#hindiwriterscommunity

85 posts
  • siddharth1 3d

    ना जाने कैसा खेल है सियासत का
    कि जिंदगी आज फिर दाव पर है
    कोई मोल रहा नहीं अब यह तख़्त-ओ-ताज का
    डूबे यह भी आज लाल रंग में है

    बचालो कि यमराज के द्वार पर खड़ी है
    जिंदगी आखरी पड़ाव पर खड़ी है
    पछताना ना फिर कि कुछ हो ना सका
    यह फिसलती रेत अब भी थोड़ी मुट्ठी में पड़ी है

    ©siddharth1

  • neha_the_writer 1w

    तेरी याद...

    आज फ़िर तेरी याद आयी है
    सालों बाद जब भीड़ में एक
    जानी पहचानी सी दिखी परछाई है
    आज फ़िर तेरी याद आयी है

    जाने किस चीज़ के नशे से हम पे
    ये बेखुदी सी छाई है
    आज फ़िर तेरी याद आयी है

    के तेरा रूठ जाना गलती से भी
    गंवारा नहीं हुआ करता था हमें
    अब तेरी शक्ल को भी ना देखूं कभी
    ऐसी मेरी रुसवाई है
    के आज फ़िर तेरी याद आयी है

    वो दिन याद कर जब तूने बारिशों में, दिल की बातें मुझसे कही थी
    वो मंजर याद कर जब तू मुझसे, लिपटकर उस दिन खूब रोया था
    वो वक़्त याद कर जब मेरे दिन, तुझी से शुरू हुआ करते थे
    वो लड़की याद कर जिसकी कभी, तू ज़िन्दगी हुआ करता था

    तोड़ी हर उम्मीद तूने, और तन्हाई में मैं तड़पी थी
    तुझसे कर लूं जुदाई, इतनी हिम्मत कहां मुझमें थी

    पर अब नहीं रहा वो समा, ना रहा तू पहले जैसा
    एक नई सी हवा चली है, ये नया आरम्भ कैसा

    मेरे जैसी वफ़ा क्या कर पाएगा कोई तुझसे?
    तुझसे बढ़ कर भी कभी, क्या कोई जान पाएगा तुझे?
    तेरी आवाज़ पे ही चल दे जो, ऐसी कोई ला पाएगा?
    जिसका प्यार तू हो, यार तू हो, बोल कहां से लाएगा?

    किससे मिलने के बहाने अब गलियों के चक्कर तू लगाएगा
    के अब तू ढूंढता रह जाएगा, पर मुझे फ़िर ना देख पाएगा

    यूं तो रखा नहीं कुछ भी कहने-सुनने के लिए
    ना ही दिल में तेरे वापस आने की आस मैंने जगाई है
    पर जाने क्यूं हैं ये आंखें मेरी नम
    शायद आज फ़िर तेरी याद आयी है।।
    ©neha_the_writer

  • gooddonewriter 1w

    क्या रहा होगा वो पहला ख्वाब
    जो नन्ही आँखों ने बुना होगा
    सपनों का शहर, खुशियों की लहर
    किलकारी संग मन झूम उठा होगा।।


    ©gooddonewriter

  • meri_kissebaazi 3w

    वो आकर्षक पुरुष

    वो पुरुष बड़े आकर्षक होते हैं जो
    अपने कांधे पर जिम्मेदारियां सजा के चलते हैं...
    .
    मुझे पता है ये मुश्किल होता है,
    बहुत मुश्किल।
    पर फिर भी,
    तुमने अपनी जिम्मेदारियों को लादा नहीं,
    सजाया है अपने कांधे पर...
    .
    जैसे शिव ने चांद को।
    .
    चांद पूर्णिमा भी लाता है और अमावस भी,
    पर चांद सा शीतल कुछ नहीं है इस आसमान में।
    .
    तुम्हारी जिम्मेदारियां दूसरे को बोझ सी लग सकती हैं
    पर तुम्हें पता है कि वो तुम्हारे दिल के करीब हैं...
    .
    लादी गई चीज़ें इंसान को अंदर तक खोखला कर देती हैं,
    और खोखला इंसान किसी को कुछ नहीं दे पाता
    खुद को भी नहीं।
    .
    सुनो,
    तुमने ये जो जिम्मेदारियां अपनी मर्ज़ी से थामी हैं ना !
    उनके पूरा होने की खुशी सबसे ज्यादा तुम्हें होगी।
    .
    बस खुद को पत्थर मत बनने देना,
    अपनी जिम्मेदारियों को दूसरों की नज़रों से मत तौलना।
    .
    दुनिया ने किसी को खुशी नहीं दी है,
    किसी को भी नहीं...
    .
    लोग तुम्हें कितना भी बेचारा दिखाने की कोशिश करें
    तुम बस ये याद रखना कि,
    तुम्हारा होना रिश्तों को बोझ बनने से बचाता है ।
    .
    और हां,
    वो पुरुष बड़े आकर्षक होते हैं
    जो अपने कांधे पर जिम्मेदारियां सजा के चलते हैं...
    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 6w

    तुम्हारा शरमाना

    वो लड़के बड़े प्यारे होते हैं
    जो अपनी तारीफ सुनकर शरमा जाते हैं।
    .
    सुनो,
    इस दुनिया को तुम जैसे लड़कों की बहुत जरूरत है।
    .
    अपनी तारीफ सुन अपने बालों को सवांरते हुए तुम प्यारे लगते हो,
    अपनी दाढ़ी पर हाथ फिरा कर अपना शर्माना छुपाते हुए तुम अच्छे लगते हो,
    अपने हाथों से अपने गालों को रगड़ कर उसकी लाली मिटाते हुए तुम प्यारे लगते हो।
    .
    शब्दों की कमी है मेरे पास...
    कैसे बयां करूं मैं !!!
    तुम्हारी सारी दिल को छू जाने वाली बातें
    जो तुम अक्सर शरमाते हुए करते हो।
    .
    मुझे पता है,
    तुम्हें शरमाने की इजाजत नहीं देता है ये समाज,
    पर फिर भी जब तुम यूं शरमा कर इस समाज को ठेंगा दिखाते हो...
    सच कहूं,
    थोड़ा ज्यादा प्यार आ जाता है तुम पर।
    .
    जब मुझ सी लड़कियां खुल कर तुम्हारी तारीफ करने से हिचकती नहीं,
    और तुम से लड़के अपनी तारीफ सुनकर शरमाने से झिझकते नहीं,
    उस पल में एक रिश्ता बनता है
    जो प्यार, दोस्ती से कहीं ऊपर है...
    .
    वो रिश्ता जो भेदभाव से परे
    इंसानियत का है।
    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 6w

    वूमेंस डे

    .
    आज सुबह जब मां को गले लगा कर
    हैप्पी वूमेंस डे कहा तो,
    मां ने भी उतने ही प्यार से विश कर दिया।
    .
    वूमेंस डे पर सबसे पहले मां, दीदी, मासी, मामी को
    विश करना ज़रूरी लगता है मुझे।
    सबसे छोटी हूं तो मेरी खुद से होड़ लगी रहती है कि कोई
    मुझे पहले विश ना कर दे।
    .
    ऐसा हर ख़ास मौके पर होता है।
    .
    कुछ साल पहले तक मुझे भी वूमेंस डे ख़ास नहीं लगता था,
    इनफैक्ट गुस्सा आता था।
    वूमेंस डे क्यों !
    क्या वूमेंस का सिर्फ एक ही दिन है !
    .
    पर,
    समय के साथ जब मैच्योरिटी अाई है तो
    अब बुरा नहीं लगता।
    .
    जब मुझसे छोटी लड़कियां बड़े ही प्यार से
    मुझे वूमेंस डे विश करती हैं तो,
    खुद-ब-खुद ख़ास एहसास हो जाता है।
    जो शायद मैं कभी बयां नहीं कर सकती।
    .
    मैं चाहती हूं कि आप सारी प्यारी लड़कियां, महिलाएं ये समझें कि चाहे कोई और आपको कैसा भी महसूस करवाए...
    पर,
    आप खुद ये बात हमेशा याद रखना कि,
    आप ख़ास हो और हमेशा रहोगी।
    .
    आपको कोई देवी, त्याग की मूर्ति, सहनशील बोले तो उसको कहना :
    इंसान हूं, इंसान रहने दो।
    .
    तुम पहले ही ना जाने कितनी लड़ाईयां लड़ रही हो।
    आज एक गहरी सांस भरना
    और वादा करना खुद से कि,
    चाहे जो हो जाए....
    तुम,
    जीना नहीं छोड़ोगी।
    जिंदादिली नहीं छोड़ोगी।
    अपने शरीर से प्यार करोगी।
    अपने दोस्तों को किसी और के लिए नहीं छोड़ोगी।
    खुद को अपनी चॉयस के लिए कभी जज नहीं करोगी।
    अपनी गलतियों के लिए खुद को माफ करोगी।
    अपने सपनों को एक नहीं बल्कि कई सारे मौके दोगी।
    .
    ये जीवन मुबारक हो हमें।
    एक दूजे का साथ मुबारक हो हमें।
    इस दुनिया में औरतों का अस्तित्व मुबारक हो हमें।
    हमारा नारीत्व मुबारक हो हमें।
    .
    Happy Women's Day
    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 7w

    दरारें

    - तुम, अब भी उतनी ही खूबसूरत हो।
    - और तुम अब भी उतने ही नासमझ
    .
    - मैं और नासमझ !
    - हां।
    .
    - अलग होने की ज़िद तुम्हारी थी।
    - ज़िद नहीं फैसला।
    .
    - ज़िद भरा फैसला।
    - तुम शायद कभी नहीं समझ पाओगे।
    .
    - तुमने कोशिश भी तो नहीं की ।
    - कोशिश...काश! तुम इस शब्द को समझ पाते।
    .
    - तुम्हें समझना नामुमकिन है मेरे लिए।
    - हां, सच कहा।
    .
    - -
    .
    - क्या हम फिर साथ नहीं हो सकते ?
    - अगर साथ ही आना होता तो अलग क्यों होते हम ?
    .
    - प्यार करता हूं तुमसे यार! काफ़ी नहीं है तुम्हारे लिए ये ?
    - सिर्फ प्यार काफ़ी नहीं होता ना !
    .
    - तुम्हें समझना नामुमकिन है मेरे लिए।
    - एक दूसरे को समझ ना पाना ही हमारे रिश्ते की दरारें हैं।
    .
    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 8w

    चिट्ठियों का पता

    क्या तुम मेरी कभी ना भेजी गई
    चिट्ठियों का पता बनोगे...
    .
    मुझे मालूम है तुम जिसे ढूंढ रहे हो
    वो चिट्ठी मैं नहीं...
    लेकिन जो तुम्हारा हो ही ना
    उसका इंतज़ार क्यों करना !
    .
    मैंने आजतक कोई चिट्ठी नहीं लिखी
    जो लिखीं उनका पता मेरे पास नहीं...
    .
    मैं तुम्हें फॉर ग्रांटेड नहीं लेना चाहती,
    तुम ख़ास हो मेरे लिए।
    .
    अजीब है ना !
    पर यही सच है...
    .
    कभी कभी गलत पते पर भेज दी गई चिट्ठियां भी ख़ास होती हैं।
    क्या तुम वो गलत पता बनोगे !
    .
    क्या तुम मेरी कभी ना भेजी गई
    चिट्ठियों का असल पता बनोगे...
    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 8w

    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 8w

    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 8w

    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 9w

    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 9w

    गलतफहमियां

    जब भी प्लेटफॉर्म पर
    यात्रीगण कृप्या ध्यान दें...
    की अनाउंसमेंट सुनती हूं
    ऐसा लगता है बड़े से माइक पर
    किसी ने तुम्हारा नाम ले लिया हो
    .
    ट्रेन में घुसते ही जब खिड़की के पास की सीट मिलती है
    मुझे तुम याद आ जाते हो
    यूं लगता है तुम मेरे आस पास ही हो
    .
    तुम्हारे होने के एहसास को ना खोने की चाह में
    मैं अक्सर अपनी आंखें बंद कर लेती हूं
    फिर तमाम लोगों से भरी इस ट्रेन में
    बस मैं और तुम रह जाते हैं
    .
    जब ट्रेन की खिड़की से धूप छनकर मेरे हाथों पर गिरती है
    ऐसा लगता है तुमने मुट्ठी भर जुगनू मेरे हाथों पर रख दिए हों
    .
    गुजरती हवा जब सनसना कर मेरे चेहरे को छू जाती है
    यूं लगता है तुमने वो गाना सुना दिया हो
    जिसे सुनते ही मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई थी
    .
    रेल की पटरी की धड़धड़ाती हुई आवाज़
    मेरी नींद को वैसे ही चीरती है
    जैसे कि हमारे साथ ना हो पाने का सच
    मेरे दिल को चीरता है
    .
    हमारे दरमियान मोहब्बत से ज्यादा गलतफहमियां हैं
    दीवार इतनी बड़ी है कि
    हमें एक-दूसरे के आंसू भी नहीं दिखते
    .
    मैं जानती हूं, तुम मेरे हो और हमेशा मेरे ही रहोगे
    तुम जानते हो, मैं तुम्हारी हूं और हमेशा तुम्हारी ही रहूंगी
    .
    पर काश ! हम इक दूजे से ये कह भी पाते
    .
    काश! मैं हमेशा कि तरह इस ट्रेन में बैठे हुए
    जब अपनी बंद आंखें खोलती
    तो तुम ठीक मेरे सामने वाली सीट पर
    मुझे मुस्कुराते हुए बैठे मिलते
    .
    शायद तब,
    मेरा सफर ज़रा सा बेहतर होता
    शायद तब,
    ट्रेन की खिड़की वाली सीट
    मुझे भी उतनी प्यारी होती
    जितनी एक बच्चे को होती है।
    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 10w

    यूं ही शायद

    - तुम कहाँ मिलोगी मुझे !
    - पता नहीं।
    .
    - मोबाइल ऐप के लेफ्ट - राइट स्वाइप में !
    - नहीं।
    .
    - किसी नाईट क्लब में !
    - मैं रात में ज़ल्दी सो जाया करती हूं।
    .
    - किसी की शादी में !
    - उम्म्म।
    .
    - किसी कॉफ़ी हाउस में !
    - शायद।
    .
    - शायद ! अब भी कन्फर्म नहीं हो ?
    - नाह।
    .
    - फिर तुम ख़ुद ही बता दो ।
    बताओ ना कहाँ मिलोगी तुम मुझे ?
    .
    - शायद किसी नुक्कड़ वाली चाय की दुकान पर मिल जाऊं।
    - अच्छा । पक्का !
    .
    - उम्म ! या शायद सड़क किनारे गोलगप्पे खाते हुए।
    - ओह !
    .
    - या फिर शायद बारिश में भुट्टे खरीद कर खाते हुए।
    - फिर तो तुम्हें ढूँढना बड़ा मुश्किल सा है ।
    .
    - तो क्या; नहीं ढूँढोंगे मुझे ?
    - किसी ऐसी ज़गह का पता बता दो जहाँ तुम्हें ढूंढने के बाद जी भर कर देख पाऊँ।
    .
    ऐसी ज़गह जहाँ से जाने की ज़ल्दी तुम्हें ना हो और तुम तक पहुँच पाने के एहसास को मैं पूरी तसल्ली से महसूस कर सकूँ।
    .
    जहाँ तुम मुझे मिलो तो तुम्हारे चहेरे पर खुशी और उस ख़ुशी से मेरी रुह में सुकून हो।
    बताओ कोई ऐसी ज़गह।
    .
    - मेरी बालकनी में।
    रोज़ इसी वक़्त ढलती शाम को रात से मिलते हुए देखती हूँ। तब तक जब तक कि आसमां में चांद ना दिख जाए।
    .
    बस यूँ ही शायद मिल जाऊंगी तुम्हें।
    ढूंढ़ पाओगे ना !
    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 12w

    दुनिया से पहले..

    मुझे जनवरी पसंद है तुम्हें अगस्त
    मुझे कॉफी पसंद है तुम्हें चाय
    मुझे रुकना पसंद है तुम्हें घूमना
    मुझे पहाड़ पसंद है तुम्हें नदियां
    मुझे बिहार पसंद है तुम्हें दुनिया
    .
    इस पसंद नापसंद के चक्कर में हमें दूर होना ज़रूरी है क्या !
    एक शहर रोहतास ढूंढा है जहां पहाड़ भी है और नदियां भी।
    इस शहर में रुकना भी घूमने सा है
    झील किनारे तुम्हारी चाय अगस्त सी खामोशी
    और मेरी कॉफी जनवरी सा सुकून देंगीं।
    .
    दुनिया से पहले अपना राज्य घूमते हैं
    जिला, शहर और अपना गांव घूमते हैं।
    .
    सुबह और शामें एक सी ही हैं
    नदी और झरने एक से ही हैं
    लोग और अपने एक से ही हैं
    साथी और सपने एक से ही हैं
    .
    हम और तुम एक से ही हैं।
    मुझे तुम पसंद हो तुम्हें मैं।
    चलो फिर,
    दुनिया से पहले अपना राज्य घूमते हैं
    जिला, शहर और अपना गांव घूमते हैं।
    जो है जैसा है बस,
    साथ साथ घूमते हैं।
    ©meri_kissebaazi

  • siddharth1 13w

    F.R.I.E.N.D.S

    ना दिखाया करो वह तस्वीरें बार-बार
    "College" के चार यार यादों में भी सताया करते हैं
    बात यह नहीं कि दोस्ती में वह बात रही नहीं
    बात सिर्फ इतनी सी है कि अब उन लम्हों को हम अकेले में बिताया करते हैं

    ©siddharth1

  • siddharth1 16w

    पूछना हो तो...

    पूछना हो तो मुझसे पूछो मेरा हाल
    यूं तो यूं ही अफवाह से घिरा रहता हूँ मैं
    लगता नहीं कि वतन हूँ तुम्हारा
    हर वक्त किसी दहशत में जीता हूं मैं

    सुर्ख़ियों में घसीटा जाता हूं
    रोज अखबार में मुंह छुपाता हूं
    तुम्हारी नादान हरकतों से
    वक्त का ऋणी बनता जा रहा हूँ मैं

    बात यह भी कोई नई नहीं
    तुम्हारे पीढ़ियों के भी कर्ज उतारे हैं
    वक्त की हर दहलीज पर
    ना जाने कितनी बार शस्त्र डाले हैं

    इंतजार करता रहता हूं
    सब वक्त पर छोड़ दिया है मैंने
    थका नहीं हूं फिर भी
    अब वक्त का आसरा लिया है मैंने

    और भी जानना हो अगर मेरा हाल
    तो खुद की खबर ले लेना एक बार
    और फिर भी वक्त ना मिले
    तो सुर्खियों में तो यूं ही मिलता रहूंगा हर बार

    ©siddharth1

  • meri_kissebaazi 18w

    ।।शायद पागलपन।।

    उन दोनों को ही गाने सुनना पसंद है।
    अक्सर रेडियो पर 2ही एफएम चैनल बजाए जाते हैं इस घर में। वजह ये है कि वो दो एफएम हर मूड के गाने बजाते हैं।
    .
    रेडियो में गाना आ रहा है
    - दिल इबादत कर रहा है धड़कनें मेरी सुन, तुझको मैं कर लूं हासिल लगी है यही धुन..
    .
    बोरोप्लस लगाती हुई वो आईने में अपने चेहरे का रूखापन देख रही है, व्हाइट ब्लैक हेड्स भी हो गए हैं। उसे अपने चेहरे की एक्स्ट्रा केयर करनी होगी।
    आईने से पीछे कुर्सी पर बैठी वो बूढ़ी होती औरत दिख रही है ,जो रिश्ते में उसकी मां है।
    चाय पीती हुई मां ब्लोअर में अपने पैर सेंक रही है। आज ठंड थोड़ी ज्यादा है।
    .
    रेडियो पर दूसरा गाना शुरू हो चुका है
    - तुझसे नाराज़ नहीं जिंदगी हैरान हूं मैं, तेरे मासूम सवालों से परेशान हूं मैं..
    .
    ऊब गई है वो अपनी ठहरी हुई ज़िन्दगी से...
    मां परेशान है क्योंकि उनकी ज़िंदगी भी ऊबाऊ है।
    वो चाहती हैं कि बेटी की शादी हो जाए।
    पर बात आगे नहीं बढ़ पा रही।
    2020 का आख़िरी महीना अपनी सोलहवीं तारीख में है।
    2021 के शादी के लग्न अप्रैल से शुरू होंगे।
    मां परेशान हैं,पर कुछ कर नहीं सकतीं।
    .
    रेडियो पर नया गाना बज रहा :
    - ओढ़ के धानी प्रीत की चादर आया तेरे शहर में रांझा तेरा
    दुनिया जमाना झूठा फसाना जीने मारने का वादा सांचा मेरा
    - हो शीशमहल ना मुझको सुहाए तुझ संग सूखी रोटी भाए
    - मन मस्त मगन मन मस्त मगन बस तेरा नाम दुहराए ।
    .
    लंबी सांस भरती हुई वो बैठ कर अख़बार पढ़ने लगी है।
    हैडलाइन है :
    "करोना की वैक्सीन सूबे में मुफ्त लगाई जाएगी "
    उसने अखबार किनारे रख दिया।
    उसे बीती रात का सपना याद आ रहा है
    जिसमें उसने उस भूरे बालों वाले लड़के का हाथ पकड़ा हुआ था। वही लड़का जिससे उसे प्यार था, पर वो उसे छोड़ आयी थी 14साल पहले।
    पर उसकी यादें अब भी जेहन में ताज़ा हैं।
    वो अक्सर उस से अकेले में बातें किया करती रहती है।
    ।। ख्यालों में किसी से बातें करना शायद पागलपन ही है।।
    .
    रेडियो पर गाना आ रहा है
    - पहला नशा पहला खुमार
    नया प्यार है नया इंतज़ार
    कर लूं मैं क्या अपना हाल
    ए दिले बेकरार, मेरे दिले बेकरार तू ही बता.
    ©meri_kissebaazi

  • siddharth1 23w

    ...

    ताउम्र यूं ही नहीं इंतजार कर लिया
    कोई तो वजह रही होगी हां के बावजूद मुकम्मल ना हो पाने की

    ©siddharth1

  • siddharth1 29w

    मुलाकात...

    इत्तेफाकन मुलाकात मुनासिब है
    पर हकीकत तो यह कि तुमसे मिलने का बहाना ढूंढ लेता हूं मैं

    ©siddharth1