#hindiweiters

30 posts
  • 7saptarangi_lekhan 17w

    चलो अच्छा है हम यहाँ दूसरे शहर में चले आएं हैं
    चलो अच्छा है मेहरबां ने हमें किसी लायक तो समझा

    ©7saptarangi_lekhan

  • ravi_shukla1 41w

    ज़िंदगी छोटी हो, बेहतर है...
    बस अकेली न हो..

    खाने लगा है अकेलापन अब हमें भी..
    शायद वक्त अभी भूखा है...।
    ©ravi_shukla1

  • deepakgill 45w

    ❤️

    तेरी यादों के शोरगुल में, खामोशियों से बात हो रही है,
    क्या बताऊं यार, शाम ढलते ही आज फिर गमों की बरसात हो रही है ।
    ©deepakgill

  • rbwrites47 94w

    जो बातो के काबिल नही था ,
    उसे अपने जज़्बात मैं जगह दे दिया,
    लाख समझाया था इस दिल को ,
    फिर भी उसने खता कर दिया ।
    ©rbwrites47

  • rbwrites47 94w

    जो बातो के काबिल नही था ,
    उसे अपने जज़्बात मैं जगह दे दिया,
    लाख समझाया था इस दिल को ,
    फिर भी उसने खता कर दिया ।
    ©rbwrites47

  • meghnaad 138w

    अब तो बस मैंने सोचाही है
    किया कुछ नही ,हुआ कुछ नही
    सोचने की इस हदको पाने के लिए
    न् जाने कितना सोचा है।

    ये जो उभरकर आया हूँ मैं
    बस एक पानी का बुलबुला ना हो
    रेत पर लिखी खाली रेखा न हो
    ये जो उगम है वो दूर तक फैले ऐसा समंदर हो।

    बीज तो निद्रिस्त ही होता है
    सारी संभावनायें लिए शांत रहता है
    भोर होने को है ,नींद खुलने को है
    युही नही मेरा चित्त अस्थिर रहता है।

    ©meghnaad Harish Amrale

  • lovefeeling15 147w

    उसके क़दमों के निशान....

    वो दिन मुझे आज भी याद है जब वो मेरी ज़िंदगी में आयी थी,
    मेरे दिल में वो कुछ इस क़दर समायी थी,
    मैंने अपने वजूद को उसके लिए क़ुर्बान किया था,
    दुनिया से दूर उसके लिए हुआ था,
    उसकी ख़ुशियाँ ही मेरी मंज़िल थी,
    मेरे सपनो में बस वही आती थी,
    मेरे ख़यालों में भी बस वही रहती थी,
    उसी पर ही रहती थी मेरी निगाह,
    अब यादों के इन पन्नो पर रह गए हैं उसके क़दमों के निशान......

    ©lovefeeling15

  • _aahana_ 152w

    मुक्तक के format मे लिखने का एक प्रयास
    #mirakee #hindiweiters #writersnetwork @yenksingh ji @satyamprakash @anita_sudhir di #riya_fourlines

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    उम्मीदों के बोझ तले दबने लग गई चाहत
    रिश्तों में फिर कम पड़ने लग गई मोहब्बत
    तीर शब्दों के या खामोशी के चुभाए गए
    तल्ख़ियां दिलों की एक दूजे को कर गई आहत
    ©riyabansal

  • raajaa 162w

    अक्स

    तेरे झूठ में भी हमे सच नज़र आता है
    तेरे चेहरे में खुदा का अक्स नज़र आता है

  • raideepak 164w

    ओ दर्द बड़ा बेशरम हैं तू
    बार बार मेरे पास ही
    क्यों चला आता हैं
    थोड़ सा भी तो सबर किया कर
    इतना जल्दी क्यों चला आता हैं
    कोई और अपना सहारा ढूढ ले तू
    अब मेरा तेरे से कोई न नाता हैं
    ओ दर्द बड़ा बेशरम हैं तू
    बार बार मेरे पास ही
    क्यों चला आता हैं
    ©deepakrai

  • khushbupoonamsindhu 170w

    अब इस पागलपन को,
    बीच रस्ते मे छोड़ नहीं सकती,
    क्योंकि मैं खुशबू ,
    अपने ही "जज्बातो" की कैदी,
    खुद ही खुद की,
    "जज्बाती सरहदें " तोड नही सकती।
    -खुशबू पूनम सिंधू।
    ©khushbupoonamsindhu

  • meghnaad 176w

    एक फुरसतभरे पड़ाव ने फिर रोक लिया
    आगे के सफर की डरावनी कहानियां सुनाने के लिये।

    तमाम समान खरीद लाया दिल को बहलाने के लिये
    सारी सफल खिड़कियां झांकी हौसला अफजाई के लिये
    सभी भविष्य से अनभिज्ञ निर्णय के पहले पलों के लिये।

    बड़ी सुलझे हुए तरीकेसे जिन्दगीने सारे पत्ते बांट लिये
    और अब मुस्कानभरा प्रश्न है अब मुझे उलझाने के लिये।

    बस एक ऊंची छलांग चाहिये इस पल के लिये
    बचें तो फिर होशयारी काम आएगी किस्से सुंनानेके लिये।

    ©meghnaad Harish Amrale

  • meghnaad 176w

    एक फुरसतभरे पड़ाव ने फिर रोक लिया
    आगे के सफर की डरावनी कहानियां सुनाने के लिये।

    तमाम समान खरीद लाया दिल को बहलाने के लिये
    सारी सफल खिड़कियां झांकी हौसला अफजाई के लिये
    सभी भविष्य से अनभिज्ञ निर्णय के पहले पलों के लिये।

    बड़ी सुलझे हुए तरीकेसे जिन्दगीने सारे पत्ते बांट लिये
    और अब मुस्कानभरा प्रश्न है अब मुझे उलझाने के लिये।

    बस एक ऊंची छलांग चाहिये इस पल के लिये
    बचें तो फिर होशयारी काम आएगी किस्से सुंनानेके लिये।

    ©meghnaad Harish Amrale

  • sachin_shashvat 176w

    आधा इश्क़

    आधा इश्क़ ही काफ़ी है बस,
    पूरा पागल कर जाने को...

    चाहत नहीं बुज़दिली कहते है,
    पागल इश्क़ में मर जाने को...

    ©sachin_shashvat

  • limra786 177w

    सालों की मुश्किलात से बनाया था एक मकान
    बडा़ हीं अफसोस व रंज हैं हम उसे घर ना बना सके ।।।

    ©limra786

  • roothi_qalam 177w

    लिखते लिखते स्याही की जो बूंद झटक दी थी
    वो मुझे नसीब कर दे!
    थोड़ी अपनी अना दे दे,
    उर्दू के करीब कर दे।

    .

    मिर्ज़ा असदुल्लाह् बेग ख़ान उर्फ़ मिर्ज़ा ग़ालिब को उनके जन्म दिन पर हम सब का नमन ����
    ....

    इससे ज्यादा क्या कहूं!

    Aaj ki Meri jitni bhi post hongi ( I hope aur likh pau) sab Tribute hongi Mirza Ghalib ko, usse jyda hum log unhen de bhi Kya skte Hain, jinhone Hume itna kuch diya������

    .

    #mirzaghalibbirthday #mirzaghalib #hindiweiters #hkr #hindiurduwriters

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    कलम का जादूगर

    ना शौहरतों की चाहत ना खिताबों का जलसा
    ग़ालिब आज भी जिंदा है ख़ुद की अना लिये।
    ©roothi_kalam

  • kabeerpantt 198w

    तुम्हे सोचते सोचते
    मैं अक्सर बहुत दूर निकल जाता हूँ
    जैसे एक छोटा बच्चा जादूगर के पीछे
    बरबस चला जाता हो
    जैसे शाम होते ही धूप
    बादलों के पीछे लौट जाती हो
    जैसे चाँद, रात ढलते ही
    घर वापस आ जाता हो
    जैसे ऊपर उछाला गया पत्थर
    ना चाहकर भी जमी पर लौट आता हो
    मैं भी खिंचा चला जाता हूँ तुम्हारी तरफ
    एक चुंबक की तरह ...

    सच पूछो तो कभी कभी लगता है
    तुम्हारा आकर्षण शायद,
    गुरुत्वाकर्षण से भी ज्यादा है
    ©kabeerpantt

  • vivekshahi 201w

    ग़ज़ल

    देना है तो दो रंग गुलाबी के दे।
    वो नही तो चाबी किसी मैखाने के दे।

    वो अब तबियत से कहाँ पिलाते हैं।
    अब तो कुछ पल मैकदे में जवानी के दे।

    बेतलब होंठ पैमाने में ना डूब जाए कही।
    साकी अब तू मय के चर्चे बस किताबी ही दे।

    मैंने देखे है महलो के जद में झोंपड़ी कई।
    खुदा मुझे बस कोई ख़ाब नबाबी के ना दे।

    अक्सर मैं भी लड़खड़ा पड़ता हूँ जीस्त-ये-सफर में।
    ये ज़िन्दगी,तू अब कोई फितरत शराबी सा ना दे।




    ©विवेक शाही।

  • rkd123 201w

    Duniya

    In gungo ki basti main ek sur chear chla hun ..

    Kuch sabdo kiy jall se rukh mor chla hun .

    In aandho kiy nagri main aapni rah chun chuka hun .

    In gungo ki basti main ek sur chear chuka hun ..

    RKD..

  • jimmy_shah 203w

    इश्क़ की गलियों में हररोज घूमने जाता है वो,
    फिर भी पता नहीं क्यों,
    सिर्फ दर्द की बाते करता है वो।

    ©SmB