#habit

376 posts
  • _barbie__ 5w

    People say time heals everything ,
    But that's not the complete truth
    I think we get used to it
    ©_barbie__

  • orange_by_design 9w

    ક્યાંક ક્યારેક એવું થાય છે
    કે આખું જગત મારી વિરુદ્ધ છે
    અને ક્યારેક એવું પણ થાય
    કે આખી દુનિયા મારી વાહે ફરે છે
    રોજ વિચાર આવે કે નાસી છૂટું
    ને રોજ એજ ખૂણા માં સંતાઈ જવા ની
    લત લાગી ગઇ છે એનુંય ભાન થાય છે
    ©orange_by_design

  • ataraxia 15w

    Un-Reciprocated

    The thing that's shattering your heart
    Isn't love
    It's the expectation of
    Being loved
    That torments your heart
    ©ataraxia

  • roheet 16w

    आदत

    लोग आदत दबा देते हैं,
    छोड़ नही पाते!
    ©roheet

  • stellaire_mystique 18w

    Sleepless nights...

    ...raat toh apni hi hota hai ab usse kya darna...
    aadat si hogayi hai ab toh raat ko apna din banane ki...us sukoon bhari shanti mein saans lene ki...in jaagte hue murdo ke bech mein khud ko zinda paane ki....bas ab toh unhi aadat si hogayi un andhero ko gale laganee ki...
    ©stellaire_mystique

  • anuradhasharma 18w

    ©anuradhasharma

  • nuances_in_life 18w

    Habits are like
    shadow, they represent oneself.

    -Yamuna Devi


    ©nuances_in_life

  • the_unknown_writer_20 18w

    Habit

    With habits, never give in or we lose our dignity. With the self, never give up or we lose our destiny. With others never give your worst or you will never develop your best. The saying, "What we give is what we receive". The lesson: Just to give.

    ©the_unknown_writer_20

  • dnswords 20w

    Kya khub he na....

    Aap success हो जाओ ....
    दुनिया aapke pichhe aati है ...!

    और

    Aap effortless ho jaao.
    आप दुनिया के पीछे जाते हो...☺️

    समजलो आपको क्या करना हें ...?

    ©dnswords

  • sheikh_huzaifa 20w

    Tumnai kaat liyai din humaray bagair
    Humay maloom hi tha
    Humari dosti aaise hi niklay gi
    Par humay koyi farak nahi padta
    Aadat baan chuki hai mere ab
    Dosti aur dostu ko jitna hi mainai mana hai
    Utna hi mujhay dosti say donkha mila hai
    Kooshish kiye thi nayi dosti karnai ki
    Aur umeed thi muqamal honay ki
    Par kya khail, khail rahi hai zindagi mere!
    Mere sath! Zindagi nai b humay aazma liya hai aur humaray sath khail rahi hai
    Hum theray bolay balay
    Samajh na aata khail logo ka
    Kuch agar dekhayi daita hai
    Bs har aik acha, sucha aur pyara.....

  • ammy21 26w

    Just watch

    Watch your thoughts
    They become words
    Watch your words
    They become actions
    Watch your actions
    They become a habit
    Watch your habits
    They become a character
    Watch your character
    It becomes your destiny
    ©ammy21

  • pranavvyas312 26w

    Habit

    Crying for the dead and make a living one cry is an old habit of us humans.
    ©pranavvyas312

  • kthakur 27w

    आदत

    किसी को अपनी आदत न बनाओ..,
    किसी की आदत बन जाओ खुश रहोगे..!!
    ©kthakur
    Insta
    my_w.o.r.ds

  • the_unknown_writer_20 28w

    Bad habits

    Some bad habits are like tyrants – they crowd the head and heart so strongly that under no circumstances do they wish to move. They have enjoyed their undisputed reign over us and will not depart easily.

    ©the_unknown_writer_20

  • ajayamitabh7 29w

    मिस्टर लेट

    हरेक ऑफिस में कुछ सहकर्मी मिल हीं जाएंगे जो समय पर आ नहीं सकते। इन्हें आप चाहे लाख समझाईये पर इनके पास कोई ना कोई बहाना हमेशा हीं मिल हीं जाएगा। यदि कोई बताने का प्रयास करे भी तो क्या, इनके कानों पर जूं नहीं रेंगती। लेट लतीफी इनके जीवन का अभिन्न हिस्सा होता है। तिस पर तुर्रा ये कि ये आपको हीं पाठ पढ़ाने लगते हैं । ऐसे हीं महानुभावों के चरण कमलों में आदरपूर्वक सादर नमन है ये कविता , मिस्टर लेटलतीफ ।

    तुम आते हीं रहो देर से हम रोज हीं बतातें है,
    चलो चलो हम अपनी अपनी आदतें दुहराते हैं।
    लेट लतीफी तुझे प्रियकर नहीं समय पर आते हो,
    मैं राही हूँ सही समय का नाहक हीं खिसियाते हो।

    तुम कहते हो नित दिन नित दिन ये क्या ज्ञान बताता हूँ?
    नही समय पर तुम आते हो कह क्यों शोर मचाता हूँ?
    जाओ जिससे कहना सुनना चाहो बात बता देना,
    इसपे कोई असर नही होगा ये ज्ञात करा देना।

    सबको ज्ञात करा देना कि ये ऐसा हीं वैसा है,
    काम सभी तो कर हीं देता फिर क्यों हँसते कैसा है?
    क्या खुजली होती रहती क्यों अंगुल करते रहते हो?
    क्या सृष्टि के सर्व नियंता तुम हीं दुनिया रचते हो?

    भाई मेरे मेरे मित्र मुझको ना समझो आफत है,
    तेरी आदत लेट से आना कहना मेरी आदत है।
    देखो इन मुर्गो को ये तो नित दिन बाँग लगाएंगे,
    जब लालिमा क्षितिज पार होगी ये टाँग अड़ाएंगे।

    मुर्गे की इस आदत में कोई कसर नहीं बाकी होगा,
    फ़िक्र नहीं कि तुझपे कोई असर नहीं बाकी होगा।
    तुम गर मुर्दा तो मैं मुर्गा अपनी रस्म निभाते है,
    मुर्दों पे कोई असर नहीं फिर भी आवाज लगाते है।

    मुर्गों का काम उठाना है वो प्रति दिन बांग लगाएंगे,
    मुर्दों पे कोई असर नहीं होगा जिंदे जग जाएंगे।
    जिसका जो स्वभाव निरंतर वो हीं तो निभाते हैं,
    चलो चलो हम अपनी अपनी आदतें दुहरातें हैं।
    ©ajayamitabh7

  • xykon_noir 31w

    आदत-ए-ग़म पाल ली है जो दिल ने!
    दिल जानता नहीं...
    कोई मानता नहीं...

    ©xykon_noir

  • shamli_mali 33w

    If you know how to be happy in any situation
    Then happiness is not a quest its a habit

    ©shamli_mali

  • ajayamitabh7 35w

    आदतें

    सत्य का पालन करना श्रेयकर है। घमंडी होना, गुस्सा करना, दूसरे को नीचा दिखाना , ईर्ष्या करना आदि को निंदनीय माना  गया है। जबकि चापलूसी करना , आत्मप्रशंसा में मुग्ध रहना आदि को घृणित कहा जाता है। लेकिन जीवन में इन आदर्शों का पालन कितने लोग कर पाते हैं? कितने लोग ईमानदार, शांत, मृदुभाषी और विनम्र रह पाते हैं।  कितने लोग इंसान रह पाते हैं? बड़ा मुश्किल होता है , आदमी का आदमी बने रहना।

    रोज उठकर सबेरे पेट के जुगाड़ में, 
    क्या न क्या करता रहा है आदमी बाजार में।
    सच का दामन पकड़ के घर से निकलता है जो,
    झूठ की परिभाषाओं से गश खा जाता है वो।

    औरों की बातें है झूठी औरों की बातों में खोट,
    और मिलने पे सड़क पे छोड़े ना दस का भी नोट।
    तो डोलते हुए जगत में डोलता इंसान है,
    डिग रहा है आदमी कि डिग रहा ईमान हैं।

    झूठ के बाज़ार में हैं  खुद हीं ललचाए हुए,
    रूह में चाहत बड़ी है आग लहकाए हुए।
    तो तन बदन में आग लेके चल रहा है आदमी,
    आरजू की ख़ाक में भी जल रहा है आदमी।

    टूटती हैं हसरतें जब रुठतें जब ख्वाब हैं,
    आदमी में कुछ बचा जो  लुटती अज़ाब हैं।
    इन दिक्कतों मुसीबतों में आदमी बन चाख हैं,
    तिस पे ऐसी वैसी कैसी आदतें गुस्ताख़ है।

    उलझनों में खुद उलझती ऐसी वैसी आदतें,
    आदतों पे खुद हैं रोती कैसी कैसी आदतें।
    जाने कैसी आदतों से अक्सर हीं लाचार है,
    आदमी का आदमी होना बड़ा दुश्वार है।

    अजय अमिताभ सुमन

  • sauron 35w

    Oddity

    I do not have the answer, whether We'll ever confront each other or not. But my heart has become like a oddity. If I didn't get a response, inkling that is everything alright?
    ©sauron

  • devasharmapoems 36w

    Imagine seeing someone every day and still wanting to take pictures of them all the time. Is that true love or just a beautiful habit? Maybe true love makes beautiful habits?
    ©devasharmapoems