चाहे इसे किसी भी नाम से बुलाइये पर मेरे लिए तो ये काशी ही रहेगा। मोहब्बत है मुझे इस नाम से, इस शहर से। जिंदगी के किसी भी पड़ाव को मैने काशी में ही रह कर पार किया है, हर पहली चीज मैने काशी में ही की है। माँ की आंचल में पहली बार यहीं तो आया था। पापा के कांधे पे बैठकर पहली बार अस्सी घाट गया था। स्कूल का पहला दिन भी काशी में ही था, माँ की पहली डांट, गणित में पहली बार फेल भी काशी में ही हुआ था। पहला प्यार भी काशी में हुआ और आखिरी मुलाकात भी काशी में ही हुई। नही भूल सकता था मै काशी को.......

    ©malhar_

  • saumya_ 75w

    काशी

    गंगा पार ले चल माँझी,
    उस किनारे ना घर, ना बगीचे, ना हीं खेत,
    जहाँ बह रही है धूल की आँधी,
    कोसों दूर नज़र आती है जहाँ बस रेत।

    सुकून, बैराग, आध्यत्म है जहाँ,
    मेरी काशी, मेरे भोले की काशी!
    देख वो रहा मेरे महादेव का महल वहाँ।

    जहाँ की धरती चूम पुण्य कमाए हर धरती वासी,
    वो देख केवट मेरे महादेव की काशी।

    ©saumya_

  • koraa_kaagaz 121w

    गर हो तुम्हारी हां
    तो हो जाए
    इक शाम
    चाय के नाम !
    ©koraa_kaagaz

  • vikkoo 144w

    विष भी इसमें अमृत लागे ये मस्ती की वो घघरी है
    युगों युगों से जगमग जगमग ये महादेव की नगरी है!!!

    ©vikku

  • sinha_shubham 146w

    #हरहरगंगे @mirakee @writersnetwork
    #banaras #kaashi

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    काशी

    अनुवाद है ये जीवन,
    विचारों का ये संवाद है।
    गंगा की निर्मल धारा प्रवाह,
    काया में ऊर्जा का संचार है।।
    ये धरा है तुलसी के कर्म की,
    ब्रह्मा का दिव्य धर्म है।
    काशी नाम नहीं अहसास है,
    काशी नाम नहीं ये प्यार है।।

    कण कण में शम्भू बास्ते,
    निवास हर प्राणी में है।
    संस्कारों की है धनी ये धरती,
    मोक्ष का अभिप्राय है।।
    लक्ष्मीबाई का जीवन बसा,
    बिस्मिल्लाह का अभिमान है।
    काशी नाम नहीं अहसास है,
    काशी नाम नहीं ये प्यार है।।
    ©sinha_shubham

  • makkhan 155w

    काशी

    हम अस्सी के बस्सी,
    वो गंगा का पानी,
    किनारे पे जाती हुई नाव पुरानी |

    वो घाटों पे बसती,
    है गलियों की रानी,
    कहते है उसे ही नगरी पुरानी |

    बिस्मिल्लाह की शहनाई की धुन है सुहानी,
    कबीर और तुलसी की दिल की जबानी,
    वो घाटों पे बसी हुई काशी पुरानी |

    महादेव की जटाओं से निकली गंगा सयानी,
    मजहबी प्रेम की पक्की कहानी ,
    वो घाटों पे बसी हुई काशी पुरानी |

    वो भारत में रत्नो की जननी पुरानी,
    कहते उसे ही सर्वविद्या की राजधानी ,
    वो घाटों पे बसी हुई काशी पुरानी |

    वो बुद्ध के उपदेशो की पहली गवाही ,
    है मोक्ष की सीढी की पहली चढाई ,
    वो घाटों पे बसी हुई काशी पुरानी |

    वो काशी में भोले की बम बम की वाणी,
    हम अस्सी के बस्सी,
    वो गंगा का पानी |
    ©makkhan

  • abhishekyadav 162w

    गंगा

    आज अपने कदमों से,
    तो कल चार कंधों पर,
    जाना तो गंगा की ओर ही है।

  • vikkoo 179w

    "बनारस का घाट हो और गंगा आरती का शोर
    पानी पर दीए की तरह जीवन, भोले के हाथ बागडोर"

    ©vikkoo

  • kaustav_singh 182w

    नही है कोई जवाब

    इन सर्द रातों को, कुछ अकेलापन सा है,
    मैं सोचता हूं क्यों ऐसा है,
    क्यों काटे ना कटे,
    क्यों किस्से यह अनकहे,
    मुझे फिरसे याद आते है,
    नही है कोई जवाब।

    वो दिन अब भी जब याद आता है,
    तो खुद से बस एक सवाल पूछता हूं,
    क्यों न बोला, क्यों कुछ न कहा,
    क्यों डरता रहा बेवज़ह,
    अब , नही है कोई जवाब।

    क्यों बस उसी पल, उसी छड़,
    जिसमे तुम्हारी नम आंखों का मुझे,
    इस तरह देखना कि हां कुछ कहूं,
    जो शायद तुम सुन्ना चाहती थी,
    जो शायद मैं महीनों से तुम्हे कहना चाहता था,
    जो शायद उसी दिन कह देना था,

  • kaustav_singh 182w

    Insaan

    खुद राह चलते ठोकर लगी है,
    गलती हमारी है,ध्यान कहीं और था,
    किस्से हमारी मोहब्बत के फैले पूरे शहर में,
    मैं जानता था, पर अंजान कोई और था,
    वो जिन्होंने आज बोला भूल जाओ हमें,जाएंगे हम तुम्हे,
    यह ज़ुबान किसी और की थी, वो इंसान कोई और था,
    मोहब्बत करने के बाद यूँ सीरत बदली है हमारी,
    झूठा हँसते है, वो किरदार कोई और था,
    आज जो भूलने की नाकाम कोशिशें करते है हम,
    उसकी सच्ची मोहब्बत थी, वो दिलदार कोई और था,
    यूँ चोट लगने पे हँसते हुए हाल पूछा है जिन्होंने,
    वो बेगुनाह थे, उनके हाथ में हथियार कोई और था।
    ईमान से.....
    - कौस्तव सिंह
    ©KAashi_writes

  • kaustav_singh 183w

    June-january

    एक ठंडी आह भर के ,तेरा नाम क्या लिया,
    फिर जून - जनवरी में ,कोई फ़र्क न रहा !
    ©kaashi_writes

  • kaustav_singh 183w

    Broken heart

    "You can't broke a broken heart"
    ©KAashi_writes

  • kaustav_singh 183w

    Khwab me aayi

    मुद्दत के बाद ख़्वाब में आई थी वो मगर
    उससे लिपट के रोता रहा बात कुछ न की
    ©kaashi_writes

  • kaustav_singh 183w

    Ek kadam

    नशीली आखें बिखरे बाल स्वछन्द विचार हाँ यही था परिचय तुम्हारा।
    हमें बुनना प्यार का ताना बाना ही तो था।

    इक अजब सी कशिश है तुम्हारी रेशमी बालों में,
    ना चाहते हुए भी मुझे उनमे रास्ता भूल जाना ही तो था।

    देखना चाहना माँगना रूठना या खो देना हिस्सा है प्रेम का,
    लेकिन तुम्हे तो बस बेवफा कहलाना ही तो था।

    इतना तनहा कर दिया कि खुद से ही नफरत करने लगा हूँ मैं,
    इक कदम मुझे इक कदम तुम्हे बढ़ाना ही तो था।
    ©kaashi_writes

  • kaustav_singh 183w

    ऐ ज़िन्दगी

    ऐ ज़िन्दगी तू यह बता,
    क्यों खफा तू मुझसे है,
    हुई क्या है वजह ,
    क्यों रास्ते अब अलग से है।

    मिल गया वो खाक में,
    जिस शख्स को तूने थामा था,
    जल गया उस आग में,
    जिसमे वो खुद से भागा था,
    अब आईना है सामने,
    अब सामने हर चीज़ है,
    हर चीज़ अब समझली है
    ऐ ज़िन्दगी तू यह बता,
    क्यों खफा तू मुझसे है।

    मेरा अतीत है चीखता,
    पास आजा मेरे दौड़के,
    पर वादा ना है तोड़ना,
    ना देखना है पीछे मुड़के,

    कुछ खो दिया है ऐसा जो पाना है मुश्किल अब हमें,
    पर कोशिशें ना छोड़ेंगे,
    जान, आजाये गलतियां भूल के,

    तू साथ मेरे अब तो चल,
    राब्ता अब सिर्फ तुझसे है,
    ऐ ज़िन्दगी तू यह बता,
    हुई खता क्या मुझसे है।
    - कौस्तव सिंह
    ©kaashi_writes

  • kaustav_singh 184w

    कोई खास नही

    कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,
    तुम कह देना कोई खास नही,

    एक दोस्त है कच्चा पक्का सा,
    एक झूठ है आधा सच्चा सा,
    जज़्बात को ढके एक पर्दा बस,
    एक बहाना है अच्छा सा,

    जीवन का ऐसा एक साथी है,
    जो दूर होके पास नही,
    कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,
    तुम कह देना कोई खास नही,

    हवा का एक सुहाना झोंका है,
    कभी नाजुक तो कभी तूफानो सा,
    शक्ल देख कर जो नज़रे झुकाले,
    कभी अपना तो कभी बेगानो सा,

    ज़िन्दगी का एक ऐसा हमसफ़र ,
    जो समंदर है,पर दिल को प्यास नही,
    कोई तुमसे पूछें कौन हूँ मैं,
    तुम कह देना कोई खास नही,

    एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है,
    यादों में जिसके एक धुन्दला चेहरा रह जाता है,
    यूँ तो उसके ना होने से कुछ गम नही,
    पर कभी कभी आँखों से आँसू बनके बह जाता है,

    यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है,
    पर आंखों को उसकी तलाश नही,
    कोई तुमसे पूछे कौन हूं मैं,
    कह देना कोई खास नही...कोई खास नही।
    - कौस्तव सिंह
    ©kaashi_writes

  • kaustav_singh 184w

    Tu hi Mohabbat

    देख देख तेरा इंतज़ार यूँ,
    हो रहा मैं खुद से दूर क्यों,
    तू ही बतादे मुझको आके यहाँ,
    तू क्या था मेरा, अब क्या रहा,
    मुझसे मिलने में है क्या मज़बूरी,
    तू ही मोहब्बत , तू ही ज़रूरी,


    इंतज़ार सदियों से मैं कर रहा,
    मैं ही अकेला बरसों से चल रहा,
    तेरे लिए की दुआ , इबादत पूरी,
    तू ही मोहब्बत , तू ही ज़रूरी,


    यूँ कभी-कभी मैं खुद से कह रहा,
    तेरा-मेरा कुछ नही, पर है रहा,
    मेरी ख़ूबी तू, तू ही मज़बूरी,
    तू ही मोहब्बत , तू ही ज़रूरी।
    -कौस्तव सिंह
    ©kaashi_writes

  • kaustav_singh 184w

    वो मोहब्बत थी

    बनूंगा किसी के काबिल
    यह उम्मीद मुझको भी है,
    वो मोहब्बत थी मेरी
    यह खबर उसको भी है।

    क्या दर्द था मेरे दिल में,
    कुछ पता तुझको भी है,
    वो मोहब्बत थी मेरी
    यह खबर उसको भी है।

    एक-एक पल काटना है मुश्किल उसके सिवा,
    मेरे खुशियों पे क्या,दर्दो पे नज़र सिर्फ तुझको ही है,
    वो मोहब्बत थी मेरी
    यह खबर उसको भी है।
    -कौस्तव सिंह
    ©kaashi_writes

  • kaustav_singh 184w

    फिर यह यह दीवाना अकेला है। #love #onesidedlove #heartpoem #Heartbroken #Live #life #peace #blessed #KAashi #KaustavOnMirakee

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    दीवाना।

    यह राग फिर से छेड़ा है,
    यह दांव फिर से खेला है,
    फिर मोहब्बत हो गयी है उनसे,
    फिर से ये दीवाना अकेला है।

    है एक तरफा ये प्यार मेरा,
    वर्षों से पड़ा झमेला है,
    एक बार तो नज़र इधर करदे,
    आशिक़ यह बड़ा अलबेला है।
    फिर मोहब्बत हो गयी है उनसे,
    फिर से ये दीवाना अकेला है।

    अब काश के वो समझे मुझको,
    कि वो ही हमसफर अकेला है,
    फिर मोहब्बत हो गयी है उनसे,
    फिर से यह दीवाना अकेला है।
    - कौस्तव सिंह
    ©kaashi_writes