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  • raaz_meghwanshi 137w

    'मर्दानगी'

    आज क्यूं चुप हो , आज क्या हुआ?
    मारो मुझे पीटो मुझे
    हाथ उठाओ मुझ पर, दो ना गाली मुझे
    हिम्मत कहां गयी अब तुम्हारी
    पी कर नहीं आए आज तुम ?
    हां मेरा महिना है आज पर फिर भी
    चलो तुम्हारा बिस्तर तो गर्म करना होगा
    औरत जो ठहरी , नाचीज़ हूं
    बस शरीर बचा है नौंच लो
    मेरी आत्मा मेरा चित्त तो मर चुका कब का
    अरे बोलते क्यूं नहीं , चुप क्यूं हो अब?
    मारो मुझे पीटो मुझे , खाना क्यूं नहीं मांगते?
    नमक कम ज्यादा हो तो मेरी मां को गाली देना
    लात मारो मेरे पेट पर, मेरे बाल पकड़ कर घसीट लो
    मेरे शरीर को तहस नहस कर दो
    कुछ भी न छोड़ो बाकी मुझमें
    बोलो भी अब, बेसुध क्यूं हों ?
    आज तुम्हें एक पत्थर क्या मारा
    तुम तो गिर ही गये बेसुध हो कर
    हां बहुत हो गया था ये, बर्दाश्त नहीं हुआ मुझसे
    नहीं सह सकी और मैं तो मार दिया
    मगर तुम तो 'मर्द' हो ना, तुम में तो कितनी हिम्मत है
    तुम कैसे मर सकते हो 'मर्द'
    उठो 'मर्दानगी' दिखाओ मुझ पर
    जो बस मुझ पर ही आजमाते हो तुम
    आज चुप क्यूं हो, आज क्या हुआ?
    मारो मुझे पीटो मुझे.......
    ©raaz_meghwanshi