#hindikavya

415 posts
  • khanmt50 5w

    शक्स

    अजीब ये शक्स था जो कभी खुश मुझे रहने ना दिया,
    खुद खुश ना रहा और मुझे कभी कहने ना दिया।
    ©khanmt50

  • khanmt50 7w

    मां

    मां के जाते ही घर के सारे कांच के बर्तन टूट गए,
    दिलों का रिश्ता सिर्फ इंसान पर क़ाबिज़ नहीं रहता ।
    ©khanmt50

  • khanmt50 7w

    लाश

    आंख खोलूं तो कई लाश नज़र आतें हैं मुझे
    इस नींद ने मुझे इंसान बनाए रखा है।
    ©khanmt50

  • jai013 16w

    कोई तो देखता होगा चाहत भरी नज़रों से हमें,
    किसी के ख्यालों की कहानियों का हिस्सा होना चाहता हूं मैं।
    अब सवालों से परेशान हो चुका हूं,
    उनके जवाब जानना चाहता हूं मैं।
    पुरानी आदतें रोकती हैं मुझे,
    मगर आज भी कुछ मासूम बातों पर फिदा होना चाहता हूं मैं।
    कितने सारे वादों पर ऐतबार
    अब भी है मुझे,
    जितनी शायद याद भी नहीं तुम्हें।
    मोहब्बत से तो शायद नहीं,
    मगर जिनसे हुई थी उनसे शिकायतें बहुत हैं मुझे।
    ©jai013

  • jai013 33w

    आदत

    मेरी आदतों में शुमार तेरी हर वो बात भूल जाना चाहता हूं
    खता तभी ये थी मेरी की मैंने तुझसे इश्क़ किया था
    खता अब ये है मेरी की मैं तुझे भूलना चाहता हूं ,
    मगर तेरी बातों को भुला नहीं पाता हूं।
    आज भी खुशियां मयस्सर नहीं तुझ से मिलने के बाद की मेरी
    दिल आज भी कई बार बस ख्वाबों में हीं ,
    तुझसे मिलकर खुश हो जाता है ।
    कर देते है लाख बुराई तेरी महफ़िल में लोग
    पता है इसे सारी बातें , और नादान नहीं है ये
    मगर फिर भी ये जिद्दी दिल बस तुझे हीं चाहता है।
    आदतन मजबूर हूं आदतों से हीं अपनी
    सामने देख कर तुझसे नजरें छुपाता हूं,
    और ख्वाबों में हक जताकर तुझको अपना बताता हूं।
    ©jai013

  • shikha___ 34w

    Hamari Ladayi Bas Alag
    Soch Ki Honi Chahiye,

    Soch Alag Hone Ke
    Karan Alag Hone Ki Nahi,

    ©shikha___

  • shikha___ 35w

    रिश्तों का कायम रहना
    बिल्कुल सीधे तौर से
    कोशिशों के कायम रहने
    पर निर्भर होता है,

    जिस वक़्त से कोशिशें दम तोड़ने लगती हैं,
    उसी वक़्त से रिश्तों की भी साँसे उखड़ने लगती हैं,


    ©shikha___

  • jai013 36w

    यादें

    दीवानों की माफिक शायद मैं भी बिखरा रहता हूं
    खुशियां हो या दर्द सारे किस्से टुकड़ों में लिखता हूं,
    मुस्कुराता हूं संभल कर लोगों के सामने
    की खबर मिले और ऐसा ना लग जाए तुम्हे
    तुम्हारे बिना और तुमसे दूर खुश भी रह लेता हूं मैं,
    एक साए से हीं रोज मिलता हूं
    और उससे तेरी खबर पूछ लेता हूं
    ना जाने क्यूं उसे भी उतना ही पता होता है
    जितना बस मैं जानता हूं,
    सांसों को मालूम है ठहर जाना है एक दिन इन्हे
    मगर तेरे आने की आहट होने पर
    फिर से जान आ जाती है इसमें,
    वाक़िफ हुए तुमसे अरसा होने को आया
    मगर धड़कन को ना जाने क्यूं आज भी
    तुझे देखकर धड़कने की आदत पहली बार सी है,
    आज भी अच्छी यादों के सारे पुराने किस्से
    ना जाने क्यूं तेरे हीं हिस्से आते है,
    एक बार भूलकर देखा था तुम्हे
    और खुद से हीं वाक़िफ ना था मैं कुछ पल के लिए।
    ©jai013

  • shikha___ 36w

    मैं अंतहीन हूँ,
    अपने ख्यालों जैसे,

    ©shikha___

  • thepoetrydefines 36w

    कमाल

    जो मैं कहना चाहता हूंँ,
    तेरा वो सवाल हो जाएँ।
    तू हो मेरी किस्मत में,
    तो कमाल हो जाए।।

    ©thepoetrydefines

  • jai013 38w

    आदमी भटकता है इसलिए
    की समझ सके उसे कोई,
    जरूरत पड़ती नहीं किसीको
    लेकिन समझता है कोई,
    वो जो दुनिया ने झूठी बातें कहीं
    जो वो सब सुनता रहा
    मैं हीं था वो कोई ,
    अब मैं जाऊं कहां
    जिस शख्स ने तुझको घर समझा था
    मैं हीं था वो कोई,
    जिसे तुमने अपना समझा नहीं
    मैं हीं था वो कोई।
    ©jai013

  • jai013 38w

    तेरी सारी बातें है
    और तुझको ही बतानी है,
    तेरी शिकायत मैं तुझसे करूं
    ये तो बेईमानी है,
    ये कैसी बेचैनी है
    और कैसी ये नादानी है,
    ठहरो रुक कर बातें कर लो
    ना जाने कितनी कहानी है,
    एक दफा हीं सही मिलो मुझसे
    तेरे बाद की सारी बातें तुझको हीं बतानी है,
    मुलाक़ात हो तो मेरी-तुम्हारी तो हमारी दुनिया में
    जिसकी खूबसूरती देख कर लोग परेशान है
    और किस शख़्स की सल्तनत है यहां
    ये देख चांद भी हैरानी में है।
    ©jai013

  • jai013 39w

    उलझ कर उनकी बातों में
    हम जो ठहर गए थे
    उस शाम की यादों का
    अबतक कोई जोड़ नहीं
    काश के ऐसा हो जाए
    की फिर कहीं वो मिल जाए
    मैं सुनता रहूं उसकी बातें
    और वो बस कहती जाए कि
    एक शाम की खातिर हीं सही
    फिर से वो सारे ख़्वाब बुनते
    जो पूरे हुए नहीं थे ,उनको पूरा करते।
    ©jai013

  • jai013 44w

    अपने साए से मिलकर अजनबी सा लगा
    मैं जो था अब वो शायद नहीं रहा
    अरसा होगया खुद से मिले हुए
    जो बचा था मुझमें मेरा
    ना जाने कब कहां वो खो गया
    अब लोग जो मुझसे मिलते हैं
    नज़रें चुराते फिरते हैं
    अब मुझको ऐसा लगता है
    जब टुकड़ों में बिखरा रहता हूं
    तब मैं सबसे पूरा होता हूं।
    ©jai013

  • jai013 45w

    मैं

    जला दी गई है बस्ती मेरी
    राख के उन ढेरों में बेचैनी समेटे हुए
    अरमान ढूंढ रहा हूं
    कुछ ख्वाब लेकर आया था शहर
    अब अपनी हीं हस्ती लुटाकर
    पहचान ढूंढ रहा हूं
    साथ छोड़ने वाले हर मोड़ पर मिले
    जो ठहरने की ख्वाहिश लेकर आए
    वो इंसान ढूंढ रहा हूं
    बस इतना जान लो मेरे बारे में
    नीयत जहां मिल नहीं रही
    वहां ईमान ढूंढ रहा हूं
    ©jai013

  • khanmt50 49w

    भूल जा

    मैं भूल कर भी तुझे याद रखना नहीं भूला,
    तू याद रख कर मुझे भुलाता चला गया।
    ©khanmt50

  • khanmt50 49w

    हाल मुस्तकबिल का

    चलो मैं अपनी गुज़िश्ता दिनों की बात तुम्हे बताता हूं,
    क्या तुम मेरे मुस्तकबिल के हाल में शामिल रहोगे।
    ©khanmt50

    मुस्तकबिल - future
    गुज़िश्ता - past

  • _nitish_gautam_ 52w

    वो क्या है, जो चल रहा है
    कभी उमड़ रहा है
    तो कभी झुलस रहा है।
    पर किससे ? सवाल यह है।

    मौन कहूं या निस्तब्ध
    जो भी है, इन दिनों सुलग रहा है।
    चिनगारी रही होगी कहीं ना कहीं ,
    तभी यूं लपट बन कर बढ़ रहा है।
    पर किधर ? सवाल यह है।

    शायद इस बार खुद से भिड़ा है वो
    अन्यथा इस प्रकार क्यों बिखर रहा है !
    पर ये अवसाद कैसे
    खुद से इतना क्यों सिहर रहा है ?
    सवाल यह है।
    ©_nitish_gautam_

  • khanmt50 6w

    नाखुदा

    खेल हवाओं ने रचा, समंदर ने भूचाल मचाई है,
    कश्ती के डुबोने की सज़ा नाखुदा ने पाई है।
    ©khanmt50

    नाखुदा - Captain of a ship

  • khanmt50 54w

    अंजाम

    वोही अंजाम वो ही इम्तहान गुज़रना है,
    ख्वाब जो भी बुनो, आंख तो आखिर खुलना है।
    ©khanmt50