#gazal

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  • kaafir_nama 3h

    शेर

    होगी दुआ में ही कमी, क्या बात जो जाती नहीं
    या फिर, ख़ुदा को शायरी, मेरी समझ आती नहीं



    ©kaafir_nama

  • a_pratyaksh 6h

    तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुशनज़र थे मगर
    जो तुझको देख चुका हो वो और क्या देखे

    - परवीन शाकिर

  • khwahishaan 9h

    शायद मैं ज़िंदगी की सहर ले के आ गया
    क़ातिल को आज अपने ही घर ले के आ गया

    ता-उम्र ढूंढ़ता रहा मंज़िल मैं इश्क़ की
    अंजाम ये कि गर्द-ए-सफ़र ले के आ गयाॉ

    नश्तर है मेरे हाथ में कांधों पे मय-कदा
    लो मैं इलाज-ए-दर्द-ए-जिगर ले के आ गया

    'फ़ाकिर' सनम-कदे में न आता मैं लौट कर
    इक ज़ख़्म भर गया था इधर ले के आ गया
    ©सुदर्शन फ़ाकिर

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  • khwahishaan 9h

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  • a_pratyaksh 14h

    दाने तक जब पहुँची चिड़िया
    जाल में थी
    ज़िन्दा रहने की ख़्वाहिश ने मार दिया।

    - परवीन शाकिर

  • ra_bh_h 16h

    गज़ल

    कहते है की जिंदगी बस एक सफर शानदार है
    फिर भी सारे आदमी क्यों मुकाम के दावेदार है

    जिया वही जिंदगी जिसने सभी कुछ लुटा दिया
    बाकी सभी तो बस कुछ मकान के पहरेदार है

    सुख में सभी आरामसे बसेरा कर लेते है यारों
    दुःख में जो हसके दिखलाए वही बस दावेदार है

    करते जाओ अच्छे काम कहने वाले कह गए
    उनका कहना अनसुना न करे वही समझदार है

    वाह राजेन कहाँ से टिप दी इतनी बातें सारी
    और हम तक मानते की तु आदमी जिम्मेदार है

    चलो कोई नहीं मौके बहुत मिलेंगे सभी को
    कहते है हम जैसों को यहाँ आना बारबार है

    © रा भ ह

  • kaafir_nama 1d

    ग़ज़ल

    *हर्फ़ - अक्षर, alphabet
    *जानिब - की तरफ़, towards
    *अंजाम -ए-अज़िय्यतों - result of torture, तकलीफों का परीणाम
    *ना-ख़ुदा -- मांझी, captain of ship
    *आब-ए-तल्ख़ -- कड़वा पानी (आंसू)
    *हम-सुख़न - साथ में बोलने वाला
    *बे-क़ाफ़िया - बिना तुक वाला, without rhyme
    *दर्द-मंद - सहानुभूति रखने वाला, empathizer

    _________________________________________________

    देखी हक़ीक़त इश्क़ की, है तजरबा मुझे
    हर हर्फ़* इसका अब पता है खोखला मुझे

    दिल के कदम, जानिब* लबों के, चल दिए मगर
    अंजाम-ए-अज़िय्यतों* से मिला, फासला मुझे

    बांधे सफ़ीने, कागज़ों की नांव पर यहां
    झूठे दिलासे दे रहा था ना-ख़ुदा* मुझे

    अब यार पछताते मिरे, करते मलाल हैं
    क्यूं दिल लगाने का दिया था, मशवरा मुझे

    ये आइना ही ख़ुद मिरा, अब दर्द-मंद* है
    गर ये न होता या ख़ुदा, कोई पूछता मुझे?

    मसरूफ़, आब-ए-तल्ख़* ने, ऐसा किया कि फिर
    लेने दिया ना और कोई, ज़ायक़ा मुझे

    अल्फाज़ मिलते गर तिरे, अल्फाज़ से मिरे
    फिर हम-सुख़न कहते नहीं, बे-क़ाफिया* मुझे

    यां पूछता है हर कोई, तेरा पता मुझे
    वां ढूंढता है गांव में अब, डाकिया मुझे

    वो जो भी था, अब लापता है, भूल जा उसे
    "काफ़िर" बना के चल दिया, जो हादसा मुझे


    ©kaafir_nama

  • kaafir_nama 2d

    गज़ल

    *नाशाद - unhappy, joyless, नाखुश
    *कू-ए-यार - महबूब की गली,
    *दुकान-ए-शौक़ - shop of love, मुहब्बत की दुकान
    *हुस्न-ए-बाज़ार - market of beauty
    _________________________________________________

    जाएं कहां नाशाद, कू-ए -यार छोड़ कर
    उसका मक़ां, उसके दर-ओ-दीवार छोड़ कर

    हों, जिस शहर में बेवफाई, नाम के लिए
    लो, आ गए हम भी वहीं, घर-बार छोड़ कर

    ये वक़्त की आंधी, उड़ा देंगी इन्हे, अगर
    उतरी नहीं, जो कश्तियां, पतवार छोड़ कर

    वो ठीक हो सकता नहीं, सब कुछ है बेअसर
    महबूब जिसका, चल दिया बीमार छोड़ कर

    हां था पता हमको, दुकान -ए-शौक़ है सजी
    पर हम गए ना हुस्न-ए-बाज़ार छोड़ कर

    यारों सजाओ महफिलें, पीने पिलाने की
    कुछ काम की बातें करो, ये प्यार छोड़ कर

    तुमको गिला हमसे सही, हमको शिकायतें
    आओ गले लग जाएं हम, तकरार छोड़ कर

    कर लो कदर हर सांस की, ये लौट आए है
    आता कहां है जो गया, इक बार छोड़ कर

    "काफ़िर" कमी तुम में ही है, क्या बात वगरना
    हर शख़्स क्यूं जाता है, हर बार छोड़ कर


    ©kaafir_nama

  • a_pratyaksh 3d

    हार के वास्ते लड़ा हूँ मैं
    जंग में जीतने का डर भी है

    उसकी शीरीं जुबां पे मत जाना
    हाँ वो मीठा है, पर जहर भी है

    - श्याम कश्यप बेचैन

  • a_pratyaksh 3d

    कुछ तो रहेगा दिल में कसकता हुआ ज़रूर
    माना कि मेरी याद न आयेगी मेरे बाद

    - गुलाब खंडेलवाल

  • rahat_samrat 4d

    ✍✍

    अपना हाल किसी से बताया नही जाता,
    यह दिल किसी से लगाया नही जाता,
    क्यों मिली अफवाहे हर डगर मुझे,
    सब भूल गए पर कुछ भुलाया नही जाता।

    कोई आहत है किन्ही बातों से,
    यह सच अब अपनाया नही जाता,
    हम टूटे नही पर जुड़े भी तो नही,
    यह काँच का दर्पण अब बचाया नही जाता।

    कोई गौर से देखो कहीं वो सुलग रही,
    यूँ अकेले ही अब धुआँ उड़ाया नही जाता,
    जब आग लगी है घर के हर हिस्से को,
    तो अब हमसे यह ताप बुझाया नही जाता।

    हमने भी काफी है दाल बिनी,
    पर अब घर मेहमानों को बुलाया नही जाता,
    कोई लोरी मैया अब तुम ही सुनाओ ना,
    राहत से यूँ अब मायूसी को सुलाया नही जाता।
    ©rahat_samrat

  • archanatiwari_tanuja 1w

    ग़ज़ल:- 37

    221 2122 221 2122

    आँखों मे ख्वाब बनकर, परदे हटा के देखो,
    चाहत है कितनी आकर, परदे हटा के देखो।1।

    जीवन महक उठा है, तेरे करीब आके,
    तुम भी तो दिल लगाकर,परदे हटा के देखो।2।

    इंतज़ार का मज़ा है, या फिर सज़ा मिले है,
    इकबार तो परखकर, परदे हटा के देखो।3।

    क्यों झांकते गिरेबां, गैरों का लोग सोचो?
    ख़ामी खुद के भी अंदर,परदे हटा के देखो।4।

    कितना गुरुर उन्हें, अपनी अदाओं पे है,
    सच्चाई ज़रा सितमगर, परदे हटा के देखो।5।

    इल्ज़ाम देते है वो , के बे-वफ़ा हुए हम ,
    चश्मा सच का लगाकर,परदे हटा के देखो।6।

    कितना फ़रेब ओढ़ा, हम पास जा के जाने,
    कैसे है उसके तेवर, परदे हटा के देखो।7।

    राहत समझ रहे थे,अब तक जिसे ऐ तनुजा,
    पछता रहे ठहरकर, परदे हटा के देखो।8।

    ©archanatiwari_tanuja

  • the_verse_of_vishal_ 1w

    Kisi mukadar ke tauhim me yeh saza har dafa mil jaye,
    Jaab jaab dhund kar haaru tujhe uss talab tu mil jaye,
    Teri diwangi me kuch yuu pagal hogya h kambhakt,
    Jaise banzaar zameen par bhi gulaab ka phool khill jaye...
    ©the_verse_of_vishal_

  • abhay22 1w

    सीख लिया

    कोई भी शिकवा नहीं जब सब्र रखना सीख लिया।।
    रहकर खामोश हमने सांसे गहरी लेना सीख लिया।।

    लेकर तो थी आयी मरने के बहाने कई लेकिन,
    मौत को बहानो में उलझाकर हमने जीना सीख लिया।।

    चलने लगे है साथ अब हमारे सब,
    हमने जबसे तन्हा रहना सीख लिया।।

    भर देते है अब इन खाली खामोश पन्नों को भी,
    खामोशी ने हमारी शोर मचाना सीख लिया।।
    ©abhay22

  • the_verse_of_vishal_ 1w

    Wo insaan tha...

    Wo insaan tha
    Dard se nahi wo anjaan tha,
    Andar andar he andar kuch iss tarah pareshaan tha,
    Jaise dard har paal ka saathi
    Khushi do paal ka mehmaan tha,
    Haqiqat se sapno ki buniyaad thi
    Jaise wo kaanch ka mehel uska samshaan tha,
    Aakhir me bhi kaha gaya
    Wo ek insaan tha....
    ©the_verse_of_vishal_

  • ra_bh_h 1w

    ગઝલ

    હૂંફનો પ્રાઈમસ પ્રેશર વગર ઓલવાઈ જાય છે
    યાદની કેરોસીન વગર આ વાટ બૂઝાઈ જાય છે  

    ઈર્ષા,ધિક્કાર,નિંદા, બદ-દુઆ અને તિરસ્કાર    
    પ્રેમ આ બધામાં એકલોજ  અટવાઈ જાય છે

    સવારમાં મસ્ત ચોખ્ખા મૂડમાં જાગ્યો હતો, ને
    બે ઘડીમાં  કારસ્તાનોથી મન છવાઈ જાય છે

    શું કહો છો? ચૂપ રહું? બધા માટેજ સારું છે?
    પણ હું શું કરું! જૂની આદતે બોલાઈ જાય છે

    બધાના હાથમાં વશીકરણ યંત્ર આવી ગયું છે
    દિમાગ બંધ છે ને મોબાઈલ જોવાઈ જાય છે  

    પહેલા સ્ટેટ્સ સિમ્બોલ્સથી પરેશાન હતા બધા
    હવે તો "સ્ટેટ્સ અપડેટ" પણ છવાઈ જાય છે  

    હાં બસ કર - 'રાજેન' ખબર છે બધી સચ્ચાઇ
    સહેવું અમને, તું કહેશે કે બસ લખાઈ જાય છે  

    © રા ભ હ

  • khwahishaan 1w

    जो लोग ख़ुद न करते थे होंठो से पान साफ़

    पलकों से कर रहे हैं तेरा पायदान साफ

    جو لوگ خد نہ کرتے تھے ہونٹوں سے پان صاف 

    پلكوں سے کر رہے ہیں تیرا پائیدان صاف  

    जिसको बचा रही है मेरे आइने की धूल

    दिख जाए साफ़ साफ़ तो नामो निशान साफ़

    جس کو بچا رہی ہے میرے آئینے کی دھول 

    دکھ جاۓ صاف صاف تو نام و  نشان صاف 

    इक हम कि उसको सौंप दिया कारोबार-ए-दिल

    इक वो कि करके चल दिया पूरी दुकान साफ़

    اک ہم کہ اس کو سونپ دیا کاروبار دل 

    اک وه کہ کرکے چل دیا پوری دکان صاف 

    सुस्ता रही है लान में अब तक ये शहरी लू

    बादे सबा तो कर भी चुकी कबकी धान साफ़

    سستا رہی ہے لان میں اب تک یہ شہری لو 

    باد صبا تو کر بھی چکی کب کی دھان صاف 

    "ग़ालिब सरीर-ए-ख़ामा नवा-ए-सरोश है"

    लेकिन वो क्या करें कि न हों जिनके कान साफ़

    غالب صریر خامہ نوائے سروش ہے

    لیکن وه کیا کریں کہ نہ ہوں جن کے کان صاف 

    वो मुझसे बदगुमान था, मेरा गुमान था 

    खिड़की का कांच साफ़ किया, आसमान साफ़

    وہ مجھسے بد گمان تھا میرا گمان تھا 

    کہڑکی کا کانچ صاف کیا آسمان صاف 

    बेशक चराग़ कुछ नहीं पर एक बात है 

    जितनी ज़बान साफ़ है उतना बयान साफ़

    بیشک چراغ کچھ نہیں پر ایک بات ہے 

    جتنی زبان صاف ہے اتنا بیان صاف 

    ©Charagh

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  • shivay 1w



    मै उसके विरह में
    कविताएं नहीं लिखूंगा
    मै नहीं लिखूंगा ग़ज़लें
    और ना ही गाऊंगा
    दर्द भरे गाने
    मै एक बागीचा बनवाऊंगा
    और उस बागीचे में लगवाऊंगा फूल
    वो फूल जो उसे और मुझे बेहद पसंद थे
    मै अपना सारा दर्द बांटा करूंगा उन फूलों से
    सुनाया करूंगा उन्हें अपनी कहानियां
    और उन्हें सींचा करूंगा अपनी आसुओं से
    वो फूल जब खिलेंगे
    तो वातावरण में खिल जाएगी
    उन फूलों की खुशबू और
    उन खुशबूओं के साथ ही फैल जाएगा हमारा प्रेम
    हमारा प्रेम जब हवा के रास्ते होता हुआ समाहित होगा
    मेरी सांसों में तो तुम फिर से जी उठोगी मेरे अंदर।
    लोग मुझे पागल कहते है
    वो मुझे पागल इसलिए कहते है
    क्यूंकि मैं पागलों के जैसे फूलों की देखभाल करता हूं
    पर उन पागलों को क्या पता की
    ये फूल मात्र नहीं है
    ये है उस पागल के लिए संजीवनी।
    ©शिवाय ❤️

  • neighbour_667 2w

    ग़ज़ल

    तुम्हारी रातों को रंगीन हम भी बनाया करेंगे,
    जब बेवक्त हम भी तुमसे मिलने आया करेंगे ।

    झूम उठेगा यह बहता हुआ समुंदर भी,
    जब हम दोनों होठों से होंठ मिलाया करेंगे ।

    जब‌ जब सताती रहेगी यह जालिम दुनिया हमें,
    तब तब हम‌ अपनी अलग दुनिया बनाया करेंगे ।

    जिंदगी भर साथ रहने का वादा करते हैं बहुत से आशिक,
    मगर हम तो तुम्हें अपनी सांसों में बसाया करेंगे ।

    मोहब्बत की दुनिया के हर आशिक पछताया करेंगे,
    जब जमाने वाले हमें दो जिस्म एक जान बताया करेंगे ।

    ©neighbour_667

  • happy_rupana 2w

    जिंदा हूं मैं!

    फिरता हूं गली-गली पाने को मौत, ऐसा एक काफिर बाशिंदा हूं मैं,
    माना कि यकीन ना होगा तुम्हें, पर सच यही है कि जिंदा हूं मैं!

    सुबह कहां हो ना जाने शाम कहां हो, जन्म कहां हुआ ना जाने शमशान कहां हो,
    उड़ता फिरता है जो बेवजह सा, ऐसा इक मुसाफिर सा परिंदा हूं मैं!

    रातों को रोता रहता हूं बेवजह, दिन का चैन कहीं खोने लगा है,
    कहते हैं लोग मुझे इश्क हुआ है, लेकिन नफरत से भरा दरिंदा हूँ मैं!

    आया था तेरे शहर दुनिया जीतने, खैर अब... सब हार कर लौट रहा,
    लड़ रहा हूं हर पल इस तन्हाई से, और लोग कहते हैं कि अहिंसा हूं मैं!

    कुछ उधारे पल तो दे जा मुझे, लुटा दूंगा, इस शायर का वादा रहा,
    यूं हर पल इश्क तुझसे ही होता है, यह बात है अलग, के अब शर्मिंदा हूं मैं......,
    ..........पर सच यही है कि जिंदा हूं मैं!
    ©happy_rupana