#jyotiparmale

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  • jyotiparmale 3d

    अनजान रास्ते

    मैं क्यों अनजाने राह पर चल रही हूं
    कदम कदम पर धोखे खाए

    अंगारों सा दहक रही हूं
    कभी निहारु प्रकृति की ओर

    कभी निहारु आकाश की ओर
    शांति की खोज में भटक रही हूं

    अनजानो की बातों से बहुत रही हूं
    अपने मार्ग से भटक रही हूं

    अनजान रास्तों पर चल रही हूं
    पता नहीं कौन अपना कौन पराया

    सबको अपना कर चल रही हूं
    वह कौन सी आज लिए आगे बढ़ रही हूं

    शांति की तलाश लिए दर-दर भटक रही हूं
    शांति मिले या ना मिले ठोकरे खा रही हूं

    जीवन की धूप छांव सब सो रही हूं
    क्यों अंधेरी गलियों में भटक रही हूं. ।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ़

    ©jyotiparmale

  • jyotiparmale 3d

    पृथ्वी

    पृथ्वी है जीवनदायिनी
    अग्नि, जल, अन्न , वायु धन प्रदायिनी ,

    पृथ्वी ने सभी खुशियां दी
    बदले में उसने कुछ भी ना लिया ,

    हम मानव ही नित्य कर रहे विनाश उसका
    हरी भरी धरती सुख रही है आज,

    तालाब नदी नाले सब सुख रहे आज
    जीव जंतु क्या पशु-पक्षी भी व्याकुल,

    पर्वत पहाड़ घटिया हो रही है विघटित
    प्रकृति का विनाश हो रहा है आज,

    पृथ्वी का हाल बेहाल हो रहा है आज
    पृथ्वी मां है उसे संभालो व उसे सुरक्षित रखो,

    कौन हमें इतना प्यार वह खुशियां देगा
    पृथ्वी जगत है यह नहीं तो कुछ नहीं।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ़

    ©jyotiparmale

  • jyotiparmale 3d

    ख्वाइश

    पापा मेरी एक है रव्याईश
    एक गुडिया ला देना,

    नाम उसका मै रानी रखूंगी
    उसके साथ दिनभर रहूंगी,

    बाहार ना निकलूगी
    घर पर ही मैं रहूँगी ,

    पर एक गुड़िया ला देना
    उसके संग मै खेलूंगी,

    जब आप और माँ काम पर जाते हो
    मै दिन भर उदास रहती हूँ ,

    बर्तन, खाना, झाडू सब करके
    फिर भी उदास मैं रहती हूँ,

    किससे बोलू किससे खेलू
    कोई नहीं घर पर मेरे शिवाय।


    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ़


    ©jyotiparmale

  • jyotiparmale 3d

    " पिता महान "

    पिता ज़मीर है पिता जागीर है ,
    पिता एक उम्मीद है एक आस है ,

    परिवार की हिम्मत और विश्वास है,
    बाहर से सक्त अंदर से नर्म है,

    उनके दिल में दफन कई मर्म है ,
    हर दर्द की दवा है पिता,

    जीवन मे पिता सबसे खास होते हैं
    इस लिए वो दिल के पास होते हैं

    पिता के सिर पर कई जिम्मेदारी - लदी हैं
    पिता परिवार के नीवं होते है

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ़


    ©jyotiparmale

  • jyotiparmale 3d

    पिता

    पिता श्री आप, महान
    छायादार वट वृक्ष समान
    शीत धप से बचाकर
    हमको दिया जीवनदान

    कष्टों को सह सह कर
    खुद सम्हले हमे सम्हाला
    पिता श्री आप महान
    वटवृक्ष छायादार समान

    पैदा होने से लेकर
    बालन होने तक
    बचपन से जवानी तक
    हमेशा पाया खुशियाँ
    आपके आगोश में

    आशीषों से भरा आपका साथ
    पिता श्री आप महान
    वटवृक्षा छायादार समान
    जीवन की कठिन परिस्थियों में

    भर दिया भर दिया आपका साथ खुशियों से
    पहचान हुआ आज जग मे मेरा
    आपकी बदौलत नाम हुआ मेरा
    आप मेरे गुरु हो भगवान हो
    जीवन को सम्हाला, संजोया, सुसंस्कृत

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ़

    ©jyotiparmale

  • jyotiparmale 3d

    लाली

    लाली हूं मैं लाली हूं
    सब को भाने वाली हूं

    हर मुश्किल आसान कर दो
    पल में यह फैसला कर दो

    देखकर खुशियां गम ले लूं
    बनके बादल बरखा दे दूं

    देख कर सब को फूल मैंने
    कांटे ही बटोरे हैं मैंने

    लोगों को खुशियां बांटते
    बनकर आंखों की ज्योति।
    ©jyotiparmale

  • jyotiparmale 1w

    देश प्रेम

    ये देश हमारा है, जो जान से प्यारा है,
    जिस भारत में हम रहते, वह स्वर्ग हमारा है,

    वो सपनो से प्यारा, भारत देश हमारा,
    ये जग से न्यारा, प्यारा देश हमारा,

    वीर शहीदों से भरा, ये देश हमारा,
    एैसा सुन्दर और सपनों से प्यारा

    संत, साधुओं का लगे कुम्भ का मेला,
    सबसे अच्छा और प्यारा लगे ये बेला

    ये भारत देश है सबसे न्यारा हमारा
    गगन चूमती है इनकी विचारधारा न्यारा

    अनेकता में एकता ये दशे हमारा
    करे शत्रुओं का नाश ये फर्ज हो हमारा

    देश की सुरक्षा, ये प्रथम कर्तव्य हो हमारा
    देश के खातिर मिटजाये, ये सोच हो हमारी

    देश के लिये रक्त का कण -कण देना चाहते है
    पवित्र भूमि तुझे हमेशा खुश देखना चाहते है

    तेरे सम्मान के लिये खुद मिट जायेंगे,
    पर तुझ पर आॉच ना आने देगे हम

    ये प्रतिज्ञा सदैव हम करते हैं देश के लिए
    दीप प्रज्वलित कर अंतिम सासों तक लड़ेगे

    बुझे ना दीप अमन का सदैव पहेरा देगें हम
    देश प्रेम की खातिर सब समर्पित करना चाहते हैं

    सभी से भाई चारे का संबंध रखते है हम
    तन, मन, धन, देश को अर्पित करना चाहते हैं

    हमें गर्व है अपनी देश ,अपनी धरती पर सदैव।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ़

    ©jyotiparmale

  • jyotiparmale 1w

    दोस्ती

    जिन्दगी विराम सी हो गई
    जब छुटा साथ आपका

    क्या कहे हालात कैसी हो गई
    जीते जी हमारी मौत हो गई

    जमाने को क्या दोष दे
    किस्मत ही ऐसी थी।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ़

    ©jyotiparmale

  • jyotiparmale 2w

    2021 की बिदाई

    वर्ष 2021 की अंतिम बेला है
    हम सब नव वर्ष के आने के इंतजार मे थे
    वर्ष 2021 तु हँसते मुस्कुराते चली जा

    अब हम तुझे करने लगे अलविदा
    बहुत जख्म दिये है तुने इस वर्ष
    इतिहास ही गढ़ दिया तुने महामारी का
    बहुत कुछ बदला क्या प्रकृति क्या रिश्ते

    मानव मानव से ही डरने लगा
    ना मिला किसी से गले दूर रहने लगा
    करोना महामारी हमारे परिवार को ही नही करोड़ो परिवार को ग्रसित किया
    बहुतो को अपनो से बिछुड़ाया और साथ छुड़ाया

    इस पीढ़ी से उस पीढ़ी ने भी कभी ऐसा
    महामारी का मंजर नही देखा था
    करोना ने मौतो का इतिहास गढ़ दिया
    2021 मे सब भयभीत होकर अपना दिन गुजारते रहे

    फिर भी करोना से पीड़ित हुए
    कुछ खो गये कुछ बच गए
    इतना भयानक ये 2021 वर्ष रहा
    बहुत कुछ सिखाया व समझाया
    करोना ने जिन्दगी को बदल दिया

    नये सिरे से जीना सीखा दिया
    हर व्यक्ति डरा - डरा सा रहने लगा
    खुद को हर तरह से बचाता रहा
    खुशियाँ कम, गम ही गम रहा 2021 वर्ष

    कभी ना आना ऐसा वर्ष दुखों भरा
    जा चले जा खुशी खुशी
    नये वर्ष की शुभ बेला लेकर आ
    खुशियो का पैगाम लेकर आ ।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ
    ©jyotiparmale

  • jyotiparmale30 3w

    _ चलो कही चले_

    देखा था मैंने एक सपना,
    होगा भारत से अपना,
    सुबह हुई नींद खुली,
    आसमान में सूरज निकला,
    पक्षियों ने ली अंगडाई,
    मुर्गों ने बाग लगाई,
    चारों ओर यही हनचल,
    चलों और कहीं चले,
    नही चाहिये मार काट,
    ये आंतक ये भष्टाचार,
    ये खून खराबा,
    ये आपस में लड़ाती ,
    जाति भेद पर मरते कटते,
    ये आंतकी के लोग,
    नही चाहिये ऐसा साथ,
    चलो और कहीं चले |

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 3w

    बदलता समय

    हर दिन एक जैसा नहीं होता यहाँ
    हर रात सुहानी नहीं होती यहाँ
    कभी हंसी मिलती है
    तो कभी गम यहाँ

    कभी रोशनी मिलती है
    तो कभी अंधेरा यहाँ
    कभी फूल मिलते है
    तो कभी कोटे यहाँ

    कभी दोस्त की वफाई
    तो कभी बेवफाई मिलती है यहाँ
    हर दिन एक सा नहीं होता है
    मेरे दोस्तों यहाँ ।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 3w

    " कैसा साथ "

    जिन्दगी चली जायेगी यू ही
    न कोई आयेगा आपके पास,

    वक्त गुजर जायेगा यूँ ही
    न देगा कोई आपका साथ,

    वक्त न ठैहरा है न ठैहरेगा
    ये भी साथ छोड़ चला जायेगा,

    विश्वास है अपनी परहाई पर
    किंतु वो भी चली जायेगी कही पर,

    किस चीज पर विश्वास करते हो इस जहाँ में
    हर चीज है नाशवान इस जहाँ में।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ


    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 3w

    कविता मेरी पहचान

    मैं और मेरी कविता
    सदैव साथ होते हैं

    चाहे सुख हो या दुख हो
    चोली दामन का साथ,

    हमेशा होता है,
    कविता मेरे जीवन की ज्योति

    तो मेरी सपनों की रानी
    वो मेरी दिल की मोती

    वो मेरी सुबह की हरियाली
    वो मेरी शाम की रोशनी

    वो मेरी आँखो की ज्योति
    वो मेरी खुशियो की बाहार

    वो मेरी अजीज सहेली
    मै और मेरी कविता ही सिर्फ
    मेरी पहचान हैं ।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 3w

    बेनाम

    दर्द, ही आराम है मेरा

    गमों, से राहत है मुझे

    वरना, जिन्दगी आग सी है

    दर्द ही, साहारा जिन्दगी का

    गमों का हमेशा साथ है

    क्यों हैं इनसे प्यार मुझे

    कांटों से है प्यार मुझे

    धुप से है राहत मुझे

    'सपनों से लगाव है मुझे

    'अधियारों से प्यार है मुझे

    दुश्मनों से प्यार है मुझे

    "अपनों से ना एतबार है मुझे

    बेवफाई का साथ है मुझे

    यही सच्चे दोस्त है मेरे

    हमेशा रहते पास मेरे

    क्यों है इनसे प्यार मुझे ।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 4w

    बेटी होने की सजा

    लड़की होने की सजा पा रही हूँ मैं,
    जो गुनाह किया ही नही, उसकी सजा पा रही हु मै ,

    माँ की कोख से ही, पहली सजा पा रही हु मै,
    बाहर आते ही सजा की, गुनेहगार हो गई हूँ मैं ,

    अपनों से प्यार पाने की , मोहताज हो गई हूँ मैं ,
    लड़की होने की सजा पा रही हूँ मैं,

    ये ना कर- वो ना कर क्योकि 'मै लड़की हूँ,'
    तुझे हद में रहना है, हर समस्या से जुझना है,

    क्योंकि मै लड़की हू, लड़की होने की सजा पा रही हूँ मै ,
    क्या बेटी होना गुनाह है, इस समाज में,

    अगर बेटी ना होगी तो, काहाँ से लाओगे बहन और बहु,
    ये ही बेटी आगे बढ़ कर बहन, बहु और माँ बनेगी।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ



    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 17w

    " करोना वक्त "

    ये कैसा बचपन है मेरा
    स्कूल है ना ट्यूशन है मेरा
    बस घर पर ही कैद रहना है
    न ही दूसरो के साथ खेलना है

    दूरी बनाकर व मास्क लगाकर रहना है
    ऑनलाइन पढ़ाई से बोर हो गए है
    स्कूल ड्रेस पहना है स्कूल जाना है
    ये कैसा बचपन है मेरा

    कही नही जाना कुछ नही करना
    बस घर पर ही रह कर डाट खाना है
    ये कैसी बिमारी आई है,जो हमे रुलाई है अपनो से दूर रहना व कुछ न कहना

    टी.वी और मोबाइल भी बोर लगता है
    बस अब दोस्तो से मिलना है
    स्कूल हमे जाना है घर से बाहर जाना है
    पहले छुट्टी अच्छी लगती थी

    अब हर दिन स्कूल खुले ऐसा लगता है
    ये कैसा बचपन है
    उदास हर बच्चे का मन है
    न कोई खुशी न कोई खेल है

    बस शांत वातावरण है
    कब होंगे आजाद हम
    कब लौटेगी स्कूल की खुशिया
    न फोन चाहिए, न टी.वी चाहिए
    हमे बस स्कूल जाने की इजाजत चाहिए।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ
    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 17w

    अमृत धारा

    जीवन का अस्तित्व पानी है
    बहता पानी अमृत धारा सा,

    जल ही जीवन है,
    जल है तो कल है,

    जल ही जीवन अमृत धारा
    जल ही कल है जल बिना कल नही

    जल जग कि जरूरत है
    जल बिना जीवन नही है

    जल धरती कि ही नही आकाश की भी जरूरत है,
    जल बिना कुछ नही और जीवन,

    जल नही तो मानो पशु पक्षी नही,
    सम्पूर्ण जगत जल बिना शुन्य है

    जल ही जगत का श्रोत है
    जल ही जीवन अमृत धारा ।


    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ
    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 20w

    " नव वर्ष "

    नव वर्ष की हर्ष बेला है आई
    जन जन मे नव चेतना है जगाई ।

    जिन्दगी हर्ष व उल्लास से भर लाई
    नव वर्ष चारो तरफ खुशिया छाई ।

    दिलो मे राग , रंग, उमंग है छाई
    देखो खुशि का पैगाम है लाई ।

    बिछड़े दिलो मे स्नेह व प्रेम है जगाई
    नई सुबह नई उमंग नई है ऊर्जा लाई ।

    मिल कर रहो अब न कोई है, तन्हाई
    करो स्वागत नव वर्ष नवंरग है लाई ।

    2021 वर्ष अपना रंग दिखाया गम्भीर घाव लगाई लगाई
    दे दो 2021 को अब बिदाई ।

    देखो देखो नव वर्ष नूतन हर्ष लेकर आई
    करो सब स्वागत देश के बहन और भाई।


    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 38w

    कान्हा

    कान्हा कन्हैया तेरी याद सताये
    रह रह आखिया नीर बहाये

    दरस के लिए व्याकुल है सखियाँ
    जहाँ जहाँ पे पड़े थे कदम तुम्हारे

    वहाँ -वहाँ पे आखियाँ ढ़ूढ़े रे कान्हा
    गोपिया व्याकुल हो रही है रे कान्हा

    अब तो दरस दिखाओ कान्हा
    अब और ना सताओ कान्हा

    तुम बिन ना सुहाये कोई काज
    तुम बिन सब लागे सूना सूना

    तुम बिन पूरा ब्रज है सूना
    तुम बिन कोई और ना दूजा

    छोड़ गये जब तुम हम सबको
    स्तम्भ कर गये तुम हम सबको

    नर नारी क्या पशु पक्षी हो गये मूक
    दिन रात बहाये चूप चूप नीर रे कान्हा

    कान्हा तेरी याद सताये आ भी जाओ,
    कान्हा तेरी याद सताये आ भी जाओ ।

    ©jyotiparmale30

  • jyotiparmale30 59w

    बेवफाईया

    खुद को मिटाया
    तुझ को बनाया

    देकर खुशिया
    गम ले लिया

    तुमको बनाया फूल
    खुद को बनाया धुल

    क्या हुई मुझसे भूल
    अब जाओ मुझको भूल ।

    स्वरचित
    ज्योति परमाले
    रायपुर छत्तीसगढ

    ©jyotiparmale30