#insprition

27 posts
  • untold_words_here 58w

    Inspirational people

    Always remember that ur best motivational quotes is ur words......
    ©pallavi_is_here

  • umesh02 66w

    वक्तव्य

    कल्पनाओं में है सही,
    पर वर्णन करना,
    मेरे वक्तव्य का तुम वर्णन करना,
    में रहूं या ना रहूं जग में,
    मेरे दोस्त मेरे वक्तव्य का ,
    तुम वर्णन करना,
    :- उमेश राठौर
    ©umesh02

  • rikki_902 91w

    Drinking is not
    A problem it's
    Just to kill
    Emotions.......
    ©rikki_902

  • rikki_902 91w

    जो अमृत पिए उसे देव कहते है और
    जो विस पिए उसे महादेव कहते है
    और जो रोज रोज पिये उसे
    पतिदेव कहते है
    ©rikki_902

  • rikki_902 91w

    जैसी करनी वैसी भरनी
    ना माने तो करके देख...
    जानत भी है दोहस्त भी है
    ना माने तो मारके देख...
    ©rikki_902

  • my_pen_ur_feeling 142w

    Love hurt

    Kisi ko tab tak hi cheaho jab tak tum apni izat na gavao ....
    Ek bar izat gava di n tb nah to pyar
    ©my_pen_ur_feeling

  • dharmi09 148w

    फखत जिन्दगी मे अब दुआओं की दरकार है,
    मरहम की अदाकारी मेरे जख्मों पर नही चलती !

    उम्र भर खुश रहना हो तो निभाना वफादारी से,
    फनकारी झूठ और फरेब की रिश्तों पर नही चलती !

    अंधेरे-शाम से ही शब भर डारा सकते है सितारों को,
    खौफ की ये मक्कारी रोशन आफताबों पर नही चलती !

    तालीम सही नही देते जो बचपन से ही बच्चों को ,
    उन बुजुर्गों की बुढापे मे उनके बच्चों पर नही चलती !

    आजकल बन्दगी से ज्यादा वफादारी की दरकार है,
    ये इबादत हो या मोहब्बत कागजी बातों पर नही चलती !

    एक रोज दिल खोल कर रोना होगा तुझे ऐ जिन्दगी,
    बेदर्द वक्त पर तेरी आह भरी सिसकियों की नही चलती !

    माना ये रिश्वत ख़्वाहिशों को पूरा करने का जरिया है ,
    जमीर की अकड़ के आगे इन जरूरतों की नही चलती !

    ये जो बगावत की चिंगारी है गर इसे न तुम थाम सके ,
    तो शहर मे अफवाह होगी तुम्हारी शोलों पर नही चलती !

    गुलों की महक को बिखरने से कैसे रोक दे ये गुलशन,
    माली की हो या गुलशन की इन हवाओं पर नही चलती !
    ©dharmi09

  • dharmi09 149w

    जाने क्यों ख़्याल-ख़्याल से इख्तिलाफ़¹ हुआ जाता है,
    जिसको करीबियत बख़्शी वही खिलाफ़ हुआ जाता है !

    दर-ओ-दीवार पर लगी तस्वीर से आज गर्द हटाई तो,
    ऱफ्ता रफ़्ता ज़हन मे उसका अक़्स साफ़ हुआ जाता है !

    तुने अपनी बेवफाई को हालत-ऐ-मजबुरी का नाम दिया,
    जा तेरा गुनाह तेरी ही दलीलों से मुआ'फ हुआ जाता है !

    इक हम ही नही जो उसके मुहल्ले मे हो आते है बार बार
    चाँद भी उसके घर की खिड़की के तवाफ़² हुआ जाता है !

    1= भिन्नता/भेद 2=परिक्रमा
    ©dharmi09

  • dharmi09 149w

    ख़्वाहिशों ने गुनाह किया और जरूरतों पर इल्ज़ाम आया था,
    ज़रा याद किजिये उस गज़ल के मकते मे मेरा ऩाम आया था !

    मसअला ये नही था कि मेरे इक मतले पर क्यों वाह वाही हुई,
    गज़ल ने तब हंगामा बरपाया जब सियासत का नाम आया था !

    ये अख़बार जो कल तक अपनी सुर्खियों पर इतराता था,
    मेरे बाग़ी होते ही इसके सफ़हे सफ़हे पर मेरा नाम आया था!

    जिस रोज उसके लबों पर मेरा नाम हो उस रोज कयामत हो,
    कयामत के रोज ही सही उसके लबों पर मेरा नाम आया था !
    ©dharmi09

  • dharmi09 149w

    किसी पत्थर को अपने जज़्बात बताना कितना मुश्किल था !
    अपनी ही लाश अपने कन्धे पर उठाना कितना मुश्किल था !

    अखबार मे ये पढ़कर रूह काँप गयी कि फसल जल गई सारी!
    सोचो तैयार फसल के खेत मे आग लगाना कितना मुश्किल था !

    घने कोहरे से सूरज का छन कर आना कितना मुश्किल था,
    पिता के मर जाने के बाद माँ का घर चलाना कितना मुश्किल था!

    आमावस की सूनी रात मे भी मैने वो सूनापन पसरे न देखा !
    माँ की नम-उदास आँखों का वो वीराना कितना मुश्किल था !

    जो भी कमाया दिन भर उससे ज़्यादा की जब बेटा शराब पी गया
    उस वक्त पड़ोस के घर से लिया आटा लौटाना कितना मुश्किल था!

    इलाज की लाचारी से माँ ने जल्द ही फिर बिस्तर पकड़ लिया,
    पैसो की तंगहाली से माँ को दवा दिलाना कितना मुश्किल था!

    अस्पताल मे नही घर की पुरानी चारपाई पे दम तोड़ दिया माँ ने,
    हाय! अब मुर्दा जिस्म को कफन ओढ़ाना कितना मुश्किल था!

    मरकर उसके जिस्म के साथ अब लकडियों का पूरा ढेर जलेगा ,
    जीते जी लकड़ी का टुकडा जलाना उसके लिये कितना मुश्किल था !

    माँ तो मेरा उदास चेहरा देखकर ही समझ लेती थी मेरा हाल ऐ दिल,
    माँ के रूखसती के बाद किसी को अपना दर्द बताना कितना मुश्किल था !

    अन्धेरों के साये मे अपनी परछाई को खोज पाना कितना मुश्किल था,
    अब माँ के कमरे मे जाकर माँ को आवाज लगाना कितना मुश्किल था !
    ©Dharmi09

  • dharmi09 149w

    उसकी चश्म मे वीरानी लगती है !
    वो भी इश्क मे दीवानी लगती है !

    मेरे ज़िस्म पे तुम्हें जख़्म लगता है !
    मुझे ये इश़्क की निश़ानी लगती है !

    आपको ये अधूरी गज़ल लगती है,
    मुझे ये मुक्कमल कहानी लगती है !

    किताबे-इश्क के भी सफहे फाड़ देना
    देखो ये हरकत कोई इसांनी लगती है !

    मुझे देखकर हया से घुंघट कर लेना,
    तरकीब ये कोई बचकानी लगती है !
    ©dharmi09

  • dharmi09 150w

    ऐसा नही कि तुमसे पहले यहाँ कोई राजा नही हुआ
    आप गलत फहमी मे कि कोई आपसा नही हुआ!

    ये लोग जो आज खुलेआम जंग की बात कर रहे है,
    लगता है इनके घरों मे कभी कोई हादसा नही हुआ !!
    ©dharmi09

  • dharmi09 150w

    ये वाकया कल की गुजरी रात का है,
    ये गम उससे बिछड़ते हुऐ साथ का है !

    मेरी हथेली पर चाहे आज भी देख लो,
    निशान उसके मेहंदी लगे हाथ का है !!
    ©dharmi09

  • dharmi09 150w

    हमे यूं ही नही ये मौसम इतने सुहाने लगे
    पूरा इक बरस इनको लौटकर आने मे लगे !

    किसी रोज़ सीने पे हाथ रख के सुनना हमे,
    इक इक गज़ल बनाने मे कई कई जमाने लगे!

    उस वक्त उसके तमाम ख़त जला दूँगा मै,
    उन ख़ूतूत के हर्फों से जब लहू आने लगे !!

    ये रूत बदल रही है तो तुम्हें हैरानगी कैसी ,
    तुम्हारे भेजे हुऐ गुलाब भी तो मुरझाने लगे !!

    लोगों ने आज़माया तो मसला बड़ा नही लगा,
    दर्द-ऐ-सबब, जब मेरे ही मुझे आजमाने लगे !

    वो महफिल मे था तो सबका दिल लगा रहा,
    उसके जाते ही लोग भी उठ़ उठ़कर जाने लगे !
    ©dharmi09

  • dharmi09 150w

    अधुरी न हो अपने इश्क़ की इक मुक्कमल कहानी हो,
    वादा वही करना मुझसे, जिसे निभाने मे आसानी हो !

    चलिये आपका मशविरा मानकर भूल जाये आपको ,
    मगर जिंदगी मे कोई दूसरी वजह तो आपके सानी हो !

    तुमसे दूर जाकर जिन्दगी की हसरत नही कर सकता,
    तुम न हो तो मौत आये साथ हो तो ही ज़िन्दगानी हो !!

    फ़क़त अब रूह से रूह तक का राब्ता रखना हमसे,
    दिलो के दरम्यां हिर्स-ओ-हवस न कोई जिस्मानी हो !!

    ये वस्ल ये जमाल ये नूर मेरे तस्सबुर का इक हिस्सा है,
    मै सुखनवर हूँ शायद मुझे तुझपे कोई गजल बनानी हो !
    ©dharmi09

  • dharmi09 150w

    उसका सरे-आम हमसे यूँ रू-ब-रू होना,
    मानो हवा की गुलों से कोई गुफ़्तगू होना !!

    याद है उसके सिर से ढ़लकता हुआ दुप्पट्टा,
    फिर उसकी जुल्फ़ का बिख़र के खूश्बू होना !

    मेरी पहली और आखिरी ख़्वाहिश भी है वो,
    मुश्किल है उसके मानिंद दूसरी जूस्तजू होना !!

    किसी और चेहरे मे उसका अक्श तलाश लूं,
    मसअला बेहद पेचदा है उसका हू-ब-हू होना !

    जिस्म और जख़्म दोनो मे मौजूदगी है इसकी,
    आसान कहाँ है रगो का बहता हुआ लहू होना ?
    ©dharmi09

  • dharmi09 150w

    ख़्वाहिश की हसरत लिये हिर्स-ओ-हवस मे घिर जाना,
    ऐसा भी क्या जीना कि अपनी ही नजरों मे गिर जाना ?

    उजालों की महफ़िल मे तो बे-ख़बर रहा अंजाम से,
    तिरगी के साये घिर आये तो सोचा अब किधर जाना ?
    ©dharmi09

  • dharmi09 150w

    रफ्ता रफ्ता तुफां भी साहिल होने लगेगा,
    दर्द जब ज़िन्दगी मे शामिल होने लगेगा !

    उसके आने से पहले छोड़ जाऊँ ये शहर,
    वो सामने आयेगा तो मुश्किल होने लगेगा!

    खुद से भी जियादा ऐतबार किया था उसपे
    उम्मीद नही थी कि वो संगदिल होने लगेगा !

    जब गम के बादल घेरगें जहनो दिल उसका,
    वो भी तारों के मानिंद झिलमिल होने लगेगा !

    तू साथ है तो बदल जायेगी सूरत सफर की,
    तन्हाई मे तो ये रास्ता भी बोझिल होने लगेगा !

    उससे मत पुछिये मशविरा किसी मसले का,
    वो कातिल सबकी नजरों मे आदिल होने लगेगा !
    ©dharmi09

  • dharmi09 150w

    ज़रूरी नही कि किश्ती का हर मुसाफिर डूबेगा,
    देखना जो पहले हौसला खो देगा वो पहले डूबेगा !

    ये भी इक मौका है खुद के हौसले आजमाने का,
    सबको ताकीद कर दो, हर कोई खाली हाथ कूदेगा!
    ©dharmi09

  • dharmi09 151w

    वन्दे मातरम!!

    राष्ट्र की माटी से निश्चित ही ये प्रण होगा,
    चढ़ दुश्मन की छ़ाती पर अब रण होगा !
    व्यथित मन की भावनाओं को तब चैन मिले
    रिपु दल के समस्त दुष्टों का जब मरण होगा !!

    हम छदम युद्ध के पक्षधर नही रहे कभी,
    आपको पूर्ववर्ती युद्धों का भी तो स्मरण होगा !!
    अब काश्मीर के दवा स्वप्न देखना बन्द करो,
    अन्यथा कब्जे मे पाकिस्तान का कण कण होगा !!

    पहले के युद्घो मे भी तुमने मुँह की खाई है,
    तुम्हारे इतिहास के पन्नों मे कहीं विवरण होगा !!
    'इन्दिरा' 'शास्त्री' का साहस जरा तुम याद करो,
    पुनः कारगिल की 'अटल' गाथा का अनुक्रमण होगा !!

    "मोदी जी" द्धारा आतंकवाद की होगी छुट्टी,
    तीनो सेनाओं से सीमाओं पर नियत्रंण होगा !
    देखो सैनिको की भुजाओं मे उबल रहा है रक्त
    तिरंगे मे लिपटना हर वीर का अलंकरण होगा !

    राष्ट्र की माटी से निश्चित ही ये प्रण होगा,
    चढ़ दुश्मन की छ़ाती पर अब रण होगा !!
    ©dharmi09