#hindi_poems

21 posts
  • inner_soul_poetry 40w

    कब तक साथ....

    कल हालात बदलेंगे,
    हम भी बदल जाएँगे।
    हम बदले तो तुम भी
    बदल जाओगे।।

    ना मुलाकातें ऐसी रह जायेंगी,
    ना बातें पुरानी फिर होंगी।
    भाग-दौड़ में होंगे हम व्यस्त कहीं,
    तब कहाँ इतना वक्त बिता पाओगे।।

    पता दोनों को होगा,
    कि वक्त नहीं मिल पाता मिलने का।
    जाहिर है न मैं दोष तुम्हे दे सकूंगी,
    न तुम कसूर मेरा बता पाओगे।।

    आखिर!!
    "वक्त बदल गया है"कहकर,
    मैं बात टाल दूंगी।
    मेरी हाँ में हाँ मिलकर,
    तुम भी आगे बढ़ जायोगे।।
    ©inner_soul_poetry
    ■▪नीलिमा मण्डल।।❤

  • smartsam 70w

    पहेली तू अलबेली!

    एक रात तू
    एक पहेली।
    ख्वाब तू
    एक अलबेली।

    एक खुमार तुम हो
    लाजवाब तुम ही।
    तारीफ करू तो
    है बस काम ही।
    दुनिया सारी बंजर
    एक हसीन तू अकेली
    ख्वाब तू....

    धड़कन मेरी तू
    दिलेजान तू।
    दिलग्गी दिल की है
    और अरमान है
    हमनशी मेरी सजीली
    ख्वाब तू....

    दिन ढलता है
    पर प्यार नहीं।
    गूंजती दिल में वो
    तेरी बाते कहीं।
    अनमोल मेरी तू कली।
    ख्वाब तू
    एक अलबेली।

    एक रात तू
    एक पहेली।
    ख्वाब तू
    एक अलबेली।
    ख्वाब तू
    एक अलबेली।

    एक रात तू
    एक पहेली।

    ©SmartSam

  • kahi___unkahi 102w

    बताने के लिए

    कुछ कहानियां हैं मेरी,
    अब लिखूंगा उनको।
    कुछ जताने के लिए नहीं
    ना ही कुछ भुलाने के लिए
    बस लोगों को बताने के लिए।
    ©kahi___unkahi

  • rupesh_mishra07 124w

    चाँद की चाँदनी जैसी,
    सवरे में खिलते हर गुलाब जैसी
    मेरी बहन तू तो है एक परी जैसी।

    पानी सी शीतल है तू,
    तितिलियों सी नटखट है तू
    लेकिन मेरी हर तकलीफ कि
    समाधान भी है तू।

    तेरे से हुआ हर झगडा
    अब एक प्यारा तोफा लगता
    मुझे तो तुझे परेशान करना
    बहुत अच्छा है लगता।

    मुझ पर हमेशा विश्वास करती
    मेरी हर बात सुनती
    हाँ मेरी प्यारी बहन,
    तू तो मेरे दिल के बहुत करीब रहती।

    राखी भले ही हाथ में न बाँध पाई
    लेकिन डोर तो तेरे प्यार की,
    सदा ही मेरे दिल से जुड़ती है आई।

    ©rupesh_mishra07

    #hindi_poems @mirakee @hindiwriters @hindikavyasangam

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    मेरी बहन

  • aghora 138w

    बंदेया।

    जिंद मेरा रब मेरा तू बंदेया
    दिलां ते नाल हुण सानू मैं घर
    करके रखेया
    आंखा ते पलका विच सानू आपा
    बना लूकाया
    रब दी सौं तैनू साडा रब में चौबी
    घंटे मनेया
    दस दुनिया नु कीवें मैं परवरदिगार
    ते फरियाद तेरी करिया।
    लहू ते नाल तेरा ना ही हुण बहेया
    दस बंदेया।

    ©aghora

  • aghora 144w

    तू जानती है।

    एक डोर में पिरोता हूं जिसे अपनी हर पंक्ति में
    हर ख्याल, हर लफ्ज़, हर जज्बात, हर अक्षर
    तेरा नाम होता है, तुझसे जुड़ा होता है।
    तू जानती है।

    नज़्म जिसे गाता हूं मैं अपने गीतों में
    हर लय, हर धुन, हर राग, हर शब्द
    तेरा शर्माना होता है, तुझसे जुड़ा होता है।
    तू जानती है।

    अपनी डगर पर चलता हूं साथ में मान जिसे मैं
    हर प्रारंभ, हर संघर्ष, हर होंसला, हर अन्त
    तेरा ख्याल होता है, तुझसे जुड़ा होता है।
    तू जानती है।

    रखता हूं जिसे अपने दिल के बेहद करीब मैं
    हर अजीज, हर अमूल्य, हर बेमोल, हर कोहिनूर
    तेरा दिल होता है, तुझसे जुड़ा होता है।
    तू जानती है।

    पढ़ता हूं जिसे, दोहराता हूं जिस किताब को मैं
    हर दफा, हर वक़्त, हर क्षण, हर दिन - रात
    तेरा चेहरा होता है, तुझसे जुड़ा होता है।
    तू जानती है।

    लिखता गाता हूं और लिख गा रहा हूं फिर ये मैं
    हर खुशी, हर पल, हर साथ, हर मुस्कुराना,
    हर ताल, हर अनमोल, हर आश, हर खाश
    तू ही होता है, तुझसे ही जुड़ा होता है।
    तू जानती है, बेशक तू जानती है।

    ©aghora

  • writer_by_hobby 144w

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    #hindi_poems

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    आजकल मौसम भी मौसम से पहले बदल रहे हैं ,
    तू तो फिर भी इंसान हैं ।
    आंखें बंद करके आना जरूर मेरे कफिले मे,
    इतना जान लो हसीनाओं के बीच मेरा मकान है।।

    #aniket_shukla
    ©writer_by_hobby

  • poetic_memer 146w

    कितना विचित्र होता है एक कवि का जीवन! लिखना भी उन्हीं के बारे में है जो कभी पढ़ने नही वाली। खैर ये कुछ पंक्तिया लिखी है एक 'कवि' होने की हैसियत से। भाव को समझिये और उसमें खो जाइए।��

    #hindi_poems
    #heartbroken_tales

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    उड़ चला

    रोया तो सही
    मगर आँसू कागज़ पर गिरे।
    तेरी यादे धीरे धीरे,
    एक शक्ल लेने लगी।

    जब आँसू से मिली,
    कलम कागज़ पर चली।
    मेरे सीने में कैद परिंदा,
    फिर तेरी ओर उड़ चला।
    ©poetic_memer

  • casper__ 150w

    ♥️

    आज फिर तुम्हारी याद आयी
    ऐसा लगा की मोहब्बत ने फ़िरसे दस्तक दी
    जेसे चारो ओर तुमहारी खुशबु छा गयी,
    जेसे दो पल में जिंदगी फिर से मेहसुस की,
    जेसे कोई अधुरा ख्वाब पुरा हो गया ..
    और मेने तुम्है हासिल कर लिया,
    मानो जिंदगी के इस सफर को मंज़िल मिल गई,
    एक बार फिर धड़कन तूफान सी दौड़ने लगी, सासें थमसी गई, जुबान लडखडाने लगी, आंखे नमसी हो गेई, फिर एक उम्मीद अगायी ...
    और दिल फ़िर टूट गया क्योंकि कहिना कही वो जनता था ..
    जानता था की बस अब ये कमबख्त यादें ही आ सकती है,
    ना तुम फ़िरसे आओगे और नहीं मैं तुम्हारी यादे मीटा सक्ता हु ।
    ©a_cold_heart

  • nitika_patra 161w

    .....

    है उलझन आज ये कैसी,
    बेचेनी में कट रहा हर पल,
    कोई मुझे अब तो बता दे,
    किस ओर चली है क़िस्मत की लकीर!!
    ©nitika_patra

  • rickety_roy 162w

    First Hindi poem by me...tried my best with the vocabulary I have (Hindi is not my mother tongue so please excuse if the spellings are wrong)....yet I hope you all will like it!
    #poems #hindi_poems

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    Ansoon

    Zindagi abhi baki h kaafi,
    zara khilne to do in kaliyon ko!
    Jo hawae chal rahi h charo our
    zara mehekne to do unko in fizayon main!

    Tumhari bedaard ansoon o ko, behne do aj zara,
    kya pata kaunse phoolo ko janm de wo aj zara!

    Khush nasib h wo registaan,
    jaha boonde giri tumhare ansoono ki!
    Khush nasib h wo jinhe nahi pata

    ye ansoon hi late h tufaan baada!

    ©rickety_roy

  • ajayamitabh7 166w

    औलाद 


    अपनी औलाद को इंसान बनाने में,
    टूटते  है माँ बाप अक्सर जमाने में।


    अजय अमिताभ सुमन
    ©ajayamitabh7

  • ajayamitabh7 166w

    लहरों का रुख


    मापना है दरिया, तो भांपो हवा का रुख,
    लहरों से लड़कर, पार हुआ नहीं जाता।


    अजय अमिताभ सुमन

  • ajayamitabh7 166w

    भोग-योग


    भोग पिपासु जन के मन मे योग कदाचित हीं फलते,
    जिन्हें प्रियकर नृत्य गोपियाँ कृष्ण कदाचित हीं मिलते।


    अजय अमिताभ सुमन

  • nitika_patra 167w

    आज़ादी की झलक्....

    जब हिंसा की आँधी आई,
    अहिंसा ने उसे दूर भगाया।
    डट के करके सामना,
    भारतियों ने भारत पाया।

    पिंजरे में कैद पंछी,
    फिर उड़ा आसमान में।
    अंधेरी रात का भी हुआ सवेरा,
    आज मेरे देश में ।

    खुशियों के गीत गाती,
    हवा हर कान में।
    फिर से वही हंसी सुनाई देती,
    हर पेड़ की छांव में।

    भारत माँ की जीत हुई,
    अंग्रेज़ों की हार।
    लेकिन आज फिर से कहीं गुम्म है,
    आज़ादी की झलक्,मेरे यार।।


    ©nitika_patra

  • thepaintbrushpoet 169w

    "ज़िन्दगी"

    ये ज़िन्दगी है जनाब,
    हर्फ़-दर-हर्फ़ गुज़रती है।
    गर्मी में रखी बर्फ सी,
    आहिस्ता से पिघलती है।
    ©thepaintbrushpoet | Nikhil Patidar
    .

  • devilishlydecent 176w

    @writersnetwork #hindi_poems JUST TRYING!
    Do give your opinions �� @the_air_nomad edits ����

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    अक्सर तुम्हारी याद में ,
    ये आँखें नम हो जाती हैं।
    तुम जब दूर होते हो,
    तो ना जाने क्यों..
    चेहरे की मुस्कराहट कम हो जाती है।
    क्या रिश्ता है तेरा-मेरा,
    ये तो खुदा भी नही जानता।
    बस तुझसे दूर रहने को,
    ये दिल नही मानता ।
    तुम साथ होते हो,
    तो सब अच्छा सा लगता है,
    ये बड़ा सा दिल भी
    बच्चे सा लगता है।
    तुम्हारे साथ रहना,
    बस यही एक ख्वाइश है।
    तुम्हारा प्यार ही तो,
    बस एक आखिरी फरमाइश है।
    जाना ना इस दिल से दूर,
    हमेशा रहना मेरे साथ,
    इस ज़िन्दगी के सफर में,
    लिए हाथों में हाथ ।

    ©devilishlydecent

  • mr_k_vj 186w

    Mne dekha hai

    Halat bure hai to kuch keh nahi skta
    majile mushkil hai magar ruk to nahi skta
    preshan naa ho mere chup rehne se
    bure se bure waqt ko bhi badalte mne dekha h
    mne dekhi hai mushkil manjilon ko aasan hote hue
    zamane ko kise ek ke hissab se bdalte bhi dekha h
    himmat tutne pr bhi jhukna nahi hai
    bde bde tufano me logo ko smbhalte dekha hai
    dekha hai mne manjilo ko jhukte hue
    Harte hue insaan ko bhi muskurate mne dekha hai
    ©mr.k

  • viyanshnaraniya_ 202w

    मौसम

    ये मौसम को हुआ क्या है?
    पहले सूखे के हालात
    फिर घनघोर बरसात
    दिन में गर्मी से आहत
    रात में ना ठंड से राहत
    इंसान खूद ही खुद में सिमट रहा
    और जीवन का कालचक्र यूँ ही चल रहा।

    जब से इंसान बेईमान हुए है
    जंगल वीरान हुए है
    मकां आलीशान हुए हैं
    बंजर खेत खलिहान हुए है
    खुद पे मेहरबान हुए है
    प्रकृति पे हैवान हुए हैं
    मौसम अनजान हुए है।

    ज़रा आओ तो पता करे ,
    ये मौसम को हुआ क्या है।

    वियांश