#fromnotepad

20 posts
  • malhar_ 18w

    रियान मुझे हमेशा से पसंद थे। हाँ माँ के पसंद होने के पहले से ही। तस्वीर कुछ खास नही लगी थी। पर पहली बार जब हम मिले थे तो ऐसा कुछ भी नही था जिससे उन्हें नापसंद किया जाये। हमारी मुलाकात के करीब 1 साल बाद हमने शादी कर ली थी। बहुत ही सुलझे हुए है रियान। मै बहुत चुलबुली हुआ करती थी। थी? हम्मममम थी। अब रियान के पास बैठती हूँ तो लगता दिन भर उन्हे सुनती रहूँ। रियान को कभी गुस्सा होते नही देखा। मुझसे कभी कोई गलती हो जाये तो मेरी पीठ थपथपाकर कहते, मिष्ठी कोई बात नही गलती तो इंसान ही करते है ना। मै उनके हाथ को बाहों में भीच कर मुस्कुरा देती। वो जब लिखते लिखते सो जाते हैं तो मै उनके अल्हड़ बालों को घंटों सहलाती हूँ। उनका स्पर्श मुझे सुकून देता है। रियान कभी वायदा नही करते। वो कहते हैं एक वायदे पूरे करने में अक्सर बहुत सी जरूरी चीजें अधूरी रह जाती हैं।
    पर मै ये सब आपको क्यूँ बता रही हूँ?बस यूँ ही बैठी थी तो सोचा बारिश के साथ मै खुद भी बह जाऊँ कागज कलम में। सारे किस्से एक से नही होते। कुछ किस्से प्रेम के होते हैं।

    ©malhar_

  • malhar_ 18w

    रोहन कल से गायब है। कुछ पता नही कहां गया। आखिरी बार यही बेड पे बैठा चाय पीता नज़र आया था, ऐसा उसके घर वाले बता रहे है। बगल वाले विनोद अंकल को शक है कि उसे कोई गायब कर दिया होगा। माँ की परेशानी को बंद आँखों से भी देखा जा सकता है पर उसकी बेचैनी को मापा नही जा सकता। एक बाप जो अपने जवान बेटे के लापता होने से बौखलाया हुआ है, कुछ बोल नही रहा। कहते है आजकल के बच्चों के बारे में जनना हो तो उनके दोस्तों से पूँछा जाना चाहिए। अगले पाँच मिनट में उन सभी दोस्तो से पूँछा गया जिन पर रोहन का अटूट विश्वास था। ये आश्चर्य की ही बात थी कि किसी को भी रोहन का पता नही था।
    पिछले दो दिनो में चार बार दोस्तों, रिश्तेदारों से पूँछा गया, जब निराशा हाथ लगी तो माँ ने भी अपने होश खोने शुरू कर दिये। ये असहनीय पीड़ा थी, जिसे सहन करने के लिए कोई यंत्र नही बन पाया तब शायद ईश्वर ने बाप बनाया। उस माँ की किसी भी बद्दुआ का असर किसी पर नही पड़ा, रोहन अब भी गायब था। रिश्तेदारों से पता चला रोहन बारहवीं में 93 परसेंट मार्क्स लाया था, घर आने के बाद पिता की दुकान में हाथ बटाता था । इससे पता चलता है कि रोहन एक कर्मठशील लड़का था। अभी तक किसी ने भी उसके गायब होने की जिम्मेदारी नही ली थी । थक हार कर आखिरकार पुलिस में रपट लिखवाई गई, छानबीन शुरू हुई। शुरूआत रोहन के घर से हुई। उस घर में रोहन का बचपन मिला, उसकी शरारतें मिली, रोहन के खिलौने मिले, रोहन के 93 परसेंट मिले पर रोहन कहीं ना मिला।
    बाहरी पूँछताछ से पता चला रोहन दो दिन पहले ही जा चुका था। कहाँ? चार कांधों पर कहीं तो ले जाया गया है उसे जहाँ से वापस आना मुमकिन नही। माँ-बाप के इस मर्ज का कोई इलाज नही था। पुलिस जा चुकी थी। माँ- बाप के कहने पर रोहन के लापता होने के पोस्टर लगवा दिए गये थे।
    कुछ महीनों बाद पता चला रोहन के माँ-बाप गायब हैं।
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    दादा जी मुझे तारा नही बनना।
    क्यूँ?
    तारे टूट जाते हैं।

    #fromnotepad
    #malharism
    #mirakee

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    गुम हुए लोगों की तलाश आज भी जारी है,
    और ये अनंत काल तक चलने वाली खोज है।

    ©malhar_

  • malhar_ 18w

    मै समझता हूँ बचपना करने की कोई उम्र, कोई हद नही होती। मुझे लगता है कि मै चाहे कितना भी बड़ा क्यूँ ना हो जाऊँ पर मुझे रेलवे स्टेशन, मुड़ते हुए रेल के डिब्बे, उन डिब्बों की खिड़की वाली सीट पर बैठा मै, पटरी बदलती रेलगाड़ी की आवाज, हमेशा से मुझे असीम खुशी देते रहेंगे। हो सकता है मै अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर रहूँ पर फिर भी मुझे ये खुशी देते रहेंगे।
    काॅलेज से घर की दूरी इतनी कम है जितनी हमारे समाज की सोच बस इतनी, फट्ट से घर आ जाता है। पर घर पहुँचना उतनी खुशी नही देता जितनी खुशी उस सफर में है। भागती हुई सड़के बहुत पसंद है मुझे। दौड़ते हुए पेड़ों की खास बात ये है कि वो कहीं जाते नही। एक बार सफर करते हुए दो लोग मिले, उनमें से एक ने पूँछा कि खुशी के क्या मायने है। दूसरा व्यक्ति जो एक हाथ में सिगरेट लिए था और दूसरे हाथ में अपना बेशकीमती मोबाइल पकड़े था, बाहर देखते हुए उसने घर, पैसा, नौकरी और ना जाने क्या क्या कारण बताये पर एक भी ऐसा करण नज़र नही आया जिससे मुझे खुशी मिले। तब समझ आया सबकी खुशी के अलग मायने हैं। पर उम्र के साथ हम अपने दायरे जब सीमित कर लेते है तो हमारी खुशियाँ भी सीमित हो जाती है। सीमित दायरों का कारण हमारा समाज है जिस पर कुछ भी कहा जाना व्यर्थ सा है।
    जब हम छोटे होते थे तो बारिश में भीगना हमें पल में ना जाने कितने जनमों की खुशियाँ दे जाता था, और अब ये सब बचकाना सा लगता है। हम उन खुशियो की तरफ भाग रहे हैं जो शायद एक दिन खत्म हो जायेंगी पर हमारा नाजुक हृदय ये महसूस करता है कि बारिश में भीगना, दूर क्षितिज को देखना, रेलगाड़ी के डिब्बों का मुड़ना , पटरियाँ बदलती रेलगाड़ी की आवाज सुनना और भागती सड़के हमेशा से खुशी देती आईं हैं।
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    #fromnotepad
    #malharism
    #mirakee

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    मै समझता हूँ कि गम को जिंदगी का हिस्सा मान लिया जाये
    तो खुश रहने के बहाने खोजने नही पड़ेंगे।

    ©malhar_

  • malhar_ 21w

    उसे आईलाइनर पसंद था, मुझे काजल!
    वो फ़्रेन्च टोस्ट और कॉफ़ी पे मरती थी,
    और मै अदरक की चाय पे!
    उसे नाइट क्लब पसंद थे मुझे रात की शान्त सड़के, शान्त लोग मरे हुए लगते थे उसे, मुझे शान्त रहकर उसे सुनना पसंद था। लेखक बोरिन्ग लगते थे उसे।
    पर मुझे मिनटो देखा करती जब मैं लिखता। वो न्यूयार्क के टाइम्स स्कवायर,इस्तांबुल के ग्रैन्ड बाजार में शॉपिंग के सपने देखती थी, मै असम के चाय के बागानों मैं खोना चाहता था!मसूरी के लाल डिब्बे मैं बैठकर सूरज डूबना देखना चाहता था!उसकी बातों में महँगे शहर थे,और मेरा तो पूरा शहर ही वो! ना मैने उसे बदलना चाहा और न उसने मुझे।

    एक अरसा हुआ दोनो को रिश्ते से आगे बढ़े। कुछ दिन पहले उनके साथ रहने वाली दोस्त से पता चला वो अब शान्त रहने लगी है, लिखने लगी है, मसूरी भी घूम आयी है लाल डिब्बे पर अंधेरा होने तक बैठी रही है! आधी रात को उसका मन अचानक से अब चाय पीने को करता है! और मैं....

    मैं भी अक्सर कॉफ़ी पी लेता हूं किसी महंगी जगह बैठकर!!
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    इस पोस्ट को दोबारा लिखने का सिर्फ ये मक्सद है की पहले वाली खो गई थी।

    #fromnotepad
    #malharism
    #miraquill

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    प्रेम में डूबे हुए लोग दूरियाँ नही नापते....
    कुछ दूरियों के मायने अलग होते है,
    कुछ मायने प्रेम के होते है।

    ©malhar_

  • malhar_ 37w

    वो तुम ही हो जो कितना भी महंगा हो और मेरी जेब कितनी ही तंग.....पर मै किसी भी कीमत पर तुम्हे उसी कीमत में खरीदना चाहता हूँ।
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    तु किसी रेल सी गुजरती है....
    मै किसी पुल सा थरथराता हूँ। ��

    #fromnotepad
    #instalite

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    क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है की आपने कोई गाना सुना हो और आप सुनने के बाद अपने कान बंद कर लेना चाहते हो ताकि कोई और आवाज न सुनाई दे, आप उस गाने को अपने अंदर कुछ देर रहने देना चाहते हो। जैसे कुछ अच्छा खाने के बाद पानी नही पीते ना ताकि स्वाद ना चला जाये, बस वैसे ही। तुम उसी गाने की तरह हो, तुम्हारे जाने के बहुत देर तक मै वैसे ही बैठा रहता हूँ, तुम्हे महसूस करते रहता हूँ। तुम्हारी कही हर बात को किसी धुन में पिरो के मै उसे बार बार सुनना चाहता हूँ। तुम्हारे हाथों का स्पर्श मेरे मन के सारे तारों को छन्न से छेड़ जाता है। तुम वो गाना हो जिसको मै लूप में लगा कर बार बार सुनना चाहता हूँ। और सब को चिल्ला चिल्ला कर बताना चाहता हूँ कि हाँ यही है....यही है वो मेरा मनपसंद गाना जो मेरे ज़ेहन में बार बार हर बार बजता रहता है।

    ©malhar_

  • malhar_ 37w

    To be continue....

    *Haa poori nahi hai...pr ho jyegi....lambi hi thodi...aur ye aalas...

    #fromnotepad
    #Upcoming
    #kaashi
    #instalite

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    काशी, बनारस या वाराणसी आप चाहे इसे किसी भी नाम से बुलाइये पर मेरे लिए तो ये काशी ही रहेगा। मोहब्बत है मुझे इस नाम से, इस शहर से। जिंदगी के किसी भी पड़ाव को मैने काशी में ही रह कर पार किया है, हर पहली चीज मैने काशी में ही की है। माँ की आंचल में पहली बार यहीं तो आया था। पापा के कांधे पे बैठकर पहली बार अस्सी घाट गया था। स्कूल का पहला दिन भी काशी में ही था, माँ की पहली डांट, गणित में पहली बार फेल भी काशी में ही हुआ था। पहला प्यार भी काशी में हुआ और आखिरी मुलाकात भी काशी में ही हुई। नही भूल सकता था मै काशी को.......

    ©malhar_

  • malhar_ 43w

    अक्सर लोगों को कहते सुना है- रात चाहे कितनी ही लम्बी क्यूँ ना हो सवेरा होता ही है, तो फिर ये अंधेरा आखिर खत्म क्यूँ नही होता! क्यूँ मुझे अब नफरत सी होने लगी है इस अंधकार से! मै नही देख सकता था ये दर्द, ये तकलीफ, ये थरथराता बदन। दिल कांप सा जाता है। अमलतास के पत्ते मुझे अब मनमोहक क्यूँ नही लग रहे? टैगोर की प्रणय कविता में क्यूँ मै अब गोते नही लगा रहा? नही....मै डरा नही हूँ, मै कमजोर नही हूँ। पर मै कमजोर हो जाना चाहता हूँ, टूट कर चूर चूर हो जाना चाहता हूँ। मै खूद को लाचार महसूस करवाना चाहता हूँ, बेबस हो जाना चाहता हूँ ताकि मै खुद को समझा सकूँ कि किस्मत की लकीरें अमिट होती हैं। जिसे किस्मत खुद नही मिटा सकती। सरगम की तेज गर्म सांसें, हृदय मे उठती असीम पीड़ा और तपता बदन देखकर लगता है जैसे कोई मेरे पैरों में सुई चुभो रहा हो। सरू ने जितनी कस कर मेरा हाथ पकड़ रखा था उतनी ही कोमलता से सरू के गालों पर आई उसकी लटों को समेट रहा था मै।
    माथे पर छोटी सी बिंदी, कानों में माँ की दी हुई बालियाँ और आँखों में हमारा निश्छल प्रेम देखकर मै कहना चाहता था-
    सरू तुम बिल्कुल माँ जैसी हो।
    और मुझे पता है सरू हमेशा की तरह क्या कहती....
    वो थोड़ा इठलाते हुए, थोड़ी सी शरारत भरी निगाहों से देखते हुए अपने दोनो हाथों को मेरे कांधे पर टिका कर कहती-
    आई एम नाॅट योर मदर....अपुन बाप है तुम्हारा, कहकर खुद ही जोर से खिलखिला कर हँसती।
    कितना सुकून था उस हँसी में। मै हमेशा की तरह उसका माथा चूम लेता और फिर हम अपनी उस दुनिया में चले जाते जहाँ हमारे पास लेने और देने के लिए निश्छल प्रेम के अलावा कुछ और नही होता था।
    सरबजीत सर के आने से मेरा ध्यान टूटा बिल्कुल मेरी तरह....डाॅक्टर आ चुके थे।
    मै उठ कर जाने लगा तो सरू ने इतनी मासूमियत से मेरा हाथ भींच कर 'ना' में सर हिलाया कि जो मेरे सब्र का बांध था वो टूटकर आँखों से बह चला।
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    पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
    बाहें गले में डाल के हम रो लें ज़ार-ज़ार.....

    #part3 (आने मे ज़रा देर हो गई)
    #fromnotepad
    #ek_mutthi_aasmaan (use hashtag for previous parts)
    #miraquill

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    ख्वाब देखा करो....
    सच होने की उम्मीद रहती है।

    ©malhar_

  • malhar_ 47w

    और फिर मुझे लगा की जिन्हे जाना होता है उन्हे रोकना नही चाहिए।
    बह जाने देना चाहिए। जिंदगी में इंसान रेत की तरह होते है, हम जितना उन्हे मजबूत करने की कोशिश करते है वो हमारी गिरफ्त से निकल जाते है। पर जाने वाले लोग दो तरह के होते है, पहले जो जाने से पहले तमाम दलीलें देते है कि वो क्यूँ जा रहे है और दूसरे वो जो बस चले जाते है बिना कुछ कहे। दूसरे किस्म के लोग मुझे ज्यादा बेहतर लगते है क्यूँकि हम आने की वजह भी नही पूंछते तो चले जाने की वजह हम कैसे पूंछ सकते है। हंलाकि हम एक बात जरूर कहना चाहते है कि किसी के आने या जाने से जिंदगी रुकनी नही चाहिए क्यूंकि खाली रेलगाड़ी के डिब्बे भी मंजिल तक पहुंच ही जाते हैं।

    ©malhar_

  • malhar_ 48w

    हमने मिलकर ना जाने क्या क्या करने के प्लान्स बनाये है, ना जाने और कितने प्लान्स बनाना बाकी है। बस प्लान्स ही तो बना पा रहे है हम लोग उसके लिए कुछ कर नही रहे, या शायद सिर्फ मै। तुमने मिलने की हमेशा से बहुत कोशिशे की हैं और मै बस मिलने की सोचता ही रहा। या शायद मै इतना हार गया हूँ खुद से की अब मै कोशिश ही नही करता। डर लगता है फिर हार गया तो? माँ कहती है कुछ चीजें भगवान पर छोड़ देनी चाहिए, पर मेरी नज़र में भगवान किसी रेलवे स्टेशन पर मिला मुसाफिर कि तरह है जिसके भरोसे तो आप अपनी कोई चीज छोड़कर जा ही नही सकते।
    पर लगता है हम मिलकर क्या बाते करेंगे, क्या बोलेंगे एक दूसरे को? क्या ऐसा बचा है जो हम एक दूसरे के बारे मे नही जानते? ऐसा कुछ भी तो नही। पिछले करीब 3 सालों से हम एक दूसरे को समझते आये है अब ऐसा लगता है जैसे कई सालो का रिश्ता है। तुम मेरी जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा हो। मेरी कहानी का वो किरदार हो तुम जिसके बिना कहानी अधूरी रह जाती है।
    हमने पहले ही कहा था इश्क से कहीं बेहतर दोस्ती का रिश्ता होता है। और ये सच है मै इस दोस्ती के लिए वो सब कर सकता हूँ जो एक इंसान प्यार में पड़ कर करता होगा। पर इन सारी तमाम बातों के बीच हमने कई प्लान्स बनाये हैं बस अब मिलने का प्लान बनाते है।

    #fromnotepad
    #pahlimulaqaat
    #miraquill

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    फिर कुछ लोग आते है जिंदगी में जो हमेशा के लिए रह जाते है।

    ©malhar_

  • malhar_ 54w

    कुछ चीजें हैं जिन्हें हम बस महसूस कर सकते है...
    जैसे गुजरे हुए कई नये साल...गुजरे हुए नये साल की यादें।
    चौक की स्टेशनरी की दुकान से 1 रूपये वाला ग्रीटिंग कार्ड खरीद कर उसमे कोने में छोटा सा दिल बना के तुम्हारा नाम लिखकर घंटों तुम्हारी गली में खड़े होकर तुम्हारे घर की तरफ झांकना ही हमारा पार्ट टाईम जाॅब हो गया था। कार्ड दे पायेंगे या नही दे पायेंगे ये हम कहां सोचते थे, हमारे जैसे तमाम आशिक किसी न किसी गली में पार्ट टाईम जाॅब कर रहे होते है बिना किसी सैलरी की आस में। पर जो जाॅब हम आज कर रहे हैं बेशक, उसमें सैलरी तो है पर ऐसा कुछ नही जिसे इतमिनान से बैठ कर महसूस किया जाये, जिया जाये। हांलकि हम कभी कार्ड दे नही पाये पर उस जाॅब में सुकून था, इंतजार था, प्यार था, उस पल को जिया जा सके ऐसा वक्त था। हां पर सैलरी फिर भी नही थी।

    ©malhar_

  • malhar_ 60w

    मुंबई में लोग खो जाते है और काशी में डूब जाते है।
    बस इतना ही फर्क है।

    #solotrip
    #fromnotepad
    #miraquill

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    तुम्हे इतनी दूर काशी ही क्यूँ जाना है जबकि मुंबई पास है..

    क्यूँकि मुंबई के पास अस्सी घाट नही है।

    ©malhar_

  • malhar_ 60w

    शहर-ए-काशी।

    #fromnotepad
    #miraquill

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    वो इंसान झूठे होते है जो कहते है, हम बनारस जा रहे है...
    जबकि काशी जाने वाले मुझे हमेशा से ही सच्चे लगे हैं।

    ©malhar_

  • malhar_ 62w

    'अंदर चलो, कहाँ धूप में खेलने जा रहे हो...? सचिन नही बन जाओगे...'
    मुझे आपका नही पता पर मैने तो ये अपने बचपन से बहुत सुना है। इतना कि अब खेलने का ही मन नही करता है। बालकनी में खड़े होकर जब मै मैदान में खेलते बच्चों को देखता हूँ तब लगता है अभी जाऊँ और बैट पकड़ कर एक कवर ड्राइव खेलूँ या फिर एक जोरदार स्ट्रेट छक्का मार के जोर से उछल जाऊँ पर........पर मै सचिन नही हूँ ना।
    जब से मैने होंश संभाल है तब से मैने पाजी (सचिन तेंडुलकर) को देखा है और यही मेरे फेवरेट रहे हैं इतना की अगर कभी ये जल्दी आउट हो जाते थे तो मै मैच देखना बंद कर देता था। मैने 2011 का वर्ल्ड कप फाइनल देखा है, पाजी को कंधे पर उठाकर लोगों को जश्न मनाते देखा है शायद तब से मैने दिलचस्पी लेना शुरू किया....देखता तो मै पहले से ही था पर क्रिकेट में खो जाने का जुनून बहुत बाद में आया।
    जो मुझे जानते हैं वो अक्सर मुझसे पूंछते हैं कि मुझे 'मुंबई इंडियन्स' क्यों पसंद है! पहले मेरे पास कोई जवाब नही होता था। बहुत बाद में पता चला की मुझे टीम कहां पसंद थी, मुझे तो 5 फुट 5 इंच का वो खिलाड़ी पसंद था जो मुंबई के लिए खेलता था, जिसके मैदान पर उतरते ही सचिन.....सचिन के नाम की आवाज स्टेडियम से निकल कर लोगों के दिलों में जाकर टकराती थी।
    पर वो तब था और ये अब है कि मुझे मुंबई के लिए खेलता हर खिलाड़ी पसंद है। उन्हीं खिलाड़ियों में शुमार रोहित शर्मा बहुत अपना सा लगता है मुझे। पसंद है मुझे उसके खेलने का स्टाइल। यकीनन बहुतों को पसंद होगा। उसके छक्के मारने पे बेशक सब तालियाँ बजाते होंगे, इस कमरें में बैठे हर शख्स की जुबान पर सिर्फ 'कमाॅन रोहित यू कैन' की आवाज है पर.....
    ये सचिन तो नही है ना। फिर क्यूँ ?
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    सन्नाते में हंसी के जैसे...
    सूने होठों पे ख़ुशी के जैसे...
    यह तो नूर हैं बरसे गर तेरी किस्मत हो बड़ी.....��

    #behindthescenes
    #fromnotepad #miraquill

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    हम जो है हम वो क्यूँ नही बन सकते...
    हमें सचिन, रोहित क्यूँ बनना है?
    हम हम बनकर क्यूँ नही रह सकते?
    क्यूँकि हम नकल में अपनी अक्ल का इस्तेमाल करते हैं।

    ©malhar_

  • malhar_ 64w

    कहते हैं मोहब्बत और फिक्र जुबां पर नही इंसान की आँखों में दिखाई देती है। सरगम की आँखों में मेरे लिए वही बेपनाह मोहब्बत मै देख सकता था। पर क्या ये सच नही कि वही अपनापन वही मोहब्बत मेरी आँखों में भी है! ये सच है यकीनन, बिल्कुल वैसे ही जैसे सूरज का पूरब से निकला सच है। वैसे इन्हें तो हम यूनिवर्सल ट्रुथ भी कहते हैं बस बिल्कुल ऐसा ही सच।
    मै सरगम के पास जाकर बैठ गया, उसके माथे पर हाथ फेरते हुए पूँछा,
    'आज कोई दवा मिस कर दी थी क्या', हांलकि मुझे पता था उसे दवा की जरूरत थी ही कहाँ!
    "वक्त पर दवा लेने से मौत टल जायेगी क्या?" कहते हुए सरगम मुझे देखने लगी और आँखों के किनारों से एक ओस की बूँद मेरे मन को झंझोर गई। मेरे पास कहाँ कुछ था कहने को। मेरे गले में जैसे कुछ अटक सा गया हो।

    सच ही तो कह रही थी सरगम...क्या सच में मौत टल जायेगी? ये सवाल मैने ना जाने कितनी बार अपने मन में दोहराया पर कोई जवाब नही मिला।
    सरगम ने अपने कांपते हुए होंठों से मेरे हाथों को चूम लिया। मै दायें बायें सरबजीत सर को देखने लगा, वो इधर ही देख रहे थे। मेरी नज़र उन पर पड़ी तो वो झेंप गये और अपना थका हुआ मन लेकर चले गये।
    'ये कम्बख्त दर्द भी ना मेरी जान लेकर रहेगा...'
    ऐसा नही कहते सरू, बी स्ट्राँग ना...
    पर मुझे पता था जिस 'दर्द' का जिक्र सरगम कर रही थी उस दर्द को मै अच्छे से जानता हूँ, पहचानता हूँ, बहुत करीब से देखा है उसे। दर्द हमारी अधूरी शादी का। अधूरी इसलिए क्यूँकि हमने अपनी कल्पनाओं में एक दूसरे से ना जाने कितनी बार कर ली थी....ख्वाबों वाली शादी। और अब इस ख्वाब के सच होने का इंतजार मुझे ताउम्र करना पड़ेगा।
    उस अंधेरे कमरे की ऐसी कोई दीवार पर टंगी तस्वीर नही जो उदास ना हो। सरगम की कथ्थई आँखें दर्द से चीख रही थीं और मै उसकी आँखों में हौले-हौले डूबता जा रहा था जैसे सूरज डूबता है समंदर की गोद में।
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    तू धार है नदिया की, मैं तेरा किनारा हूँ
    तू मेरा सहारा है, मैं तेरा सहारा हूँ....��

    #part2 (इक दिन पूरी होगी)
    #fromnotepad
    #ek_mutthi_aasmaan (use hashtag for part1)
    #malharism #miraquill

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    हर मर्ज का इलाज दवाएं थोड़े होती है...
    इंसान की जरुरत आखिर इंसान ही समझता है...
    वो जरूरतें जो कभी पूरी नही होतीं।

    ©malhar_

  • malhar_ 65w

    रात चाहे अमावस्या की हो या पूर्णिमा की रात तो आखिर रात ही होती है ना, काली घनी रात जिससे मेरा कोई पहले का नाता लगता है। उस रात भी मै सूनसान सड़क पे गोल चौराहे से इतने तेज कदमों से चल रहा था कि समझ ही नही आ रहा था कि मेरे कदम भाग रहे हैं या मेरी धड़कनें। रफ्तार इतनी तेज हो चुकी थी कि मै लगभग दौड़ रहा था। रात के लगभग 2:30 बजे मै यूनिवर्सिटी से गुजर रहा था और आंकलन करने की कोशिश कर रहा था कि कितने मिनट अभी और लगने वाले थे मुझे सरगम के घर पहुँचने में। लगभग 5 मिनट और। सरगम यानी काॅलेज के दिनों की दोस्त या शायद दोस्ती से परे एक ऐसा रिश्ता जिसे बताया नही जा सकता बस महसूस कर लेना ही काफी है। आज उसे दिल की ऐसी बीमारी ने जकड़ लिया था कि दिल्ली मुंबई के हर बड़े डॉ ने जवाब दे दिया था। वो मंजर कितना भयावह होगा ना जब आपको पता चले कि आप कब मरने वाले हैं। हर दिन को अपनी आंखों के सामने कम होते हुए देखना कितना दर्दनाक होगा!

    जब मै पहुँचा तो सरबजीत सर यानी सरगम के बाबू जी एक हारे हुए सिपाही की तरह बाहर ही खड़े थे। पेशे से डॉ थे हर मरीज की तकलीफ समझते है पर जब आज अपनी ही बेटी की तकलीफ इतनी बड़ी महसूस हुई तो उन्हें खुद से कोफ्त होने लगी। जब भी मै उनके घर पहुँचता हूँ तो वो मुझे ऐसी आशा भरी निगाहों से देखते है जैसे एक छोटा बच्चा जब रुआसा होता है तो अपनी माँ को देखता है जैसे वो अभी उसे गले से लगाकर चुप करा लेगी। मै बस कंधे पे हाथ रख देता और वो सिवाय 'बेटा' के कुछ और नही बोल पाते। रात जितनी शांत थी मन उतना ही बेचैन हो रहा था। मै नॉर्मल होते हुए सरगम के कमरे में पहुँचा, वो दर्द से कराह रही थी। मेरा हर कदम उसकी ओर मुझे खींचे लिये जा रहा था। गर्म सांसें सर्द हो गईं थी। मेरे माथे का पसीना मेरे सीने में आकर मेरे कांपते हुए दिल को ठंडक देनी की कोशिश कर रहा था।
    आ....आप आ गये रो....रोनित, सरगम ने मुझे देखते हुए टूटे-फूटे शब्दों में कहा और उसके मुरझाये हुए होंठों पे हलकी सी जान आ गई।
    ___________________________________________________
    कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना है,
    जीवन का मतलब तो, आना और जाना है.....��

    #part1 (आशा है ये कहानी अधूरी नही होगी)
    #fromnotepad
    #ek_mutthi_aasmaan #malharism

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    कहते है कि जब हम अनछुए पहलुओं को छूने की कोशिश करते हैं तो मन छन्न सा कांप उठता है जैसे कोई वादक सितार के तार छेड़ता हो।

    ©malhar_

  • malhar_ 72w

    डियर पापा,
    आमतौर पर जब बच्चे पैदा होते हैं तो डॉ कहते हैं, 'मुबारक हो लड़का/लड़की हुई है' बट् आई एम श्योर मेरे केस मे डॉ ने कहा होगा, "अफसोस नालायक हुआ है।"
    मै एक अच्छा बेटा बन पाने में बुरी तरह नाकाम रहा हूँ। आपने अच्छे पापा की भूमिका बहुत अच्छी निभाई थी शायद मै ही बहुत अच्छा बनने की जोश में कुछ भी ना बन सका। रिश्ते मजबूत करने की जगह मैने रिश्ते इतने उलझा लिए हैं कि शायद मै मर कर भी इन्हें सुलझा नही सकता। माँ से सुना था बचपन में मै सिर्फ आपके पास ही रहता था, आपके साथ ही खाता था, घूमता था और रोने पर आप ही मुझे गोद में उठाकर एक ज़ोर की जादू की झप्पी देते थे। इस प्यार को, इस लगाव को मै हमेशा-हमेशा चाहता था। मैने खुद को आपसे दूर जाते हुए देखा था, मैने हमारे रिश्ते को बिखरते देखा था पापा। बहुत जल्दी थी मुझे बड़े होने की, पता नही था मै क्या-क्या खोकर आगे बढ़ रहा हूँ। सबकी नज़रों में खुद को उठाने की ख्वाहिश में आज मै खुद से नज़रे चुरा रहा हूँ । मेरी खुशियों के लिए ना जाने आपने अपने क्या-क्या शौक छोड़े थे और बदले में मैने क्या किया अपने.....अपने पापा को ही छोड़कर चला गया। अब तो अधूरी ख्वाहिश सी ही रह जायेगी जब आपको मौका मिलता....जब लोग कहते,'देखो वो ध्रुव के पापा।' काश! आप अपने बेटे को आगे बढ़ते हुए देख सकते पापा, काश! मै आपके गले लग कर चीख कर रो पाता, काश! आज आप हमारे बीच हमारे साथ होते पापा।
    आज सब खुश हैं....हाँ माँ भी खुश होने की कोशिश कर रही है। आपको मुझसे शिकायत थी माँ ने क्या बिगाड़ा था, आप उसे भी छोड़कर चले गये ना। मै भी बिल्कुल माँ की तरह ही हूँ, आँखें ज्यादा देर खुद को रोक नही पातीं। बेचैनी सी होती है। आपकी यादों से हमने अपनी बाकी की जिंदगी बनाई है। और आज मुझे जो 'बेस्ट स्टार्टअप ऑफ द ईयर' अवार्ड मिलने वाला है...ये आपको ही समर्पित है पापा। आपके नालायक बेटे की छोटी सी कोशिश।

    आपका निकम्मा बेटा,
    ध्रुव।
    ___________________________________________________
    कांधे पे मुझको बिठा...
    ले चल तू ले चल अभी...
    छोटा हूँ मै....दुनिया बड़ी....��

    *आलस को पीछे छोड़कर एक और...
    #fromnotepad
    #miraquill

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    बचपन में जो हमको चलना सिखाते है...
    बड़े होकर उन्हीं का हाथ छोड़कर हम दौड़ने की कोशिश करते हैं।

    ©malhar_

  • malhar_ 76w

    कई बार जिंदगी और मौत के बीच भगवान नही, एक दोस्त आकर खड़ा हो जाता है और वो तब-तक खड़ा रहता है जब-तक मौत की तरफ जाने वाला रास्ता बंद नही हो जाता, वो खड़ा ही रहेगा जब-तक तुम मान नही लेते कि जिंदगी इंद्रधनुष जितनी रंगीन है....खूबसूरत है। इस दुनिया को और इस दुनिया के तमाम रिश्तों को मेरी नज़र से देखा जाये तो दोस्ती का रिश्ता सबसे अहम और उम्दा रिश्ता है, प्यार से भी खूबसूरत रिश्ता। जहाँ न स्वार्थ होता है और न ही नसीहत।
    कई बार आपकी जिंदगी में ऐसे दौर आते हैं जहां समझ नही आता क्या करें क्या ना करे...! मानो ऐसा लगता है कि आप बीच चौराहे पर खड़े हो और कुछ सूझे ना कि आखिर जाना किधर है, जब गम और ना-उम्मीदी के बादल आपके मन को घेरने लगें, जब ये दुनिया, ये घरवाले,ये रिश्तेदार उपदेश देने में लगे हो; यहां तक कि कुछेक दोस्त भी आपको नसीहतें देने में जुटे हों,तो मन झुंझला सा जाता है।
    तब आप एक ऐसा साथी, ऐसा दोस्त चाहते है जो बस हमे सुन-भर ले, कुछ बोले ना। एक ऐसा दोस्त जिसके कांधे पर सर रख कर हम खुद को हलका महसूस करें। एक ऐसा दोस्त जो हमारी परेशानियाँ नही, हमारी खामोशी बांट ले। एक ऐसा दोस्त जो आपकी नाकामियों के साथ आपको अपना ले।
    खुशियाँ तो सब बांटते हैं पर जो अपना गम भी बांटे वो दोस्त है। ऐसे दोस्त सिर्फ आपकी जिंदगी में ही नही आते आपकी जिंदगी बन जाते हैं। सबकी जिंदगी में एक ऐसा दोस्त तो होना ही चाहिए जो आपको रास्ता तो दिखाये पर मजबूर ना करे, जो आपकी ढाल तो बने पर आपको कभी गिरने ना दे। सबको हक है कि ऐसा दोस्त सबकी जिंदगी में हो। लाखों सितारों के बीच एक ऐसा चाँद जिसको देखने भर से आधी परेशानी छू मंतर हो जाये। बस एक सच्चे दोस्त से हम और क्या उम्मीद कर सकते हैं। हमे पढ़ कर भी अनपढ़ सा रहे, हमे महसूस कर के भी खामोश रहे।
    ___________________________________________________
    छुपा हुआ सा मुझी में
    है तू कहीं ऐ दोस्त...
    मेरी हँसी में नहीं है
    तू मेरी आह में है...��

    #yaarikenaam
    #fromnotepad
    #miraquill

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    जिंदगी में हर रिश्ते ज़रूरी होते हैं...
    अहम कौन से हैं ये आपको तय करना होता है।

    ©malhar_

  • malhar_ 80w

    शायद सपने पूरे भी हो जायें....
    पर उन सपनों को पूरा करने के लिए बहुत कुछ अधूरा ही छोड़ देना पड़ता है।

    #malharism
    #fromnotepad

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    छोटे शहर के लड़के सिर्फ सपने नही देखते...
    वो खुद को उन सपनों में एड्जस्ट करने की कोशिश करते हैं।

    ©malhar_

  • malhar_ 81w

    तुम उन लौंडो की डेरिंग का लेवल नही जान सकते जो ग्रेजुएशन के 1st इयर मे भी घर वालों को बिन बताये Jee का अटेम्प्ट देते है। साला हम तुमको बता रहे है संतोस जिंदगी मा एकै साथ सब खुसी मिल जाये तो बहुते बड़ी बात है। साला तुम्हाई किस्मत बहुत जबर है...लौंडिया भी पटा लिये हो और साला IIT में दाखिला भी ले लिये हो। साला ई भगवान भी हमरी जिंदगी मा कौनो खुसी नही लिखे है। तुमका भी अब IIT मिल गया है, साला तुम हमको भूल तो नही जाओगे ना।"
    का बक रहे हो बे तुम साला, हम तुमको भूल जायेंगे!! तुम सोचे भी कैइसे...।आज फिर तुम पी के हमसे बात कर रहे हो ना, साला जब तुमको उसका याद आता है तुम पी लेते हो।'
    त का करे संतोस, हमाये बस मा थोड़े ना है।"
    हम साला तुम्हाये ऊपर ट्रक चढ़ाये देंगे, हम पहिलेही बोले थे ऊ सही लड़की ना है तुम्हाये लिए। आज ऊके चक्कर में ना पड़े होते ता साला साथ मा पढ़ रहे होते हम दोनो।'
    अब साला तुम हमको ज्यादा ज्ञान ना पेलो संतोस।"
    बहुते मारेंगे हम तुमको, साला तुमको हमाई कसम है आज के बाद तुम पी के आये तो।'
    त का करे संतोस तुम्हई बताओ, साला घर में भी कौनो ठीक से बात नही करता।"
    हम नही जानते कुछ तुम ऊ लौंडिया को फोन नही करोगे।'
    हम कुछ कर बइठेंगे साला संतोस।"
    साला तुम फिर फालतू बात किये ना, तुमको कुछ हो गया ता सोचा है घरवालों का क्या, हमरा का होगा।
    तुम साला हमसे बात ना करो हम धर रहे है फोन।'
    ___________________________________________________

    यारी तेरी यारी चल माना इस बारी,
    सारी मेरी फ़िकरें तेरे आगे आके हारी
    खूब है लगी मुझको तेरी बीमारी....����

    #malharism
    #fromnotepad
    #atrangiYaari

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    बड़ी शिद्दत से तुम मिले हो...
    तुम्हें खोने का मेरा कोई हक नही।

    ©malhar_

  • malhar_ 81w

    अच्छा चलता हूँ...
    तुम्हारा ये कहना मुझे कभी पसंद नही आया। और तुम्हारा कह कर चले जाना मेरी हर तन्हा रातें इसका बदला मेरी आंखों से लेती हैं। पर अब ये आदत सी बन चुकी है।हम जिससे मोहब्बत करते है उसमे हम खुद को ढूढंते है।हर वक्त उसके भीतर झांक कर ये देखना चाहते है कि हम उसमें कितना हैं....या हैं भी या नही। और अगर नही हैं तो क्यों नही हैं? क्या कमी रह गई मेरे प्यार में? जब हम प्यार में होते है तो हमे दूसरों की गलती दिखाई ही नही देती, हमे हर वक्त यही लगता है कि शायद मेरी ही कोई गलती होगी.....शायद मै ही गलत थी।
    शामें तो बहुत आयेंगी मगर इस शाम जैसी फिर कोई शाम नही होगी, जहाँ समंदर की गोद में डूबता सूरज तो है, बारिश की बूंदें इठलाती हुई जमीं चूमती तो हैं मगर मेरे अंदर की बारिश ना जमीं को चूम रही है और ना तुम्हें। वो शाम हमारी आखिरी शाम थी, हमारे कमजोर डोर की आखिरी शाम....हमारी आखिरी मुलाकात की आखिरी शाम। हमारे बहुत से अनगिनत सपनों की आखिरी शाम जिसे हम दोनों को मिलकर पूरे करने थे।
    ना जाने तुमने इसी काॅफी कैफे में क्यूँ बुलाया था, जहाँ हम पहली बार मिले थे। कहने को तो हम सिर्फ 2 मीटर की दूरी पर बैठे थे पर जो दूरी हमारे बीच पनप चुकी थी इसको नापने का कोई यंत्र है ही नही। तुम्हारी लड़खड़ाती जुबां से ज्यादा तुम्हारी आंखें बोल रही हैं। तुम्हारे जज्बात तुम्हारी आँखों से लुढ़कते हुए मै देख सकती हूँ, जिन्हें छिपाने की तुम नाकाम कोशिशें कर रहे हो।सामने दो काॅफी रखी जरूर है पर मै आज भी चाहती यही हूँ कि हम सिर्फ एक ही काॅफी से पियें, हमेशा की तरह। हमारे बीच एक बेचैन भरी खामोशी है, जिसे ना मै समझ पा रही हूँ और ना तुम....

    ___________________________________________________

    हमको मिली हैं आज ये, घड़ियाँ नसीब से
    जी भर के देख लीजिये, हमको क़रीब से
    फिर आपके नसीब में, ये बात हो न हो.....����

    #malharism
    #fromnotepad

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    कुछ किस्से अधूरे होकर भी पूरे लगते हैं...
    जैसे कुछ किस्से किसी ऐसे अल्प विराम पर आकर ठहर से जाते हैं मानों पूर्ण विराम तक उन्हें जाना ही ना हो।

    ©malhar_