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498 posts
  • bhaijaan_goldenwriteszakir 19h

    #रमजान #ramjan #jp

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    रमजान मुबारक

    नेकी के सागर में गुनाह सब डूब रहे हैं
    आया रेहमतों का महीना "सब इबादत कर रहे हैं ...

    हर घर में रौनक हर घर में क़ुरान पाक की इबादत
    वो घर जमीं पर चाँद सूरज की तरहा चमक रहे हैं .....

    हाथो में तस्वीह सर पे टोपी -- शुक्र खुदा का कर रहे हैं
    मिलजाए जीतेजी हाथो में नेक अमाल के पर्चे वो राह ढूंढ रहे हैं.

    करके हर इक गुनाह से तौबा - खुदा को सज़दे कर रहे हैं
    लाए जिस पर ईमान वो इल्म की तिलावत कर रहे हैं
    आया है माहें रमजान रोजे रख कर हर इक बुराई से दूर हो रहे हैं
    गुनाह सब हो जाए माफ़ -- वो अच्छाई के रास्तो पर चल रहे हैं
    नेकी के सागर में सब गुनाह डूब रहे हैं
    आया है रेहमतों का महीना "सब इबादत कर रहे हैं.......
    ©bhaijaan_goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1d

    तन्हाई की हर इक गली में
    तेरी तस्वीर सज़ा आए

    मोहब्बत मिली जितनी तुमसे
    उसे ज़िन्दगी समझ हम जी आए
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 3d

    फ़क़त -----> सिर्फ
    उल्फत ----> मोहब्बत

    #jp

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    बकमाल मुझमे फ़क़त तेरी उल्फत ही रही
    नज़र से पिलाई जो मोहब्बत,
    वो तीर ए खंजर जुदाई से - रिस रिस कर अधूरी ही रही..
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 4d

    सफऱ ✍️

    सफऱ मुलाक़ात का अब आता नही
    हर तरफ तन्हाई - लबों पर मुस्कुराहट आती नही...

    ख्यालों की दुनियां में बिखरते ख़्वाब
    चले गए दूर इतने की अब ख़्वाब में भी वो आती नही...

    क्या सच दिल का रूबरू करूँ
    कलम कागज़ पर लाचार वो दिल के एहसास में वो आती नही..

    ❤❤❤❤✍️✍️✍️✍️❤❤❤❤✍️✍️✍️✍️❤❤❤❤
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 4d

    फिर कहर कोरोना का या फिर खेल ये राजनीति का,
    क्या सच क्या झूठ -- जनता मजबूर
    ये खेल बस इक मधारी का....
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 4d

    आँखों में रौशनी नही...... दिल ये कहता है
    दिखता सब कुछ पर वो किसी काम नही...
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 5d

    तुम याद आय - आँखों में आँसू आय
    छूकर तुम्हारी वफ़ा -- फिर गीत मोहब्बत के गुन गुनाय..

    तेरी बातों का अंदाज़ - तेरी सरारत
    सब दिल के आईने में मंद - मंद मुस्कुराय .....

    भीगती पलकें लबों पर दुआ - सीने से लगी तेरी तस्वीर
    कलम कागज़ पर यूँ लहराई - जैसे फिर मिलने तू सच में आय...
    ❤❤❤❤❤❤❤✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️❤❤❤❤❤❤❤
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 5d

    छुपाकर आँखों में आंसू कुछ इस तरहा रखे
    भीगती रही कलम कागज़ पर "वो ख़ामोशी दिल की हरपल दर्ज़ होती रही..
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 5d

    भुलाकर मोहब्बत "वो प्यार
    करने फिर चला
    ज़िन्दगी खिलौना "वो फिर
    इक जान से खेलने चला
    मधारी बड़ा ही वो होसियार -- पल पल गली मौहल्ले वो बदलता चला

    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    इश्क़ ✍️

    मोहब्बत का सौदा वो तन्हाई से कर गए
    रूह को करके क़ैद इश्क़ के पिंजरे में
    वो आज़ाद परिंदे से उड़ गए...!
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    पहाड़ो पर अब वो ख़ूबसूरती नही रही
    ज़ब उजड़ गए जंगल तब से हरयाली ना रही...
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    देकर तोफे में "तन्हाई" वो आख़री मुलाक़ात बहुत रुलाती है
    हुए नही फिर हम किसी के -- तन्हाई के साय में तेरी यादों के साथ मुस्कुराते बहुत हैं...!
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    ज़ख्म नही फूल है

    दिल के ज़ख्म को ✍️ कलम से फूलों में बदलता चला गया
    यादों की साखो से अंधेरों में ---- उजाला तराशा किया
    कब सुबह से शाम दिन से रात हफ्ते से महीने फिर साल दर साल गुजरते चले गए
    दिल के ज़ख्म नासूर होते चले गए
    मिला नही सुकून दर्द में --- तब कागज़ पर शब्दो से मोहब्बत की तस्वीर बनाई
    लिखा ख़त मिली राहत रूह - ए - आफताब को
    फिर दोस्ती दिल ने कागज़ कलम से बखूबी खूब निभाई .....✍️✍️✍️✍️
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    गुनाह ✍️

    पुछा जो सवाल उनसे गुनाह हो गया
    मिला नही जवाब वो दुरी में और इजाफा हो गया,

    फर्क अब नही उन्हें ☔️ मैं पास रहु या दूर
    वो एहसास अब नही उनके दिल में ❤
    मैं इकरार करू वो इज़हार करे - वो लम्हें अब नही उनकी ज़िन्दगी में फासले अब मिलो के वो लाते चले गए..
    फूल मोहब्बत के बिखरते चले गए ✍️ कलम राज दिल के अब खोल रही वो ज़ज़्बात कागज़ पर दिख रहे....
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    इंतकाम और वो भी दिल ❤ दिल से '''कभी नही,
    ज़ख्म ही तो है आज नही कल भर जाएगा
    फिर गिला दिल में ❤ दिल के लिए '''हरगिज़ नही..
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    खता दिल की बस इतनी थी
    शिद्दत से की मोहब्बत
    और टूट कर बिखर जाना
    फिर तेरी यादों के साय में फूल बन खिल जाना ....
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    तेरे गांव की सड़के आज भी याद है
    रातो के अंधेरों में मिलते जुगनू
    वो सहर में वापस lot कर जाना
    वो डर कोई देख ना ले मुझे
    तेरे घर से निकलते हुए
    फिर मिलने की आश आज भी है ...

    ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    बिन मांगे मिलजाए -- दुनियां से ''कितना अजीब है,

    खुदा नही यहाँ कोई -- जो सुनले पुकार दिल की

    अब तो आदत होगई हर इक चीज़ की इंतज़ार में....

    फूलों में भी खुसबू चंद पलो की रहती है

    फिर आरजू इक दिल में ता उम्र रहने की - ये बात भी अजीब है..

    ❤❤❤❤❤❤❤✍️✍️✍️✍️✍️✍️❤❤❤❤❤❤❤
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    कब तलक यूँ ही भटकेगी ज़िन्दगी की साँसे,

    कोई रहवर कोई मुनासिब की परछाई ज़िन्दगी के आईने में दे खुदा,

    फूल मोहब्बत का कांटों सा चुभता है - इस ज़ख्म की कोई दवा तो दे खुदा,

    लाज़मी ना हो जाए हर इक इश्क़ की दास्तां - इस बात से पर्दा तो उठा दे मेरे खुदा,

    कोई गिला कोई शिकायत ग़र हुई - माफ़ी देकर माफ कर दे खुदा,

    देकर फिर हाथोए हाथ मेरे यार का - इस ज़िन्दगी पर इक एहसान फिर कर दे मेरे खुदा...

    कब तलक यूँ ही भटकेगी ज़िन्दगी की साँसे अब रहम कर दे मेरे खुदा

    ❤❤❤❤❤❤✍️✍️✍️✍️✍️✍️❤❤❤❤❤❤❤❤
    ©goldenwriteszakir

  • bhaijaan_goldenwriteszakir 1w

    हू ब हू - वो मिलता तुझसे है -----

    ये यक़ीन तुझे दिलाना मुश्किल तो नही पर समझाना अजीब है....

    ख़्वाब - हक़ीक़त - नजारे - तन्हाई - नींदे - सब के सब उसके दामन के मोती

    कब कौन मुझे मिलजाए ये महसूस करना हर रोज लाज़मी है...

    कब तलक यूँ ही ज़िन्दगी की साँसे कम होती जाएंगी ये सवाल का जवाब भी उनकी ख़ामोशी की ik अदा है....

    ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
    ©goldenwriteszakir