#gaon

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  • ravibijla 16w

    गांव छोड़ दिया

    चिठ्ठी ,पत्तर ,तार का दामन सबने छोड़ दिया ,
    पुराने ,नए त्योहार का दामन सबने छोड़ दिया ।
    और सुना हैं गांव में भी अब बिजली 18 घंटे आती हैं ,
    अब गावों वालों ने भी छत पर जाना छोड़ दिया !
    शहर वाले हो गए कई वाले अब ,
    और कईयों ने तो अब गांव तक आना छोड़ दिया ।
    ऐसी लत लगी कम्बख्त पैसा कमाने की सबको ,
    सबने अपने पितरों तक को मनाना छोड़ दिया ।
    और तुम क्या बात करते हो बिजला गांव के बारे में ?
    तुमने भी तो गांव की हँसी का ठिकाना छोड़ दिया ।
    सब पूछते है कि गांव नहीं आते तुम अब ,
    ये नहीं पूछते कि क्यों ? गांव आना छोड़ दिया ।
    क्यों गांव आना छोड़ दिया ?
    ©ravibijla

  • rahat_samrat 25w

    कितनी बेबस लाचार निगाहें,
    बहती नदिया सी धार आँख से,
    सूख गए तो अलग हो रहे,
    धीरे धीरे वह पत्ते शाख से,
    रह गयी बस एक सांस आखिरी,
    रहकर संग अग्नी कहती राख से।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 27w

    ✍✍

    घुट के जीते गाँव को कुछ समय के लिए शहर जाने दो,
    ये लाचारी की रातों का सिसकता हुआ पहर जाने दो।

    हक है उसे भी कि वह बनाये अपनी ख़ुद की पहचान,
    वो इन शहरियों में भी ढल जायेगा उसे ठहर जाने दो।

    बस्तियों से गुजरती उन मासूम सी हस्तियों पर भी,
    ऐ ख़ुदा थोड़ी उन लकीरों पर भी अपनी मेहर जाने दो।

    आँधिया आती है हर बार और बेघर कर देती है सबको,
    कच्चे घर भी अब बोलते है भगवान यह कहर जाने दो।

    किसानों ने ना जाने कितने मोती सहेजे अपने खेतों पर,
    अब सूखे खेत खलिहानों तक पानी की नहर जाने दो।

    राहत हर तरफ़ फ़ैली है संगत बस चमक अमीरी की,
    पर कहती है मजदूरी कि अब रोटी में ना ज़हर जाने दो।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 28w

    बाबा कहति है-

    बाबा कहै बचवा सुनो बात हमरी--
    आँगन अब कोउ नही जानत गँउआ का,
    बड़ा घर होई गा है इब बबुआ का,
    टूटी पाटी, और वह कच्ची माटी,
    सब बिसरि गयो है ,
    ना इंजन चक्की, बस चट पक्की,
    खुली अटारी बालकनी मा निखरि गयो है,
    ऊजरि करि रहै सब कारि कमरी,
    बाबा कहै बचवा सुनो बात हमरी।

    दाई बस आँगन भीतर करती है,
    लाल के आश मा दुवार निहरती है,
    साँझ दिया जलत आरे पर
    सूखी नीम की पात जलत दुवारे पर,
    वह नीम्बी का धुआँ अब लेत तफरी,
    बाबा कहै बचवा सुनो बात हमरी।

    ईंधन की नहीं अब सोंधी रोटी,
    पैंट में बिसरि गयी धोती,
    दरेती तो पाथर के गयी टूट,
    हर घर सास पुतउहन मा फूट,
    बाग बगईचा भए सब वीरान,
    जब से शहर गयो लाला यहु घर भुलान,
    हम बैठे दुवारे अकेले रेडियो से सुनत खबरी,
    बाबा कहै बचवा सुनो बात हमरी।
    ©rahat_samrat

  • rahat_samrat 30w

    ✍ वो गाँव ✍

    सुकूँ मिलता है उस पुरवाई से जब पेड़ पत्ते हिला देती है,
    उन सर्द हवाओं में बारिश की बूंदे जब इश्क़ मिला देती है।

    तन्हा रातों में बसर कर तन्हाई ने कई वर्ष गुजारे इंतज़ार में,
    पता तो बस उसी को चलता है जिसको यादें सिला देती है।

    गलियारे वो गाँव के जहाँ जमावड़ा जमता था बुजर्गों का,
    वो अब तब्दील हो गयी सड़को में यह ख़्याल गिला देती है।

    बताता है हर कोई हर छत पर मोर बैठते थे पहले गाँव में,
    अब तो जंगल भी ना बचे कहकर माँ दिलासा दिला देती है।

    नया आयाम नयी सोंच नये मकान भी खड़े है यहाँ अमीरी के,
    जिनकी प्रताड़ित करती सोच गरीबों को मदिरा पिला देती है।

    "राहत"यकीं करना आसान नही इतना इन सामाजसेवकों पर,
    अनपढ़ समझ यह लोगों को उस रोटी में जहर खिला देती है।

    ©rahat_samrat

  • aghoriamli 33w

    धरती अन्न किसान
    तेरे बिना सब सुनसान
    सदा रहे आबाद यह धरा
    महके वतन मेरा हिन्दुस्थान

    -अघोरी अमली
    ©aghoriamli

  • aman_singhai_ 37w

    यूं तो सड़क मेरे गांव से भी गुजर रही है
    पर लगता है यहां बोहोतो की ज़िंदगी उजड़ रही है !
    ©amansinghai

  • blue_nib 49w

    प्रगति

    वो गावों गया!!!
    उसे समृद्ध बनाने...
    देखो, अब वहाँ भी...
    पानी जारीला, हवा काली है...
    मकान पक्के, लोग हक्के -बक्के...
    सफलता में छिपी, सरलता कि विफलता...
    खेतों में उगती, कारखानों कि फसले...
    गुलाबी कागज़ो अब सुलजते सब मसले....
    वो गावों गया...
    उसे समृद्ध बनाने....
    देखो... वो गावों...
    अब एक समृद्ध शहर है ||

    ©माही
    ©blue_nib

  • beautifulbird 61w

    शरीफ

    बत्तमीजो की दुनिया में शरीफ बिल्कुल वैसे ही होते हैं
    जैसे किसी गांव में दलित,
    जिन्हें काम के लिए साथ रखा तो जाता है
    पर अपनाया नहीं जाता।
    ©beautifulbird

  • saurabhkashyap21 62w

    Ek truck ki daastan....
    #rahi
    #gaon-gaon
    #seher-seher
    #kone
    #mudta
    #judta

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    Ek rahi hai jo gaon-gaon,
    Or seher-seher se mudta hai;
    Bin iske koi kona nahi,
    Jo kisi kone se judta hai!!!
    ©saurabhkashyap21

  • geet_001 62w

    ये ऊंची इमारतें शहर की
    मेरे गांव की ज़मीन से छोटी है
    © Kuchunkahibaatein

    #timtimatetaare #gaon #shehar #gaon #sadak #garhseduur #hindiwriters #yaadein #binamanzilkasafar #haalezindagi
    @__dipps__ @sagarkmr7777 @soul_in_pen @durgeshkumar @safarnama_yaadonka

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    शहर की चका-चौंध ने मेरे
    गांव का टिमटिमाता आसमां छीन लिया
    ©kuchunkahibaatein10

  • scribblesandfables 72w

    Yaadon ka GAON

    Wo gaon jo yaadon me hai,
    Reh gaya bas baaton me hai,
    Ha sadke pakki hogayi hain gaon ki,
    Chatkaari ab bhi lagti wo kachi mod hi hai.

    Par badal gaya mera gaon jo tha wo,
    Chala gaya mera yaar jo tha wo,
    Ab bade shehr me kamata hai,
    Har diwali, saal-bhar pe aata hai.

    Sadak ka budha mod wo bola,

    "Suna hai, hogaye ho tum bade aadmi,
    Insaan ho ya fal ho mausami?
    Saal me bas ek hi fera?
    Gaon me bhi to ghar hai tera".

    Dauda dauda aaya main peepal kinaare,
    Aaya wo, sang aayi bahaarein.
    Socha, fir baithenge ussi aam k bagiche me,
    Khub khelenge cricket,
    Gulel maar k aam giraayenge,
    Unhi galiyon me dhammal machaayenge.

    Tab malum aaya,
    Ye sab tha bas yaadon me,
    Reh gaya tha mera gaon,
    Meri bhi bas baaton me.

    #mirakee #memories #scribble #hindi #poem #gaon
    @writersnetwork @writersbay @mirakee

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    Yaadon ka GAON

    Wo gaon jo yaadon me hai,
    Reh gaya bas baaton me hai,
    Ha sadke pakki hogayi hain gaon ki,
    Chatkaari ab bhi lagti wo kachi mod hi hai.

    ©scribblesandfables

  • parihar_sahab 72w

    सुना है ��
    ______________________________________
    बस मेरे कुछ विचार हैं,अगर
    गलत लगें तो बताइयेगा ज़रूर��
    _______________________________________
    #gaon #khushiya #dilse #alfaz #aawaz
    #khyal #mirakee #mirakeewriters #shayar
    #writer #shayri #poem #poetry #rekhta

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    खुश हैं वो सभी लोग जो अपने गाँवों में रहते हैं,
    सुना है कि शहरों में लोगों की बातें चार दीवारों तक ही सीमित रहतीं हैं

    ©परिहार

  • sunil_swami 76w

    अपने गाँवो की मिट्टी में अलग ही ख़ुशबू होती हैं
    जो तन और मन को पूरी तरह तृप्त कर देती हैं।

    #gaon #mitti #khushbu #villages

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    अपने गाँवो की मिट्टी में अलग ही ख़ुशबू होती हैं
    जो तन और मन को पूरी तरह तृप्त कर देती हैं

  • nitesh__9000 79w

    गांव

    इक शहर से ऊब कर, यादें उसकी छोड़कर लौट रहा हूं मैं ।
    अब सुकून मिल रहा है मुझे, वापस फिर अपने गांव लौट रहा हूं मैं ।।

    भोर की वो सुकून, अपनेपन की चाहत, मोहब्बत, वो प्यार ।
    चहचहाती चिड़ियों कि आवाज़, वो गरम प्याले कि चाय, और सूर्य की किरणों में बीतता हुआ वो दिन, सोच रहा हूं मैं ।।

    लोगों की ऊंची आवाजें, वो तकरार भी‌ गांव की ।
    भूल के वो हंगामें सब, लेकिन फिर वही एकजुटता, शायद उनकी मुहब्बत को महसूस कर रहा हूं मैं ।।

    कड़क धूप से भरी दुपहरी की शान्ति, मिलते-जुलते, इक्के-दुक्के वो लोग ।
    कहीं छांव से घिरी बगिया में, पत्ते खेलते लोगों को सोच रहा हूं मैं ।।

    खुशियों के बीच ओझल, नन्हें-मुन्हें वो प्यारे बच्चे,
    धूल से लिपटे, मिट्टी में खेलते उनकी खुशियां देख रहा हूं मैं ।।

    वो गढ्ढे, नदियां, उन तलाबों किनारे, वो मेरे चरवाहे साथी ।
    उछलते कूदते बछड़े, अपनी मां से लिपटे, और घासों के कतरते गायों को भी याद कर रहा हूं मैं ।।

    गांव से जुड़ी पुरानी यादें, तमाम खुशियां, वो मेरा परिवार ।
    दिल भी शहरी, दिमाग़ भी, फिर भी अपने गांव को याद कर रहा हूं मैं ।।

    ©nitesh__9000

  • nsharm 80w

    पल में दोपहर पल भर में शाम हो जाती है
    मेरे गांव की राते हर रोज रंगीन हो जाती है
    महफ़िले सजती है उस पेड़ के नीचे
    जहां गमों की नदियां सुख में तब्दील हो जाती है..

    निधि

  • jharishika 88w

    पथराई आँखें

    कच्ची सड़के , बूढ़ा बड़गद , ग्राम देवता और एक तालाब  और थी एक बुढ़ी   माँ  सब कहते थे उसको फुँदना माँ।  नहीं नहीं ये नाम नहीं था उसका,  नाम तो हमे मालुम नहीं था , उसका एक बेटा  था जिसका नाम था फुँदना ,  उसी के नाम से जानी जाती थी वो,  बड़े प्यार से पाला था उसको अकेले ही खुद भूखा रहकर।  धीरे धीरे वो बड़ा हुआ माँ के आँचल से अब वो बचता  फिरता था वो घंटो बाट  निहारती थी वो जाने कहाँ भटकता था , एक दिन वो आके बोला  माँ  मैं भी बाहर जाऊंगा शहर  जाके कमाऊंगा फिर तुझको वहां बुलाऊंगा , बहुत रोका माँ   ने उसको मत जा  मेरे लाल तुझ बिन मैं ना रह पाऊँगी , शहर  में कौन तेरा ख्याल रखेगा कौन तुझे खिलायेगा मेरे हाथ की दाल।  


    दाल बहुत पसंद थी उसके बेटे को, फिर वो दिन भी आया चला गया वो कहके  की तुझको लेने आऊंगा ,  संग मौसम भी कितने बीत गए , कितनी गर्मी , कितनी शर्दी , कितने पतझड़ बीत गए,  जो ना बदला वो ये  की रोज काम के बदले २ मुट्ठी अरहर  मेरे घर से ले जाती थी  किस दिन बेटा आ  जाए  रोज दाल पकाती है , अब तो गली कूचे में सब उसको पागल कहते थे  नासमझी में मैंने भी उसको कई बार ही कुछ कुछ बोला था  वो  भी चिढ के कई बार खिझलाती थी  मिट्ठी का ढेला लेकर  मेरे पीछे आती थी।  

     

    अबकी गाँव गयी तो ढूंढा मैंने उसको बहुत,  सोचा माफ़ी मांग लू , थक कर लोगो से  पूछा तो पता चला नहीं रही अब वो , आखिरी दिन भी  मेरा लाल आएगा कहकर कापंते हांथो से उसने दाल पकाई  थी .
    ©jharishika

  • udtapanchal 89w

    गाँव

    शहर की औकात बस इतनी सी है,
    कि अगर कोई बात बिगड़े तो गांव की याद आ जाती है।

  • deepakmstbaji 109w

    इस शहर मे हमे हमारी होशयारी ले आई,
    माँ ने बहुत रोका मगर जिम्मेदारी ले आई...

    ©Deepakmstbaji

  • juhigrover 110w

    दीपावली है दीपों का त्यौहार,
    मगर हर मन में अन्धेरा क्यों है?
    दीप जले हैं घर आंगन में,
    फिर भी उजाला क्यों नहीं है?

    कैंसी है ये अंधी दौड़ पैरों की,
    जो गाँव छोड़ शहरों की ओर,
    घरों में ये रोशनी कैंसी ही है,
    अपनों से दूर, दिल में अन्धेर।

    रोशन घर, सजी दीवारें चारदीवारी,
    मगर बेकार अपनों की आस में,
    कहाँ है खुशी जहाँ हम अकेले,
    तुम अकेले चमक दमक में,भीड़ में।

    चलो आज कुछ नया ही करते हैं,
    घर आंगन सजाते हैं, रोशनी में,
    एक चराग़ दिल का भी जलाते हैं,
    अपनों के पास या घर बुलाते हैं।

    रोशन कर के दिल की खुशियाँ,
    आज यों ही दीपावली मनाते हैं,
    सजाते हैं दिल का कोना कोना,
    अपनों के साथ दीपावली मनाते हैं।
    ©juhigrover