#faaltu_baatein

31 posts
  • raakhaa_ 3w

    #faaltu_baatein

    प्यार का एक ऐसा जुनून देखा है,
    मैंने माँ की गोद में सुकून देखा है...

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    थक हार के लौटता है परिंदा, माँ अपने पंखों की छांव देती है...
    घर का आंगन, मंदिर की श्रद्धा, माँ अकेले ही मुझे सारा गांव देती है।

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 4w

    #faaltu_baatein

    मुसीबतों को अपनी, तेरे नाम से ललकार दूं!
    सारी खुशियां अपनी, तेरी एक साड़ी पे वार दूँ...

    Maa✨��

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    एक मैं हूँ जो सब याद रखता है,
    एक माँ है, जो सबको...

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 4w

    #faaltu_baatein
    युद्धभूमि सज्ज है, लक्ष्य सामने है, मन अस्थिर है, गांडीव छूट रहा है...
    (गोविंद! ध्यान रखना)

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    जब काया ही कुरुक्षेत्र बनी, श्वाशें ही ललकार हुई,
    मन अर्जुन-सा स्तब्ध रहा, तब माधव की दरकार हुई...

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 5w

    #faaltu_baatein
    मेरे जैसे कई हैं... बस उनके लिये ही लिखती हूँ अब��

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    हर रोज़ मुझे कोई "मैं" दिखता है...
    ये ज़माना आईना होता चला जा रहा है!

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 5w

    #faaltu_baatein
    ✨ और क्या ही बोलूं...

    (पंक्ति में...
    पहला शून्य - अवकाश
    दूसरा शून्य - आकाश)

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    कभी शून्य सा अदृश्य है, कभी शून्य सा प्रकांड है,
    कभी कृष्ण में ही विश्व है, कभी कृष्ण ही ब्रह्मांड है।

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 5w

    #faaltu_baatein
    गीता जयंती की शुभकामनायें���� बोर्ड परीक्षाओं की वजह से समय नहीं मिल पा रहा...बहुत कुछ लिखना था पर....

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    बंसी की तानों का श्रेय वृंदावन, गैयों के घुंगरू का मान है...
    शँखनादों की भूमि कुरुक्षेत्र, धर्मों का, गीता का , ज्ञान है।

    नृत्य-रास की ब्रज-भूमि, गोलोक का ही प्रखंड है,
    नित्य-तांडव सी युद्ध-भूमि, काल से भी प्रचंड है।

    जो कान्हा-मुख में ब्रह्मांड दिखा, मात की फटकार पर,
    किया अनुभव पार्थ ने, माधव से शत गुहार पर...

    प्रेम की कविता का लेख़क, मानो ये गिरिधर-नागर है,
    है गीतकार भी उत्तम, माधव! गीता का भी सागर है!
    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 6w

    #faaltu_baatein
    जानकी-राम के विवाह पंचमी की शुभकामनाएं����
    (देरी के लिए क्षमा...��)

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    रघुपति के बाणों की शक्ति है तुमसे,
    अयोध्या नगरी की भक्ति है तुमसे...
    वैदेही! तुमसे राम का राम होना है,
    उनके आदर्श की अभिव्यक्ति है तुमसे!

    जानकी के सौभाग्य का गान है तुमसे,
    मिथिला की भूमि का मान है तुमसे...
    हे अवधपति! देवी है हमारी मैथिली,
    उस देवी के भाग्य का गुणगान है तुमसे

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 8w

    #faaltu_baatein

    ��एक सच बताऊं....
    जब थोड़ा बुरा लगता है, अतीत डराने को दौड़ता है, मैं अपने कमरे में एक कलम और कागज़ लेकर बैठ जाती हूँ। मुझे नहीं पता होता है क्या लिखना है, मैं कलम घिसती हूँ, वो खुद-ब-खुद कविता हो जाती है। ��

    गोविंद की कृपा है����

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    सवेरों में मुझे जब रात काली दिखने लगे जाए,
    मेरे मन की व्यथाएं यूँ सरेआम बिकने लग जाये।

    तुम ऐसा मोल रखना , खरीद लेना मुझको हे केशव!
    वो मुझसे दाम पूछें, हाथ तुमको लिखने लग जाये।

    मेरी नैय्या के केवट तुम बनो, नैय्या भी तुम होना,
    पालना मेरा तुम्ही हो, मेरी शैय्या भी तुम होना।

    मुझे तेरे ही धामों में बना के दास रख लेना,
    मेरी लोरी तुम्ही तो हो, मेरी मैय्या भी तुम होना।

    अतितों का बड़ा है भय, कैसे पार आऊं मैं?
    बिना टूटे ही हे गिरिधर! कैसे वार खाऊँ मैं?

    मेरा प्रारम्भ तुम ही थे, मेरी अंतिम तुम्ही इच्छा,
    तुम्हें जीतूं मैं दुनिया से, ये दुनिया हार जाऊं मैं।

    बंसी की तानों में छिपाकर मुझको रख लेना,
    या अपने चरनों में जीने का, हे माधव! हक मुझे देना।

    तर जाऊं मैं हर बाधा, मुझे आशीष दे दो तुम,
    ये दुनिया रूप परखेगी, तुम मेरा मन परख लेना।
    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 8w

    #faaltu_baatein
    �� गोविंद��

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    उसके होने का एहसास अलग है! बहुत अलग...

    उसकी बांसुरी में जितना वो है, उतना ही उसके मोर पखा में। जितना वो अपने माखन मिश्री के भोग में दिखता है, उतना ही अपने कानों के कुंडल में चमकता है। जितना अपने चन्दन टीके में निखरता है, उतना ही अपने चरणों मे समर्पित तुलसी में महकता है! जितना वो अपने विग्रह में समाया है, उतना ही अपने भजनों में सुनाई देता है।

    अपने कमरे से दूसरे कमरे तक के सफर में उसकी झांकी पड़ती है। मैं हर बार ठिठक कर , उसे दो पल निहार कर ही गुज़रती हूँ। सुबह उसका श्रृंगार मैंने ही तो किया था! मैंने ही उसे पीताम्बर में सजाकर, तिलक किया था। उसके कंठ में एक माला, हाथों में चूड़ा, बाहों में बंसी, चरनों में तुलसी और सिर पर मोर मुकुट .... मैंने ही तो रखा था। पर उसे जितनी बार निहारती हूँ, मानो ऐसा लगता है, जैसा श्रृंगार किया था उससे सौ गुना ज्यादा निखरा हुआ रूप है।

    मैं नही समझ पाती ये क्या लीला है! ये प्रेम है, अपार प्रेम...ये भरोसा है, धैर्य है, मैत्री है, समरपण है....या इन सबका समावेश...पता नहीं।

    मैं बस इतना जानती हूँ, वो गोविंद है, और मैं .... और मैं? मैं...पता नहीं!!
    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 9w

    #faaltu_baatein

    डंके - गुरूर की पहचान
    शोर - मन को द्रवित करने वाली चीज़ें (materialistic desires)
    अरि - शत्रु

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    ......

    कुपित कठोर मन का होना, फिर हारे-मारे थक सोना,
    बोल कहाँ ले जाएगा, किस दिशा तुझे पहुंचाएगा?

    व्यथित पथिक मन होता है, और भाग्य भरोसे सोता है,
    क्यों विपदा बाज़ी मार गयी? क्यों शक्ति मन से हार गई?

    तीर नहीं तलवार नहीं, चंचल मन इनके पार कहीं,
    भटका के तुझे सताएगी, न सत्य तुझे बतलायेगी!

    जब चारों ओर सब काला हो, और कोई न सुनने वाला हो,
    एक ओर झुका सर दोहराना, हरि-हरि तुम चिल्लाना!

    बन धैर्य हरि आ जाएंगे, उस मन मे वो बस जाएंगे,
    जब तेरे मन मे हरि रहे, तो कैसे मन फिर अरि रहे?

    मन से तेरी फिर हार नहीं, मन से कोई भी रार नहीं,
    मन जगविजयों की धूरी है, और मनोविजय ज़रूरी है,

    जो खुद के मन से हारेगा,तो फिर किस-किस को मारेगा?
    क्योंकि फिर तू तेरा दुश्मन,तेरा जीवन ही तेरा रण!

    जब शोर यहां बढ़ जाएगा, और मन तेरा अकुलायेगा
    मन मे रखना हरि नाम कहीं, राम कहीं, घनश्याम कहीं,

    डंके बजते हर ओर सुनो, एक सत्य कहूँ पुरज़ोर सुनो!
    हर हारे के हर ओर सखा, हरे हरि हर शोर सखा!

    हरे हरि हर शोर सखा...

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 9w

    मैं तो नहीं हूँ काबिल...तेरा पर कैसे पाऊं,
    टूटी हुई वाणी से...गुणगान कैसे गाउँ��

    #faaltu_baatein

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    घर-आंगन औ' राज भुलावे, राह निहारे मतवारी,
    हीरा-मोती फीका लागे, ब्रज-रज भावे गिरधारी!

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 9w

    बच्चों सा बचा नहीं कुछ, बस बेवकूफी के अलावा...
    चलो मुझको भी Happy Children's Day!!

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 12w

    #faaltu_baatein

    जो करना था वो कर भी रही हूँ या नहीं?....

    शजर - पेड़

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    दबकर बैठी हैं ख्वाहिशें, किसी छोटे से शजर में,
    मुकामों के अब चर्चे हैं, "राखा" के शहर में...

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 14w

    #faaltu_baatein

    If you haven't read my last write-up, follow this path :
    #vijay_dashmi_ram

    Happening for the second time in my life.... When my words got a chance to serve Lord, and yes he admired them�� Sharing a true incident...

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    क्यों राम नाम न लिखूँ मैं, क्यों राम नाम न गाउँ?
    जब राम नाम के द्वारे मैं , सब सुख अपने पाऊं!

    मैं दासी ,बस राम चरण की धूल से मन भर जाए,
    मन का क्या हो जब मन मे, श्री राम स्वयं चल आएं!

    संग जानकी हनुमत को भी, मुझसे मिलवाने लाये,
    गौर-निताई, जगन्नाथ भी साथ प्रभु के आएं।

    दया कृपा करूणामूरत हे, सर्वलोक के स्वामी!
    हे जनकसुता-वर! कैसे गाउँ? ठिठक रही मेरी वाणी।

    दरस मुझे दे स्वप्न में ,प्रभु लीला बहु रचाई,
    मैं मूरख कुछ समझ न पायी, बस राम-राम गुण गायी!

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 14w

    #faaltu_baatein #vijay_dashmi_ram

    विजय दशमी की शुभकामनायें����
    रघुकुल शिरोमणि श्री राम हम सब पर कृपा करें और भक्ति का अवसर दें❤️

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    जानकी से भोर मेरा, राममय हर शाम कर दो,
    मुझ दास की विनती सुनो, मेरा बस इतना काम कर दो।

    मेरी विरासत जब लिखो, बस एक रत्न मेरे नाम कर दो,
    पावन अयोध्या की कहीं, मिट्टी पे अंकित राम कर दो।

    जिस रज में राजा राम हों, उस रज में चारों धाम कर दो,
    'राम' दिख जाए जहां, सिर झुका प्रणाम कर दो।।

    कर्म में मेरे बसो, सब कर्म को निष्काम कर दो,
    उर बसो रघुनंद मेरे, मन अयोध्या धाम कर दो।।

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 14w

    #faaltu_baatein
    #krishna

    The best motivation ��
    Madhav and Words ��

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    •••

    उसने मेरे कन्धों पे रख, एक महल बना कर रखा है,
    खुद पीछे वो रहता है, मुझे पहल बना कर रखा है।

    बंसी से अपनी खींची रेखा, तकदीर बना कर रखी है,
    अपने चरणों के एक कोने में मेरी,तस्वीर बना कर रखी है।

    मैं गिर जाऊं जो थक करके, हाथ पकड़ने आता है,
    सफर में मेरी मन्ज़िल तक ,वो भी नंगे पैरों जाता है।

    नाम को उसके संजोया है, जागीर बना कर रखी है,
    दिल के एक कोने में उसकी, तस्वीर बना कर रखी है।

    हर बार गिरा है मन अम्बर से, चौखट पर उसकी रुकता है,
    मैं झुकती हूँ चरणों मे उसके, वो मुझे उठाने झुकता है।

    मुक्त हुआ मन बन्ध के उससे, क्या ज़ंजीर बना कर रखी है!
    अपनी रणभूमि में उसको शमशीर बना कर रखी है।

    दिल के एक कोने में उसकी ,तस्वीर बना कर रखी है...

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 15w

    #faaltu_baatein

    गोविंद!❤️ कैसे कर लेते हो ये����

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    और हर रोज़ जब थक के उसके सामने बैठ जाती हूँ, मानो लगता है सुकून मिल गया हो। अगर यही सुकून है, तो शायद मुझे थकने में कोई आपत्ति नहीं।

    उसे निहार के थोड़ा सा मुस्कुरा दिया करती हूँ, वो कुछ नही बोलता, बस एक टक देखता है मुझको। थोड़ी देर बैठ कर, उसके हाथों में अपनी किस्मत की रेखाओं को ,और उसके सिरहाने अपने सारे सपनों को छोड़ के वापस आ जाती हूँ।

    वो रात भर में मानो जैसे अपनी छोटी बंसी से गीली रेत पर कोई रेखा खींच रहा हो, बिल्कुल वैसे ही खेलता है मेरी लकीरों से। मेरे सपनों को सँजोता है, और धीरज के चोले में बांध कर थोड़ा सहज सा कर देता है मानो। आह!! सुकून...यही तो है।

    कैसे कर लेते हो तुम ये!!

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 16w

    #faaltu_baatein
    कुछ कहानियां दिल से जुड़ी हुई....

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    और माँ उसपर बोलीं, "नहीं, कल नहीं परसों है जितिया का व्रत।"
    "अब ये किसलिए होता है?" मैंने अपने किताबों से नज़रें हटाकर, हसते हुआ पूछा। ये सब इतने सारे व्रत कैसे रख लेते हैं, मैं तो आज तक नहीं समझ पायी। मेरी समस्या तो ये है कि अगर सुबह 9:30 तक मुख पे निवाला नहीं गया तो मानो सिर के नस वही थिरक थिरक कर तांडव मचा देते हैं। सिर भारी हो जाता है, और धीमे से आंखों का रस्ता देखते हुए जबड़े तक दर्द ऐसे पहुंचता है मानो दर्द का भी रक्त सा प्रवाह हो रहा हो।
    "बेटे के लिए। उसे मौत के मुँह से वापस लाने के लिए होता है।"

    मेरे मन में आया ,और बेटियों के लिये? मैंने सवाल नहीं किया। हमारे यहां सवाल नहीं किया जाता है। क्यों? पता नहीं, पर नहीं किया जाता है।
    यही तो बात होती है जब आपकी बुद्धि सर्वोत्तम भगवान के शरणों में झुक जाती है। तब सवाल आपके होते हैं और जवाब प्रभु के। जब आप गीता उपदेश देने वाले को हृदय में बिठा लेते हैं, तो गीता खुद बूंद बूंद रिसते आपके मस्तिष्क में गंगा बनकर बैठ जाती है, और सब कुछ कैलाशमय हो जाता है, मानो। विज्ञान की भाषा में कहें तो यही है धर्म का, वेदों का और भक्ती का "प्रैक्टिकल एप्लीकेशन"!

    किसने दिया, किस तर्क पर दिया पता नहीं, पर एक जवाब मिला। मेरा और प्रभु का ये मस्तिष्क वाली ही बातें होती हैं। कभी मन मे बैठकर वो जवाब देते हैं तो कभी कभी आकर खीर का भोग भी लगा जाते हैं!!

    " शक्ति को किस का भय? उसके लिए क्यों संघर्ष होगा?"

    ये एक वाक्य मुझ मन्दबुद्धि को कैसे सूझा ये तो लीलाधर ही जानें। बात छोटी है पर बहुत बड़ी, सामान्य है पर सबसे हटकर भी। मैं अग्रसर हो रही हूँ। इससे पहले हमेशा मन मे रहा कि कभी बेटियों के लिए कोई व्रत का अनुष्ठान क्यों नहीं बना। ऐसा नहीं कि मैंने कभी तर्क नहीं किया। पर आज शांत थी मैं। मेरे मन मे विश्वास था "कि अगर कुछ है तो वो इसलिए है क्योंकि उसे वैसा ही होना चाहिए"। और बस मैं मुस्कुरा के वापस अपने किताबों में खो गयी।

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 18w

    #faaltu_baatein

    Whom would you like to dedicate this to?����

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    और बस उसके होने से ,
    सब हो जाया करता है...

    ©raakhaa_

  • raakhaa_ 18w

    #faaltu_baatein

    ये जो नाम के नाते हैं, इनके क़र्ज़ तो यूँ साध दिए जाएंगे....

    ये जो कुछ रिश्ते यूँ ही बन जाते हैं, क्या कहें, हमारी एक रुपये की औकात, ये लाखों (अनमोल) के रिश्तों को कैसे निभाये??����

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    बड़ी बड़ी बातों में उलझे,छोटे छोटे रिश्तों को,
    न्योछावर कर पूंजी भर दो, इनके सारे किश्तों को।

    छोटी छोटी बातों में , बड़े बड़े कुछ रिश्तों को,
    लाखों कर्ज चुकाने होंगे, एक रुपये के किश्तों को।

    ©raakhaa_