#hindipoems

5317 posts
  • themindpage 12h

    मदहोशी

    मदहोश जरूर हूँ
    पर बेहोश में नहीं।
    मदहोशी में सही
    जी रहा हूँ मै कहीं।।
    ना रोकना मुझे
    इस मदहोशी से तुम।
    घुम न हो जाऊ
    इस ज़िन्दगी में मै कहीं
    घुम न हो जाऊ
    इस ज़िन्दगी में मै कहीं।।
    ©रहनुमा
    ©themindpage

  • buraa_aadmi 4d

    चाँद मशरिक़ से गायब है ज़रा देखो तो,
    मेरी चौखट पे जो ठहरा है वो सवेरा ही था ।
    ढूंढें फिरता था लिए चिराग हाथों में हर तरफ,
    सबसे गन्दा था जो दामन वो भी मेरा ही था।

    कहाँ मिलता है ख़ुदा किसी ने देखा है क्या,
    मेरी इबादत के लिए एक तेरा चेहरा ही था।
    निकल जायेगी कायनात कभी सोचा भी नहीं,
    मैं तो बस रस्ते की तरह ज़रा सा ठहरा ही था।

    आया ही नहीं कभी खुद को रोशन करना,
    दीपक तले तो हमेशा से अँधेरा ही था।
    अच्छे कर्म वालों को भी यहाँ भूल जाते हैं लोग,
    ख़ैर आदमी तो मैं फिर भी बुरा ही था।

    ©buraa_aadmi

  • rohit_kushwaha 5d

    कोई किस्सा पुराना याद आया, वो बीता ज़माना याद आया
    जब ज़िक्र हुआ अफ़सानों का, कोई गीत पुराना याद आया
    कोई इश्क़ पुराना याद आया, एक हुस्न सुहाना याद आया
    जब ज़िक्र हुआ दीवानों का, कोई एक दीवाना याद आया
    एक दोस्त पुराना याद आया, कोई एक फ़साना याद आया
    जब ज़िक्र हुआ अपनों का, कोई एक अंजना याद आया
    एक सफर पुराना याद आया, वो एक बंजारा याद आया
    जब ज़िक्र हुआ आशियानों का, कोई भूला ठीकाना याद आया
    एक दर्द पुराना याद आया, एक मज़लूम बेचारा याद आया
    जब ज़िक्र हुआ चारासाज़ी का, कोई ज़ख्म पुराना याद आया
    ©rohit_kushwaha

  • ashish_augustus 2w

    आलसी राहते

    राहतो में छुपते आलसो पे गौरफरमाया तो पाया सारे सुकून कहा गुम हुए। ढल रही थी शाम और हम वक्त की तरकीब से अनजान मसरूफ हुए। चार बातें चार लोगों की सुनी, एक हम भी किसी को समझा के खुश हुए। रात की धुंध में, अलाओ की महक से हवाओ की तहज़ीब जाना। जाना की पेड़ो की छाहों में अंधेरा भी है और हल्की बारिश की फुहारे भी। बस इतना जानते ही फुरसतो की बेपरवाहिया खत्म हुई और हम आलसो की पुरवाई में रूखसत हुए।

    ~आशीष

  • akgautam 2w

    CHAR DISHAYEIN

    Part #1

    Aandhi aai megh udde, Udd kar gherien char dishayein.
    Chhaya andhera phir garjey megh, Gad gad ho gyi char dishayein.
    Barse megha ghanan ghanan hoke magan, Bheeg ke dhul gyi chaar dishayein.
    Mit gaye daag sab baith gyi dhool aai khushboo sondhee si, Mehak uthi phir char dishayein.
    Vanaspati ki pyaas bujhi maati ki aag bujhi,
    Mor nachta koyal gaati harsh mei jhoome char dishayein.
    Bachche khele jhoola jhoole Bade bhi saawan ka tyauhaar manaye, Nabh mei nabhchar ghoomein char dishayein.


    Part #2

    Baras beet gye per ruke na megha barse din ke charon pahar, Bhay se bhar gyi char dishayein.
    Mehak se judi thi ab jal se bichhdi hai, Doob gyi hai char dishayein.
    Doobie nadiyan doobe naale tooti sadke jaise gira Himalaya.
    Ujda basera kaanpe raina dooor ho gye sab apne aur sapne, Jaise dooor hai char dishayein.
    Kaam kaaj keechad mei dhah gya doodh-anaaj sab paani mei beh gya, Bhookh se tadpe char dishayein.
    Jeevan roye har ek praani soye band hoker ek pinjare mei, Sagar ban gyi char dishayein.
    Kab hum milenge kab tum miloge kisi ka koi asaar nhi,Kab chadta Suraj kab jaati Kiran ab uska bhi anuman nhi.

    Bas intajaar hai
    KABHI TOH MILENGI PHIR CHAR DISHAYEIN

    ©akgautam

  • martin_1 2w

    October 2

    Jeevan main dukh ka kaala saya.
    Fir bhi desh ko ajaad bana ne me jindagi bitaya.
    (जीवन में दुःख की काला साया , फीर भी देश को आज़ाद बानाने में जिंदगी बिताया)
    (இருண்ட சகாப்தத்தில், அவர் தனது வாழ்க்கையை நாட்டிற்காக வாழ்ந்தார்.)
    (অন্ধকার যুগে দেশের জন্য জীবন যাপন করেছেন।)
    (અંધકાર યુગમાં દેશ માટે પોતાનું જીવન જીવ્યું.)
    (చీకటి యుగంలో దేశం కోసం తన జీవితాన్ని గడిపారు.)
    (ഇരുണ്ട കാലഘട്ടത്തിൽ രാജ്യത്തിനുവേണ്ടി ജീവിച്ചു.)
    (अंधाऱ्या काळात त्यांनी देशासाठी आयुष्य जगले.)
    (ଅନ୍ଧକାର ଯୁଗରେ ଦେଶ ପାଇଁ ତାଙ୍କ ଜୀବନ ବଞ୍ଚିଥିଲା ​​|)
    (ਹਨੇਰੇ ਯੁੱਗ ਵਿੱਚ ਉਸਨੇ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇਸ਼ ਲਈ ਬਤੀਤ ਕੀਤੀ.).
    (تاریک دور میں اپنی زندگی ملک کے لیے گزاری۔)
    And I can't forget Sashtri ji.(sorry , if you find error above).
    ©martin_1

  • madinah_writes 2w

    काला बुरा है।

    सफेद अच्छा है।
    अच्छा बुरा में है ।
    बुरा अच्छा में है ।
    यह जीवन है।
    हर कोई प्रयास करता है।
    ©madinah_writes

  • prachi_j 2w

    धरा हूँ मैं

    धरा हूँ मैं ।।
    धर सी अविचल ,अधर सी कोमल।
    परमाणु सौ गिरे सीने पर,
    न हुई मैं विचलित तनिक भी।।
    अश्रु पर जब गिरे सीता के,
    फट गयी विलम्ब न किया क्षणिक भी।।

    हूँ ममता की सागर,प्रकृति का उदगम भी।
    हूँ मनुष्य का जीवन, जीव का अन्त भी।
    हूँ सहनशक्ति की मूरत,कनक का भण्डार भी।
    हूँ जल की मै तारक,खनिजो की धारक भी।

    है ढ़ूँढ़ता कहाँ तू हर जगह उसे रे,
    मैं तो यही हूँ तेरे पग के तले में ।।
    है बढने की चाह मे, तू नभ को निहारता।
    निहार अपने पग को ,की ये धरती ना रहेगी।।
    ©prachi_j

  • kv1504 3w

    #श्रीराम #सीतामाता #हिंदू #कविता #शरण #भक्ति #प्रभु #hindipoems #God #devotion #bhakti #writerstolli #writersnetwork @miraquill @writersnetwork @writerstolli @twt_official

    Read More

    कौशल्यानंदन

    मुझे हर मोड़ पर तुम ही मिलो श्री राम प्रभु अबसे,
    किसी पर भी नहीं विश्वास दीनदयाल प्रभु जबसे।।

    तुम्ही हो तात अब मेरे और सीता हो गईं माता,
    तेरे गुणगान के अतिरिक्त मुझे कुछ भी नहीं आता।।

    तुम्ही हो भक्तवत्सल , भक्त हैं तेरे हनुमाना,
    मुझे भी है प्रभु बस अब तेरी शरण में ही आना।।

    कहो क्या कुछ नहीं बदला है तेरे नाम जपने से,
    अंधेरे पथ पे रोशनी हुई जो पहले थे सपने से।।

    तुम्हारे चरण कमलों में है जब से धर दिया माथा,
    अपनी ही तरह संघर्ष का साहस दो रघुनाथा।।
    ©kv1504

  • sheetalsoni 4w

    Koi puche unse,
    Itni berukhi hmse kyu,
    Kya main isey Mohabbat krna ka tohfa smju ?
    ©sheetalsoni

  • ishubhankar 4w

    देखा तुझे फिर एक बार,
    उसी गली से घुजरते हुए,
    जिनमे घुमा करती थी तू मेरे साथ,
    उसी तरह हाथ पकडे किसिका
    जैसे कभी थामा था हाथ तूने मेरा बीच बाजार |
    वोही मासूमियत अंखो मे,
    जिसपे दिल हरा था मैंने कई बार |

    वादा नहीं निभाया तुने,
    लेकिन वादा किया खुदसे उस दिन,
    आंसु नहीं बहेंगे और तेरे नाम के,
    दिल नहीं दुखेगा तेरी याद में,
    हंसी आएगी सोच के वो पल,
    जिन्को दफन कर दिया दिल के कोने में कहीं |

    ©ishubhankar

  • tiethethought 4w

    Chitthiyan likh Kar..
    Ishq Bayaan Kiya tha.

    Tumhein mili nahi hongi shayad..
    Chaahat mein itni taqat to aaj bhi hai.

    Jawab tumne bhejna zaroor hoga..
    Waqt nahi mila hoga..
    Bharosa itna tum par aaj bhi hai.

    ~HJ☆

  • _devsi_ 5w

    #हिन्दी
    #हिंदीदिवस
    #देवसीदेव
    #surabhidevendra
    #devsidev
    #hibdiquotes
    #hindidiwas
    #14septmeber
    #bhashaookirani
    #mirakee
    #mirakeewriters
    #hindipoems
    #भाषाओंकीरानी
    #हिंदीकविता
    #हिंदीकाव्य
    #आशार

    Read More

    मैं हूँ हिन्दी…..

    मैं हूँ हिन्दी भाषाओं की रानी
    चलो सुनाऊँ मैं अपनी कहानी,
    मैं भारतीय संस्कृति कि पहचान
    मैं भारतवासियों की शान,
    14 सितंबर को शुरू हुई
    हिन्दी दिवस को मनाने की शुरुआत
    मैंने जोड़ा भारत को एकता की माला में,
    मन से दूर करूँ मैं भेदभाव की हर दिवार
    स्थानीय भाषाओं के साथ जगह बनाती
    और कभी-कभी मैं उन्हीं में अपना अंश पातीं
    हाँ, मैं भारत माँ के माथे पर एक चमकीली बिंदी हूँ
    मैं भाषाओं कीं रानी “हिन्दी हूँ “……


    ©_devsi_🌸

  • arti_20 5w

    तुम खुद के लिए जिंदगी जीना तो सिखों
    फिर
    जमाने की बातो से तुम्हें फरक भी नहीं परेगा
    ©arti_20

  • unpredictableink 6w

    किसी की अधूरी चाहत ने बिगाड़ दिया हमको,
    वरना ये लड़की भी बड़ी सीधी साधी थी।।

    ©unpredictableink

  • unpredictableink 6w

    जब कुछ न लिखा जाए, तब भी कुछ लिखा जाए।

    ©unpredictableink

  • bhawanaa 6w

    हिंदी दिवस पर सभी जन पढ़ें मेरा ये संदेश
    मैं जहां की हूं निवासी वह है मेरा भारत देश,
    पूरब में अरुणाचल इसके पश्चिम में गुजरात बसा है
    उत्तर में है अडिग हिमालय दक्षिण में सागर है लहराता अपने केश।
    नई दिल्ली राजधानी इसकी अतिथि के स्वागत को सदा ही रहती पेश।
    अठ्ठाइस राज्य आठ केन्द्र शासित प्रदेश
    सबकी अपनी अपनी बोली सबके अपने अपने भेष।
    हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई रहते सभी यहां मिलजुलकर
    शंका नहीं मन में लवलेश।
    मन्दिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे
    आरती, अजान, प्रार्थना, और सबद के सुर है प्यारे, अपनेअपने कर्म में सभी रत भूलकर भी ना पहुंचाएं कभी किसी को ठेस।
    भांति-भांति के पशु और पक्षी विचरण करते नभ जल और थल में,
    सुरभि को माता का दर्जा श्वान की देखी वफादारी
    आजिविका सदा बढायें हय अजा और मेष।
    जीवन गतिमान रहे सदा ही लय में
    मरण की सच्चाई में ना छूटे जीजिविषा की रेस।
    मिल बांटकर सदा ही खाया आत्मशक्ति से मन तृप्त कराया
    चाहे घर में दाना नहीं रहा हो शेष।
    जय जवान जय किसान रहते यहां हर घर में
    कोई सींचे अपने स्वेद से कोई मिलाये अपना लहू कण कण में ,
    निज प्राणों की बाजी हारे जाने कितने नरेश।
    बाघ बना है राष्ट्रीय पशु और राष्ट्रीय पक्षी मोर,
    फल राष्ट्रीय आम बना है राष्ट्रीय पुष्प कमल खिला है चहुंओर।
    हिंदी से राष्ट्र की पहचान बनी है, विविध बोलियां हम हैं बोलते फिर काहे का क्लेश।।


    ©bhawana

  • gaurav_gagan 6w

    Us Ishq ki nadiyo me jo behta chala tu,
    Dooba bhi sahi magar kehta chala tu,
    Jo samandar se aage mil na saka mujh se
    Mila Ishq se par mila Kaha tu.

    Subah bhi hogi shaamey waha hongi,
    Ishq aasman se hoga, duniya jahan se hoga
    Jab saare jahan me bas ek chaand se hoga
    Kya Chaand bhi betha kahi apne daag chipaye hoga?

    ©gaurav_gagan

  • varsha0505 8w

    आज फिर

    आज फिर टूटे हुए आत्म्समं ने फिर तेह किया
    की हम उनसे बात नही करेगे
    यकिन है के
    कोशीश वो भी ज्यादा नही करेगे ।
    ©varsha0505

  • pratibhajadhav 9w

    शायद हम पहले कहीं मिले है !

    शहर की भीड़ में शोरभरे किसी चौराहे पे,
    बेखबर से तुम और मैं आसपास से गुजरे होंगे..!
    या फिर किसी स्टेशन पे हम दोनो टकराये हो ,
    तुमने मेरी किताबे उठाई और मैंने तुम्हारा सामान समेटा हो शायद..
    शायद किसी कॉफी शॉप में मुझसे तुम्हारी आँखे मिली हो;
    और मैंने शरमा के नजरे झुकाली होगी..!
    या किसी अस्पताल में तुमने मुझसे ओ.पी.डी.का रास्ता पूछा हो;
    और बिना शुक्रिया कहे ही चले गये हो तुम शायद..!
    शायद किसी बगीचे में भँवरों के संग;
    तुम्हें भी मैंने गुनगुनाते देखा होगा..
    या फिर किसी आईसक्रिम कार्नर से;
    यकिनन, तुमने कई दफे मुझे गुजरते देखा होगा..
    शायद किसी दोस्त की शादी में मिले हो तुम और मैं..!
    हो सकता है कभी सफर में, खिड़की वाली सीट के लिए;
    हम - तुम ,दोनों झगड़ पड़े हो ..!
    सामने वाली छत पर जब मैं चंदा से बतिया रही थी;
    तब तुम टूटते तारे से दुआ माँग रहे हो शायद..!
    या रेड़ियो की फर्मायशों में सुनी हो मैंने आवाज तुम्हारी..!
    किसी शाम को तनहाई में तुम्हें आई हो याद हमारी..!
    ऐ हमसफर !किसी जगह पर सावन ,भादों या पतझर में,
    कभी न कभी; कहीं न कहीं शायद हम पहले भी मिले होंगे..!
    @ प्रतिभा.


    #love #life #wn #feelings #miraquill #pod #poetry #poetrycommunity #story #hindipoems @love_whispererr @monikakapur @piu_writes @vasudhagoyal

    Read More

    ऐ हमसफर किसी जगह पर, सावन,भादों या पतझर में;
    कभी न कभी, कहीं न कहीं शायद हम पहले भी मिले होंगे..!
    ©pratibhajadhav