#blackmoment

1 posts
  • priman 5w

    वक्त!

    हालात के नतीजों पर आंख लगी है,
    दिन रात के नतीजों पर जज़्बात लगी है,
    पैसे के लिए आज इस कद्र है परेशान,
    एक वक्त के नतीजों पर पूरी जान लगी है।

    सोच रहे हर वक्त की कैसे बढ़ा जाए,
    जूझ रहे है इस कद्र की कैसे लड़ा जाए,
    अनजाने तो दूर है कबसे पर आज अपनो का सवाल है,
    की कैसे करा जाए।

    धूल बन गई वो मिट्टी जिसपर रक्त बहाया था,
    ऐसे वक्त में गिरा था की सबका शीश जुकाया था,
    पर आज खड़ा हूं वक्त के साथ,
    देखा मां लड़ा तेरा बेटा वक्त के साथ।

    कर्मो की चाह से आज दौड़ रहा मैं,
    नर्म लम्हों से दूर अब रह रहा मैं,
    कहने को बनाएं मैने कितने दोस्त,
    पर सच के सिर्फ खुद का दोस्त बन रहा मैं।

    आंधी उड़ा रखी उन सपनों की,
    जिसको सोच कर कल डर रहा था मैं,
    आज वक्त है मेरी घोड़ों की तरह,
    जिसपर बैठ कर आज राज कर रहा मैं।
    ©priman