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  • yatharth_singh_chauhan 112w

    महाराणा प्रताप के एक मोर्चे पर इस्माइल ख़ान बक्सरिया और एक दूसरे मोर्चे पर हाकिम ख़ान सूर साथ थे। उन्होंने जब पकड़े गए अब्दुर्र रहीम ख़ानेखाना की औरतों और बच्चों को ससम्मान रिहा कर दिया तो रहीम ने उन्हीं के लिए कहा था, "जो दृढ़ राखे धरम को, ने तिही राखे करतार।"
    मेवाड़ के महाराणा, एकलिंग जी को मेवाड़ के राजा और खुद को उनका दीवान मानते थे। अतः आप सभी को एकलिंग दीवान महाराणा प्रताप की जयंती की हार्दिक बधाई।

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    महाराणा प्रताप

    महाराणा प्रताप की मृत्यु की खबर जब अकबर को मिली तो सामने बैठे कवि दुरसा आड़ा ने हाल यूँ कहा,

    "अस लेगो अणदाग, पाघ लेगो अणनामी।
    गौ आडा गवड़ाय, जिको बहतो धुरवामी॥
    नवरोजे नह गयो, नगौ आतसां नवल्ली।
    नगौ झरोखा हेठ, जेठ दुनियाण दहल्ली॥
    गहलोत राण जीती गयो, दसग मूंद रसणा डसी।
    नीसास मूक भरिया नयन, तो मृत शाह प्रताप सी॥"

    अर्थात् "अपने घोडे़ को शाही दाग नहीं लगवाया। अपनी पगड़ी को किसी के सामने नहीं झुकाया। यश के गीत गाता गया। राज्य के धुरे को बाएं हाथ से घुमाता गया। न नवरोज में गया, न शाही डेरों में। शाही झरोखे के नीचे न गया जिसने पूरी दुनिया दहला रखी थी। हे प्रतापसिंह! तेरी मृत्यु पर शाह अकबर ने दांतों में जीभ को दबाया। नि:स्वास छोड़ी और आंखें भर आईं। गहलोत राणा प्रताप तू जीत गया। "
    ©yatharth_singh_chauhan

  • kanpuriya_fankar 183w

    मिट्टी इश़्क दी

    मिट्टी समझ कर न खेल राँझणे,
    तू न जाने है कितनी आग दबी
    जलकर उसमें ही पड़ी
    वो सूखी दरार वै
    तू न जाने क्या तपिश लावै
    इश़्क दी मिट्टी अंजाम वै..
    देखा रंग लाल भी मिट्टी पे, देखा रंग काला भी
    कैसे न पड़े लाल फ़ीका
    आगे स्याह काले के
    दिल है इक भट्ठी हो जैसे
    धधकता पूरे दम पर
    नाचे हैं लपटें भीतर, चंगा चेहरे पर
    दिल है इक भट्ठी हो जैसै
    हाथ रख दूर, परवाने!
    आँच शमा की शबाब पर
    जल-जल कर, जलाकर,
    लेती इंतकाम वै
    तू न जाने जो रंजिश लावै,
    इश़्क दी मिट्टी अंजाम वै..
    न बन राँझणा लाश दा, न बैठेगी उठकर तेरी आवाज़ पे
    कैद है आग दिल दी, ठंडी पड़ी जान में
    न झकझोर, दीवाने!
    झुलस जाएगा साथ में
    लाश रही वो, रही बेजान
    क्या समझेगी इश़्क दी ज़बान
    न बन राँझणा लाश दा, न कर सकेगा उसे ज़िंदा इज़हार से
    तू न जाने कैसी ख़लिश लावै,
    इश़्क दी मिट्टी अंजाम वै..
    ©kanpuriya_fankar