#dhruvwrites

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  • dhruvmatade 192w

    अगर तुम गझल होती...

    कलम से लिखा हर इक शब्द दिल मै उतरता हे मेरे...
    क्या इतनी आसानी से तुम भी समा पाती?
    अगर तुम गझल होती ।।
    जैसे मुस्कुराकर लोगो को अपने लिखे हुए जज्बात सूनाये थे मैने...
    क्या उसी शिद्दत से तुम्हारे बारे मे बता पाता??
    अगर तुम गझल होती ।।
    "ये गझल मैने लेखी हे" छाती ठोक के बतात..
    क्या इसी मसुमियत से तुम्हे अपना बता पाता??
    अगर तुम गझल होती ।।
    अगर तुम गझल होती तो क्या सब शायर क्या तुम्हे ही लिखते?? तुम्हे ही सुनाते?? तुम्हारी ही बात करते??
    पर तभी भी मे सुनाने वालो मे नहीं....
    सुनने वालो मे रहेता.....
    अगर तुम गझल होती..
    अगर तुम गझल होती ।।


    ©dhruvmatade